ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 1 अप्रैल 2012

परमेश्वर को आपका प्रयोजन है

   अपने पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले प्रभु यीशु यरूशलेम आए। यरूशलेम में अपने प्रवेश की शाही सवारी के लिए उन्होंने एक गधे को चुना। उन्होंने अपने चेलों को निर्देष दिए कि वह गधा उन्हें कहां से मिलेगा, और यह भी कहा कि यदि कोई पूछे कि वे गधे को कहां ले जा रहे हैं तो उत्तर में कहें कि "...प्रभु को इस का प्रयोजन है और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा" (मरकुस ११:३)। कितनी विचित्र बात है कि अपने प्रयोजन के लिए परमेश्वर के पुत्र को इतने साधारण साधन की आवश्यक्ता थी। एलेक्ज़ैंडर मैकलैरन ने इस बात पर अपनी टिप्पणी में कहा: "मसीह हमारे पास भी इसी प्रकार से आता है। वह हमारे सारे बहानों को अनसुना करके हम से कहता है, ’मुझे तुम्हारा प्रयोजन है, यही काफी है।’ "

   ज़रा सोचिए! सृष्टि के सृष्टिकर्ता को हमारा प्रयोजन है और वह अपनी अनन्तकालीन योजना में हमें सम्मिलित करना चाहता है। यद्यपि वह सर्वसामर्थी है और किसी सृजे गए प्राणी का मोहताज नहीं है, फिर भी अपनी योजनाओं की पूर्ति के लिए उसने हम जैसे तुच्छ मनुष्यों को चाहा है; उन मनुष्यों को जो ना उसे जानते हैं, ना उसका आदर करते हैं और ना ही उसके आज्ञाकारी रहे हैं, वरन सब अपनी अपनी लालसाओं और अभिलाषाओं में अपनी अपनी राह चलते रहे हैं। किंतु वह हमारी ओर अपने अनुग्रह का हाथ बढ़ा कर कहता है, "मुझे तुम्हारा प्रयोजन है; मैं तुम्हें अपने कार्य के योग्य और सक्षम बनाऊंगा, मेरी ओर लौट आओ।" यदि इस संसार में उसे हमारी आवश्यक्ता नहीं होती तो वह हमें पाप से भरे संसार में छोड़ता भी नहीं। जैसे ही हम पश्चाताप, पापों की क्षमा और प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा उद्धार पाते, वह हमें संसार के दुख और क्लेषों से उठाकर अपने पास स्वर्ग के अनन्त आनन्द में बैठा लेता। किंतु संसार के लिए उसकी योजना है, जिसकी पूर्ति के लिए उसे समर्पित कार्यकर्ता चाहिएं जो उसकी आज्ञानुसार उसके लिए कार्य करें।

   किसी ने असीसि के फ्रांसिस से पूछा कि वह परमेश्वर के लिए इतना कुछ कैसे करने पाए? फ्रांसिस ने उत्तर दिया, "शायद इसका यह कारण हो: परमेश्वर ने स्वर्ग से देखा और ढूंढ़ा कि संसार का सबसे कमज़ोर और छोटा व्यक्ति कौन है? तब उसकी निगाह मुझ पर पड़ी, और वह बोला मुझे वह मिल गया। अब इसमें होकर मैं कार्य करूंगा और यह घमण्डी नहीं होगा; यह इस बात का एहसास रखेगा कि मैं उसे केवल उसके तुच्छ और गौण होने के कारण ही प्रयोग कर पा रहा हूँ, उसकी अपनी किसी हैसियत, योग्यता या सामर्थ के कारण नहीं।"

   हो सकता है कि आप अपनी और संसार की नज़रों में छोटे और महत्वहीन हों, परन्तु परमेश्वर के लिए आप बहुत महत्वपुर्ण और उपयोगी हैं; इतने महत्वपूर्ण कि उसने आप के लिए अपने पुत्र को मरने भेज दिया जिससे आपका उसके साथ मेल-मिलाप हो सके। वह आज भी आपकी प्रतीक्षा में है कि आप उसकी ओर मुड़ें, समर्पण करें और वह आपको अपने लिए सक्षम बनाए।

   परमेश्वर को आपका प्रयोजन है, क्या आप परमेश्वर के लिए उपलब्ध हैं? - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर अपने असाधारण कार्यों के लिए साधारण मनुष्यों को ढूंढ़ता है।
 
यदि तुम से कोई पूछे, यह क्‍यों करते हो तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा। - मरकुस ११:३
 
बाइबल पाठ: मरकुस ११:१-७
Mar 11:1   जब वे यरूशलेम के निकट जैतून पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्याह के पास आए, तो उस ने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा।
Mar 11:2  कि अपने साम्हने के गांव में जाओ, और उस में पंहुचते ही एक गदही का बच्‍चा जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बन्‍धा हुआ तुम्हें मिलेगा, उसे खोल लाओ।
Mar 11:3  यदि तुम से कोई पूछे, यह क्‍यों करते हो तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा।
Mar 11:4  उन्‍होंने जाकर उस बच्‍चे को बाहर द्वार के पास चौक में बन्‍धा हुआ पाया, और खोलने लगे।
Mar 11:5  और उन में से जो वहां खड़े थे, कोई कोई कहने लगे कि यह क्‍या करते हो, गदही के बच्‍चे को क्‍यों खोलते हो?
Mar 11:6  उन्‍होंने जैसा यीशु ने कहा था, वैसा ही उन से कह दिया; तब उन्‍होंने उन्‍हें जाने दिया।
Mar 11:7  और उन्‍होंने बच्‍चे को यीशु के पास लाकर उस पर अपने कपड़े डाले और वह उस पर बैठ गया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १३-१५ 
  • लूका ६:२७-४९

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें