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Tuesday, November 9, 2010

परमेश्वर से संगति की सच्ची लालसा

पास्टर टोज़र (१८९७ - १९६३) ने मसीही धर्मशास्त्रियों की जीवनीओं और लेखों का ऐसा गहन अध्ययन किया कि वह उनके बारे में सहजता से लेख लिखने के योग्य हो गया। अपने इन अध्ययनों के आधार पर उसने कहा: "बीते समय के इन पवित्र स्त्री और पुरुषों के निकट आईये और आप उनके अन्दर लगी हुई परमेश्वर की संगति के प्रति लालसा की आग की गर्मी को महसूस कर पाएंगे। ये लोग परमेश्वर की निकटता के लिये रोते थे, प्रार्थनाएं करते थे, दिन और रात उसकी उपस्थिति में रहने के लिये अन्तर्द्वन्द में रहते थे। उनकी इस लालसा पूरती, उनकी उस प्रचण्ड खोज के कारण, उसकी संगति के एहसास को और भी मधुर बना देती थी।"

भजन ४२ का लेखक पास्टर टोज़र द्वारा कही गई प्रचण्ड लालसा जैसी भावना रखता था। अपनी परमेश्वर की निकटता में आने की तीव्र लालसा को लेखक प्यासे हिरन द्वारा पानी की खोज की समानता के रूपक से व्यक्त करता है: "जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?" (भजन ४२:१, २) उसकी यह लालसा इतनी तीव्र थी और उसका दुख इतना गहरा कि वह भोजन करने से अधिक आंसू पीता था (भजन ४२:३)। भजन के लेखक की लालसा की संतुष्टि, उसके परमेश्वर पर रखे गए भरोसे और उसकी उपस्थिति और सहायता के लिये करी गई उसकी आराधना में व्यक्त हुई (भजन ४२:५-८)।

परमेश्वर का वायदा है कि जो भी उसे सम्पूर्ण मन से खोजते हैं वह उन्हें कभी निराश नहीं करता "तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझ से प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा। तुम मुझे ढूंढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे" (यर्मियाह २९:१२, १३)। उसे केवल सच्चे मन से निकली सच्ची प्रार्थना चाहिये और वह उत्तर देगा, अन्य किसी चीज़ की उसे आवश्यक्ता नहीं है - न कोई धर्म, न कोई रीति-रिवाज़, न कोई अनुष्ठान, न कोई सांसारिक वस्तु की भेंट, न अपने शरीर को दुख देकर उसे रिझाने का प्रयत्न; केवल एक सच्ची पुकार, क्योंकि "टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।" (भजन ५१:१७)।

जिनकी लालसा की पूर्ति हो जाती है, उनकी तृप्ति भी हो जाती है: "यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा (यूहन्ना ६:३५, ३७)।

क्या आप में परमेश्वर की संगति की सच्ची लालसा है? क्या उस लालसा की पूर्ति के लिये आपने उस सच्चे परमेश्वर को सच्चे और टूटे मन से पुकारा है? उसे आपकी टूटे मन से निकली सच्ची प्रार्थना का इंतिज़ार है।


केवल यीशु, जो जीवते जल का स्त्रोत है, परमेश्वर के लिये प्यासी आत्मा को तृप्त कर सकता है।

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। - भजन ४२:१

बाइबल पाठ : भजन ४२

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।
जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?
मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह, क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।
तेरी जलधाराओं का शब्द सुन कर जल, जल को पुकारता है, तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख, क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ४६-४७
  • इब्रानियों ६