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Wednesday, September 8, 2010

ढाढ़स देने के लिये ढाढ़स पाना

कुछ मसीही खिलाड़ियों से मैंने पूछा कि कठिनाईयों का सामना करते में उनकी स्वभाविक प्रतिक्रीया क्या होती है? उनके उत्तरों में भय, क्रोध, आत्मग्लानि, आक्रमण, निराशा, गाली-गलौज का व्यवहार, उदासीनता, परमेश्वर की ओर मुड़ना आदि प्रतिक्रीयाएं सम्मिलित थीं। मैं ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि हर कठिनाई में परमेश्वर उन्हें ढाढ़स देगा और फिर उन्हें दूसरों को ढाढ़स देने के लिये प्रयोग करेगा।

जैसे मैंने उन खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया, कुरिन्थुस शहर में पौलूस ने भी विश्वासियों को प्रोत्साहित किया। उसने उन्हें स्मरण दिलाया कि मसीह के विश्वासियों के लिये क्लेश अवश्यंभावी हैं। उनमें से कई, मसीह के साथ अपने संबंध के कारण, क्लेशों से निकल रहे थे; कोई ताड़ना सह रहा था, कोई निर्दयता और सताव में होकर निकल रहा था तो कोई बन्दीगृह में डाला गया था। पौलुस चाहता था कि वे यह बात जानें कि उनके क्लेशों में परमेश्वर उनके साथ था और उनका मददगार था, जिससे इन क्लेशों में उनका प्रत्युत्तर सांसारिक नहीं वरन ईश्वरीय स्वभाव के अनुसार हो। फिर पौलुस ने परमेश्वर द्वारा उन पर इन क्लेशों के आने की अनुमति और क्लेशों में ईश्वरीय शांति प्राप्त होने एक कारण उन्हें बताया - जिससे कुरिन्थुस के वे विश्वासी दूसरों के क्लेशों में उन से सहानुभूति रख सकें और उन क्लेशों में उन्हें ढाढ़स दे सकें। (२ कुरिन्थियों १:४)

जब हम क्लेशों से होकर निकलते हैं तो स्मरण रखें कि परमेश्वर अपने वचन, अपने आत्मा और हमारे सहविश्वासियों के द्वारा हमें ढाढ़स देगा, इसलिये नहीं कि हम आराम से रहें, वरन इसलिये कि जब हम परमेश्वर से ढाढ़स पाते हैं तो दूसरों को भी ढाढ़स देने वाले हों। - मार्विन विलियम्स


जब परमेश्वर प्रीक्षाएं आने देता है तब अपनी शांति भी देता है।

वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है, ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - २ कुरिन्थियों १:४

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:३-११

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है।
वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है, ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।
क्‍योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।
यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्‍हें हम भी सहते हैं।
और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है, क्‍योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों, के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।
हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा, और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।
और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन ३-५
  • २ कुरिन्थियों १