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Monday, February 14, 2011

उद्देश्य

हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की योजना है जो अपने प्रत्येक पहलू में सिद्ध है और हमारे लाभ के लिये है। सृष्टि का सार्वभौमिक सृष्टिकर्ता कुछ भी "संयोग" या "भाग्य" के लिये नहीं छोड़ता - प्रभु यीशु मसीह का जीवन इसका जीवन्त उदाहरण है। प्रभु यीशु का बेतेलेहम में शिशु के रूप में जन्म लेना, उसका जीवन, संसार में उसकी सेवकाई, उसकी मृत्यु, उसका पुनरुत्थान - सब कुछ परमेश्वर की योजना के अनुसर हुआ। यह दिखाने के लिये कि प्रभु यीशु अपने स्वर्गीय पिता की इच्छा को पूरा करने के लिये पूर्णतः समर्पित था, लूका लिखता है "जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, तो उस ने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया।" (लूक ९:५१) प्रभु यीशु की मृत्यु कोई "दुर्भाग्यवश" घटी हुई घटना नहीं थी - वह परमेश्वर की योजना के अन्तर्गत हुई थी और उसकी आज्ञा का पालन था - वह समस्त संसार के प्रत्येक जन के पापों के लिये अपने प्राण देने आया था।

इसी प्रकार यह भी उतना ही सत्य है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन परमेश्वर द्वारा किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिये बनाया गया है। प्रसिद्ध प्रचारक और बाइबल शिक्षक सी. एच. स्पर्जन ने कहा था, "मैं यह कभी मान नहीं सकता कि परमेश्वर ने कोई मनुष्य, विशेष कर मसीही मनुष्य को निरुद्देश्य बनाया है, और वह अपना जीवन बिना किसी मकसद के व्यतीत करने के लिये है। उसने आप को एक उद्देश्य के अन्तर्गत बनाया है। उस उद्देश्य का पता कीजिए और फिर अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा कीजिए।"

हमें अपने जीवन की घटनाओं को स्वर्गीय दृष्टिकोण से देखना चाहिये। हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की एक योजना है। जब हम यह जान लेंगे तो उस योजना को पूरा करने और उसकी आज्ञाकारिता द्वारा उसकी सेवा और उसकी महिमा करने को भी तत्पर रहेंगे।

हमारा जीवन न तो व्यर्थ है न निरुद्देश्य। हम जहां भी हैं, वहां परमेश्वर ने हमें एक उद्देश्य के अन्तर्गत रखा है - उस उद्देश्य को पहिचानिये और उसकी पूर्ति में संलग्न होकर अपने जीवन को साकार कीजिए। - पौल वैन गौर्डर


कर्तव्य पूर्ति हमारे लिये है, उनके परिणाम देना परमेश्वर के लिये।


....मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्‍द सुनता है। - यूहन्ना १८:३७

बाइबल पाठ: यूहन्ना १८:३३-३७

तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उस से पूछा, क्‍या तू यहूदियों का राजा है?
यीशु ने उत्तर दिया, क्‍या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?
पीलातुस ने उत्तर दिया, क्‍या मैं यहूदी हूं? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्‍या किया है?
यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्‍तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं।
पीलातुस ने उस से कहा, तो क्या तू राजा है? यीशु ने उत्तर दिया कि तू कहता है, क्‍योंकि मैं राजा हूं; मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्‍द सुनता है।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १५-१६
  • मत्ती २७:१-२६