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गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

सच्ची गलती

   मैं परेशानी में था। मैं घर के लिए खरीददारी करने एक दुकान में आया हुआ था, मेरे हाथ में मेरी पत्नी के द्वारा खरीदने की वस्तुओं की सूची थी, और मैं दुकान की अल्मारियों और शेल्फ से सुची के अनुसार चीज़ें लेकर अपने साथ रखता जा रहा था। अब एक चीज़ पर आकर मैं अटक गया था। सूची में लिखा था "सोया", और मेरे सामने दुकान में "सोया" के अनेक प्रकार और "सोया" से बनी कई वस्तुएं पड़ीं थीं, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरी पत्नी का तात्पर्य किस "सोया" से था। मैंने वहां कार्य करने वाले एक कर्मचारी से भी सहायता के लिए पूछा, फिर अपनी समझ के अनुसार "सोया सौस" उठाया और आगे चल दिया। घर पहुंच कर ही मुझे मालूम पड़ा कि मेरी पत्नी को "सोया सौस" की नहीं, वरन हमारी पोती के लिए "सोया दूध" की आवश्यकता थी। लेकिन अब तो बहुत देर हो चुकी थी।

   मैं अपने प्रयास में सच्चा था, मैंने असमंजस के समय सहायता भी ली, और मैंने जो निर्णय लिया वह मेरी समझ में सही भी था, लेकिन फिर भी मैं गलत था। किंतु अब मेरी इस गलती के एहसास से ना मुझे कोई लाभ था और ना ही मेरी पोती के लिए मेरा यह एहसास किसी रीति से उपयोगी था। यदि मैंने अपने असमंजस के समय दुकान के कर्मचारी की बजाए अपनी पत्नि से सहायता ली होती और अपनी समझ का सहारा लेने की बजाए, जिसके लिए मैं दुकान में था उससे पूछा होता, तो बात कुछ और होती और यह गलती होने से पहले ही सुधर जाती।

   ऐसी ही "सच्ची गलतीयाँ" आज संसार में अनेकों लोग कर रहे हैं। वे इस पृथ्वी की अपनी यात्रा में स्वर्ग का मार्ग ढूंढ़ रहे हैं, किंतु जो उन्हें स्वर्ग पहुँचा सके उसे पहिचान और मान नहीं रहे हैं। उनकी लालसा सच्ची है, उनके प्रयास खरे हैं, वे सच्चे मन से अपनी नज़रों में सही लगने वालों से सहायता भी ले रहे हैं, लेकिन फिर भी वे गलत हैं। उस दुकान में मेरे ही समान करी गई गलती को वे भी दोहरा रहे हैं, सच्चे परमेश्वर को पुकारने की बजाए, वे भी अपनी समझ का ही सहारा ले रहें; धर्म और धर्म के कामों, दान-पुण्य, तीर्थ यात्रा और भले कार्यों, रीति-रिवाज़ों के पालन इत्यादि के द्वारा वे वहाँ पहुंचना चाहते हैं जहाँ का इन बातों से कोई सरोकार ही नहीं है। उनकी इस गलती का परिणाम भी उनके लिए, मेरी गलती के परिणाम के समान ही होगा - जब हकीकत का एहसास होगा और सच्चाई सामने आएगी, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी; गलती का एहसास किसी लाभ का नहीं होगा और गलती पलटी नहीं जा सकेगी।

   प्रभु यीशु ने कहा, "मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना १४:६)। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के और इस बात के सम्दर्भ में लिखा है कि, "और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें" (प्रेरितों ४:१२)।

   किसी अन्य या अन्य बात पर विश्वास करने की "सच्ची गलती" ना करें; केवल प्रभु यीशु ही है जिसने आप के पापों का दण्ड अपने ऊपर ले लिया और उनके प्रायश्चित के लिए अपनी जान दे दी। केवल वही है जो कहता है "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्रम दूंगा" (मत्ती ११:२८)। केवल वही है जिसके लिए लिखा है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा वह नाश ना होगा वरन अनन्त जीवन पाएगा (यूहन्ना ३:१६)।

    प्रभु यीशु को अपना के आज ही अपना भविष्य सुनिश्चित कर लें। - डेव ब्रैनन


स्वर्ग का एकमात्र मार्ग प्रभु यीशु ही है।
और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों ४:१२
बाइबल पाठ: यूहन्ना १४:१-६
Joh 14:1  तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
Joh 14:2  मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
Joh 14:3  और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपके यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
Joh 14:4  और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
Joh 14:5  थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
Joh 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल १९-२१ 
  • लूका ११:२९-५४

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