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Monday, July 19, 2010

सामर्थ और विनाश

जौर्ज मैकडोनल्ड की परी कथा ’लिलिथ’ में विशालकाय दानव साधरण मनुष्यों के बीच में रहते हैं। इन दानवों को अपने दैनिक कार्यों को बड़ी सावधानी से करना होता है, नहीं तो वे बहुत नुकसान कर बैठेंगे। उनके खर्राटों का शोर बहुत परेशान करने वाला है, जब वे करवट बदलते हैं तो उनके नीचे दब कर घर टूट सकते हैं।

बाइबल में उज़्ज़ियाह १६ वर्ष की आयु में राजा बनने के बाद बहुत शक्तिशाली हो गया। २ इतिहास २६ उसकी इस सफलता के कारण में दिये गये हैं। उसका पिता अमाज़ियाह उसके लिये एक अच्छा आदर्श बना (पद ४)। ज़करियाह भविष्यद्वक्ता उसका शिक्षक था (पद ५)। उसके पास कुशल योद्धाओं और योग्य सेनापतियों की सेना थी (पद ११-१५)। और परमेश्वर ने उसे बढ़ाया (पद ५)।

स्पष्ट है कि राजा उज़्ज़ियाह परमेश्वर के अनुग्रह से ’विशालकाय’ हो गया। किंतु उन्नति के शिखर पर पहुंच कर वह लापरवाह हो गया और उसने बुरी तरह से ठोकर खाई। उसके पतन की कुंजी १५वें पद के इस भाग में मिलती है - "क्योंकि उसे अदभुत यहायता यहां तक मिली कि वह सामर्थी हो गया"- इस वाक्य के अन्तिम चार शब्द हम सब के लिये गंभीर चेतावनी हैं। अगला पद (पद १६), बताता है कि "परन्तु जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उस ने बिगड़कर अपने परमेश्वर यहोवा का विश्वासघात किया...।"उसने घमंड में आकर पुरोहितों का कार्य भी अपने हाथ में ले लिया और उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि वह कोढ़ी हो गया और महल से बाहर निकाल दिया गया (पद १६-२१)।

हम सब को अद्भुत रीति से सहायता मिली है - परमेश्वर से, उन लोगों से जिन्हें परमेश्वर ने हमारे लिये आदर्श बनाकर रखा है और उन से जो हमारे साथ सेवा करते हैं। जब हम सामर्थी हो जाएं तो सचेत रहें कि कहीं ठोकर न खा जाएं। - अल्बर्ट ली


मैंने ऐसा कोई और मनुष्य नहीं पाया जिसने मेरा इतना नुकसान किया हो जितना मैंने स्वयं अपना किया है - डी. एल. मूडी


बाइबल पाठ: २ इतिहास २६:३-१५
जब उज्जिय्याह राज्य करने लगा, तब वह सोलह वर्ष का था। और यरूशलेम में बावन वर्ष तक राज्य करता रहा, और उसकी माता का नाम यकील्याह था, जो यरूशलेम की थी।
जैसे उसका पिता अमाज़ियाह, किया करता या वैसा ही उसने भी किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था।
और जकर्याह के दिनों में जो परमेश्वर के दर्शन के विषय समझ रखता था, वह परमेश्वर की खोज में लगा रहता था; और जब तक वह यहोवा की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्वर उसको भाग्यवान किए रहा।
तब उस ने जाकर पलिश्तियों से युद्ध किया, और गत, यब्ने और अशदोद की शहरपनाहें गिरा दीं, और अशदोद के आसपास और पलिश्तियों के बीच में नगर बसाए।
और परमेश्वर ने पलिश्तियों और गूर्बालवासी, अरबियों और मूनियों के विरुद्ध उसकी सहायता की।
और अम्मोनी उज्जिय्याह को भेंट देने लगे, वरन उसकी कीर्ति मिस्र के सिवाने तक भी फैल गई, क्योंकि वह अत्यन्त सामर्थी हो गया था।
फिर उज्जिय्याह ने यरूशलेम में कोने के फाटक और तराई के फाटक और शहरपनाह के मोड़ पर गुम्मट बनवाकर दृढ़ किए।
और उसके बहुत जानवर थे इसलिये उस ने जंगल में और नीचे के देश और चौरस देश में गुम्मट बनवाए और बहुत से हौद खुदवाए, और पहाड़ों पर और कर्म्मेल में उसके किसान और दाख की बारियों के माली थे, क्योंकि वह खेती किसानी करने वाला था।
फिर उज्जिय्याह के योद्धाओं की एक सेना थी जिनकी गिनती यीएल मुंशी और मासेयाह सरदार, हनन्याह नामक राजा के एक हाकिम की आज्ञा से करते थे, और उसके अनुसार वह दल बान्धकर लड़ने को जाती थी।
पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुष जो शूरवीर थे, उनकी पूरी गिनती दो हजार छ: सौ थी।
और उनके अधिकार में तीन लाख साढ़े सात हजार की एक बड़ी बड़ी सेना थी, जो शत्रुओं के विरुद्ध राजा की सहायता करने को बड़े बल से युद्ध करने वाले थे।
इनके लिये अर्थात पूरी सेना के लिये उज्जिय्याह ने ढालें, भाले, टोप, झिलम, धनुष और गोफन के पत्थर तैयार किए।
फिर उस ने यरूशलेम में गुम्मटों और कंगूरों पर रखने को चतुर पुरुषों के निकाले हुए यन्त्र भी बनवाए जिनके द्वारा तीर और बड़े बड़े पत्थर फेंके जाते थे। और उसकी कीर्ति दूर दूर तक फैल गई, क्योंकि उसे अदभुत सहायता यहां तक मिली कि वह सामर्थी हो गया।


एक साल में बाइबल:
  • भजन २३-२५
  • प्रेरितों के काम २१:१८-४०