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Sunday, October 10, 2010

सत्य पर कायम रहना

अमेरिका में बीसवीं सदी के आरंभ में प्रचलित रंगभेद की पृष्ठभूमि पर लिखित उपन्यास "To Kill a Mockingbird" का एक पात्र, एटिकस फिन्च, १९३० के दशक में दक्षिण अमेरिका के एक छोटे शहर में एक प्रतिष्ठित वकील है। उसे एक मुकद्दमा लड़ना होता है जिसमें एक काले रंगे वाले इमान्दार और सीधे साधे व्यक्ति के विरुद्ध दो कुटिल और बेईमान गोरे खड़े होते हैं। एटिकस जानता है कि उसे पंचों से बहुत पक्षपात का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उसका विवेक उसे बाध्य करता है कि कठोर प्रतिरोध के बावजूद वह सत्य को निडरता से साथ प्रस्तुत करे और सत्य पर कायम रहे।

बाइबल के पुराने नियम में भी परमेश्वर ने ढीट और कठोर मन वाली अपनी प्रजा के पास अपने नबी भेजे ताकि वे उन्हें सत्य को बताएं "तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया" (२ इतिहास २४:१९)। सत्य के अपने सन्देश के कारण उन नबीओं को बहुत सताव का सामना करना पड़ा और कई मारे भी गए (इब्रानियों ११:३२-३८)।

प्रभु यीशु की पृथ्वी की सेवकाई के समय भी उसे सत्य पर कायम रहने और सत्य का प्रचार करने के कारण लोगों के क्रोध और बैर का सामना करना पड़ा "ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए। और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ या, उस की चोटी पर ले चले, कि उसे वहां से नीचे गिरा दें। पर वह उन के बीच में से निकलकर चला गया" (लूका ४:२८-३०)। परन्तु परमेश्वर ने अपनी सार्वभौमिकता में, संसार के हाकिमों द्वारा घोर अन्याय से सत्य पर कायम प्रभु यीशु को क्रूस की मृत्यु दिये जाने को ही समस्त संसार के लिये पापों से मुक्ति पाने और उद्धार का मार्ग बना दिया!

अब, इस संसार में, जीवित प्रभु के प्रतिनिधी होने के कारण उसके अनुयाइयों को यह ज़िम्मेवारी सौंपी गई है कि वे संसार को प्रभु के मार्ग का प्रचार करें तथा न्याय, ईमानदारी और आपसी मेल मिलाप को बढ़ावा दें (मती २८:१८-२०, मीका ६:८, २ कुरिन्थियों ५:१८-२१)। ऐसा करने के लिये उन्हें कई दफा कठोर प्रतिरोध के समक्ष सत्य पर कायम रहना पड़ेगा, और उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी (२ तिमुथियुस ३:१२)। सत्य पर कायम रहना और सत्य का प्रचार करना, प्रत्येक मसीही विश्वासी को दी गई ज़िम्मेवारी है, जिसे उन्हें तब तक निभाना है जब तक प्रभु दोबारा आकर सब कुछ ठीक ठाक न कर दे (प्रकाशितवाक्य २०:११-१५)। - डेनिस फिशर


सत्य को दबाकर या छुपाकर संसार में स्थान बनाने की जाने की बजाए, सत्य पर बने रहने के लिये संसार द्वारा तिरिस्कृत होना कहीं बेहतर है।

तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया। - २ इतिहास २४:१९


बाइबल पाठ: २ इतिहास २४:१५-२२

परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु होकर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था।
और दाऊदपुर में राजाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, क्योंकि उस ने इस्राएल में और परमेश्वर के और उसके भवन के विषय में भला किया था।
यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमों ने राजा के पास जाकर उसे दणडवत की, और राजा ने उनकी मानी।
तब वे अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का भवन छोड़कर अशेरों और मूरतों की उपासना करने लगे। सो उनके ऐसे दोषी होने के कारण परमेश्वर का क्रोध यहूदा और यरूशलेम पर भड़का।
तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया।
और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह में समा गया, और वह ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर लोगों से कहने लगा, परमेश्वर यों कहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं को क्यों टालते हो? ऐसा करके तुम भाग्यवान नहीं हो सकते, देखो, तुम ने तो यहोवा को त्याग दिया है, इस कारण उस ने भी तुम को त्याग दिया।
तब लोगों ने उस से द्रोह की गोष्ठी करके, राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उसको पत्थरवाह किया।
यों राजा योआश ने वह प्रीति भूलकर जो यहोयादा ने उस से की थी, उसके पुत्र को घात किया। और मरते समय उस ने कहा यहोवा इस पर दृष्टि करके इसका लेखा ले।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ३४-३६
  • कुलुस्सियों २