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Thursday, March 31, 2011

परमेश्वर से बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति रौनलड रीएगन के साथ एक घटना घटी - वे एक बुज़ुर्ग अमेरिकी नागरिक से फोन पर बात करना चाह रहे थे। उन्होंने उसे टेलिफोन किया लेकिन उस व्यक्ति को विश्वास ही नहीं हुआ कि फोन पर दूसरी तरफ स्वयं राष्ट्रपति हैं और राष्ट्रपति उससे बात करना चाह रहे हैं, इसलिए उसने फोन काट दिया। राष्ट्रपति फोन मिलाते रहे और वह फोन काटता रहा; ऐसा उसने आधा दर्जन बार किया। आखिरकार टेलिफोन ऑपरेटर ने और उसके पड़ौसी ने उसे समझाया और विश्वास दिलाया कि वास्तव में राष्ट्रपति ही उससे बात करना चाह रहे हैं, फिर उसने १५ मिनिट तक राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बातें करीं।

सदियों पहले शमूएल को भी आश्चर्य में डालने वाला बुलावा आया। उसे पता नहीं चला कि कौन उसे बुला रहा है, बुलाने वाला किसी भी राष्ट्रपति से कहीं बढ़कर था। जब शमूएल ने जाना कि स्वयं परमेश्वर उससे बातें कर रहा है, तो उसने ध्यान देकर परमेश्वर की बातें सुनीं।

हम मसीहीयों की प्रतिक्रिया भी कभी कभी कुछ ऐसी ही होती है जब परमेश्वर हमसे बातें करता है। कभी कभी हमें अपने मन की गहराईयों में किसी बात के लिए ऐसा दृढ़ विश्वास होता है जिसे हम समझ नहीं पाते। पहले पहल हम उसे परमेश्वर की आवाज़ की तरह नहीं पहचानते, फिर जब हमें विश्वास हो जाता है कि हाँ परमेश्वर ही है, तो हमें अचम्भा होता कि वह हम से बातें करना चाहता है।

हम भूल जाते हैं कि परमेश्वर अपने प्रत्येक विश्वासी से एक व्यक्तिगत संबंध रखना चाहता है, वह चाहता है कि हम भी उसे व्यक्तिगत रीति से जानें। वह हम से अपने लिखित वचन बाइबल द्वारा बातें करता है, अपने जीवित वचन प्रभु यीशु मसीह द्वारा बातें करता है, और हमारे अन्दर अपने पवित्र आत्मा के रूप में निवास करता है, जो हमें उसका वचन सुनने और समझने की सामर्थ देता है।

परमेश्वर सदा हम से बातें करने के प्रयास में लगा रहता है, इसलिए हमें भी उसकी बात सुनने और मानने के लिए तैयार रहना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


दो तरह के मसीही होते हैं, पहले वे जो परमेश्वर की प्रतीक्षा में रहते हैं और दूसरे वे जो परमेश्वर को प्रतीक्षा करवाते रहते हैं।

सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो तो अपने मन को कठोर न करो... - इब्रानियों ३:७, ८


बाइबल पाठ: इब्रानियों ३:७-१४

Heb 3:7 सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो।
Heb 3:8 तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था।
Heb 3:9 जहां तुम्हारे बाप दादों ने मुझे जांचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे।
Heb 3:10 इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना।
Heb 3:11 तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे।
Heb 3:12 हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए।
Heb 3:13 वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।
Heb 3:14 क्‍योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों ११-१२
  • लूका ६:१-२६

Wednesday, March 30, 2011

परमेश्वर की आवाज़ सुनिए

कई वर्ष पहले, मैं हर सुबह अपनी खिड़की के बाहर एक पक्षी की मधुर चहचहाट की आवाज़ से उठता था। आरंभ में उसके चहकने के संगीत से मैं रोमांचित हो उठता था, लेकिन कुछ समय में मेरे कान उसके गीतों के आदि हो गए, और अन्ततः मुझे उसकी आवाज़ सुननी बन्द हो गई। मैं उस पक्षी के मधुर गान को साधारण सी बात समझने लगा; पक्षी तो अब भी मेरी खिड़की के बाहर रोज़ सुबह गाता है, लेकिन मुझे अब उसका संगीत सुनाई नहीं देता।

कुछ ऐसा ही हमारे साथ बाइबल में होकर परमेश्वर की आवाज़ सुनने के विषय में होता है। जब हम उद्धार पाए ही होते हैं तो हम नियम से बाइबल पढ़ते हैं और ध्यान से उसकी शिक्षाओं से सीखते हैं। परमेश्वर की योजनाओं को बाइबल के पन्नों में खुलता देख हम रोमांचित भी होते हैं। लेकिन समय के साथ बाइबल पढ़ना हमारे लिए औपचारिक्ता बनने लग जाती है और हम उसके सन्देश की ओर पूरा ध्यान देना छोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि हमें परमेश्वर की आवाज़ सुननी बन्द हो जाती है।

यह दुखदायी स्थिति इतने धीरे धीरे पनपती है कि इसके कमज़ोर कर देने वाले प्रभावों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाने पाता। फिर अचानक एक दिन कुछ ऐसा होता है जिससे हमें अपनी कमज़ोरी का एहसास होता है और हम तब जान पाते हैं कि हम क्या खो बैठे हैं। कितना भला हो कि हम शमूएल की तरह परमेश्वर की ओर अपने ध्यान को लगाए रखें और कह सकें, "... कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।" (१ शमूएल ३:१०)

प्रतिदिन अपना कुछ समय नियमित रूप से परमेश्वर के वचन को पढ़ने के लिए निर्धारित करें, पढ़ते समय उसकी शिक्षाओं की ओर पूरा ध्यान दें और सभी ध्यन भटकाने वाली बातों को दूर कर दें; तभी हम परमेश्वर की आवाज़ के प्रति जागरूक रह सकेंगे और परमेश्वर की आवाज़ हमारे लिए अर्थहीन नहीं होने पाएगी। - रिचर्ड डी हॉन


जितना अधिक हम पवित्रशास्त्र को पढ़ेंगे, परमेश्वर प्रभु को उतना ही अधिक जान पाएंगे।

... कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है। - १ शमूएल ३:१०

बाइबल पाठ: १ शमूएल ३:१-१०

1Sa 3:1 और वह बालक शमूएल एली के साम्हने यहोवा की सेवा टहल करता था। और उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था और दर्शन कम मिलता था।
1Sa 3:2 और उस समय ऐसा हुआ कि (एली की आंखे तो धुंघली होने लगी थीं और उसे न सूझ पड़ता था) जब वह अपने स्थान में लेटा हुआ था,
1Sa 3:3 और परमेश्वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था, और शमूएल यहेवा के मन्दिर में जंहा परमेश्वर का सन्दूक था लेटा था;
1Sa 3:4 तब यहोवा ने शमूएल को पुकारा और उस ने कहा, क्या आज्ञा!
1Sa 3:5 तब उस ने एली के पास दौड़कर कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। वह बोला, मैं ने नहीं पुकारा, फिर जा लेट रह। तो वह जाकर लेट गया।
1Sa 3:6 तब यहोवा ने फिर पुकार के कहा, हे शमूएल! शमूएल उठकर एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। उस ने कहा, हे मेरे बेटे, मैं ने नहीं पुकारा, फिर जा लेट रह।
1Sa 3:7 उस समय तक तो शमूएल यहोवा को नहीं पहचानता था, और न तो यहोवा का वचन ही उस पर प्रगट हुआ था।
1Sa 3:8 फिर तीसरी बार यहोवा ने शमूएल को पुकारा। और वह उठ के एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। तब एली ने समझ लिया कि इस बालक को यहोवा ने पुकारा है।
1Sa 3:9 इसलिये एली ने शमूएल से कहा, जा लेट रहे; और यदि वह तुझे फिर पुकारे, तो तू कहना, कि हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है तब शमूएल अपने स्थान पर जा कर लेट गया।
1Sa 3:10 तब यहोवा आ खड़ा हुआ, और पहिले की नाईं पुकारा, शमूएल! शमूएल! शमूएल ने कहा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों ९-१०
  • लूका ५:१७-३९

Tuesday, March 29, 2011

प्रयास नहीं, केवल विश्वास द्वारा

सुसमाचार प्रचारक जॉर्ज नीडहैम एक प्रसिद्ध और अमीर व्यक्ति से मिलने गए। उस व्यस्त व्यक्ति से नीडहैम ने केवल एक प्रश्न किया, "क्या आपका उद्धार हो गया है?" अमीर व्यक्ति ने उत्तर दिया, "नहीं, परन्तु मैं मसीही बनने का प्रयत्न कर रहा हूँ।" नीडहैम ने पूछा, "कितने समय से आप यह प्रयास कर रहे हैं?" उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, "१२ वर्ष से।" सुसमाचार प्रचारक नीडहैम बोले, "मुझे यह कहने की अनुमति दें कि आप बहुत बेवकूफ रहे हैं। इतने वर्ष प्रयास कर के भी आप सफल नहीं हो सके; यदि मैं आपके स्थान पर होता तो मैं प्रयास नहीं विश्वास करता।"

उस शाम को नीडहैम को अचंभा हुआ कि वह व्यक्ति उस चर्च में आया जहाँ नीडहैम प्रचार कर रहा था। उसके चेहरे पर ऐसा शान्ति और आनन्द झलक रहा था जो नीडहैम ने उससे दिन के समय की मुलाकात में नहीं देखा था। सभा के बाद उस व्यक्ति ने नीडहैम से कहा, "मैं वाकई में मूर्ख था, और अपने जीवन के १२ बहुमूल्य वर्ष व्यर्थ प्रयास में गवाँ दिये, जबकि उद्धार मुझे साधारण विश्वास से मिल सकता था।"

बाइबल हमें उद्धार पाने के लिए कुछ काम करने, या प्रयास करने के लिए नहीं कहती। प्रेरित पौलुस ने कहा, "परन्‍तु जो काम नहीं करता वरन भक्तिहीन के धर्मी ठहराने वाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धामिर्कता गिना जाता है।" (रोमियों ४:५)

अनन्त जीवन पाने का केवल एक ही मार्ग है, प्रयास करना छोड़कर मसीह यीशु पर विश्वास करना आरंभ कर दीजिए। - पौल वैन गोर्डर


उद्धार प्रयास से नहीं, विश्वास से है; उसके लिए कुछ करना नहीं, किए हुए पर विश्वास करना है।

...जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले। - प्रकाशितवाक्य २२:१७

बाइबल पाठ: रोमियों ४:१-८

Rom 4:1 सो हम क्‍या कहें, कि हमारे शारीरिक पिता इब्राहीम को क्‍या प्राप्‍त हुआ?
Rom 4:2 क्‍योंकि यदि इब्राहीम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्‍ड करने की जगह होती, परन्‍तु परमेश्वर के निकट नहीं।
Rom 4:3 पवित्र शास्‍त्र क्‍या कहता है? यह कि इब्राहीम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धामिर्कता गिना गया।
Rom 4:4 काम करने वाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्‍तु हक समझा जाता है।
Rom 4:5 परन्‍तु जो काम नहीं करता वरन भक्तिहीन के धर्मी ठहराने वाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धामिर्कता गिना जाता है।
Rom 4:6 जिसे परमेश्वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाउद भी धन्य कहता है।
Rom 4:7 कि धन्य वे हैं, जिन के अधर्म क्षमा हुए, और जिन के पाप ढ़ांपे गए।
Rom 4:8 धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों ७-८
  • लूका ५:१-१६

Monday, March 28, 2011

अनुग्रह द्वारा उद्धार

बड़े अक्षरों में लिखे हुए एक शीर्षक ने मेरा ध्यान खींचा: "नए मत में परिवर्तन बहुत पीड़ादायक है।" उस लेख में एक जर्मनी के व्यवसायी का अनुभव लिखा था जिसे एक नए धर्म में अपने परिवर्तन के कार्य को पूरा करने के लिए बहुत पीड़ा दायक रीतियां पूरी करनी पड़ीं थीं। उन पीड़ा दायक रीतियों का उद्देश्य था कि वह अपने नए धर्म और विश्वास के प्रति अपनी वचनबद्धता और समर्पण प्रमाणित कर सके।

तुलना में, प्रभु यीशु द्वारा दिया जाने वाला उद्धार इससे कितना भिन्न तथा सहज है। उद्धार, अनुग्रह द्वारा, केवल साधरण विश्वास से, बिना किसी मानवीय कर्मों के - मसीही विश्वास को अन्य सभी धर्मों से बिलकुल अलग करता है। प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास द्वारा किसी मनुष्य का परिवर्तन अनुभव किसी कष्टदायक रीति को पूरा करने से लागू अथवा संपूर्ण नहीं होता। यह हो सकता है कि मसीह में लाए गए विश्वास के कारण हमें संसार से दुख उठाना पड़े तथा अपने विश्वास को संसार के समक्ष हम अपने भले कार्यों से प्रदर्शित करें, किंतु न तो दुख उठाना और न ही भले कार्य हमें उद्धार देते हैं या उद्धार के योग्य बनाते हैं। पौलूस ने लिखा, "क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।" (इफिसियों २:१०)

मसीह में हमारा उद्धार इस बात से नहीं होता कि हम कितना कष्ट सह सकते हैं, वरन उससे होता है जो मसीह हमारे लिए पहले ही क्रूस पर सह चुका है। प्रभु यीशु का मार्ग कष्टों द्वारा परिवर्तन का मार्ग नहीं है, वह परमेश्वर का वरदान है, तथा परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह ही से है। - रिचर्ड डी हॉन


हम अपने कर्मों की श्रेष्ठता द्वारा नहीं, परमेश्वर के अनुग्रह से उद्धार पाते हैं; यह हमारे कर्मों का नहीं मसीह के मारे जाने और जी उठने का नतीजा है।

तो उस ने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्‍नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। - तीतुस ३:५



बाइबल पाठ: इफिसियों २:१-१०

Eph 2:1 और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।
Eph 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।
Eph 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्‍तान थे।
Eph 2:4 परन्‍तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया।
Eph 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)
Eph 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।
Eph 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।
Eph 2:8 क्‍योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।
Eph 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे।
Eph 2:10 क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों ४-६
  • लूका ४:३१-४४

Sunday, March 27, 2011

अतीत बदला गया

प्रभु यीशु के जन्म से लगभग ४०० वर्ष पूर्व, युनानी कवि अगाथन ने कहा था, "परमेश्वर भी अतीत को बदल नहीं सकता।" एतिहासिक दृष्टिकोण से यह बात सही है, जो बीत चुका है उसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन जब परमेश्वर ने अपने पुत्र को क्रुस पर मरने भेजा, तो उसने हमारे पापमय अतीत को मिटा देने का मार्ग तैयार कर दिया।

जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया, डौनलड बार्नहाउस उसका वर्णन इन शब्दों में करते हैं: "जैसे, यदि समुद्रतल में कोई छेद या दरार समुद्र के पानी को धरती की गहराईयों में धधकती हुई ज्वालओं तक जाने दे, तो उसके कारण होने वाले विस्फोट से यह धरती फट जाएगी; वैसे ही प्रभु यीशु मसीह के मारे जाने और जी उठने के द्वारा अतीत की पर्तें फट गईं और अनन्त काल अतीत में बह निकला, अतीत की सब बातों को उथल-पुथल और टुकड़े टुकड़े कर दिया। यीशु ने प्रत्येक विश्वास करने वाले के अतीत को लिया, अपने लहू से उसे धो कर साफ किया और उसके जीवन को ऐसा बदल डाला कि अब वह समय की सीमाओं मे बन्धा नहीं रहा वरन अनन्त जीवन उसमें आ गया।"

कवि ने कहा, "काश कोई ऐसा स्थान होता जहाँ पुनः आरंभ संभव हो पाता।" ऐसा स्थान है - प्रभु यीशु में, क्योंकि "...यीशु मसीह का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है" (१ यूहन्ना १:७) और "सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।" (२ कुरिन्थियों ५:१७)

यही सुसमाचार का चमत्कार है। जिन्हों ने मसीह यीशु के पाप क्षमा के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, उनके लिए उसने "विधियों का वह लेख जो हमारे नाम पर और हमारे विरोध में या मिटा डाला, और उस को क्रूस पर कीलों से जड़ कर सामने से हटा दिया है। " (कुलुस्सियों २:१४)

परमेश्वर ने हमारे पापमय अतीत को पूर्णतः साफ कर दिया है। - पौल वैन गोर्डर


प्रभु का उद्धार घोर पापी को भी उत्तम संत बना देता है।

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं। - २ कुरिन्थियों ५:२१


बाइबल पाठ:

Col 2:1 मैं चाहता हूं कि तुम जान लो, कि तुम्हारे और उन के जो लौदीकिया में हैं, और उन सब के लिये जिन्‍होंने मेरा शारीरिक मुंह नहीं देखा मैं कैसा परिश्रम करता हूं।
Col 2:2 ताकि उन के मनों में शान्‍ति हो और वे प्रेम से आपस में गठे रहें, और वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्‍त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात मसीह को पहिचान लें।
Col 2:3 जिस में बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्‍डार छिपे हुए हैं।
Col 2:4 यह मैं इसलिये कहता हूं, कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभाने वाली बातों से धोखा न दे।
Col 2:5 क्‍योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूं, तौभी आत्मिक भाव से तुम्हारे निकट हूं, और तुम्हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्हारे विश्वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्न होता हूं।
Col 2:6 सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो।
Col 2:7 और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ, और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो।
Col 2:8 चौकस रहो कि कोई तुम्हें उस तत्‍व-ज्ञान और व्यर्थ धोखे के द्वारा अहेर न करे ले, जो मनुष्यों के परम्पराई मत और संसार की आदि शिक्षा के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं।
Col 2:9 क्‍योंकि उस में ईश्वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।
Col 2:10 और तुम उसी में भरपूर हो गए हो जो सारी प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है।
Col 2:11 उसी में तुम्हारा ऐसा खतना हुआ है, जो हाथ से नहीं होता, अर्थात मसीह का खतना, जिस से शारीरिक देह उतार दी जाती है।
Col 2:12 और उसी के साथ बपतिस्मे में गाड़े गए, और उसी में परमेश्वर की शक्ति पर विश्वास करके, जिस ने उस को मरे हुओं में से जिलाया, उसके साथ जी भी उठे।
Col 2:13 और उस ने तुम्हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारिहत दशा में मुर्दा थे, उसे साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया।
Col 2:14 और विधियों का वह लेख जो हमारे नाम पर और हमारे विरोध में या मिटा डाला, और उस को क्रूस पर कीलों से जड़ कर सामने से हटा दिया है।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों १-३
  • लूका ४:१-३०

Saturday, March 26, 2011

जीवन जल

एक छोटे शहर में हो रही सुसमाचार सभा में एक व्यक्ति को अपनी पापमय दशा और प्रभु यीशु को ग्रहण करने की आवश्यक्ता बड़े सशक्त रूप से महसूस हुई, लेकिन उसने अपनी भावनाएं छुपा लीं और अपनी पत्नि तक को नहीं बताया, यद्यपि वह मसीही विश्वासी थी। एक शाम को जब उसकी पत्नि कहीं बाहर गई हुई थी वह अपने पाप बोध को लेकर बहुत बेचैन हुआ और घर के अन्दर इधर से उधर चक्कर काटने लगा। उसकी बेटी ने अपने पिता की बेचैनी देखी तो पूछा कि "क्या हुआ?" पिता ने बात टालने के लिए कहा "कुछ नहीं" और पाप बोध की अपनी बेचैनी छिपाने की कोशिश करने लगा। उस बच्ची ने बड़े सहज भाव से पूछा, "पिताजी, यदि आप प्यासे हैं तो जाकर पानी क्यों नहीं पी लेते?" उसके इन शब्दों ने पिता को चौंका दिया, उसे उस सुसमाचार सभा में कही गई बात याद आ गई कि उद्धार का सुसमाचार मुक्त बहते हुए जल के सोते की तरह है जिससे प्रत्येक प्यासा अपनी प्यास बिना किसी रोक टोक के बुझा सकता है। उसने और संघर्ष नहीं किया, उसी रात उसने अपने पापों की क्षमा माँगकर प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता करके ग्रहण कर लिया।

इस संसार के सोते तो केवल प्यास बढ़ाते ही हैं, मनुष्य की आत्मिक प्यास केवल प्रभु यीशु ही बुझा सकता है। प्रभु यीशु ने बड़े सीधे और स्पष्ट शब्दों में सुसमाचार प्रस्तुत किया; उन्होंने हमारे प्रतिदिन के जीवन से जुड़ी बातों, जैसे भोजन, जल, स्वीकृति आदि द्वारा उद्धार के सुसमाचार को समझाया। यीशु ने कहा "परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।" (यूहन्ना ४:१४) - पौल वैन गोर्डर


सांसारिक उपलब्धियों के कुओं से जितना चाहे पी लो, प्यास बढ़ती ही है, कभी तृप्ति नहीं मिलती।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। - यूहन्ना ७:३७

बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:५-१५

Joh 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिस याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
Joh 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्‍टे के लगभग हुई।
Joh 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
Joh 4:8 क्‍योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
Joh 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
Joh 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
Joh 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
Joh 4:12 क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया, और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढारों समेत उस में से पीया?
Joh 4:13 यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर पियासा होगा।
Joh 4:14 परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍त काल तक पियासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
Joh 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू २२-२४
  • लूका ३

Friday, March 25, 2011

"उसे" जानना

एक पत्रिका "Youth's Living Ideals" में एक बुज़ुर्ग महिला की कहानी छपी। उस मसीह की विश्वासी महिला को बाइबल के बहुत से भाग कण्ठस्त थे, लेकिन जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ती गई, उसकी यादाश्त भी क्षीण होती गई, और फिर उसे केवल एक ही पद याद रहा - "...क्‍योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है।" (२ तिमुथियुस १:१२); और वह इसी पद को दोहरती रहती थी। और कुछ समय के बाद इस पद का भी केवल एक भाग ही उसे स्मरण रह सका "वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है" और वह इसी खंड को बोलती रहती थी। जब उसकी मत्यु का समय आया तो रिशतेदारों ने देखा कि उसके होंठ हिल रहे हैं, उन्होंने झुक कर सुनना चाहा कि वह कुछ माँग तो नहीं रही, लेकिन उसके मुँह से धीमी आवाज़ में अब एक ही शब्द निकल रहा था "वह, वह, वह..."। वह महिला सिवाय एक शब्द के सारी बाइबल को भूल चुकी थी, लेकिन उस एक शब्द में सारी बाइबल उसके पास थी।

मृत्यु की घड़ी तक परमेश्वर की उस संत ने उसे कभी नहीं खोया जिससे वह प्रेम करती थी। उसका उद्धार प्रभु यीशु मसीह के साथ एक जीवित संबंध पर आधारित था, और प्रभु मृत्यु के क्षण तक भी उसके हृदय को संतोष दे रहा था। उद्धार पाने का एकमात्र तरीका है उद्धारकर्ता को जानना।

हम अपने किन्हीं कर्मों द्वारा उद्धार नहीं पाते, यह केवल प्रभु यीशु मसीह में विश्वास द्वारा संभव है। अपने सिद्ध जीवन और कलवरी के क्रूस पर दिये बलिदान द्वारा ही उसने उद्धार का मार्ग सबके लिए तैयार किया है। - रिचर्ड डी हॉन


पवित्र शास्त्र को दिमागी तौर से जानना एक बात है लेकिन उद्धारकर्ता को व्यक्तिगत रीति से जानना कुछ और ही बात है।

और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूं, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं। - फिलिप्पियों ३:१०


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:७-१४

Php 3:7 परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।
Php 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं।
Php 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Php 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानू, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं।
Php 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।
Php 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Php 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Php 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १९-२१
  • लूका २:२५-५२

Thursday, March 24, 2011

स्वीकार तो आप ही को करना है

अमेरिका में ऐंड्रू जैक्सन के राष्ट्रपति काल में, अदालत ने एक आदमी को मृत्यु दण्ड की आज्ञा दी। जैक्सन ने उस कैदी को क्षमा दान देना चाहा, परन्तु उस कैदी ने क्षमा दान लेने से इन्कार कर दिया। जेल के अधिकारियों, वकीलों और कई लोगों ने बहुत प्रयास किया कि उस कैदी को मना सकें कि वह क्षमा दान स्वीकार कर ले, उसे यह भी समझाया गया कि क्षमा दान अस्वीकार करना राष्ट्रपति का अपमान होगा, लेकिन वह नहीं माना। अन्ततः सर्वोच न्यायालय को फैसला देने के लिए कहा गया। न्यायालय ने फैसला दिया कि क्षमा दान तब तक लागू नहीं माना जा सकता जब तक वह स्वीकार न किया जाए।

यही बात परमेश्वर के उद्धार के दान पर भी लागू होती है। यद्यपि प्रभु यीशु ने समस्त संसार के सभी लोगों के लिए छुटकारे का मार्ग दिया है, लेकिन केवल वो ही जो उसके इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, इसका लाभ उठा पाते हैं।

जब तक हम व्यक्तिगत रीति से यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार नहीं करते, हम पाप के लिए परमेश्वर के दण्ड से बच नहीं सकते, "जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्‍तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहरा चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।" (यूहन्ना ३:१८)

उद्धार का मार्ग सबके लिए खुला है, लेकिन उसका लाभ उठाने और उसका अनुभव करने के लिए पहले उसे स्वीकार करना होगा - और यह आप ही को करना है! - रिचर्ड डी हॉन


उद्धार सेंतमेंत है, किंतु उसे स्वीकार तो करना होगा।

परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। - यूहन्ना १:१२



बाइबल पाठ: यूहन्ना ३:१४-२१

Joh 3:14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में