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Saturday, July 31, 2010

आरंभ का एक मात्र स्थान

जब एक प्रकाशन संस्था ने मुझे आमंत्रण दिया कि मैं उनकी एक नई पुस्तक की भूमिका लिखूं तो मैंने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। जब मैं उस पुस्तक को पढ़ने लगा तो मैंने पाया कि वह जवानों को बदलते हुए संसार में परमेश्वर के लिये जीवन जीने को प्रोत्साहित करने के लिये लिखी गई थी, किंतु फिर भी उसे पढ़कर मैं कुछ विचिलित हुआ। यद्यपि उस पुस्तक में बाइबल से बहुत से पद उद्वत किये गए थे और अच्छी आत्मिक सलाह दी गई थी, किंतु उसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि परमेश्वर के साथ सही संबंध का आरंभ प्रभु यीशु में मिला उद्धार है।

लेखक के विचार से आधुनिक समाज में अच्छे आत्मिक जीवन का आधार भले कार्य हैं, सब कुछ हमारे भले कार्यों पर निर्भर है, न कि मसीह पर विश्वास द्वारा मिले उद्धार पर। इसलिये मैंने उस पुस्तक की भूमिका नहीं लिखी।

चर्च का स्वरूप और संसकृति तेज़ी से बदल रही है और नये विचारों की होड़ में सुसमाचार का वास्तविक सन्देश कहीं पीछे छूटता जा है। प्रेरित पौलुस अचंभित था कि लोगों ने "दूसरे सुसमाचार" (गलतियों १:६) को कितनी सहजता से स्वीकार कर लिया। उसने जो प्रचार किया था वह किसी मनुष्य के विचार नहीं थे, उसे वह सन्देश स्वयं प्रभु यीशु से प्राप्त हुआ था (गलतियों १:११, १२)।

इस खरे सुसमाचार को हमें कभी नहीं छोड़ना है कि: मसीह हमारे पापों के लिये मरा, गाड़ा गया और हमें परमेश्वर के सन्मुख धर्मी ठहराने के लिये जी उठा (रोमियों ४:२५, १ कुरिन्थियों १५:३, ४)। केवल यही सुसमाचार है जो प्रत्येक विश्वास करने वाले के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है (रोमियों १:१६)।

यदि हम परमेश्वर के लिये जीवन व्यतीत करना चहते हैं तो आरंभ करने का यही एक मात्र स्थान है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के उद्धार के उपहार को केवल मसीह में विश्वास के द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है।

जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्‍त्रापित हो। - (गलतियों १:९)

बाइबल पाठ: गलतियों १:६-१२
मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे।
परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं।
परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो स्‍त्रापित हो।
जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्‍त्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं?
यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।
हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं।
क्‍योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५४-५६
  • रोमियों ३

Friday, July 30, 2010

झंझट

मेरे पति टौम और हमारे मित्र फ्रैड को जब मालूम पड़ा कि सड़क पर यातायात क्यों धीमा चल रहा है तो फ्रेड ने बेचैन होकर कहा, "क्या उस बेचारे की कोई सहायता नहीं करेगा?" वहां सड़क पर एक साईकिल सवार गिरा पड़ा था, उसकी साईकिल उस के उपर पड़ी थी और गाड़ियां बिना रुके उसके करीब से निकलती जा रहीं थीं। फ्रेड ने अपनी कार की सावधानी सूचक बत्तियां जलाईं और अपनी कार को खड़ा करके गाड़ियों के आवगमन को सड़क पर रोक दिया। फिर फ्रैड और टौम दोनो कार से बाहर निकलकर सड़क पर पड़े उस व्यक्ति की सहायता के लिये नीचे उतर पड़े।

फ्रैड और टौम दोनो उस झंझट में पड़ने को तैयार थे, जैसे लूका १० में प्रभु यीशु द्वारा दिये गये दृष्टांत में वह सामरी व्यक्ति तैयार था। उस सामरी के समान, उन दोनो ने भी परेशानी में पड़े एक व्यक्ति की सहायता के लिये, अपनी हिचकिचाहट को काबू में किया और आगे बढ़े। उस सामरी को भी सहायता करने के लिये जाति और सांसकृतिक भेदभाव के ऊपर उठना पड़ा, किंतु उसने सहायता करी; जबकि जिनसे सहायता की उम्मीद करी जाती थी वे घायल व्यक्ति की उपेक्षा करके चले गये।

ऐसे समयों पर अपने आप को परिस्थिति में डालने से बचने के बहाने बनाना आसान है। साधारणतया, सहायता करने से बचने के बहानों की सूचि में सबसे ऊपर व्यस्तता, उपेक्षा और भय होते हैं। फिर भी यदि हम अपने प्रभु का अनुकरण विश्वासयोग्यता से करने की चाह रखते हैं, तो हम उसके समान, सहानुभूति सहित, सहायता करने के अवसरों का सदुपयोग भी करेंगे (मत्ती १४:१४, १५:३२, मरकुस ६:३४)।

अच्छे सामरी के दृष्टांत में प्रभु यीशु ने उस सामरी की प्रशंसा करी क्योंकि उसने महंगा पड़ने, असुविधाजनक और मुश्किल होने के बावजूद सहानुभूति के साथ एक घायल व्यक्ति की सहायता की।

प्रभु हमें भी यही कहता है "...जा, तू भी ऐसा ही कर" (लूका १०:३७)। - सिंडी हैस कैसपर

कार्यशील प्रेम ही सच्ची सहानुभूति है।

यहोवा अनुग्रहकारी और दयावन्त है। - भजन १११:४

बाइबल पाठ: लूका १०:३०-३७

यीशु ने उत्तर दिया, कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा या, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए।
और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतरा कर चला गया।
इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया।
परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया।
और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ा कर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकाल कर भटियारे को दिए, और कहा, इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५१-५३
  • रोमियों २

Thursday, July 29, 2010

घर वापसी

अपने लड़कपन में समय बिताने का मेरा मन पसन्द तरीका था अपने घर के पीछे बह रहे पानी के नाले के साथ साथ चलना। यह करना मेरे लिये बहुत रोमांचकारी होता था; बहुत से मन बहलाने वाले काम करने को होते थे: पत्थरों पर चढ़ना-उतरना,पक्षियों को देखना, जानवरों के पैरों के निशनों के सहारे उनका पीछा करना, उस नाले पर छोटे बांध बनाना, आदि। अगर मैं इन सब के बावजूद नाले के मुहाने तक पहुंच पाता, तो मैं और मेरा पालतु कुत्ता झील के किनारे बैठ कर कुछ खाते और झील पर उड़ान भरते वायुयानों को देखते रहते।

हमसे जितना संभव हो सकता था, हम उतनी देर इन सब में बिताते, परन्तु बहुत देर नहीं कर सकते थे क्योंकि मेरे पिता के निर्देश थे कि हम सूर्यास्त से पहले ही घर पहुंच जाया करें। उस जंगल के रास्ते पर दिन का उजाला जल्द ही कम हो जाता था और मार्ग में बढ़ते अन्धकार के कारण मैं अक्सर सोचता कि काश मैं घर जल्दी पहुंच सकूं।

हमारा घर जंगल के पेड़ों के पार एक टीले पर स्थित था, और जब तक परिवार का प्रत्येक सदस्य घर न पहुंच जाए, घर की बत्ती जली रहती थी। अक्सर मेरे पिता पिछले बरामदे में मेरे इंतिज़ार में बैठे अखबार पढ़ रहे होते थे। मेरे पहुंचने पर वे पूछते, "समय कैसा रहा?" और मैं उत्तर देता, "बहुत बढ़िया, लेकिन घर वापस पहुंचना सबसे अच्छा है।"

अब, बढ़ी उम्र में, उन दिनों की यह यादें मुझे एक और यात्रा के बारे में सोचने को प्रोत्साहित करती हैं - जिस यात्रा पर मैं अब अग्रसर हूं। यह यात्रा आसान नहीं है, लेकिन मैं जानता हूं कि यात्रा के अन्त में अपने अनन्त घर में मैं अपने प्रेमी स्वर्गीय पिता से मिलुंगा, जो मेरी प्रतीक्षा कर रहा है। इस यात्रा के पूरे होने और अपने उस स्वर्गीय पिता से मिलने के लिये मैं बहुत आतुर हूं।

वहां मेरी प्रतीक्षा हो रही है, प्रतीक्षा में उस अनन्त घर में ज्योति चमक रही है और मेरा पिता मेरी राह देख रहा है। मुझे लगता है कि मेरे पृथ्वी के पिता के समान, मेरे घर पहुंचने पर वह मुझसे पूछेगा "समय कैसा रहा?" और मैं उसे उत्तर दूंगा "बहुत बढ़िया, लेकिन घर वापस पहुंचना सबसे अच्छा है।"

क्या आप भी ऐसे ही घर वापसी की राह देख रहे हैं? - डेविड रोपर


एक मसीही विश्वासी के लिये स्वर्ग का दूसरा नाम घर है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन ७३:२४

बाइबल पाठ: भजन ७३:२१-२८

मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रहकर भी, पशु बन गया था।
तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था, तू ने मेरे दहिने हाथ को पकड़ रखा।
तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा।
स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।।
जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे, जो कोई तेरे विरूद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४९, ५०
  • रोमियों १

Wednesday, July 28, 2010

मित्रों का मूल्य

जौन क्रिसोसटोम (सन ३४७-४०७) प्रारंभिक चर्च का एक महान प्रचारक था। उसके सुवक्ता होने के कारण उसे यह नाम क्रिसोसटोम दिया गया, जिसका अर्थ है ’सुनहले मुँह वाला’।

मित्र के मूल्य पर उसके द्वारा कही गई कुछ बातों को परखकर देखिये: "यह मित्रता ही है जिसके कारण हम स्थानों और ‌ऋतुओं को चाहते हैं; जैसे फूल अपनी मधुर पंखुड़ियां अपने चारों ओर की भूमि पर बिखेर देते हैं, ऐसे ही मित्र भी अपने आस पास सौहार्द और अनुग्रह बिखेर देते हैं। मित्रों के साथ दरिद्रता में भी आनन्द होता है। हमारे लिये यह अधिक भला होगा कि सूर्य जाता रहे बजाए इसके मित्र न रहें।"

दाऊद और योनातान की कहानी मित्रता के मूल्य को दिखाती है। यद्यपि योनातन का पिता राजा शाउल, अपने पागलपन में, दाऊद को मारने को फिर रहा था, दाऊद ने उस ही के पुत्र की मित्रता से हिम्मत पाई - "और योनातन दाऊद से प्रेम रखता था, ... क्योंकि वह उस से अपने प्राण के बराबर प्रेम रखता था" (१ शमुएल २०:१७)। उनका यह संबंध विश्वास, समझ-बूझ और प्रोत्साहन पर आधारित था। राजा शाऊल द्वारा किये जा रहे अनुचित उत्पीड़न को सहना दाऊद के लिये असंभव होता यदि परमेश्वर पर आधारित योनातान की मित्रता (१ शमुएल २०:४२) का पोषण उसे ना मिलता।

किंतु मित्रता का इससे भी ऊंचा स्तर हम प्रभु यीशु में देखते हैं, जिसने अपने अनुयायियों के प्रति अपनी मित्रता का मूल्य अपने प्राण से भी अधिक रखा "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना १५:१३)। आज भी उसका अपने मित्रों से वायदा है कि "मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों १३:५)।

क्रिसोसटोम के वचन और दाऊद-योनातान की मित्रता के उदाहरण हमें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर द्वारा दिये गये मित्रों की मित्रता को हमें कैसे संवारे रखना है, प्रभु यीशु हमें दिखाता है कि मित्रता का मूल्य क्या है। - डेनिस फिशर


जब संसार हमें छोड़ देता है तो मित्र ही हमारे साथ रहते है।


और योनातन दाऊद से प्रेम रखता था, ... क्योंकि वह उस से अपने प्राण के बराबर प्रेम रखता था" - १ शमुएल २०:१७

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना १५:१३

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१२-१७
मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है: परन्‍तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपके पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
तुम ने मुझे नहीं चुना परन्‍तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ, और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४६-४८
  • प्रेरितों के काम २८