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Monday, November 22, 2010

पृथ्वी पर स्वर्ग?

सिंगापुर के एके भवन निर्माता ने अपनी नई गगनचुंबी भवन निर्माण योजना का विज्ञापन दिया: "पृथ्वी पर स्वर्ग अनुभव कीजिए।" शायद उसका तातपर्य था कि उसके बनाए नए मकान इतने आलिशान और ऐश्वर्यपूर्ण होंगे कि उनमें रहने वाले अलौकिक आनन्द की अनुभूति करेंगे।

सभोपदेशक का लेखक राजा सुलेमान असीम संपत्ति का मालिक था (सभोपदेशक १:१२)। उसने अपनी संपति और ऐश्वर्य द्वारा पृथ्वी पर स्वर्गीय आनन्द पाने के प्रयास में, जो संभव हुआ वह किया (सभोपदेशक २:१-१०), तौभी उसे संतुष्टि नहीं मिली। अन्ततः वह सांसारिक जीवन की मिथ्या से इतना निराश हुआ कि उसने अपने सारे प्रयसों और अनुभवों को एक ही शब्द में निचोड़ डाला - "व्यर्थ"। सभोपदेशक के दूसरे अध्याय में "व्यर्थ" शब्द का उपयोग उसने आठ बार किया। जब उसने पृथ्वी पर करी अपनी मेहनत और अपने कार्यों का विशेलेषण किया (सभोपदेशक २:११) तो उसने पाया कि उसमें, और किसी अन्य मनुष्य में कोई अन्तर नहीं है। इस एहसास ने कि जो कुछ वह जमा कर रहा है, उसके बाद किसी और को जाएगा, और न उसे पता है और न उसका कोई नियंत्रण है कि वह दूसरा उसके परिश्रम का उपयोग कैसे करेगा, उसके व्यर्थता के एहसास को और बढ़ा दिया। उसका निष्कर्ष यही था कि "मनुष्य के लिये खाने-पीने और परिश्र्म करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैं ने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।"(सभोपदेशक २:२४)

प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से सांसारिक वस्तुओं के संबंध में वायदा किया है: " इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे? क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।" (मत्ती ६:३१-३३)

पौलुस ने कहा "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।" (कुलुस्सियों ३:२२)

पृथ्वी पर स्वर्ग की खोज में न रहें - यह संभव नहीं है, चाहे जैसा और चाहे जितना प्रयास कर लें। सांसारिक वस्तुओं की अभिलाषा छोड़कर परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता की खोज करें, उसकी शांति से अपने मन को भर लें; और यथासमय प्रभु आपको स्वर्ग में भी स्थान देगा, जहां वह आपके लिये स्थान तैयार कर रहा है "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आ कर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।" (यूहन्ना १४:१-३) - सी. पी. हिया


जिन्होंने अपने मन स्वर्गीय वस्तुओं की ओर लगा रखे हैं वे पृथ्वी की वस्तुओं को गौण जानते हैं।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२२


बाइबल पाठ: सभोपदेशक २:१-२६

मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
मैं ने बड़े बड़े काम किए, मैं ने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिए, और उन में भांति भांति के फलदाई वृक्ष लगाए।
मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिए कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे।
मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए, और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उस ने कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था।
मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गाने वालियों को रखा, और बहुत सी कामिनिय