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Monday, January 3, 2011

कहीं नहीं, या, अभी यहीं!

एक नास्तिक वकील ने अपने दफतर की दीवार पर एक पट्टी लगा रखी थी जिसपर लिखा था "GOD IS NOWHERE" - परमेश्वर कहीं नहीं है। एक दिन उसकी प्रतीक्षा में बैठी उसकी छोटी बेटी, समय बिताने के लिये कागज़ पर इस पंक्ति को बार बार लिखने लगी। लिखते लिखते, अन्जाने में उसने NOWHERE के W और H के बीच में अन्तर डाल दिया और वाक्य का अर्थ पूर्णत्या बदल गया, क्योंकि अब वह हो गया "GOD IS NOW HERE" - परमेश्वर अभी यहीं है!

यह छोटी कहानी दर्शाती है कि वास्तविक जीवन में क्या होता है। अविश्वासी कहते हैं कि यह संसार एक दीर्घकालीन क्रमिक विकास (evolution) का नतीजा है और उन्हें सृष्टि में कहीं भी परमेश्वर के होने का कोई प्रमाण नहीं दीख पड़ता, जबकि सृष्टि परमेश्वर के कार्यकौशल से भरी पड़ी है। वे मूर्खतापूर्वक कहते और मानते हैं कि सृष्टि बिना सृष्टिकर्ता के अस्तित्व में आ गई। लेकिन मसीही विश्वासी, सृष्टि में परमेश्वर की अद्भुत कला, योजना और सुन्दरता देखते हैं और उसपर विश्वास करके उसकी इस विलक्षण सृष्टि के लिये महिमा करते हैं। हम भजनकार के साथ कहते हैं "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।" (भजन १९:१)

उस वकील के दफतर की पट्टी पर लिखे अक्षर दो अलग तरह से पढ़े जा सकते हैं, लेकिन उन दोनो में से केवल एक ही सत्य है। बहुत से लोग सृष्टि में परमेश्वर की महान हस्तकला को देख कर उसे ’केवल संयोग’ मानकर दरकिनार कर देते हैं, परन्तु कुछ हैं जो उसमें ’महान सृष्टिकर्ता’ को देखते हैं, जो यथार्त है। बाइबल हमें इस यथार्त को समझने और मानने की समझ देती है।

जो उस पट्टी पर लिखे वाक्य को "GOD IS NOW HERE" करके पढ़ते हैं, वे ही वास्तव में सत्य को जानते हैं। - रिचर्ड डी हॉन


’प्रकृति’ परमेश्वर की हस्तकला का एक नाम है।

मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। - भजन १४:१


बाइबल पाठ: भजन १९:१-६

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाई अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है, और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ७-९
  • मत्ती ३