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Wednesday, November 23, 2011

उद्यमी क्षेत्र

   कुछ नगरों में उनके बिगड़े हुए क्षेत्रों को सुधारने के कोई प्रयास देखने को नहीं मिलते और वे क्षेत्र समय के साथ साथ बद से बदतर होते जाते हैं। कुछ अन्य नगरों में इन बिगड़े हुए क्षेत्रों को सुधारने के साहसी प्रयास देखने को मिलते हैं और समय के साथ साथ उन बिगड़े हुए क्षेत्रों की दशा में आशा से भी बहुत अधिक सुधार देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नगर की व्यवस्था के संचालन करने वालों ने इन बिगड़े हुए क्षेत्रों को "उद्यमी क्षेत्र" के रूप में देखना आरंभ किया, जिसके साथ स्वतः ही समय और प्रयास के साथ सुधार हो पाने की संभावना जुड़ जाती है। अपने नगर की समस्याओं को इस नज़रिए से देखने के कारण, वे लोग इसमें सुधार ला पाने की नई संभावनाएं तलाश पाते हैं, बिगड़े हुए को और बिगड़ने नहीं देते और फिर व्यापक सुधार के मार्ग खुलने लगते हैं, कार्यकारी होने लगते हैं और सुधार दिखने भी लगता है।

   मसीही विश्वासियों को भी ऐसा ही नज़रिया अपनाए रखना चाहिए। अपनी असफलताओं के कारण अपने जीवन के कठिन भागों में उन्नति पाने कि बजाए असफलताओं से निराश होकर बैठने वालों को अपनी असफलताओं को "उद्यमी क्षेत्र" के रूप में देखना चाहिए जहाँ निरंतर प्रार्थना और सतत प्रयास रचनात्मक सुधार ला सकता है।

   किसी मसीही विश्वासी को आत्मिक हताशा और विफलता में जीते रहने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि किसी पाप अथवा असफलता में यह सामर्थ नहीं है कि वह उस पर हावी होकर रह सके। क्रूस पर मसीह यीशु के बलिदान ने, उसके अनुयायियों के जीवन से, पाप के बन्धनों और आधिपत्य को सदा के लिए पराजित कर दिया है (रोमियों ६:१४) और अब संसार कि हर सामर्थ से कहीं अधिक सामर्थी परमेश्वर की सामर्थ प्रत्येक मसीही विश्वासी में निवास करती है "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्‍योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (१ युहन्ना ४:४)।

   जब कभी हम किसी पाप या कमज़ोरी या असफलता के चंगुल में फंसें तो विश्वास के साथ परमेश्वर की सहायता को पुकारें, उस बात के विषय में अपनी नकारात्मक प्रवृति को सकारात्मक बनाएं, और अपनी असफलता के उस क्षेत्र को "उद्यमी क्षेत्र" बना कर प्रार्थना और प्रयासों द्वारा अपनी असफलता को सफलता में परिवर्तित कर लें। - डेव एग्नर

बीते हुए कल की पराजयों को आते कल के प्रयासों पर हावी ना होने दें।

सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं? - रोमियों ६:१, २

बाइबल पाठ: रोमियों ६:१-१८
    Rom 6:1  सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो?
    Rom 6:2  कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं?
    Rom 6:3  क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया;
    Rom 6:4  सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।
    Rom 6:5  क्‍योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुड़ गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुड़ जाएंगे।
    Rom 6:6  क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्‍व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें।
    Rom 6:7  क्‍योंकि जो मर गया, वह पाप से छूट कर धर्मी ठहरा।
    Rom 6:8  सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी।
    Rom 6:9  क्‍योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।
    Rom 6:10  क्‍योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्‍तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।
    Rom 6:11  ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
    Rom 6:12  इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो।
    Rom 6:13  और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।
    Rom 6:14  और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।
    Rom 6:15  तो क्‍या हुआ? क्‍या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं बरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं।
    Rom 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्‍त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्‍त धामिर्कता है
    Rom 6:17  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।
    Rom 6:18  और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए।
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २०-२१ 
  • याकूब ५