ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 17 जुलाई 2010

जब भूमि हिले

सैन फ्रैन्सिस्को में आये एक विनाशकारी भूकंप के कई दिन बाद वहां एक स्कूल के खेल के मैदान में एक बच्चा हिलता और कंपकंपाता देखा गया। उसके प्रधानाध्यापक ने उससे पूछा कि क्या तुम ठीक हो तो तो बच्चे ने हां में सिर हिलाया और कहा "मैं भूमि की तरह हिल और कांप रहा हूं जिससे यदि भूकंप फिर से आये तो मैं उससे डर महसूस न कर सकूं।" वह अपने आप को एक और भूकंप के लिये तैयार कर रहा था।

कभी कभी किसी हादसे के बाद हम अपने आप को किसी अन्य संभावित दुर्घटना के लिये तैयार कर लेते हैं। यदि फोन द्वारा हमें कोई बुरा समाचार मिलता है तो जब भी फोन बजता है तो हम डर कर सोचते हैं कि "न जाने अब क्या हो गया?"

भजनकार दाऊद के लिये जैसे "भूमि हिल रही थी" जब राजा शाऊल ने उसे मारने का प्रयास किया (१ शमूएल १९:१०)। वह भागकर छिप गया, उसे लगा कि अब अगले कदम पर मृत्यु है। उसने अपने मित्र योनातान को कहा "...नि:सन्देह, मेरे और मृत्यु के बीच डग ही भर का अन्तर है" (१ शमूएल २०:३)। दाऊद ने लिखा "मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया" (भजन १८:४)।

अपने दुख के समय दाऊद परमेश्वर के आगे गिड़गिड़ाया (भजन १८:६) और पाया कि परमेश्वर स्थिर करने वाला है, उसपर वह सदा विश्वास रख सकता है कि वह उसके साथ बना रहेगा। दाऊद ने कहा "यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ानेवाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का गढ़ है"(भजन १८:२)।

यदि कभी हमारे पांव तले की भूमि हिले, तो हमारे लिये भी परमेश्वर ऐसे ही स्थिरता का स्त्रोत होगा। - ऐनी सेटास


जीवन की आंधियों में सुरक्षित रहने के लिये युगों की स्थिर चट्टान - मसीह यीशु पर जीवन का लंगर डाले रहें।


बाइबल पाठ: भजन १८:१-६
"हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं।
यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ानेवाला है, मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का गढ़ है।
मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा, इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा।
मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया;
पाताल की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं, और मृत्यु के फन्दे मुझ पर आए थे।
अपने संकट में मैं ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा, मैं ने अपने परमेश्वर को दोहाई दी। और उस ने अपने मन्दिर में से मेरी बातें सुनी। और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी।"


एक साल में बाइबल:
  • भजन १८, १९
  • प्रेरितों के काम २०:१७-३८

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें