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Saturday, November 12, 2011

सहारा

   अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में एक विशेष तरह के पेड़ पाए जाते हैं जो सिकोया रेडवुड वृक्ष कहलाते हैं। ये वृक्ष धरती से ३०० फुट की ऊंचाई को प्राप्त कर लेते हैं, किंतु इनकी जड़ें धरती के अन्दर अधिक गहराई तक नहीं जातीं। इनकी जड़ें धरती की उपरी सतह में फैलती हैं और सतह पर होने वाली नमी सोख़ के वृक्ष के लिए जल अर्जित करतीं हैं। ये वृक्ष कभी अकेले नहीं बढ़ते क्योंकि तेज़ हवाएं इन्हें आसानी से गिरा सकतीं हैं। ये वृक्ष सदा झुर्मुट में बढ़ते हैं; झुर्मुट के सभी वृक्षों की जड़ें आपस में उलझी रहती हैं और इस से एक वृक्ष को दूसरे से सहारा मिल जाता है और इतनी ऊंचाई एवं उथली जड़ों के बवजूद तेज़ आंधियां भी इन्हें गिरा नहीं पातीं।

   मानव जीवन में भी यह सिद्धांत लागू होता है। क्लेष और कष्ट सभी पर आते हैं, और कुछ परिस्थितियाँ ऐसे भी होती हैं जो जिस पर आती हैं, उसे ही उन्हें सहना भी होता है; लेकिन तौ भी रिश्तेदार, मित्रगण और निकट के लोग प्रार्थनाओं द्वारा, साथ रहकर या अन्य किसी न किसी रूप में क्लेष भोगने वाले को सहारा एवं सान्तवना दे सकते हैं और उसे टूटने से बचा सकते हैं। किंतु परेशानी तब होती है जब क्लेष भोगने वाला सहायता की अपनी आवश्यक्ता को स्वीकार ना करे और अकेले ही सब कुछ सहने का प्रयास करे।

   समस्त संसार के पापों के लिए क्रूस पर अपने बलिदान से पहले गतसमनी के बाग़ में ऐसे ही सहारे की उम्मीद प्रभु यीशु ने अपने चेलों तथा मित्रों पतरस, याकूब और युहन्ना से रखी थी, जब वह उन्हें अपने साथ प्रार्थना करने के लिए लेकर गया, लेकिन उन्होंने उसे निराश ही किया। जो कष्ट प्रभु भोगने पर था, वह कोई और नहीं भोग सकता था, लेकिन वह चाहता था कि परमेश्वर पिता से उस आते दुख को झेलेने की सामर्थ पाने की प्रार्थना में उसके चेले उसके साथ हों। लेकिन उन्हें प्रार्थना करने की बजाए सोते हुए देख कर उसे अपने अकेलेपन का एहसास और भी अधिक कष्टदायी हुआ होगा।

   यदि प्रभु यीशु को प्रार्थना और सहारे की आवश्यक्ता अनुभव हुई तो हम मनुष्यों के लिए एक दूसरे को सहारा देना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना कितना आवश्यक है। आवश्यक्ता अनुसार अपने लिए और अपने साथ किसी को प्रार्थना के लिए तैयार रखना, अथवा किसी अन्य के लिए प्रार्थना में सदा तत्पर रहना एक दूसरे को सहारा देने का कारगर उपाय है। - डेनिस डी हॉन


जो कष्ट में होते हैं उन्हें सान्तवना से अधिक सहारे की आवश्यक्ता होती है।

तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। - मत्ती २६:३८

बाइबल पाठ: मत्ती २६:३६-४६
    Mat 26:36  तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जाकर प्रार्थाना करूं।
    Mat 26:37  और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।
    Mat 26:38  तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।
    Mat 26:39  फिर वह थोड़ा और आगे बढ़ कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए, तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्‍तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।
    Mat 26:40  फिर चेलों के पास आकर उन्‍हें सोते पाया, और पतरस से कहा, क्‍या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके?
    Mat 26:41  जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्‍तु शरीर र्दुबल है।
    Mat 26:42  फिर उस ने दूसरी बार जाकर यह प्रार्थना की, कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्‍छा पूरी हो।
    Mat 26:43  तब उस ने आकर उन्‍हें फिर सोते पाया, क्‍योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं।
    Mat 26:44  और उन्‍हें छोड़ कर फिर चला गया, और वही बात फिर कह कर, तीसरी बार प्रार्थना की।
    Mat 26:45  तब उस ने चेलों के पास आकर उन से कहा, अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
    Mat 26:46  उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ५१-५२ 
  • इब्रानियों ९