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Tuesday, December 13, 2011

प्रेम की सेवकाई

   जब हडसन टेलर ’चाइना इन्लैंड मिशन’ के निर्देषक थे तो अकसर उन्हें मिशन क्षेत्रों में कार्य करने की लालसा रखने वाले लोगों को नियुक्त करने के लिए उन से साक्षात्कार करना पड़ता था। जब वे उन उम्मीदवारों से पूछते कि "आप विदेशों में जा कर मिशनरी कार्य क्यों करना चाहते हैं?" तो कोई कहता, "इसलिए कि मसीह यीशु ने हमें सारे जगत में जा कर सुसमाचार प्रचार की आज्ञा दी है", या कोई दुसरा कहता कि, "क्योंकि संसार में करोड़ों लोग मसीह के बिना मर कर नरक में जा रहे हैं।" अन्य कुछ भिन्न अथवा इससे मिलते जुलते उत्तर देते। हडसन टेलर उन सब से कहते, "आप के यह सारे कारण चाहे ठीक भी हों, तो भी जब परीक्षा, सताव और क्लेषों, और मृत्यु के जोखिम के आने के समय ये सब आपको पराजित होने के लिए अकेला छोड़ देंगे। केवल एक ही कारण है जो इन सब परीक्षाओं और क्लेषों और मृत्यु तक परखे जाने पर भी आपके साथ खड़ा रहेगा, और आपको विजयी करेगा - मसीह यीशु का प्रेम।"

   एक मिशनरी प्रचरक ने कहा, "क्या मैं यह कार्य पसन्द करता हूँ? जी नहीं; मुझे और मेरी पत्नि को गन्दगी बिलकुल पसन्द नहीं है। हम सम्भ्रांत संसाकारों वाले हैं, किंतु यदि कोई जन किसी बात को पसन्द नहीं करता हो तो क्या उसे मसीह यीशु के लिए वह बात करनी नहीं चाहिए? परमेश्वर ही ऐसे मनुष्य पर दया करे, जो केवल अपनी पसन्द के अनुसार ही परमेश्वर के लिए कार्य करना चाहता हो। परमेश्वर की सेवकाई में पसन्द-नापसन्द का कोई स्थान नहीं है। परमेश्वर ने हमें आज्ञा दी है कि जाओ, हमें बस उसके कहे गए स्थान को जाना है, और हम जाते हैं। मसीह का प्रेम हमें इस के लिए विवश करता है।"

   हो सकता है कि हम खतरनाक अथवा नापसन्द परिस्थियों में कार्य ना कर रहे हों, किन्तु जो भी कार्य उसने हमें करने के लिए दिया है उस की अपनी विशिष्ट कठिनाईयाँ हो सकती हैं। हमारी परीक्षाओं और कठिनाईयों में हमें केवल मसीह का प्रेम ही सतत कार्यरत रहने की प्रेरणा तथा सामर्थ दे सकता है। - रिचर्ड डी हॉन

मसीह की सेवा नियम एवं विधान के अन्तर्गत करना कर्तव्य मात्र है; किंतु प्रेम के आधीन हो कर करना आनन्द है।

क्‍योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है, इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्‍तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - २ कुरिन्थियों ५:१४, १५

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ६:१-१०
2Co 6:1  और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुगंह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो।
2Co 6:2  क्‍योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी उद्धार का दिन है।
2Co 6:3  हम किसी बात में ठोकर खाने का कोई भी अवसर नहीं देते, कि हमारी सेवा पर कोई दोष न आए।
2Co 6:4  परन्‍तु हर बात में परमेश्वर के सेवकों की नाई अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्‍लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से।
2Co 6:5  कोड़े खाने से, कैद होने से, हुल्लड़ों से, परिश्रम से, जागते रहने से, उपवास करने से।
2Co 6:6  पवित्रता से, ज्ञान से, धीरज से, कृपालुता से, पवित्र आत्मा से।
2Co 6:7  सच्‍चे प्रेम से, सत्य के वचन से, परमेश्वर की सामर्थ से; धामिर्कता के हथियारों से जो दाहिने, बाएं हैं।
2Co 6:8  आदर और निरादर से, दुरनाम और सुनाम से, यद्यपि भरमाने वालों के ऐसे मालूम होते हैं तौभी सच्‍चे हैं।
2Co 6:9  अनजानों के सदृश्य हैं, तौभी प्रसिद्ध हैं; मरते हुओं के ऐसे हैं और देखों जीवित हैं; मार खाने वालों के सदृश हैं परन्‍तु प्राण से मारे नहीं जाते।
2Co 6:10  शोक करने वाले के समान हैं, परन्‍तु सर्वदा आनन्‍द करते हैं; कंगालों के जैसे हैं, परन्‍तु बहुतों को धनवान बना देते हैं; ऐसे हैं जैसे हमारे पास कुछ नहीं तौभी सब कुछ रखते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • होशे १२-१४ 
  • प्रकाशितवाक्य ४