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Saturday, December 31, 2011

प्रेर्णादायक आशा

   महान उपदेशक F. B. Meyer ने एक दफा प्रसिद्ध सुसमाचार प्रचारक मूडी से प्रश्न किया, "आपके इतना सफल प्रचारक होने का रहस्य क्या है?" मूडी ने उत्तर दिया, "पिछले कई वर्षों से मैंने कभी कोई प्रचार नहीं किया अथवा सन्देश नहीं दिया, जिसको देते वक्त मुझे यह एहसास न रहा हो कि प्रभु का आगमन कभी भी हो सकता है, मेरे यह सन्देश समाप्त करने से पहले भी।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल की सबसे अधिक प्रेर्णादायक शिक्षाओं में से एक है प्रभु यीशु के पृथ्वी पर पुनःआगमन की शिक्षा। जब परमेश्वर बाइबल के अपने दिव्य प्रकाशन के अन्त पर आए, तो उन्होंने इस विष्य की ओर ध्यान खींचा, स्वयं प्रभु यीशु के शब्दों में, "जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं" (प्रकाशितवाक्य २२:२०)।

   हमारे प्रभु के ये शब्द हमें स्मरण दिलाते हैं कि हमें अपने साथ ले जाने के लिए वह आने वाला है। जब परमेश्वर इस आशवासन पर इतना ज़ोर दे कर अपने वचन के प्रकाशन का अन्त करता है, तो हमें उस के इस वायदे की आशा को सदा अपने मन में बनाए रखना चाहिए। इस लालसा से कि हम अपने उद्धारकर्ता को देखेंगे, उस के समान हो जाएंगे और उस के साथ अनन्त काल तक रहेंगे, हमें प्रेर्णा मिलनी चाहिए कि हम अपने प्रभु की सेवाकाई में तत्पर और कार्यरत रहें जैसे मूडी रहते थे।

   इस पापमय संसार में हमारे लिए यह बहुत सरल होता है कि अपने आस-पास की परिस्थितियों और संसार की घटनाओं से निराश हो कर हम अपनी स्वर्गीय दृष्टी को कमज़ोर हो जाने दें और अपनी इस आशा पर से ध्यान हटा लें। किंतु हर परिस्थिति में, मसीह के दूसरे आगमन और उससे मिलन की आशा निरंतर प्रत्येक मसीही विश्वासी के मन में जलती रहनी चाहिए। प्रेरित पौलुस ने भी इस संबंध में लिखा, "पर हमारा स्‍वदेश स्‍वर्ग पर है; और हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने की बाट जोह रहे हैं। वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदल कर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा" (फिलिप्पियों ३:२०, २१)।

   उसके वचन के अन्त में लिखे गए प्रभु यीशु मसीह के ये शब्द, "हां मैं शीघ्र आने वाला हूं" हमें हर परिस्थिति में अपने विश्वास की आशा को बनाए रखने और अपने विश्वास के अनुरूप जीवन व्यतीत करने में प्रेर्णादायक हैं। - पौल वैन गोर्डर


हमारी महिमा की आशा हमें पवित्रता की आवश्यक्ता का स्मरण दिलाती रहती है।

जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं। - प्रकाशितवाक्य २२:२०
 
बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २२:१२-२१
Rev 22:12  देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है।
Rev 22:13  मैं अलफा और ओमिगा, पहिला और पिछला, आदि और अन्‍त हूं।
Rev 22:14  धन्य वे हैं, जो अपने वस्‍त्र धो लेते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से हो कर नगर में प्रवेश करेंगे।
Rev 22:15  पर कुत्ते, और टोन्‍हें, और व्यभिचारी, और हत्यारे और मूतिर्पूजक, और हर एक झूठ का चाहने वाला, और गढ़ने वाला बाहर रहेगा।
Rev 22:16  मुझ यीशु ने अपने स्‍वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि तुम्हारे आगे कलीसियाओं के विषय में इन बातों की गवाही दे: मैं दाऊद का मूल, और वंश, और भोर का चमकता हुआ तारा हूं।
Rev 22:17  और आत्मा, और दुल्हिन दोनों कहती हैं, आ; और सुनने वाला भी कहे, कि आ; और जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।
Rev 22:18  मैं हर एक को जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा।
Rev 22:19  और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा।
Rev 22:20  जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ।
Rev 22:21  प्रभु यीशु का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 
  • प्रकाशितवाक्य २२

Friday, December 30, 2011

उलटी गिनती

   सन १९८१ के उस रविवार के दिन करोड़ों अमेरिकी उस अंतरिक्ष वायुयान कोलंबिया की अंतरिक्ष यात्रा आरंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे थे; उन की आशाएं उस की सफल उड़ान पर टिकी थीं। फ्लौरिडा के कैनिडी अंत्रिक्ष केंद्र में ८०,००० से अधिक लोग जमा हो गए थे कि राष्ट्र के प्रथम अंतरिक्ष वायुयान की उड़ान को देख सकें; हज़ारों लोग वहाँ के आस-पास की सड़कों के किनारे खड़े उस उड़ान के आरंभ को देखने की प्रतीक्षा में थे। अनगिनित लोग टेलिविज़न पर इस दृश्य को देख रहे थे। जब उड़ान की उलटी गिनती अपने अंतिम १० सेकेंड पर पहुँची तो सारा राष्ट्र एक साथ वह गिनती बोलने लगा। और फिर देखते ही देखते वह विशाल उड़ान यान सीधा ऊपर उठना आरंभ हो गया। उस से निकली नारंगी लपटों और भाप तथा धुएं ने उड़ान स्थल को घेर लिया, तेज़ गर्जन की आवाज़ और भारी कंपन वातावरण पर छा गए; वह सब कुछ अविस्मरणीय था। लंबे समय से इस उड़ान की प्रतीक्षा थी क्योंकि अंतरिक्ष खोज का भविष्य इसकी सफलता पर निर्भर था।

   यह घटना जितनी भी आश्चर्यजनक तथा आशावान क्यों ना रही हो, किंतु एक और घटना के सामने यह कुछ भी नहीं - प्रभु यीशु का पृथ्वी पर पुनःआगमन। जब वह बादलों पर अपनी सामर्थ और महिमा में आएगा तो संसार की अन्य हर बात नगण्य और हर आशा खोखली तथा मूर्खतापूर्ण लगेगी। प्रभु यीशु का यह पुनःआगमन संसार में शांति और आनन्द के ऐसे युग का आरंभ होगा जैसा न कभी कहीं था, ना अभी कहीं है और न ही जिसकी कलपना कभी कोई कर पाया है।

   बाहर अंतरिक्ष में जो मनुष्य ने भेजा था उसका तेज और महिमा उस तेज और महिमा के सामने कुछ भी नहीं जो स्वर्ग से आने वाला प्रभु की उस के आगमन के समय होगी। प्रभु यीशु ने अपने पुनःआगमन से पहले घटने वाले चिन्ह और संसार के हाल बताए थे (लूका २१; मत्ती २४)। आज उसका बताया गया वह सभी हाल और सब चिन्ह पूरे हो रहे हैं। उसके पुनःआगमन की उलटी गिनती आरंभ हो चुकी है; वह अब कभी भी पहुंच सकता है। धन्य हैं वे जो उस के आगमन के लिए तैयार हैं, उस के इंतिज़ार में हैं। - मार्ट डी हॉन

 
प्रभु यीशु का पुनःआगमन अवश्यंभावी है, क्योंकि जो बाइबल कहती है और मसीह प्रतिज्ञा करता है परमेश्वर उसे अवश्य ही पूरा भी करता है।

तब वे मनुष्य के पुत्र को सामर्य और बड़ी महिमा के साय बादल पर आते देखेंगे। - लूका २१:२७

बाइबल पाठ: लूका २१:२५-३६
Luk 21:25  और सूरज और चान्‍द और तारों में चिन्‍ह दिखाई देंगें, और पृथ्वी पर, देश देश के लोगों को संकट होगा; क्‍योंकि वे समुद्र के गरजने और लहरों के कोलाहल से घबरा जाएंगे।
Luk 21:26  और भय के कारण और संसार पर आने वाली घटनाओं की बाट देखते देखते लोगों के जी में जी न रहेगा क्‍योंकि आकाश की शक्तियां हिलाई जाएंगी।
Luk 21:27  तब वे मनुष्य के पुत्र को सामर्थ और बड़ी महिमा के साथ बादल पर आते देखेंगे।
Luk 21:28  जब ये बातें होने लगें, तो सीधे हो कर अपने सिर ऊपर उठाना; क्‍योंकि तुम्हारा छुटकारा निकट होगा।
Luk 21:29  उस ने उन से एक दृष्‍टान्‍त भी कहा कि अंजीर के पेड़ और सब पेड़ों को देखो।
Luk 21:30  ज्योंहि उन की कोंपलें निकलती हैं, तो तुम देख कर आप ही जान लेते हो, कि ग्रीष्मकाल निकट है।
Luk 21:31  इसी रीति से जब तुम ये बातें होते देखो, तब जान लो कि परमेश्वर का राज्य निकट है।
Luk 21:32  मैं तुम से सच कहता हूं, कि जब तक ये सब बातें न हो लें, तब तक इस पीढ़ी का कदापि अन्‍त न होगा।
Luk 21:33  आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।
Luk 21:34  इसलिये सावधान रहो, ऐसा न हो कि तुम्हारे मन खुमार और मतवालेपन, और इस जीवन की चिन्‍ताओं से सुस्‍त हो जाएं, और वह दिन तुम पर फन्‍दे की नाईं अचानक आ पड़े।
Luk 21:35  क्‍योंकि वह सारी पृथ्वी के सब रहने वालों पर इसी प्रकार आ पड़ेगा।
Luk 21:36  इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह १३-१४
  • प्रकाशितवाक्य २१

Thursday, December 29, 2011

आशा में आनन्दित

   अपनी पुस्तक Dare to Believe में डैन बौमैन अपने जीवन का एक रोचक अनुभव बताते हैं जो इस बात को समझने में सहायता करता है कि जिस वस्तु के लिए हम जानते हैं कि वह हमारी है, उसे प्राप्त करने और उसका और भी भरपूरी से आनन्द लेने की लालसा कैसी होती है। उन्होंने लिखा कि हर वर्ष क्रिसमस के समय वह क्रिसमस के दिन मिलने वाली भेंटों के बारे में जानने के लिए अपने घर में बहुत ताक-झांक किया करते थे। एक वर्ष उन्हें अपने नाम का लेबल लगी एक बन्धी हुई भेंट दिखाई दी, क्योंकि उनकी माँ उसे भली-भाँति लपेट कर छिपा नहीं सकी थीं, इसलिए डैन ने उस भेंट को टटोल कर पहचान लिया कि वह क्या थी - गोल्फ खेलने के बल्ले। डैन ने लिखा: "जब माँ घर पर नहीं होतीं तो मैं जा कर उस पैकिट को टटोलता, हिलाता और मुद्राएं बनाता जैसे मैं गोल्फ खेलने के मैदान पर हूं और गोल्फ खेल रहा हूँ। जो बात मैं कहना चाह रहा हूँ वह यह है कि उस पैकिट पर मेरा नाम लिखा था, वह मेरे लिये था, मैं यह भी जानता था कि उस में क्या है, किंतु क्रिसमस के दिन तक उस पैकिट के मुझे दिये जाने और खोले जाने का इंतज़ार था जब अपनी परिपूर्णता में वह मेरा हो जाता; किंतु भविष्य में होने वाली बात के रोमाँच और आनन्द को मैं अभी से अनुभव करने लगा था और उसकी परिपूर्णता में उसे पाने की मेरी लालसा और बढ़ गई थी।"

   ऐसा ही मसीही विश्वासियों के साथ है, जब वे उस अद्भुत अवर्णननीय आनन्द की प्रतीक्षा में है जो परमेश्वर ने स्वर्ग में उन के लिए तैयार कर रखा है, "परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुनी, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं" (१ कुरिन्थियों २:९)। डैन बौमैन ने आगे लिखा, "तब हम महिमामय हो जाएंगे, लेकिन उस महिमा का स्वाद हम अभी से चख रहे हैं....विश्वासी जीवन की यह विशेषता उसी क्षण से आरंभ हो जाती है जिस क्षण कोई व्यक्ति मसीह यीशु में विश्वासा लाता है और मसीह के जीवन का संभागी हो जाता है। आज और अभी मसीही विश्वासी के पास अनन्त जीवन है, लेकिन अभी का यह आनन्द उस जीवन की आने वाली परिपूर्णता का थोड़ा सा पूर्व-अनुभव मात्र ही है। अभी के अनुभव तो केवल हमारी भूख को जगाने और बढ़ाने के लिए हैं, हमारे लिए मुख्य भोजन तो परमेश्वर द्वारा बाद में परोसा जाएगा।"

   मसीही विश्वासियों के पास वर्तमान में ही आशा में आनन्दित रहने का भरपूर कारण है। - रिचर्ड डी हॉन

हमारे भविष्य की आशा हमें वर्तमान का आनन्द प्रदान करती है।

जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें। रोमियों ५:१, २

बाइबल पाठ: रोमियों ५:१-११
Rom 5:1   जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Rom 5:2  जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें।
Rom 5:3  केवल यही नहीं, वरन हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जान कर कि क्‍लेश से धीरज।
Rom 5:4  ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्न होती है।
Rom 5:5  और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
Rom 5:6  क्‍योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Rom 5:7  किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्‍तु क्‍या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Rom 5:8  परन्‍तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Rom 5:9  सो जब कि हम, अब उस के लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उस के द्वारा क्रोध से क्‍यों न बचेंगे?
Rom 5:10  क्‍योंकि बैरी होने की दशा में तो उस के पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उस के जीवन के कारण हम उद्धार क्‍यों न पाएंगे?
Rom 5:11  और केवल यही नहीं, परन्‍तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्‍ड भी करते हैं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह ९-१२ 
  • प्रकाशितवाक्य २०

Wednesday, December 28, 2011

वर्तमान की आशा

   हमारे आस-पास और संसार में घटने वाली प्रतिदिन की घटनाएं हमें निराशा की ओर धकेलेती हैं: जवान और मेहनती किसान अपनी फसल के बुरे हाल और अपने कर्ज़ को चुका ना पाने से परेशान है और आत्म हत्या को विकल्प के रूप में देखता है; यातायात दुर्घटनाओं से प्रभावित और बिखरे परिवार के बचे सदस्य विस्मित हैं कि सरकार या प्रशासनिक अधिकारी इन्हें क्यों रोक नहीं पाते तथा आधुनिक विज्ञान तथा टेकनॉलौजी इनका समाधान दे पाने में क्यों असक्षम हैं; एक सुशिक्षित किंतु बेरोज़गार युवक उपयुक्त रोज़गार जुटा पाने में असमर्थ है और छोटी-मोटी नौकरी या मेहनत-मज़दूरी कर के ही अपना गुज़र-बसर कर रहा है; आए दिन होने वाले लूट-पाट और खून-खराबे तथा छोटी-छोटी बातों पर होने वाले बड़े-बड़े झगड़े; धर्म और जाति के आधार पर टूटता बँटता लड़ता समाज; ये सब आम आदमी के दिल में निराशा और भविष्य के लिए दहशत भरता रहता है। समाज की दशा और जीवन पर लगे ये और ऐसे ही अनगिनित प्रश्नचिन्ह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या कोई नियंत्रण में है? क्या कहीं कोई आशा है? किंतु यही परिस्थितियाँ एक मसीही विश्वासी को इब्रानियों २:८, ९ की सच्चाई को स्मरण दिलाती हैं; वह सच्चाई जो उसे भविष्य के लिए भरोसा तथा वर्तमान के लिए शांति देती है।

   यह सर्वविदित है कि पृथ्वी पर जिस अधिकार को रखने के लिए परमेश्वर ने हम मनुष्यों को सृजा था (उत्पत्ति १:२६), हम वह अधिकार सही रीति से निभा नहीं पा रहे हैं; लेकिन इस खामी का आभास मसीही विश्वासी के लिए हताश और निराश होने का नहीं वरन परमेश्वर की ओर देखने और उसकी योजनाओं एवं उद्देश्यों को पहचानने का प्रेरक है, विश्वास से प्रभु यीशु की ओर देखने का कारण है। प्रभु यीशु पृथ्वी पर साधारण मनुष्य की तरह रहा और जीया, पाप पर जयवन्त रहा, समस्त मानव जाति के पापों की कीमत कलवरी के क्रूस पर चुकाई और मृत्यु की सामर्थ को तोड़ डाला। आज हम विश्वास रखते और जानते हैं कि प्रभु यीशु परमेश्वर के दाहिने बैठा है, और लगभग २००० वर्ष पूर्व उसके द्वारा कलवरी के क्रूस पर पूरा किए गए कार्य उस पर विश्वास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पापों से क्षमा और उद्धार देता है। स्वर्ग तथा पृथ्वी का सारा अधिकार प्रभु यीशु ही को दिया गया है, और वह अभी भी सब बातों पर नियंत्रण रखता है। वह निर्धारित समय पर पुनः आएगा, उस का राज्य स्थापित होगा और परमेश्वर की शांति बहाल हो जाएगी।

   इस संसार के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, प्रशसानिक, वैज्ञानिक और अन्य कोई भी अगुवे कैसे भी दावे क्यों ना करते रहें, भविश्य के कैसे भी सपने क्यों ना दिखाते रहें, किंतु संसार का इतिहास और परिस्थितियों पर ध्यान करने वालों को विदित है कि प्रभु यीशु का इन्कार करने और उस पर अविश्वास करने वाला यह संसार हर प्रकार की परेशानियों में पड़ा है और अविराल बद से बदतर हालात में लुढ़कता जा रहा है; संसार में हर जगह शांति का नहीं हर प्रकार की अशांति और अराजकता का राज्य है। किंतु अद्भुत बात यह है कि अपने चारों ओर की इन अनियंत्रित और लगातार बिगड़ती परिस्थितियों में भी मसीह यीशु के विश्वासी अपने प्रभु की शांति को अनुभव करते हैं और उसमें आनन्दित होते हैं।

   आज हम विश्वास की आँखों से अपने प्रभु को देख सकते हैं, वह हमारे सुनहरे भविष्य का भरोसा और हमारे वर्तमान की आशा है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


आज चाहे बाहर कुछ भी स्पष्ट नहीं दिखता हो, किंतु हम ऊपर साफ-साफ देख सकते हैं।

तू ने सब कुछ उस के पांवों के नीचे कर दिया: इसलिये जब कि उस ने सब कुछ उस के आधीन कर दिया, तो उस ने कुछ भी रख न छोड़ा, जो उसके आधीन न हो : पर हम अब तक सब कुछ उस के आधीन नहीं देखते। पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिय्रे मृत्यु का स्‍वाद चखे। - इब्रानियों २:८, ९

बाइबल पाठ: इब्रानियों २:१-१५
Heb 2:1  इस कारण चाहिए, कि हम उन बातों पर जो हम ने सुनी हैं और भी मन लगाएं, ऐसा न हो कि बहक कर उन से दूर चले जाएं।
Heb 2:2  क्‍योंकि जो वचन स्‍वर्गदूतों के द्वारा कहा गया था जब वह स्थिर रहा ओर हर एक अपराध और आज्ञा न मानने का ठीक ठीक बदला मिला।
Heb 2:3  तो हम लोग ऐसे बड़े उद्धार से निश्‍चिन्‍त रह कर क्‍यों कर बच सकते हैं जिस की चर्चा पहिले पहिल प्रभु के द्वारा हुई, और सुनने वालों के द्वारा हमें निश्‍चय हुआ।
Heb 2:4  और साथ ही परमेश्वर भी अपनी इच्‍छा के अनुसार चिन्‍हों, और अद्भुत कामों, और नाना प्रकार के सामर्थ के कामों, और पवित्र आत्मा के वरदानों के बांटने के द्वारा इस की गवाही देता रहा।
Heb 2:5  उस ने उस आने वाले जगत को जिस की चर्चा हम कर रहे हैं, स्‍वर्गदूतों के आधीन न किया।
Heb 2:6  वरन किसी ने कहीं, यह गवाही दी है, कि मनुष्य क्‍या हैं, कि तू उस की सुधि लेता है या मनुष्य का पुत्र क्‍या है, कि तू उस पर दृष्‍टि करता है?
Heb 2:7  तू ने उसे स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया; तू ने उस पर महिमा और आदर का मुकुट रखा और उसे अपने हाथों के कामों पर अधिकार दिया।
Heb 2:8  तू ने सब कुछ उसके पांवों के नीचे कर दिया: इसलिये जब कि उस ने सब कुछ उसके आधीन कर दिया, तो उस ने कुछ भी रख न छोड़ा, जो उसके आधीन न हो : पर हम अब तक सब कुछ उसके आधीन नहीं देखते।
Heb 2:9  पर हम को यीशु जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्‍वाद चखे।
Heb 2:10  क्‍योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्‍छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।
Heb 2:11  क्‍योंकि पवित्र करने वाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्‍हें भाई कहने से नहीं लजाता।
Heb 2:12  पर कहता है, कि मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊंगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा।
Heb 2:13  और फिर यह, कि मैं उस पर भरोसा रखूंगा; और फिर यह कि देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्वर ने मुझे दिए।
Heb 2:14  इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया, ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे।
Heb 2:15  और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्‍हें छुड़ा ले।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह ५-८ 
  • प्रकाशितवाक्य १९

Tuesday, December 27, 2011

नियंत्रण

   सन १८५४ में रूसी कवि और राजनितिज्ञ ने उस समय के संसार की स्थिति के अपने भयावह आँकलन के बारे में अपनी पत्नि को एक पत्र में लिखा, "अब जो बात विसमित करती है - और इसके बारे में मेरा निश्चय दृढ़ होता जा रहा है तथा सामन्य लोगों को भी प्रतीत हो रहा है, कि उन सारे खतरों के विषय में जिनका हमें सामना करना पड़ता है, लोगों की विचारधारा ऐसी होती जा रही है जिसमें स्वयं उन्हें परिस्थिति की समझ नहीं रही है। यह ऐसा है मानो हम एक लगातार और भी अधिक ढलुआँ होती जा रही ढाल पर भागती हुई बघ्घी में बैठे हों और अचानक पता चले कि बघ्घी को नियंत्रित करने वाला कोचवान है ही नहीं।"

   ऐसा प्रतीत होत है कि यह संसार एक अनियंत्रित गाड़ी के समान है जो अन्धेरी रात में अपने विनाश की ओर बढ़ती जा रही है, और कोई उसे रोकने या नियंत्रित करने वाला नहीं है। संसार में हर जगह बढ़ते हुए आपसी मतभेद, जातीय तनाव, धर्म के नाम पर झगड़े-फसाद, नई और ला-इलाज बीमारियाँ, स्थान स्थान पर होने वाले युद्ध और अशांति यह सोचने को बाध्य करते हैं कि संसार नियंत्रण से बाहर हो कर विनाश की कगार पर डगमगा रहा है।

   परन्तु मसीही विश्वासी संसार की दशा के इस भयावह दृश्य को अलग परिपेक्ष में देख सकते हैं। हम मसीही विश्वासी जानते हैं कि यद्यपि शैतान को वर्तमान संसार का शासक कहा जाता है, तौ भी अन्तिम नियंत्रण परमेश्वर के हाथों में है। हमें परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह द्वारा दीए गए परमेश्वर के वायदे पर भरोसा है कि जो परमेश्वर ने कहा है वह पूरा हो कर रहेगा। परमेश्वर "अपनी इच्‍छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है" (इफीसियों १:११)। परमेश्वर की ओर से "यही युक्ति सारी पृथ्वी के लिये ठहराई गई है; और यह वही हाथ है जो सब जातियों पर बढ़ा हुआ है। क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने युक्ति की है और कौन उसको टाल सकता है? उसका हाथ बढ़ाया गया है, उसे कौन रोक सकता है? (यशायाह १४:२६, २७)"

   इस सारी विनाशकारी उथल-पुथल के बीच हम मसीही विश्वासी आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि नियंत्रण अटल परमेश्वर के स्थिर हाथों में है। - डेव एग्नर

पृथ्वी बदलती है परन्तु परमेश्वर और हमारी आत्मा स्थिर और शाश्वत रहते हैं।

मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्घा है और उसे सफल भी करूंगा। - यशायाह ४६:११

बाइबल पाठ: यशायाह ४६:५-१३
Isa 46:5  मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें?
Isa 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते वा कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदुरी दे कर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत्‌ भी करते हैं!
Isa 46:7  वे उसको कन्धे पर उठा कर लिए फिरते हैं, वे उसे उस के स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।
Isa 46:8  हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ।
Isa 46:9  प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।
Isa 46:10  मै तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।
Isa 46:11  मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरूष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्घा है और उसे सफल भी करूंगा।
Isa 46:12  हे कठोर मन वालों तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगा कर मेरी सुनो।
Isa 46:13  मैं अपनी धामिर्कता को समीप ले आने पर हूं वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूंगा और इस्राएल को महिमा दूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह १-४ 
  • प्रकाशितवाक्य १८

Monday, December 26, 2011

बंधन

   पक्षाघात के कारण जौं-डौमिनीक बौबी लगभग पूरी तरह से किसी भी तरह की कोई गतिविधि करने से विहीन हो गया था। उसकी जीवनी, The Diving Bell and the Butterfly, पक्षाघात के बाद के उसके जीवन का वर्णन करती है। लगभग पूरी तरह से लकवे के बन्धन में होने के बाद भी बौबी अपनी पुस्तक लिखवा सका, केवल अपनी बाईं आँख झपकने के द्वारा। एक सहायक, अक्षरों को उसके सामने दोहराता और जिस शब्द को बौबी लिखना चाहता था उसके अक्षर के लिए बौबी अपनी पलक बन्द करके उसका संकेत देता। इस प्रकार पुस्तक लिखने के लिए बौबी को लगभग २००,००० बार अपनी पलक झपकने की आवश्यक्ता पड़ी, लेकिन जो भी क्षमता उस के पास बची रह गई थी बौबी ने उसका प्रयोग दूसरों से संपर्क करने और अपनी बात कहने के लिए किया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के २ तिमुथियुस में प्रेरित पौलुस एक दूसरे प्रकार के बन्धन में जकड़ा हुआ था। अधिकारियों ने उसे घर में बन्दी बना दिया था, और उसे मालुम भी पड़ गया था कि अब उसका मारा जाना तय हो चुका है। इन परिस्थितियों में भी उसने तिमुथियुस को लिखा, "...मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं" (२ तिमुथियुस २:९)। अपने बन्धन और मौत के मंडराते साए में भी पौलुस आगन्तुकों का स्वागत करता था, औरों को प्रोत्साहन देने के लिए पत्र लिखता था और परमेश्वर के सुसमाचार के प्रचार के बारे में जान कर प्रसन्न होता था।

  संभव है कि परिस्थितियों ने हमें औरों से अलग कर दिया हो; हमारे बन्धन कुछ भी हो सकते हैं, जैसे - हम अस्पताल में बिस्तर पर हो सकते हैं; किसी कैद-खाने में हो सकते हैं; हम अपने समाज और लोगों द्वारा तिरिस्कृत हो सकते हैं; किंतु फिर भी हमें निश्क्रीय नहीं होना है। जो भी क्षमता और संसाधन हमारे पास बचे हैं, उनका प्रार्थना के साथ उपयोग हम हर परिस्थिति में अपने प्रभु की महिमा के लिए कर सकते हैं।

   बन्धन बाँध तो सकते हैं, निश्क्रीय नहीं कर सकते। - डेनिस फिशर


मसीह के लिए किया जाने वाला कोई भी कार्य कभी छोटा नहीं होता।
...मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं। - २ तिमुथियुस २:९

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१-११
2Ti 2:1  इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2Ti 2:2  और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी है, उन्‍हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।
2Ti 2:3  मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाई मेरे साथ दुख उठा।
2Ti 2:4  जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता;
2Ti 2:5  फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता।
2Ti 2:6  जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।
2Ti 2:7  जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।
2Ti 2:8  यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है।
2Ti 2:9  जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाई दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं।
2Ti 2:10  इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएं।
2Ti 2:11  यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी।
एक साल में बाइबल: 
  • हग्गै 
  • प्रकाशितवाक्य १७

Sunday, December 25, 2011

इम्मैनुएल

   लगभग २००० वर्ष पूर्व के उस प्रथम क्रिसमस दिन के साथ, परमेश्वर का अपने लोगों के साथ होने के आशवासन का एक नया अर्थ हो गया है। प्रभु यीशु के जन्म से पहले, इस्त्राएलियों को यह विश्वास था कि अन्तिम न्याय के समय उन्हें उम्मीद रहेगी क्योंकि परमेश्वर उनके साथ होगा (यशायाह ८:८, १०)। परन्तु फिर भी वे परमेश्वर को उस परिपूर्णता में नहीं जानते थे, जैसे आज हम जान सकते हैं। पुराने नियम के समय के संतों की अपेक्षा आज हमें बेहतर अवस्था में हैं क्योंकि हम नए नियम के अध्ययन के द्वारा प्रभु यीशु में परमेश्वर की महिमा को देख सकते हैं (२ कुरिन्थियों ४:६)। हम परमेश्वर को जीवन के प्रत्येक परिस्थिति में अनुभव भी कर सकते हैं क्योंकि उसका पवित्र आत्मा आज हमारे साथ सदा विद्यमान रहता है।

   जब भी मुझे इस आशवासन की पुनःआवश्यक्ता होती है कि परमेश्वर मेरे साथ है, मैं प्रभु यीशु को अपने विचारों में ले आता हूँ, कि कैसे उसने छोटे बालकों को अपनी गोद में लेकर उन्हें आशीष दी (मत्ती १९:१३-१५)। फिर मैं उसके लहूलुहान चेहरे, मारी और कूटी गई देह और उसके क्रूस पर चढ़ाए जाने की ओर ध्यान करता हूँ; यह मुझे स्मरण दिलाता है कि मेरे पापों से क्षमा और उद्धार के लिए उसने क्या कुछ सह लिया। फिर अन्ततः मैं मनन करता हूँ उसके वायदे पर, "और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती २८:२०); और इन सब को स्मरण कर के मैं आत्मिक रीति से ताज़गी पाता हूँ।

   प्रभु यीशु के बैतलहम में जन्म के द्वारा परमेश्वर मानव रूप में संसार में आए। जो भी प्रभु यीशु पर विश्वास करता है वह अपनी प्रत्येक आवश्यक्ता के लिए नई सामर्थ पा सकता है; ऐसा क्यों? क्योंकि प्रभु यीशु के जन्म ने इम्मैनुएल शब्द अर्थात परमेश्वर हमारे साथ को नया और सार्थक बना दिया। - हर्ब वैण्डर लुग्ट