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Sunday, October 31, 2010

पवित्रता के लिये पृथक

अमेरिका में अक्तूबर महीने का यह अन्तिम दिन "हैलोवीन दिवस" कहकर मनाया जाता है, जिसमें बच्चे भेस बदल कर और थैले लिये घर घर जाते हैं और घर वाले उन्हें उनके थैलों में मिठाइयां देते हैं। "हैलोवीन" अंग्रज़ी के hallow [हैलो] शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है पवित्र। आज कल यह शब्द बहुत कम प्रयोग होता है, और जब होता है तो इसके विभिन्न अर्थ हो जाते हैं।

मसीही विश्वास में हैलो का अर्थ पवित्र ही है। जब किसी चीज़ या जन को हैलो किया जाता है, तो उसका तातपर्य होता है कि वह पवित्रता के लिये पृथक किया गया है, जैसा प्रभु की प्रार्थना में परमेश्वर के संदर्भ में इसके प्रयोग से प्रकट है "Hallowed be thy name" - तेरा नाम पवित्र माना जाए। केवल परमेश्वर का नाम ही पवित्र नहीं ठहराया गया है, वरन प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपने आप को भी पवित्रता में रखना है, जैसा पौलुस ने तिमुथियुस को सिखाया, कि वह ऐसा पात्र बने जो परमेश्वर के उपयोग के लिये पवित्र हो "तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं" (२ तिमुथियुस २:१९-२३)।

अक्तूबर के इस अन्तिम दिन अमेरिका में बच्चे तो मिठाईयों के थैले लिये घूमते हैं, परन्तु हमें विचार करना है कि हम अपने मन में क्या लिये घूम रहे हैं? हमारे जीवन के पात्र में क्या भरा है? क्या हमारे जीवन द्वेश और कलह की कड़ुवाहट से भरे हैं जिनसे मूर्खता और अविद्या के विवाद उत्पन्न होते हैं, या वे परमेश्वर की आत्मा की मिठास से भरे हैं जिनसे समाज में धार्मिकता, विश्वास, प्रेम और शांति फैलती है?

हम न सिर्फ आज के दिन को, वरन हर दिन अपने आप को परमेश्वर के लिये पवित्र और उपयोगी होने के लिये पृथक और समर्पित कर के, हर दिन को "हैलो" कर सकते हैं। - जूली ऐकरमैन लिंक


मसीही विश्वासी के लिये सबसे बड़े आनन्द की बात है उसका परमेश्वर के लिये उपयोगी होना।

यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। - २ तिमुथियुस २:२१


बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१९-२६

तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।
बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये।
यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा।
जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं
और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।
और इस के द्वारा उस की इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतान के फंदे से छूट जाए।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह २२, २३
  • तीतुस १

Saturday, October 30, 2010

साथी और भगौड़े

उपन्यासकार स्टीफन ब्लाइ का मानना है कि मित्र और घोड़े दो प्रकार के होते हैं - एक वे जो हर परिस्थिति में साथ खड़े रहते हैं और दूसरे वे जो परेशानी की भनक पड़ते ही साथ छोड़कर भाग निकलते हैं और आपको अकेले ही खतरों का सामना करने के लिये छोड़ देते हैं। दुर्भाग्यवश, मित्रों और घोड़ों का यह भेद तब तक नहीं मालूम नहीं पड़ता जब तक आप मुसीबत में नहीं पड़ जाते, और तब बहुत देर हो चुकती है, यदि आपका मित्र साथ खड़े रहने वाला न हो!

परेशानियों के समय में प्रत्येक को ऐसे मित्रों की आवश्यक्ता होती है जिन पर वह भरोसा कर सके। किंतु बजाए इसके कि हम यह चिंता करें कि हमारे मित्र किस श्रेणी के हैं, हमें यह जांचने की आवश्यक्ता है कि स्वयं हम किस श्रेणी के हैं - साथी या भगौड़े? नीतिवचन का लेखक बताता है कि "मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्र होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है" (नीतिवचन १८:२४); तथा "मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है" (नीतिवचन १७:१७)।

अपनी सेवकाई के अन्तिम दिनों में, जब वह अपने मृत्युदण्ड की आज्ञा के पूरे होने का इंतिज़ार कर रहा था, पौलुस के साथ के कई लोग उसका साथ छोड़ कर चले गए। अपनी अन्तिम पत्री में पौलुस ने अपने साथियों और भगौड़ों में से कुछ के नाम लिखे, उनमें से एक भगौड़ा था देमास; और साथी था लूका ( २ तिमुथियुस ४:१०, ११)। यद्यपि अपने भगौड़े मित्रों के कारण पौलुस अवश्य बहुत निराश हुआ होगा किंतु अपने साथीयों के कारण उसका ढ़ाढ़स भी बन्धा होगा।

जब वे जिन्हें हम मित्र कहते हैं किसी परेशानी में पड़ेंगे तो उनके लिये हम किस श्रेणी के मित्र ठहरेंगे - साथी या भगौड़े, यह तो वक्त और परिस्थितियां ही बता सकेंगी; परन्तु एक है - प्रभु यीशु, जिसका अपने लोगों से अटूट वायदा है "मैं न तुझे कभी छोड़ुंगा और कभी तुझे त्यागुंगा" (इब्रानियों १३:५), और यह वायदा आज तक कभी भी, किसी भी परिस्थिति में, किसी के लिये झूठा साबित नहीं हुआ है। उसने आपके पाप और अविश्वास की दशा में भी, आपके लिये अपनी जान देकर अपने इस वायदे को स्थापित तथा प्रमाणित किया है।

प्रभु यीशु को अपना मित्र बना लीजिए, वह कभी भगौड़ा नहीं होगा, सदा साथी ही रहेगा; एक ऐसा मित्र जो भाई से अधिक मिला रहता है। - बिल क्राउडर


एक सच्चा मित्र हर परीक्षा में साथ खड़ा मिलेगा।

मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है। - नीतिवचन १७:१७


बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस ४:६-१८

क्‍योंकि अब मैं अर्घ की नाई उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है।
मैं अच्‍छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है।
भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, बरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।
मेरे पास शीघ्र आने का प्रयत्‍न कर।
क्‍योंकि देमास ने इस संसार को प्रिय जानकर मुझे छोड़ दिया है, और थिस्‍सलुनीके को चला गया है, और क्रेसकेंस गलतिया को और तीतुस दलमतिया को चला गया है।
केवल लूका मेरे साथ है: मरकुस को लेकर चला आ, क्‍योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है।
तुखिकुस को मैं ने इफिसुस को भेजा है।
जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया हूं, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष करके चर्म पत्रों को लेते आना।
सिकन्‍दर ठठेरे ने मुझ से बहुत बुराइयां की हैं प्रभु उसे उसके कामों के अनुसार बदला देगा।
तू भी उस से सावधान रह, क्‍योंकि उस ने हमारी बातों का बहुत ही विरोध किया।
मेरे पहिले प्रत्युत्तर करने के समय में किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, बरन सब ने मुझे छोड़ दिया था: भला हो, कि इस का उनको लेखा देना न पड़े।
परन्‍तु प्रभु मेरा सहायक रहा, और मुझे सामर्थ दी: ताकि मेरे द्वारा पूरा पूरा प्रचार हो, और सब अन्यजाति सुन ले; और मैं तो सिंह के मुंह से छुड़ाया गया।
और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्‍वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुंचाएगा: उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह २०, २१
  • २ तिमुथियुस ४

Friday, October 29, 2010

अन्मोल लोग

अमेरिका के एक प्रसिद्ध अखबार में एक लेख छपा, जिसमें कुछ अधेड़ अमेरिकी नागरिकों द्वारा उनकी खोई हुई प्रिय कार को ढूंढ निकालने के प्रयासों का वर्णन था। ये लोग विज्ञापनों द्वारा खोज कर, रद्दी सामान के स्थानों में ढूंढकर और ढूंढने में माहिर विशेषज्ञों का सहारा लेकर, जो एक घंटे के लिये $४०० तक का मेहनताना लेते हैं, अपनी जवानी के प्रतीक को खोज निकालना चाहते हैं। उन्हें अपनी कार जैसी कोई दूसरी कार नहीं चाहिये, उन्हें केवल वही खोई हुई कार चाहिये जो कभी उनकी हुआ करती थी!

बहुत से लोगों के लिये उनके ये प्रयास व्यर्थ तथा समय और पैसे की बरबादी हैं, लेकिन उन लोगों के लिये उनकी वह खोई हुई कार अन्मोल है और उसकी कीमत वे ही समझते हैं।

बाइबल के लूका १५ में कुछ ऐसे लोगों के बारे में लिखा है जो समाज की दृष्टि में निन्दित और तिरिस्किरित थे, पर वे प्रभु यीशु के पास उसके प्रवचन सुनने आते थे। कुछ धार्मिक अगुवों को यह नागवार गुज़रा और उन्होंने प्रभु के लिये लांछन दिया "...कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है" (लूका १५:२)। यह सुन कर प्रभु यीशु ने तीन नीतिकथाएं सुनाईं जिनके द्वारा उसने सिखाया कि ये पापी भी परमेश्वर की दृष्टि में कितने बहुमूल्य हैं। ये तीन नीतिकथाएं थीं खोयी हुए भेड़ (लूका १५:४-७), खोये हुए सिक्के (लूका १५:८-१०) और खोए हुए पुत्र (लूका १५:११-३२) के विषय में। हर एक नीतिकथा कुछ खोने के दर्द, खोजने के प्रयास और पाने के आनन्द को दर्शाती है। हर एक नीतिकथा में हम परमेश्वर के चित्रण को देखते हैं, उस प्रेमी परमेश्वर पिता के रूप में जो पाप में खोई हुई प्रत्येक आत्मा के वापस लौट आने से अति आनन्दित होता है।

चाहे आज आप अपने आप को परमेश्वर से कितना भी दूर महसूस करते हों या उससे कितना भी दूर क्यों न चले गए हों, आप आज भी उसकी दृष्टि में अनमोल हैं। वह आपको ढूंढ रहा है और आपके लौट आने का इन्तिज़ार कर रहा है। - डेविड मैककैसलैंड


जो खोए हुओं में से वापस लौट आए हैं, अब उनका कर्तव्य खोए हुओं को ढूंढना और लौटने का मार्ग दिखाना है।

क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे। - लूका १५:२४


बाइबल पाठ: लूका १५:१-२४

सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें।
और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
तब उस ने उन से यह दृष्टान्त कहा।
तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे?
और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है।
और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे करके कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।
मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धमिर्यों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे?
और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी करके कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्का मिल गया है।
मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है।
फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा : उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूं।
मैं अब उठकर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है।
अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
पुत्र ने उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है; और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; झट अच्छे से अच्छा वस्त्र निकालकर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्द मनावें।
क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह १८, १९
  • २ तिमुथियुस ३

Thursday, October 28, 2010

शैतान से धोखा

राडोवान कराडज़िक, एक समय बोसनिया में रहने वाले सर्ब लोगों का अगुवा था। उस देश में चले गृह युद्ध के दौरान, उसके ऊपर अपनी जाति से भिन्न साधारण नागरिकों के भारी नरसंहार का इल्ज़ाम था और वह ऐसा अपराधी था जिसे संसार में सबसे अधिक खोजा जा रहा था। लम्बी सफेद दाढ़ी बढ़ाए हुए और नकली पहचान पत्र रखकर वह एक चिकित्सक के रूप में काम करता रहा और लोगों को धोखा देता रहा। ऐसे १३ साल तक छुपे रहने के बाद अन्ततः उसकी असलियत पता लगी और वह पकड़ा गया।

बाइबल बताती है कि शैतान भी लोगों को भेष बदल कर धोखा देते रहने में माहिर है, और सृष्टि के आरंभ से ऐसा करता आ रहा है। मनुष्य के इतिहास के आरंभ में, अदन की वाटिका में वह ज्ञानी सलाहकार बन कर हव्वा के पास आया, और उसे यह समझा कर बहकाया कि परमेश्वर उसके और आदम के साथ पूरी तरह से ईमानदार नहीं है (उत्पति ३:१-५)। पौलुस सचेत रहने को कहता है "क्‍योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्‍वर्गदूत का रूप धारण करता है" (२ कुरिन्थियों ११:१४)।

प्रभु यीशु ने शैतान की वास्तविकता प्रगट करी - " तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्‍योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है, क्‍योंकि वह झूठा है, बरन झूठ का पिता है" (यूहन्ना ८:४)। हर एक झूठ और धोखा शैतान की ओर से है, चाहे वह झूठ कितना भी आकर्षक, तर्कसंगत या परिस्थितियों के संदर्भ में कितना भी उचित क्यों न लगे। तर्क और ज्ञान के ऐसे जाल में फंसा कर शैतान लोगों को बहकाता और फंसाता रहता है।

शैतान के विषय में लोग दो तरह की गलत धारणा रखने के कारण धोखा खा जाते हैं। कुछ तो उसे कालपनिक मान कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और कुछ अन्य उसे वास्तविकता से अधिक सामर्थशाली मानकर उसके आगे घुटने टेक देते हैं। हम धोखा न खाएं, शैतान सामर्थी अवश्य है, बाइबल भी उसे "इस संसार[युग] का ईश्वर" कहकर संबोधित करती है (२ कुरिन्थियों ४:४); लेकिन प्रभु यीशु मसीह के विश्वासियों को उसके सामने डरने और घबराने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि विश्वासियों के लिये बाइबल यह भी बताती है कि " हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है, क्‍योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (१ युहन्ना ४:४)। वह दिन आने को है जब शैतान सदा काल के लिये आग की झील में डाल दिया जाएगा (प्रकशितवाक्य २०:१०)।

शैतान के उसके अंजाम तक पहुंचने के दिन तक हम चौकस रहें कि वह हमें धोखा न देने पाए और हम ऐसे धर्मी जीवन जीते रहें जो मसीह के चरित्र को प्रदर्शित करते हों क्योंकि "...वही सच्‍चा है, और उस में अधर्म नहीं" (यूहना ७:१८)। - सी. पी. हिया


शैतान के पास सिवाय धोखे और कपट के और कुछ देने को नहीं है।

फिर मैं ने स्‍वर्ग पर से यह बड़ा शब्‍द आते हुए सुना, कि अब हमारे परमेश्वर का उद्धार, और सामर्थ, और राज्य, और उसके मसीह का अधिकार प्रगट हुआ है, क्‍योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगाने वाला, जो रात दिन हमारे परमेश्वर के साम्हने उन पर दोष लगाया करता था, गिरा दिया गया। - प्रकशितवाक्य १२:१०


बाइबल पाठ: प्रकशितवाक्य १२:७-१२

फिर स्‍वर्ग पर लड़ाई हुई, मीकाईल और उसके स्‍वर्गदूत अजगर से लड़ने को निकले, और अजगर और उनके दूत उस से लड़े।
परन्‍तु प्रबल न हुए, और स्‍वर्ग में उन के लिये फिर जगह न रही।
और वह बड़ा अजगर अर्थात वही पुराना सांप, जो इब्‍लीस और शैतान कहलाता है, और सारे संसार का भरमाने वाला है, पृथ्वी पर गिरा दिया गया, और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए।
फिर मैं ने स्‍वर्ग पर से यह बड़ा शब्‍द आते हुए सुना, कि अब हमारे परमेश्वर का उद्धार, और सामर्थ, और राज्य, और उसके मसीह का अधिकार प्रगट हुआ है, क्‍योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगाने वाला, जो रात दिन हमारे परमेश्वर के साम्हने उन पर दोष लगाया करता था, गिरा दिया गया।
और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्‍त हुए, और उन्‍होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली।
इस कारण, हे स्‍वर्गों, और उन में के रहने वालों मगन हो; हे पृथ्वी, और समुद्र, तुम पर हाय! क्‍योंकि शैतान बड़े क्रोध के साथ तुम्हारे पास उतर आया है, क्‍योंकि जानता है, कि उसका थोड़ा ही समय और बाकी है।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह १५-१७
  • २ तिमुथियुस २

Wednesday, October 27, 2010

अद्भुत सृष्टि का अद्भुत परमेश्वर

जमैका, वेस्ट इंडीज़ का एक अचरज भरा खाड़ी स्थल है "Luminous Lagoon" - यह जमैका के उत्तरी तट पर स्थित, दिन में साधारण सा दिखने वाला समुद्र का मुहाना है, जो रात आने पर विस्मित कर देने वाला बन जाता है। यदि आप यहां रात में आएं, तो पाएंगे कि समुद्र का जल अनगिनित ज्योतिर्मान जीवाश्मों से भरा पड़ा है, जो पानी के हिलने पर चमकने लगते हैं। यदि कोई मछली आपकी नाव के पास से निकले तो वह जुगुनु की तरहा चमकती दिखती है, नाव चलने से उसके पीछे पानी की चमकती हुई लकीर दिखाई देती है।

परमेश्वर की इस अद्भुत सृष्टि का नज़ारा देखने वाला अवाक और मंत्रमुग्ध सा रह जाता है; लेकिन परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि की कुल छटा का यह अंशमात्र ही है। इस अद्भुत सृष्टि के बारे में हम अय्युब ३७, ३८ में पढ़ते हैं, परमेश्वर वहां सृष्टि से संबंधित कुछ प्रश्न अय्युब से पूछता है - " क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है? - अय्युब ३७:१५" ; " उजियाले के निवास का मार्ग कहां है, और अन्धियारे का स्थान कहां है? - अय्युब ३८:१९"

परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि, चाहे वह चकाचौंध कर देने वाला बिजली का चमकना हो, या पानी में रौशनी बिखरते जीवाश्म हों, हमारे लिये बहुत रहस्यमय हैं, किंतु जैसा उसने अय्युब को स्मरण दिलाया, वे सब उसके हाथों की कलकृतियां हैं जो उसके ज्ञान, योग्यता और सामर्थ का एक छोटा सा नमूना हैं। इन विस्मित कर देने वाली बातों को देखकर हम अय्युब के समान इतना ही कह पाते हैं कि यह बातें मेरी समझ से बाहर हैं (अय्युब ४२:३)।

भजनकार कहता है "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है" (भजन १९:१-३); और पौलुस ने कहा "इसलिये कि परमश्‍ेवर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों १:१९, २०)।

इस अद्भुत सृष्टि का सृष्टिकर्ता अद्भुत परमेश्वर आज आपको अपनी बाहों में भर लेने के लिये आपकी ओर अपने हाथ फैलाये हुए है। क्या आप उसे निराश करेंगे? क्या आज आप उससे कहेंगे "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा कर और मुझे स्वीकार कर?" - डेव ब्रैनन


जब हम सृष्टि से विस्मित होना छोड़ देते हैं, तब सृष्टिकर्ता की उपासना करना भी छोड़ देते हैं।

परन्तु मैं तो ईश्वर ही को खोजता रहूंगा और अपना मुक़द्दमा परमेश्वर पर छोड़ दूंगा। वह तो एसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते। - अय्युब ५:८, ९


बाइबल पाठ: अय्युब ३७:१-१८

फिर इस बात पर भी मेरा ह्रृदय कांपता है, और अपने स्थान से उछल पड़ता है।
उसके बोलने का शब्द तो सुनो, और उस शब्द को जो उसके मुंह से निकलता है सुनो।
वह उसको सारे आकाश के तले, और अपनी बिजली को पृथ्वी की छोर तक भेजता है।
उसके पीछे गरजने का शब्द होता है, वह अपने प्रतापी शब्द से गरजता है, और जब उसका शब्द सुनाई देता है तब बिजली लगातार चमकने लगती है।
ईश्वर गरजकर अपना शब्द अद्भूत रीति से सुनाता है, और बड़े बड़े काम करता है जिनको हम नहीं समझते।
वह तो हिम से कहता है, पृथ्वी पर गिर, और इसी प्रकार मेंह को भी और मूसलाधार वर्षा को भी ऐसी ही आज्ञा देता है।
वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है, जिस से उसके बनाए हुए सब मनुष्य उसको पहचानें।
तब वनपशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं।
दक्खिन दिशा से बवणडर और उतरहिया से जाड़ा आता है।
ईश्वर की श्वास की फूंक से बरफ पड़ता है, तब जलाशयों का पाट जम जाता है।
फिर वह घटाओं को भाप से लादता, और अपनी बिजली से भरे हुए उजियाले का बादल दूर तक फैलाता है।
वे उसकी बुद्धि की युक्ति से इधर उधर फिराए जाते हैं, इसलिये कि जो आज्ञा वह उनको दे, उसी को वे बसाई हुई पृथ्वी के ऊपर पूरी करें।
चाहे ताड़ना देने के लिये, चाहे अपनी पृथ्वी की भलाई के लिये वा मनुष्यों पर करुणा करने के लिये वह उसे भेजे।
हे अय्यूब ! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर।
क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है?
क्या तू घटाओं का तौलना, वा सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है?
जब पृथ्वी पर दक्खिनी हवा ही के कारण से सन्नाटा रहता है तब तेरे वस्त्र गर्म हो जाते हैं;
फिर क्या तू उसके साथ आकाशमणडल को तान सकता है, जो ढाले हुए दर्पण के तुल्य दृढ़ है?

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह १२-१४
  • २ तिमुथियुस १

Tuesday, October 26, 2010

प्रभु के अनुरूप

एक इतवार प्रातः जब मैं चर्च में प्रवेश कर रहा था तो मुझे देखकर एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ से पूछा "माँ, क्या यही यीशु है?" यह कहने की आवश्यक्ता नहीं है कि मैं उस माँ के उत्तर को सुनने को उत्सुक्त था। माँ ने कहा, "नहीं, यह तो हमारे पास्टर हैं।" मैं जानता था कि वो ऐसा ही कुछ कहेगी, लेकिन मन में चाह थी कि वह इसके साथ कुछ इस तात्पर्य की पंक्तियां भी जोड़ दे कि " ...लेकिन उन्हें देखकर हमें यीशु स्मरण आता है।"

प्रभु यीशु के अनुरूप होना उनके जीवन का उद्देश्य है जो उसका अनुसरण करने को बुलाए गए हैं। वास्तव में, जैसा प्रचारक जौन स्टौट का कहना है, यह अनुरूपता हमारे जीवन के अतीत, वर्तमान और भविष्य का एकमात्र लक्ष्य है। रोमियों ८:२९ बताता है कि अतीत में "क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों", वर्तमान में "...हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं" (२ कुरिन्थियों ३:१८) और भविष्य में "इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्‍योंकि उस को वैसा ही देखेंगे जैसा वह है" (१ यूहन्ना ३:२)।

यीशु के अनुरूप होने का तात्पर्य कुछ नियमों का पालन करना, चर्च जाना, दशमांश देना आदि नहीं है। इसका तात्पर्य है उसकी क्षमा के एहसास को अपने जीवन में बनाए रखना, और दूसरों के प्रति सदा दयालुता और अनुग्रह का व्यवहार बनाए रखना। इसका तात्पर्य है ऐसा जीवन जीना जो यीशु के समान, हर एक जन को बहुमूल्य जानता हो और वैसे ही उनकी कद्र भी करता हो। इसका तात्पर्य है परमेश्वर पिता की आज्ञाकारिता को पूर्णरूप से समर्पित जीवन जीना। उद्धार पाए प्रत्येक जन के लिये यह अनुरूपता अनिवार्य है।

यीशु के समान बनिये, आप को मिले उद्धार का यही उद्देश्य है। - जो स्टोवैल


ऐसे जीओ कि लोग आप में यीशु को देख सकें।

क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। - रोमियों ८:२९


बाइबल पाठ: रोमियों ८:२६-२९

इसी रीति से आत्मा भी हमारी र्दुबलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्‍तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्‍या है क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है।
और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ९-११
  • १ तिमुथियुस ६

Monday, October 25, 2010

एक लेखक, मिच अल्बौम, को विचार आया कि यदि कुछ ऐसे व्यक्ति, जिनके पार्थिव जीवन पर आपने इस पृथ्वी पर कोई प्रभाव डाला हो, वे आपसे स्वर्ग में मिलें, और स्वर्ग में आपके पार्थिव जीवन की व्याख्या करें, तो स्वर्ग आपके लिये कैसा स्थान होगा? इस विचार के आधार पर करी गई अपनी कल्पना को उसने पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक है "The Five People You Meet in Heaven"।

मिच अल्बौम की यह पुस्तक इस बात पर अवश्य अन्तःदृष्टि देती है कि जाने-अन्जाने हम कैसे दूसरों के जीवन को कैसे प्रभावित करते रहते हैं, परन्तु एक मसीही विश्वासी के लिये स्वर्ग में अनन्त आनन्द का आधार किसी अन्य व्यक्ति की राय नहीं है। उसके इस अनन्त आनन्द का आधार है प्रभु यीशु मसीह से उसका संबंध। स्वर्ग एक वास्तविक स्थान है, जहां प्रभु यीशु अपने लोगों के लिये तैयारी कर रहा है (यूहन्ना १४:२, ३) और वहां हम प्रभु यीशु से मिल कर सदा आनंदित रहेंगे।

परन्तु प्रभु यीशु से यह स्वर्गीय मुलाकात पृथ्वी पर व्यतीत किये गये हमारे जीवन में प्रभु के प्रति हमारे उतरदायित्व को निभाने का लेखा-जोखा लिये जाने का भी समय होगा। प्रभु द्वारा बुद्धिमानी और न्याय से किया गया हमारे पार्थिव जीवन का मूल्यांकन प्रगट करेगा कि हम उसके प्रति कितने आज्ञाकारी रहे और हमने उससे कैसा प्रेम किया; और स्वर्ग में मिलने वाले हमारे कर्मों के प्रतिफल भी निर्धारित करेगा "क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए" (२ कुरिन्थियों ५:१०)।

हम यह तो नहीं जानते कि स्वर्ग में सबसे पहले हम किन पाँच लोगों से मिलेंगे, लेकिन यह अवश्य जानते हैं कि सर्वप्रथम हम किससे मिलेंगे - प्रभु यीशु से। क्या आप उससे मिलने और उसके