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Sunday, September 18, 2011

सामर्थ का रहस्य

   सदा अपने पाप के बारे में सोचते ही रहना तथा अपनी खामियों के लिए हर समय विलाप करते रहना न स्वयं को न दुसरों को अच्छा लगता है। लेकिन पापों को हलके में भी नहीं लेना चाहिए। पवित्र परमेश्वर के नैतिक नियमों की अवहेलना तथा उल्लंघन अति गंभीर बात है। जीवन में पाप की भयानकता और दुषप्रभावों को कभी कमतर कर के नहीं आंकना चाहिए।

   स्कॉटलैंड के जाने-माने प्रचारक रौबर्ट मैक्चेन की मृत्योपरांत एक पादरी उनके शहर में आया। मैक्चेन की सेवकाई से बहुत से लोगों ने अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभ यीशु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया था। यह पादरी मैक्चेन के ऐसे प्रभावी प्रचार के रहस्य को जानना चाहता था। जिस चर्च से मैक्चेन सेवकाई करते थे, वहाँ के सेवादार ने उस पादरी को मैक्चेन की कुर्सी-मेज़ दिखाई और उनसे कहा, "आप इस कुर्सी पर बैठिए", पादरी बैठ गए; सेवादार ने फिर कहा, "अब अपनी कोहनियाँ मेज़ पर रखिए और अपना सिर अपने हाथों से पकड़ लीजिए", पादरी ने वैसा ही किया; सेवादर ने आगे कहा, "अब पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए, मैक्चेन यही किया करते थे।" फिर सेवादार उस पादरी को चर्च के आगे के भाग में ले गया जहाँ पर वह मंच था जिस से मैक्चेन प्रचार करते थे। सेवादार ने पादरी से कहा, "अपनी कोहनियाँ मंच पर टिकाइए, अपने हाथों से अपने मुँह को पकड़ लीजिए और पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए; मैक्चेन यही किया करते थे।"

   मैक्चेन का स्वभाव था कि वे अपने तथा अपने लोगों के पापों के लिए बेझिझक रोते और पश्चाताप करते थे। पाप के प्रति इस प्रकार कायल रहने ने उन्हें परमेश्वर के सामने दीन और नम्र रखा और परमेश्वर की सामर्थ उनमें हो कर अति प्रभावी रूप से कार्य कर सकी। इसकी तुलना में, पाप के प्रति अकसर हमारा रवैया ढिटाई का होता है। हमें अपने जीवन में पाप के लिए परमेश्वर की पवित्र आत्मा की आवाज़ के प्रति और अधिक संवेदनशील तथा पापमय व्यवहार से अलगाव का जीवन जीने को तत्पर और तैयार रहना चाहिए।

   हम परमेश्वर की क्षमा करने की प्रवृति में आनन्दित तो रह सकते हैं, लेकिन साथ ही हमें पापों के लिए पश्चातापी और शोकित भी रहना चाहिए। यही परमेश्वर के लिए सामर्थी और प्रभावी जीवन का रहस्य है। - डेव एग्नर

कलवरी पर प्रभु यीशु का क्रूस इस बात का प्रमाण है कि पाप परमेश्वर को परेशान करता है; क्या आप भी पाप से परेशान होते हैं?

धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। - मत्ती ५:४

बाइबल पाठ: दानिएल ९:१-१९
     Dan 9:1  मादी क्षयर्ष का पुत्र दारा, जो कसदियों के देश पर राजा ठहराया गया था,
    Dan 9:2  उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
    Dan 9:3  तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।
    Dan 9:4  मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,
    Dan 9:5  हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।
    Dan 9:6  और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।
    Dan 9:7  हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:8  हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरूद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:9  परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खान है।
    Dan 9:10  हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उस ने अपने दास नबियों से हमको सुनाई।
    Dan 9:11  वरन सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरूद्ध पाप किया है।
    Dan 9:12&