बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Sunday, February 28, 2010

गहरी धुन

"फीवर पिच" नामक एक अंग्रेज़ी फिल्म के नायक बेन पर एक बेसबॉल खेलने वाले दल की धुन सवार थी। वह उनसे इतना प्रभावित था कि बसन्त और गर्मी के दिनों में वह उनका एक भी खेल देखना नहीं छोड़ता था।

एक बार सर्दियों के दिनों में बेन को एक जवान स्त्री लिंडसे से प्रेम हो जाता है और वह उसे अपनी ओर आकर्षित भी कर लेता है। जब बसन्त आता है तो लिंडसे को मालुम चलता है कि बेन बेसबॉल खेलों के समय एक भिन्न ही व्यक्ति हो जाता है। यदि लिंडसे उसके साथ बेसबॉल देखने नहीं जाती तो बेन के लिये भी उसके पास समय नहीं है। बेन की इस धुन के कारण लिंडसे बेन के साथ अपने संबंध तोड़ देती है।

तब एक दोस्त बेन को समझाता है और उससे पूछता है कि "तुम जिस बेसबॉल दल से इतना प्रेम करते हो, क्या वह भी तुमसे प्रेम करते हैं, क्या उन्होंने कभी तुम्हारे प्रेम का प्रत्युत्तर दिया है?" यह प्रश्न बेन को अपनी प्राथमिकताओं के बारे में सोचने और उन्हें ठीक करने को मजबुर करता है, और फिर वह अपनी प्रेमिका से अपने संबंध सही करके उसको ठीक समय दे पाता है।

हम अपने जीवन में काम, कई तरह के विनोदों और आनन्दमय कार्यों में व्यस्त रहते हैं। परन्तु हमें अपने विकल्पों को चुनते समय दो बातों पर विशेष ध्यान देना है, जो यीशु ने बतायीं - "तू अपने सारे मन से...परमेश्वर से प्रेम रख, और अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम कर।" (मत्ती २२:३७,३९)।

जब लगता है कि किसी विनोद या कार्य के कारण जीवन असंतुलित हो रहा है, तब हमें अपने आप से यह प्रश्न करना है, "क्या यह विनोद या यह कार्य भी मुझसे प्रेम करता है?" इसका उत्तर हमें नियंत्रण में रखेगा। परमेश्वर से और लोगों से प्रेम, ये ही वास्तव में मूल्य रखते हैं। - एन्नी सेटास


जब हम परमेश्वर के प्रेम को दूसरों के साथ बांटते हैं तब हम उसके प्रति अपना प्रेम दिखाते हैं।


बाइबल पाठ: मत्ती २२:३४-४०


तू अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम कर। - मत्ती २२:३९


एक साल में बाइबल:
  • गिनती २०-२२
  • मरकुस ७:१-१३

Saturday, February 27, 2010

चुप रहने का समय

मेरी दोस्त ’मेरी’ को अपने पिता के साथ मछली पकड़ने का समय बहुत पसंद था। मुझे मछली पकड़ने के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी, इसलिये मैं जानना चाहती थी कि क्यों उसका मन इतना खुश होता था? उसका जवाब था, "मैं अपने पिता के साथ रहना पसंद करती हूँ।" जब मैंने उससे पूछा कि "क्या वहाँ मछली पकड़ने के साथ साथ अपने पिता के साथ बातें भी करती हो?" तो उसका जवाब था कि "नहीं हम बातें नहीं करते, केवल मछली पकड़ते हैं।"उसे संवाद नहीं, पिता का साथ आनन्द देता था।

आपने कभी सोचा कि परमेश्वर के सन्मुख हम बहुत समय बोलने में ही व्यस्त होते हैं; परन्तु क्या हम मौन या चुप रहने का अभ्यास करते हैं, या परमेश्वर के साथ बिताये "मौन समय" को हम अपनी प्रार्थनाओं से भर देते हैं? परमेश्वर ने कहा, "शांत हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ" (भजन ४६:१०)। यीशु ने जाना के उसके चेले इतने व्यस्त हुए हैं कि उन्हें खाने का समय भी नहीं मिलता, तो उसने उन से कहा, "तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो" (मरकुस ६:३१)। हम जीवन के आकर्षणों को पीछे छोड़ें तो और आसानी से परमेश्वर पर ध्यान कर सकेंगे और उसमें विश्राम पा सकेंगे।

क्या आप अकेले परमेश्वर के साथ कुछ मौन पलों को बिताने का अभ्यास करते हैं? क्या आप चाहते हैं कि वह आपके मन को शांति दे? (भजन २३:१-३) उसे आपको "शांत रहना" सिखाने दीजिये। यीशु के बुलावे को सुनिये के "मेरे साथ अलग आकर थोड़ा विश्राम करो।" - सिंडी हैस कास्पर


परमेश्वर के साथ बिताया शांत समय हमारे अन्दर भविष्य के खतरों का सामना करने की शक्ति संजो देता है।


बाइबल पाठ: भजन २३:१-३; मरकुस ६:३०-३२


शांत हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ। - भजन ४६:१०


एक साल में बाइबल:
  • गिनती १७-१९
  • मरकुस ६:३०-५६

Friday, February 26, 2010

अति दुखद विभाजन

एक वैबकैम द्वारा एक सफेद सिर वाले बाज़ के घोंसले में चल रहे नाटक पर नज़र रखी गई। एक प्रेमी बाज़ परिवार टूट रहा था, इस दृश्य को इन्टरनैट पर बहुत सारे लोगों ने देखा। पिछले वर्षों में कई अंडे देकर और उनसे बच्चे निकालकर मादा बाज़ ने बसंत में फिर नए अंडे दिये और उन्हें सेंने लगी। परन्तु एक नई जवान मादा बाज़ ने उनके सन्तुष्ट घोंसले के आनन्द को मिटा दिया। जब नर बाज़ उस नई मादा के साथ क्रीड़ा करने लगा, तो अंडे देने वाली मादा बाज़ घोम्सला छोड़कर चली गई और घोंसले में पड़े अंडों में पनपता जीवन नष्ट हो गया।

इंटरनैट के वार्तालाप स्थनों में इस पर उतेजित विवाद चला। बाज़ों देकह्ने और उन्हें चाहने वाले दर्शक क्रुद्ध थे। पक्षी शास्त्रियों ने उन नये बाज़ उत्साहियों को सावधान किया कि उन्हें मानव मूल्यों को पक्षियों पर लागू नहीं करना चाहिये। परन्तु सबने किया और चाहा कि प्रथम दंपति फिर मिल जाएं। ऐसा लगा कि सभी दर्शक परिवार के मेल और उसकी इकाई होने को पवित्र समझते हैं।

इस पर मैंने सोचा कि जब मानव परिवारोम में इस तरह का विच्छेद होता है, तब परमेश्वर भी ऐसे ही दुखी होता हिगा। मैं उन बाज़ों कि लिये इतना दुखी क्यों था? क्यों मैं अपने समाज के अलग हुए दम्पति और परिवारों के बारे में इतना व्याकुल नहीं होता? मुझे अपनी प्राथमिकता को बदलना है।

मलाकी २ में हम विवाह के विषय पर परमेश्वर का दृष्टिकोण देखते हैं। विवाह लोगों के साथ उसकी वाचा का प्रतीक है (पद ११)। वह उसे बहुत मूल्य देता है। हमें भी देना है। - जूली ऐकरमैन लिंक


विवाह-संबंध को दृढ़ करने को मसीह को प्रथम स्थान दो।


बाइबल पाठ: मलाकी २:१०-१६


तुम में से कोई अपनी जवानी की स्त्री से विश्वासघात न करे। - मलाकी २:१५


एक साल में बाइबल:
  • गिनती १५,१६
  • मरकुस ६:१-२९

Thursday, February 25, 2010

ओकेल्लो की कहानी, कहानी हमारी

मेरी दोस्त रौक्सैन्न ने अपने जीवन में कई अच्छी नौकरियाँ कीं। उसने ओलिम्पिक्स खेलों में संवादिका होकर काम किया। उसने प्रसिद्ध कंपनियों और व्यक्तियों के लिये काम किया। कई सालों तक उसने बड़े मसीही खिलाड़ियों के बारे में लेख लिखे। परन्तु उन सब की तुलना उसकी अब की नौकरी से नहीं की जा सकती - उगान्डा के बच्चों को यीशु का प्रेम देने का काम।

उसका जीवन उगांडा में कैसे बीतता है? उदाहरण स्वरूप, वर्षा काल के एक गुरुवार को लीजिये; वह कीचड़ के कच्चे रास्ते से कैंसर रोगियों के अस्पताल में जाती है। अन्दर जाकर वह छोटे बालक ओकेल्लो को अपनी गोदी में उठाती है, जिसकी बाहों में बहुत सूजन और दर्द है, बदन बुखार से जल रहा है। वह उसे कैंसर के डॉक्टर के दफ्तर में ले कर जाती है और उसकी हालत सुधरने तक उसके साथ रहती।

हमारा नमूना यीशु है। उसने अपनी सेवा का सारा काल दुखियों के बीच बिताया, उनके रोगों को चंगा किया, उन्हें परमेश्वर के प्रेम का सुसमाचार दिया (लूका ७:२१,२२)।

हमारे जीवन की प्राथमिकताएं क्या हैं - केवल काम? अवश्य है कि हमें अपने और अपने परिवार के पालन-पोषण के लिये नौकरी करनी है। परन्तु दुख-दर्द भरे संसार की पीड़ा कम करने को क्या हम कुछ नहीं कर सकते हैं? हम रौक्सैन्न के जैसे उगांडा नहीं जा सकेंगे, परन्तु हम अपने आस-पास किसी की मदद करने का मार्ग ढूंढ सकते हैं और किसी के जीवन को बदल सकते हैं। - डेव ब्रैनन


मसीह में हमारी समानता का मापदंड है दूसरों के कष्टों की ओर हमारी सहानुभूति।


बाइबल पाठ:लूका ५:१२-१६


तब उसने (यीशु ने) अपना हाथ बढ़ाकर उसे(कोढ़ी को) छुआ। - लूका ५:१३


एक साल में बाइबल:
  • गिनती १२-१४
  • मरकुस ५:२१-४३

Wednesday, February 24, 2010

गड़बड़ की स्थिति को सुधारना

जब हम बाइबल में नओमी को देखते हैं तब उसका जीवन बड़ी गड़बड़ में था। नओमी और उसका पति अकाल के समय भोजन की खोज में मोआब देश चले गये थे। उस देश में उनके दोनो पुत्रों ने मोआबी लड़कियों से शादी की। जीवन खुशी से चल रहा था, परन्तु कुछ समय में उसके पति और दोनो पुत्र मर गये और वह परदेश में अकेली और विधवा रह गयी। नाओमी ने अपने असहनीय दुख में भी जाना कि उसके जीवन की बागडोर किसके हाथ में है? "यहोवा ही ने मेरे विरूद्ध साझी दी, और सर्वशक्तिमान ने मुझे दु:ख दिया है" (रूथ १:२१)। नओमी परमेश्वर के लिये दो इब्रानी शब्दों का प्रयोग करती है, "शद्‍दाई" जो परमेश्वर के हर परिस्थिति में समर्थ होने को दिखाता है और "यहोवा" जो परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को दिखाता है। वह वाचा की रक्षा करने वाला प्रेमी यहोवा विश्वासयोग्य है। नओमी ने इन दोनो नामों का प्रयोग एक साथ किया। वह शिकायत के बावजूद अपने विश्वासयोग्य और सर्वशक्तिशाली परमेश्वर के गुण नहीं भूली। परमेश्वर नओमी की रक्षा अन्त तक करने में समर्थ और विश्वासयोग्य रहा।

अगर आप गहरी निराशा में पड़े हैं और कोई मार्ग नहीं सूझ रहा तो याद रखिये कि नओमी का यहोवा आप का भी यहोवा है। वह हमारे जीवन की गड़बड़ को महान भलाई में बदल सकता है। वह समर्थ और विश्वासयोग्य है। इसलिये जब जीवन गड़बड़ हो तो स्मरण रखिये कि आपका परमेश्वर कौन है। - जो स्टोवैल


शांत होकर परमेश्वर को कार्य करने दो और देख लो कि परमेश्वर तुम्हारी बिगड़ी हालत को महिमामय स्थिति में कैसे परिवर्तित करता है।


बाइबल पाठ: रूथ १:१५-२२


यहोवा ही ने मेरे विरुद्ध साक्षी दी, और सर्वशक्तिमान ने मुझे दुख दिया है, फिर तुम क्यों मुझे नओमी कहते हो? - रूथ १:२१


एक साल में बाइबल:
  • गिनती ९-११
  • मरकुस ५:१-२०

Tuesday, February 23, 2010

कटनी का इन्तज़ार

जेम्स एन्जल और विल्बर्ट नौर्टन अपनी एक पुस्तक में एक रेखा चित्र द्वारा दिखाते हैं कि अक्सर लोग पूर्ण विश्वास में आने और यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने का अंतिम निर्ण्य लेने से पहले कई स्तरों से पार होते हैं।

लोंगों के अपने मन-परिवर्तन के अनुभवों को सुनते समय हमें लगता है कि उनका विश्वास एकदम ही हुआ होगा। परन्तु उनके यह निर्णय लेने से पहले उनकी आत्मिक यात्रा की एक लम्बी कहानी होती है। वे सुसमाचार पर विचार करने में समय बिताते हैं, और यीशु को उद्धारकर्ता करके ग्रहण करना एक प्रक्रिया का नतीजा होता है।

यह खेतीबारी की प्रक्रिया जैसा ही है। महीनों का इंतिज़ार एक दिन खत्म होता है और मज़दूर फसल काटने को खेतों में आते हैं। यीशु द्वारा दिये एक दृष्टांत से भी हम सीखते हैं कि विश्वास भी फसल के समान कुछ समय लेकर ही धीरे-धीरे बढ़कर परिपक्व होता है - "पहले अंकुर, तब बाल और तब बालों में तैयार दाना...फिर कटनी आ पहुंचती है।"(मरकुस ४:२८,२९)।

क्योंकि लोग निर्णय लेने से पहले समय चाहते हैं और सुसमाचार का कई प्रकार का अध्यय्न अवं मनन भी, इसलिये उनकी विश्वास यात्रा में हमें उनके साथ संवेदना रखने की आवश्यक्ता है। इस बीच हम उनकी आत्मिक दिलचस्पी को बढ़ावा दे सकते हैं, उनके लिये प्रार्थना कर सकते हैं और फसल के लिये इन्तज़ार कर सकते हैं। - डेनिस फिशर


हम बीज बोते हैं, परमेश्वर फसल देता है।


बाइबल पाठ: मरकुस ४:२६-२९


पहले अंकुर, तब बाल और तब बालों में तैयार दाना...कटनी आ पहुंची है। - मरकुस ४:२८,२९


एक साल में बाइबल:
  • गिनती ७, ८
  • मरकुस ४:२१-४१