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शनिवार, 18 सितंबर 2010

दृष्टिकोण

लगता है कि संसार में दो तरह के लोग रहते हैं - एक वे जिनका दृष्टिकोण अनन्त के लिये है और दूसरे वे जो वर्तमान के लिये व्यस्त रहते हैं।

एक शाशवत पर मन लगाते हैं, दूसरे क्षणिक पर। एक स्वर्ग में धन एकत्रित करते हैं, दूसरे इस धरती पर। एक समस्याओं भरे वैवाहिक जीवन को भी निभा लेते हैं इस विश्वास से कि इससे आगे भी कुछ है, दूसरे समस्याओं में नए जीवन साथी ढूंढने लगते हैं यह मान कर कि जो है वो यहीं है। एक दरिद्रता, भूख, अपमान और लज्जा इसलिये सह लेते हैं "क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं" (रोमियों ८:१८), दूसरे इस उद्देश्य से जीवन जीते हैं कि धनी और प्रसिद्ध होना ही सुखी होना है।

सब दृष्टिकोण की बात है।

इब्राहिम का दृष्टिकोण परलोक का था; इसी लिये वह यरदन नदी की तराई का उपजाऊ और भली भांति सींचा हुआ भूभाग बड़ी सहजता से अपने भतीजे लूत के लिये छोड़ सका (उत्पति १३)। वह जानता था कि भविष्य में परमेश्वर ने उसके लिये कुछ इससे भी उत्तम रख छोड़ा है। और ऐसा ही हुआ, परमेश्वर ने उससे कहा कि वह अपने चारों ओर दृष्टि करे, जहां तक भी उसकी निगाह जाती है, वह सारी भूमि उसकी और उसके वंश की होगी और उसके वंशज धूल के किनकों के समान अनगिनत होंगे (पद १६)।

यह ऐसा दृष्टिकोण है जिसे आज बहुतेरे समझ नहीं पाते। वे तो अपनी सारी युक्ति और सामर्थ से बस वर्तमान के लिये ही जीते हैं, यहीं सब कुछ पाना चाहते हैं। पर परमेश्वर के लोग कुछ और ही दृष्टिकोण रखते हैं - वे जानते हैं कि भविष्य में परमेश्वर ने उनके लिये कुछ और भी उतम रख छोड़ा है - "परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखीं, और कान ने नहीं सुनीं, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी, वे ही हैं जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं" (१ कुरिन्थियों २:९)। - डेविड रोपर


जो प्रभु यीशु मसीह के लिये जीवन जीते हैं, वे अनन्तता के लिये जीवन जीते हैं।

क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। - रोमियों ८:१८


बाइबल पाठ: उत्पति १३:१०-१८

तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है।
तब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा, और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर।
क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूंगा।
और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों की नाईं बहुत करूंगा, यहां तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।
उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर क्योंकि मैं उसे तुझी को दूंगा।
इसके पशचात अब्राम अपना तम्बू उखाड़ कर, माम्रे के बांज वृक्षों के बीच जो हेब्रोन में थे जा कर रहने लगा, और वहां भी यहोवा की एक वेदी बनाई।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन ३०, ३१
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

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