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Thursday, December 8, 2011

शैतान के प्रतिरोध

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों से निकट भविष्य में अपने यरूशलेम जाने और वहाँ पर यहूदियों के धर्म गुरुओं द्वारा पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ा कर मारे जाने के बारे में बताया, तो उन के चेले पतरस ने इसका विरोध किया और उन्हें ऐसा होने देने को रोक देने के लिए कहा। पतरस का यह प्रतिरोध उसके अनजाने में ही उस में होकर यीशु के विरुद्ध शैतान के द्वारा डाला जाने वाला प्रतिरोध था। प्रभु यीशु ने इस बात को प्रकट किया और पतरस में होकर कार्य कर रहे शैतान को इसके लिए डाँटा (मत्ती १६:२१-२३)।

   शैतान ने पहले यीशु को बचपन में ही मार डालने के प्रयास किए जब उसके जन्म के बाद राजा हेरोदेस ने उस इलाके में पैदा हुए सभी बच्चों को मरवा देने की आज्ञा दी ताकि उन बच्चों में यीशु भी मार डाला जाए (मत्ती २:१-१६)। जब से युहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने प्रभु यीशु को परमेश्वर का मेमना कहा जो जगत के पाप उठा ले जाता है (युहन्ना १:२९), तब ही से शैतान यीशु को क्रूस पर जाने से रोकने के अपने प्रयासों में लग गया। पहले उसने यीशु की सेवकाई आरंभ होने से पहले ही उसे प्रलोभन दिया कि यीशु उस से संसार के राज्य ले ले और क्रूस पर जाने का अपना इरादा छोड़ दे। फिर सेवकाई के दौरान उसने कई बार यहूदी धर्म गुरुओं और अगुवों को उकसाया कि वे उस का विरोध करें, लोगों को उस के विरुद्ध भड़काएं, उसे पत्थरवाह कर के मार डालें जिससे वह क्रूस पर ना जा सके। जब शैतान के ये प्रयास विफल रहे तो उस ने अपनी रण नीति बदली और प्रभु के चेले पतरस को उकसाया कि वह परमेश्वर की योजना का विरोध करे और यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने से रोके। जब यह भी कामयाब नहीं हुआ तो फिर शैतान एक और चेले यहूदा में समा गया (यूहन्ना १३:२७) कि यीशु का विरोध करे। उसके बाद शैतान ने प्रभु के चेलों से कायरता पूर्वक उसे अकेला छोड़ कर भागने, पतरस द्वारा तीन बार उसका इन्कार करने, रोमी सैनिको द्वारा बेरहमी से उसे पीटने, कोड़े मारने और उसका ठठा करने तथा जिन लोगों के बीच यीशु रहा और जिन्हें उसने चँगाईयाँ दीं, परमेश्वर का वचन सिखाया, उन्हीं के द्वारा उसके प्रति बेरुखी और दण्डित किए जाने की माँग रख कर शैतान ने यीशु को यह जताने के प्रयास किए कि मानव जाति इतनी गिरी हुई है कि उसके लिए क्रूस की मृत्यु सहना यीशु को गँवारा नहीं होना चाहिए।

   लेकिन शैतान के सभी प्रयास विफल हुए और यीशु परमेश्वर कि योजना में समस्त मानव जाति के उद्धार का मार्ग तैयार करने के लिए क्रूस पर मारा भी गया और फिर तीसरे दिन जी भी उठा, और आज जो कोई उसके इस कार्य पर विश्वास करके उसे ग्रहण करता है, उसे उद्धार भी देता है।

   शैतान ने भी अपने प्रयास बन्द नहीं किए हैं, अब उसने अपनी रण नीति एक बार फिर बदल ली है। अब वह प्रभु यीशु द्वारा उद्धार के सुसमाचार के प्रचार को बाधित कर रहा है, कि लोग या तो यह सुसमाचार सुने ही ना, या सुन कर भी उस पर विश्वास ना करें। इस कार्य के लिए उसने मसीही विश्वास का स्वरूप बिगाड़ कर उसे इसाई धर्म का रूप दे दिया और अब वह झूठी बातों और तथ्यों के तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करे जाने के द्वारा यीशु पर विश्वास को धर्म परिवर्तन की संज्ञा दे कर लोगों को भड़काता है, आज भी धर्म गुरुओं और धर्म के अगुवों द्वारा सुसमाचार प्रचार का विरोध करवाता है, मसीही विश्वास के सुसमाचार प्रचारकों पर सताव और उत्पीड़न लाता है कि वे अपने प्रयासों को छोड़ दें और अन्य देखने वाले इस से डर जाएं तथा यीशु पर विश्वास नहीं करें। वह संसार के लोगों को उकसाता है कि परमेश्वर है ही नहीं और उस पर विश्वास करना व्यर्थ है। जो फिर भी परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उन्हें वह उकसाता है कि उन्हें यीशु की आवश्यक्ता नहीं है, वे स्वयं ही अपने प्रयासों, भले कार्यों और धर्म के कार्यों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं और स्वर्ग जा सकते हैं।

   किंतु जैसे पहले हुआ, अब भी वैसे ही हो रहा है, शैतान के सभी प्रयासों के बावजूद प्रभु यीशु के क्रूस पर मारे जाने, गाड़े जाने और तीसरे दिन जी उठने और यीशु में पापों की क्षमा पर विश्वास कर के प्रति दिन हज़ारों लोग उद्धार पा