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Wednesday, August 10, 2011

हे प्रभु, आप मुझे ईमानदार बनाए रखना

औस्ट्रेलिया के प्रथम गवरनर जनरल, लौर्ड होपटाउन को विरासत में एक पुराना बहीखाता मिला जिसे चमड़े की जिल्द से ढक कर, उसपर पीतल के किनारे लगाकर सुरक्षित बनाया गया था। यह बहीखाता उनकी सबसे प्रीय संपत्तियों में से एक थी। इस बहीखाते को ३०० वर्ष पूर्व उनके एक पूर्वज जौन होपटाउन ने, जब उन्होंने इंगलैंड के एडिनबरोह शहर में अपना वयवसाय आरंभ किया, तब लिखना आरंभ किया था। जब यह पोथी लौर्ड होपटाउन के पास पारिवारिक विरासत के रूप में पहुँची तो उन्होंने उसे खोल कर देखा, और बही के प्रथम पृष्ट पर उन्हें अपने पूर्वज जौन होपटाउन की एक प्रार्थना लिखी मिली, "हे प्रभु मुझे और इस पुस्तक को आप ईमानदार बनाए रखना।" जौन होपटाउन जानते थे कि यदि उन्हें ईमानदार रहना है तो यह केवल परमेश्वर की सहायता ही से संभव है।

प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए ईमानदारी अनिवार्य है। सत्य के रूप को बदलने के लिए उसे शब्दों और तातपर्यों के जाल में उलझाकर प्रस्तुत करना, तथ्यों को छुपाना या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना, आँकड़ों में फेरबदल करना, किसी बात को गलत रूप से प्रस्तुत करना आदि वे गैर-ईमनदारी के व्यवहार हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है। यदि हम नौकरी करते हैं तो हमें अपने नियोक्ता को पूरे दिन का काम देना है, हमारे नौकरी के समय के उपयोग पर किसी को ऊंगली उठाने का मौका नहीं मिलना चाहिए। ऐसा न करना हमारी गवाही के विरुद्ध है और हमें बेईमान बनाता है। मसीही विश्वासी को ना केवल कामों में वरन अपने उद्देश्यों में भी ईमानदार होना चाहिए। इस कारण से और उद्धार द्वारा प्राप्त अपने नए जीवन-चरित्र को प्रगट करने के लिए हर एक मसीही विश्वासी को परमेश्वर तथा मनुष्यों, दोनो के समक्ष अपनी ईमानदारी को बनाए रखने के प्रयास में सदा लगे रहना चाहिए।

यह आसान कार्य नहीं है। प्रतिदिन और प्रतिपल शत्रु शैतान हमें समझौते और पाप में फंसा कर हमारी ईमानदारी का मज़ाक बनाने के प्रयत्न में लगा रहता है। संसार के प्रलोभन और साथियों तथा परिवार के लोगों के दबाव, घर की आवश्यक्ताएं, विपरीत परिस्थितियाँ, सताव, लोगों का अकारण बैर और विरोध आदि हर दाँव शैतान हमारी गवाही को बिगाड़ने और हमें ईमानदार कहलाए जाने से हटाने के लिए प्रयोग करता है। इसलिए ईमानदारी के इस उद्देश्य में हमें परमेश्वर की सहायता और सामर्थ अवश्य है।

प्रत्येक मसीही विश्वासी की प्रतिदिन की प्रार्थना होनी चाहिए, "हे प्रभु, आप मुझे ईमानदार बनाए रखना।" - पौल वैन गौर्डर


समझ-बूझ की पुस्तक का प्रथम अध्याय ईमानदारी है।

क्‍योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्‍तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्‍ता करते हैं। - २ कुरिन्थियों ८:२१


बाइबल पाठ: १ पतरस ४:११-१९

1Pe 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों मे यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।
1Pe 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझकर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1Pe 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्‍द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
1Pe 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो क्‍योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
1Pe 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।
1Pe 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
1Pe 4:17 क्‍योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
1Pe 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्‍या ठिकाना?
1Pe 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७९-८०
  • रोमियों ११:१-१८