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Friday, September 24, 2010

संतोष

एक बुज़ुर्ग औरत की फोटो ने मेरे मन को जकड़ लिया और मुझे सोचने पर बाध्य कर दिया। मुस्कुराती हुई वह बुज़ुर्ग औरत कूड़े के एक ढेर पर बैठी थी और वहां से उठाया कुछ भोजन खा रही थी। उस औरत को प्रसन्न करने के लिये कितनी ज़रा सी और कैसी तुच्छ चीज़ भी काफी थी!

अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल और महंगाई की चर्चाएं बहुत आम बात हो गई है। बहुत से लोग अपने जीविका कमाने के बारे में चिंतित रहते हैं। क्या इन परिस्थितियों में यह संभव है कि हम मत्ती ६:२५ में अपने प्रभु यीशु द्वारा दी गई शिक्षा "मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे" पर ध्यान दें और विश्वास रखें?

हमारा प्रभु यह नहीं कह रहा था कि हमें कोई काम करने की आवश्यक्ता नहीं है, या हमें कुछ खाने की आवश्यक्ता नहीं है, या हम ने कैसे कपड़े पहने हैं इस के लिये सोचने की आवश्यक्ता नहीं है। वह जीवन में इन बातों के महत्व और आवश्यक्ता को भली भांति जानता था। वह जो सिखा रहा था वह था जीवन में इन बातों के प्रति सही दृष्टिकोण रखना। वह चेतावनी दे रहा था कि ये बातें हमारे लिये कभी इतनी बड़ी न बन जाएं कि इन की प्राप्ति के पीछे हम धन संपत्ति के ग़ुलाम बन जाएं और यीशु पर अपने विश्वास को छोड़ बैठें। उसने कहा "कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते" और "इसलिये पहिले तुम उस [परमेश्वर] के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी"(मत्ती ६:२४, ३३)।

पहले परमेश्वर के धर्म और राज्य की खोज करने का तातपर्य है कि हम इस बात को पहिचाने कि हम चाहे जितनी भी मेहनत अपने और अपने परिवार की समृद्धि के लिये कर लें, अन्ततः परमेश्वर ही है जो हमारी आवश्यक्ताओं को पूरा करता है; और क्योंकि हम स्वर्गीय परमेश्वर पिता की सन्तान हैं, तो हमारी आवश्यक्ताओं की चिंता करना उसका कार्य है और वह समय अनुसार हमें हमारी आवश्यक्ता कि हर वस्तु उपलब्ध कराता रहेगा। - सी. पी. हिया


यदि धन के ग़ुलाम बनने से बचना है तो उसे परमेश्वर द्वारा उपलब्ध कराया संसाधन बना कर प्रयोग करें।

कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते। - मत्ती ६:२४


बाइबल पाठ: मत्ती ६:२४-३४

कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते।
इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे? क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं, तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है। क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते?
तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा?
इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे?
क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिएं।