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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

तरबूज़ की गवाही

विलियम जैनिंग ब्रायन्स को यह जानकर अचंभा हुआ कि १ पौंड (आधा किलो से कुछ कम) वज़न पूरा करने के लिये तरबूज़ के लगभग ५००० बीज चाहिये होते हैं। उसने लिखा, "हाल ही में किसी ने तरबूज़ का एक छोटा बीज बो दिया। पानी और धूप के प्रभाव से, उस बीज ने अपना बाहरी छिलका उतार दिया और अपना काम करना आरंभ कर दिया। उसने अपने वज़न से २००,००० गुणा वज़न का सामान धरती और आकाश से जमा किया, उसे पतले से तने और डालियों में प्रवाहित किया और फिर उस बेल की डालियों में नये तरबूज़ बना दिये। हर तरबूज़ का हरे रंग का सख्त बाहरी खोल था, उसके अन्दर सफेद रंग की मोटी और कुछ कम सख्त रक्षा देने वाली परन्तु स्वाद में फीकी परत थी और फिर उसके अन्दर लाल रंग का नरम, मीठे रस से भरा गूदा था जिसमें ढेर सारे बीज जगह जगह रखे हुए थे, और हर बीज इसी प्रक्रिया को दोहराने की क्षमता रखता था। किस योजनाकार ने यह सब सिसिलेवार इतनी निपुणता से करने की योजना बनाई? उस छोटे से बीज में इतनी सामर्थ कैसे आई? उसे कैसे पता चला कि भिन्न रंग, सखती और स्वाद देने के लिये किस चीज़ को कितनी मात्रा में, कहां से लेकर, कब और कैसे औरों के साथ मिश्र्ति करना है कि हर तरबूज़ में यही नतीजा निकले, तथा हर तरबूज़ लगभग एक सी आकृति और आकार का ही हो?"

ब्रायन्स ने कहा कि यदि हम एक तरबूज़ की रचना को नहीं समझ और समझा पाते तो हम परमेश्वर को और उसकी असीम सामर्थ और कार्यविधी को कैसे समझ पाएंगे! इस तरह के अनेक और अद्भुत उदाहरण सृष्टि के प्रत्येक पहलू में रखकर परमेश्वर ने अपनी असीम सामर्थ और ज्ञान का उदाहरण दिया है जिसे हम अपने सीमित बुद्धि से कभी समझ नहीं सकते।

एक तरबूज़ की रचना में विदित परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि हमें अचंभित कर सकती है। उसके अवर्णनीय आश्चर्यकर्मों को देखकर हम भजनकार के साथ नम्रता और विस्मय सहित उसके सन्मुख झुककर इतना ही कह सकते हैं "हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।" - भजन १०४:२४ - हेनरी बौश


परमेश्वर की सृष्टि पर उसके हस्ताक्षर उसकी महिमा की घोषणा करते हैं।

हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है? पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है। - भजन १०४:२४


बाइबल पाठ: उत्पत्ति १:९-१३

फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे, और वैसा ही हो गया।
और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा, तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उस ने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें, और वैसा ही हो गया।
तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १०-१२
  • मत्ती ४

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