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Friday, October 7, 2011

जोखिम

   मेरा एक मित्र ने, मुख्य राजमार्ग पर गाड़ी चलाते हुए, एक खतरनाक परिस्थिति देखी - एक ट्रक चालक ने मार्ग पर लापरवाही से चल रहे एक दूसरे चालक को बचाने के लिए अपनेर ट्रक को तेज़ी से एक तरफ काटा, और मार्ग के किनारे की बाड़ से टकरा गया। ट्रक की तेल टांकी से तेल रिसने लगा। किसी भी क्षण आग लग सकती थी और विस्फोट हो सकता था। मेरा मित्र अपनी गाड़ी से निकला और दौड़ कर ट्रक चालक के पास पहुँचा, जो बेसुध हो गया था, और उसे खींच कर बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर इलाज के लिए ले गया। मेरा मित्र वर्तमान का "नेक सामरी" बना, जिसने अपने "पड़ौसी" की सहायता के लिए अपनी जान का जोखिम उठाया।

   प्रभु यीशु द्वारा दिये गए "नेक सामरी" के दृष्टांत में उन्होंने समझाया कि हमारा "पड़ौसी" कौन है - हर वह व्यक्ति जिसे हमारी सहयता की अवश्यक्ता है। इस कथा में, एक सामरी व्यक्ति ने यरुशलेम से यरीहो के मार्ग में डाकुओं द्वारा लूट और पीट कर अधमरा कर के छोड़ दिए गए यहूदी की सहायता करी, यद्यपि यहूदी लोग सामरियों से नफरत करते थे। उस मार्ग पर सहायता के लिए रुक कर, सामरी ने अपनी जान का जोखिम भी उठाया क्योंकि डाकू उसे भी लूट-पीट कर वैसा ही कर सकते थे। उसने अपने "पड़ौसी" की सहायता के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।

   यदि हम प्रभु यीशु द्वारा लूका १०:२५-३७ में दी गई इस कथा को गंभीरता से लेते हैं तो हम भी अपने समय और साधनो द्वारा दूसरों की सहायता करेंगे। हो सकता है कि हमारे पास कुछ रोमांचकारी करने का अवसर ना हो, लेकिन सहायता के अवसर अवश्य होंगे; जैसे, किसी निराश व्यक्ति के साथ बैठ कर उसका ढाढस बंधाना, एड्स से पीड़ित किसी व्यक्ति को सांत्वना देना, गलतफहमी के शिकार किसी भोले और सही व्यक्ति की सच्चाई उजागर करने का प्रयास करना, आदि। दूसरों के साथ दया और हमदर्दी का बर्ताव करके हम परमेश्वर द्वारा हम पर करी गई दया और उससे मिले उद्धार के लिए उसके प्रति धन्यवादी हो सकते हैं; परमेश्वर से मिले नए स्वभाव को प्रदर्शित कर सकते हैं। जब हम दूसरों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं तो हम प्रभु यीशु के प्रति अपनी आज्ञाकरिता को और परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करते हैं।

   अपने "पड़ौसी" की सहायता के लिए जोखिम उठाना भला जोखिम है, इसे उठाने से डरिए नहीं। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


हम कितना त्याग करने को तैयार रहते हैं, यही हमारे प्रेम का नाप है।

खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना, न तो विधवा पर अन्धेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर; और न अपने अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना। - ज़कर्याह ७:९, १०
 
बाइबल पाठ: लूका १०:२५-३७
    Luk 10:25  और देखो, एक व्यवस्थापक उठा और यह कह कर, उस की परीक्षा करने लगा कि हे गुरू, अनन्‍त जीवन का वारिस होने के लिये मैं क्‍या करूं?
    Luk 10:26  उस ने उस से कहा; कि व्यवस्था में क्‍या लिखा है? तू कैसे पढ़ता है?
    Luk 10:27  उस ने उत्तर दिया, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
    Luk 10:28  उस ने उस से कहा, तू ने ठीक उत्तर दिया है, यही कर: तो तू जीवित रहेगा।
    Luk 10:29  परन्‍तु उस ने अपनी तईं धर्मी ठहराने की इच्‍छा से यीशु से पूछा, तो मेरा पड़ोसी कौन है?
    Luk 10:30  यीशु ने उत्तर दिया, कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेर कर उसके कपड़े उतार लिए, और मार-पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए।
    Luk 10:31  और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतरा कर चला गया।
    Luk 10:32  इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतरा कर चला गया।
    Luk 10:33  परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देख कर तरस खाया।
    Luk 10:34  और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डाल कर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ा कर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
    Luk 10:35  दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकाल कर भटियारे को दिए, और कहा, इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
    Luk 10:36  अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
    Luk 10:37  उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह २८-२९ 
  • फिलिप्पियों ३