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मंगलवार, 29 जून 2010

राजदूत

मैकौले रेवीरा, बाइबल कॉलेज में मेरा एक घनिष्ठ मित्र था और उसे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु से बहुत प्रेम था। उसके मन की अभिलाषा थी कि वह कॉलेज से स्नातक हो, अपनी मंगेतर शैरन से शादी करे और अपने स्थान वॉशिंगटन में लौटकर एक चर्च स्थापित करे जिससे वह अपने मित्रों और परिवार जनों को मसीह के निकट ला सके।

किंतु यह हो न सका, अचानक एक दुर्घटना में हुई मैकौले और शैरन की मृत्यु से उसके इस सपने का अंत हो गया। सारे छात्र स्तब्ध रह गये। उनके स्मरण में की गई शोक-सभा में उसके इस सपने को चुनौती के रूप में रखा गया, "मैक तो चला गया, उसके स्थान पर अब कौन इस सेवकाई को करेगा?" छात्रों पर मैक के जीवन की गवाही के प्रभाव के प्रमाण के रूप में २०० से अधिक छात्र मसीह के उस दिवंगत सेवक के स्थान पर इस चुनौती को स्वीकार करने के लिये खड़े हो गये।

उन छात्रों की यह प्रतिक्रीया यशायाह भविष्यद्वक्ता के समर्पण और आज्ञाकारिता को याद दिलाती है। भय और अशांति के काल में उसे परमेश्वर के सिंहासन के समक्ष बुलाया गया और उसने परमेश्वर का प्रश्न सुना "मैं किसे भेजूँ? हमारी ओर से कौन जायेगा?" यशायाह का जवाब था "मैं यहां हूँ। मुझे भेज" (यशायाह ६:८)।

परमेश्वर आज भी लोगों को अपने राजदूत होने के लिये बुलाता है, जो उसके उद्धार के सन्देश को संसार के लोगों तक ले जाएं। वह हमें पुकारता है कि हम उसकी सेवा में समर्पित हों - घर से दूर या घर के पास। हमारे लिये विचार करने की बात यह है कि हम उसकी पुकार का क्या जवाब देते हैं?

परमेश्वर हमें सामर्थ दे कि हम यशायाह के समान कह सकें "मैं यहां हूँ। मुझे भेज।" - बिल क्राउडर


जिसे परमेश्वर बुलाता है, उसे योग्य भी बनाता है; जिसे योग्य बनाता है उसे भेजता भी है।


बाइबल पाठ: यशायाह ६:१-८


तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज। - याशायाह ६:८


एक साल में बाइबल:
  • अय्युब १४-१६
  • प्रेरितों के काम ९:२२-४३

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