ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

अद्भुत सृष्टि का अद्भुत परमेश्वर

जमैका, वेस्ट इंडीज़ का एक अचरज भरा खाड़ी स्थल है "Luminous Lagoon" - यह जमैका के उत्तरी तट पर स्थित, दिन में साधारण सा दिखने वाला समुद्र का मुहाना है, जो रात आने पर विस्मित कर देने वाला बन जाता है। यदि आप यहां रात में आएं, तो पाएंगे कि समुद्र का जल अनगिनित ज्योतिर्मान जीवाश्मों से भरा पड़ा है, जो पानी के हिलने पर चमकने लगते हैं। यदि कोई मछली आपकी नाव के पास से निकले तो वह जुगुनु की तरहा चमकती दिखती है, नाव चलने से उसके पीछे पानी की चमकती हुई लकीर दिखाई देती है।

परमेश्वर की इस अद्भुत सृष्टि का नज़ारा देखने वाला अवाक और मंत्रमुग्ध सा रह जाता है; लेकिन परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि की कुल छटा का यह अंशमात्र ही है। इस अद्भुत सृष्टि के बारे में हम अय्युब ३७, ३८ में पढ़ते हैं, परमेश्वर वहां सृष्टि से संबंधित कुछ प्रश्न अय्युब से पूछता है - " क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है? - अय्युब ३७:१५" ; " उजियाले के निवास का मार्ग कहां है, और अन्धियारे का स्थान कहां है? - अय्युब ३८:१९"

परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि, चाहे वह चकाचौंध कर देने वाला बिजली का चमकना हो, या पानी में रौशनी बिखरते जीवाश्म हों, हमारे लिये बहुत रहस्यमय हैं, किंतु जैसा उसने अय्युब को स्मरण दिलाया, वे सब उसके हाथों की कलकृतियां हैं जो उसके ज्ञान, योग्यता और सामर्थ का एक छोटा सा नमूना हैं। इन विस्मित कर देने वाली बातों को देखकर हम अय्युब के समान इतना ही कह पाते हैं कि यह बातें मेरी समझ से बाहर हैं (अय्युब ४२:३)।

भजनकार कहता है "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है" (भजन १९:१-३); और पौलुस ने कहा "इसलिये कि परमश्‍ेवर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों १:१९, २०)।

इस अद्भुत सृष्टि का सृष्टिकर्ता अद्भुत परमेश्वर आज आपको अपनी बाहों में भर लेने के लिये आपकी ओर अपने हाथ फैलाये हुए है। क्या आप उसे निराश करेंगे? क्या आज आप उससे कहेंगे "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा कर और मुझे स्वीकार कर?" - डेव ब्रैनन


जब हम सृष्टि से विस्मित होना छोड़ देते हैं, तब सृष्टिकर्ता की उपासना करना भी छोड़ देते हैं।

परन्तु मैं तो ईश्वर ही को खोजता रहूंगा और अपना मुक़द्दमा परमेश्वर पर छोड़ दूंगा। वह तो एसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते। - अय्युब ५:८, ९


बाइबल पाठ: अय्युब ३७:१-१८

फिर इस बात पर भी मेरा ह्रृदय कांपता है, और अपने स्थान से उछल पड़ता है।
उसके बोलने का शब्द तो सुनो, और उस शब्द को जो उसके मुंह से निकलता है सुनो।
वह उसको सारे आकाश के तले, और अपनी बिजली को पृथ्वी की छोर तक भेजता है।
उसके पीछे गरजने का शब्द होता है, वह अपने प्रतापी शब्द से गरजता है, और जब उसका शब्द सुनाई देता है तब बिजली लगातार चमकने लगती है।
ईश्वर गरजकर अपना शब्द अद्भूत रीति से सुनाता है, और बड़े बड़े काम करता है जिनको हम नहीं समझते।
वह तो हिम से कहता है, पृथ्वी पर गिर, और इसी प्रकार मेंह को भी और मूसलाधार वर्षा को भी ऐसी ही आज्ञा देता है।
वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है, जिस से उसके बनाए हुए सब मनुष्य उसको पहचानें।
तब वनपशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं।
दक्खिन दिशा से बवणडर और उतरहिया से जाड़ा आता है।
ईश्वर की श्वास की फूंक से बरफ पड़ता है, तब जलाशयों का पाट जम जाता है।
फिर वह घटाओं को भाप से लादता, और अपनी बिजली से भरे हुए उजियाले का बादल दूर तक फैलाता है।
वे उसकी बुद्धि की युक्ति से इधर उधर फिराए जाते हैं, इसलिये कि जो आज्ञा वह उनको दे, उसी को वे बसाई हुई पृथ्वी के ऊपर पूरी करें।
चाहे ताड़ना देने के लिये, चाहे अपनी पृथ्वी की भलाई के लिये वा मनुष्यों पर करुणा करने के लिये वह उसे भेजे।
हे अय्यूब ! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर।
क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है?
क्या तू घटाओं का तौलना, वा सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है?
जब पृथ्वी पर दक्खिनी हवा ही के कारण से सन्नाटा रहता है तब तेरे वस्त्र गर्म हो जाते हैं;
फिर क्या तू उसके साथ आकाशमणडल को तान सकता है, जो ढाले हुए दर्पण के तुल्य दृढ़ है?

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह १२-१४
  • २ तिमुथियुस १

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें