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Wednesday, August 31, 2011

आत्मिक अन्धापन

ब्रिटिश इतिहास के सर्वोत्त्म रजनितिज्ञों मे से एक थे विलियम पिट्ट जो केवल २४ वर्ष की आयु में ही इंग्लैण्ड के प्रधान मंत्री बने। एक मसीही विश्वासी, विलियम विल्बरफोर्स, ने एक बार पिट्ट को एक मसीही प्रवचन की सभा में आने के लिए उत्साहित किया, जहाँ इंगलैण्ड की संसद के एक सदस्य ने बहुत प्रभावी रूप से मसीही विश्वास से संबंधित प्रवचन दिया। सभा के बाद विल्बरफोर्स ने पिट्ट से पुछा कि सभा में दिये गए सन्देश के बारे में उनकी क्या राय है। पिट्ट ने उत्तर दिया, "आप से सच कहूँ तो सभा के आरंभ से लेकर अन्त तक मैंने बहुत ध्यान से उस व्यक्ति के प्रवचन को सुना, परन्तु जो वह कह रहा था, मुझे लेशमात्र भी समझ में नहीं आया।"

मेरे एक मित्र ने, जो मसीही नहीं है, मुझसे कहा, "मैंने बाइबल पढ़ी तो है, लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आई।" मेरे मित्र का यह कहना कोई नई बात नहीं है, संसार में बहुत से लोग ऐसे हैं जो बाइबल को समझ पाने में असमर्थ हैं। यह एक सच्चाई है - इस संसार के लोग, चाहे वे कितने भी पढ़े लिखे, ज्ञानी, सफल और संपन्न क्यों न हों, परमेश्वर के वचन को अपनी बुद्धि और ज्ञान के सहारे समझ नहीं पाते।

सांसारिक पढ़ाई-लिखाई, संसकृति, संसार एवं संसार की विभिन्न बातों तथा राजनिति का ज्ञान आदि परमेश्वर के वचन को समझने में कोई सहायता नहीं करते। परमेश्वर के वचन को समझना है तो प्रभु यीशु मसीह में साधारण विश्वास से परमेश्वर की सन्तान बनना पड़ेगा, तभी बुद्धि पर पड़ा संसार की बातों का परदा हट पाएगा और आत्मिक आन्धापन दूर हो सकेगा। पापों से मुक्ति द्वारा मिला नए जीवन का यह अनुभव ही बाइबल की सच्चाईयों के लिए हमारी आँखों को खोल सकता है।

इस नए जन्म के साथ हम में आकर बसने वाला परमेश्वर का पवित्र आत्मा ही हमें परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों और गहराईयों को समझा सकता है; उसकी उपस्थिति के अलावा आत्मिक अन्धेपन का कोई समाधान नहीं है। - पौल वैन गोर्डर


जब हम अपने हृदय को उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए खोल देते हैं, तब परमेश्वर हमारे हृदयों को अपने वचन के लिए खोल देता है।

परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्‍योंकि वे उस की दृष्‍टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्‍हें जान सकता है क्‍योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। - १ कुरिन्थियों २:१४

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों २:१-१६

1Co 2:1 और हे भाइयों, जब मैं परमेश्वर का भेद सुनाता हुआ तुम्हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया।
1Co 2:2 क्‍योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह, वरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूं।
1Co 2:3 और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा।
1Co 2:4 और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं परन्‍तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था।
1Co 2:5 इसलिये कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्‍तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो।
1Co 2:6 फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्‍तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं।
1Co 2:7 परन्‍तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया।
1Co 2:8 जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्‍योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते।
1Co 2:9 परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं।
1Co 2:10 परन्‍तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया क्‍योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है।
1Co 2:11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता, केवल मनुष्य की आत्मा जो उसमें है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेवर का आत्मा।
1Co 2:12 परन्‍तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्‍तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं।
1Co 2:13 जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्‍तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं।
1Co 2:14 परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्‍योंकि वे उस की दृष्‍टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्‍हें जान सकता है क्‍योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है।
1Co 2:15 आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्‍तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता।
1Co 2:16 क्‍योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए? परन्‍तु हम में मसीह का मन है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १३२-१३४
  • १ कुरिन्थियों ११:१७-३४