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मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

खामोशी

   कभी कभी किसी झूठे दोषारोपण के लिए खामोशी ही सही प्रत्युत्तर होता है, और कभी कभी किसी बात के लिए खामोश रहना अनुचित होता है। 
   जब प्रभु यीशु को धर्मसभा के सामने ला कर खड़ा किया गया और उसपर दोष मढ़े गए तो वह खामोश रहा (मरकुस १४:५३-६१)। वह जानता था कि उस परिस्थिति में अपना बचाव करना व्यर्थ है क्योंकि अधिकारी तो उसे दोषी ठहराकर उस का दण्ड निर्धारित भी कर चुके थे, जो चल रहा था वह उस दण्ड के निर्णय को लागू करने से पहले करी जाने वाली मात्र औपचारिकता थी, वहां उसे अपनी कोई सफाई देने का अवसर नहीं दिया जा रहा था और ना ही दण्ड के बदले जाने की कोई संभावना थी। खामोश रहकर वह यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उसके विष्य में करी गई भविष्यवाणी "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह ५३:७) भी पूरी कर रहा था। किंतु इसी प्रभु यीशु ने, इन्हीं धर्मशास्त्रियों को उनके झूठ और दोषारोपण के लिए लताड़ा भी था, और उन्हें चुनौती भी दी थी कि उसमें कोई पाप साबित कर के दिखा दें (यूहन्ना ८:१३-५९)।

   एक पास्टर ने अपने चर्च के कार्य से इस्तीफा दे दिया क्योंकि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके बारे में गलत बातें चर्च मण्डली में फैलाईं थीं। उस पास्टर का मानना था कि उन परिस्थितियों में उसका अपनी प्रतिरक्षा करना उसके मसीही विश्वास के आचार के विरुद्ध होता। कभी कभी ऐसा होता है, किंतु उस परिस्थिति में बेहतर होता कि वह पास्टर स्वभाव ही से बखेड़ा खड़ा करने वाले उन लोगों का सामना करता, उनके झूठे आरोपों की पोल खोलता और अपना इस्तीफा देने की बजाए उन लोगों को चर्च के सामने गलती मानने या फिर अनुशासन का सामना करने में से एक चुनने को कहता।

   खामोश रहना गलत करने वालों को गलती करते रहने के लिए प्रोतसाहित भी कर सकता है। किंतु यदि हम केवल अपने आहत अहम के बचाव के लिए या मनुष्यों में अपनी महत्वता को प्रमाणीत करने के लिए ही प्रत्युत्तर देना चाहते हैं, तो मौन रहना और परमेश्वर के समय और न्याय की प्रतीक्षा करना ही बेहतर है।

   क्या आप पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है? यदि आप को लगता है कि प्रत्युत्तर देना व्यर्थ है, या आपका प्रत्युत्तर आपके चोट खाए अहम की रक्षा ही के अन्तर्गत है, तो परमेश्वर से सहने का अनुग्रह मांगें और खामोश रहें। परन्तु यदि आप समझते हैं कि गलत करने वालों को और उनकी गलती को सुधारने या किसी अन्याय को सुधारने का आपके पास उचित अवसर है तो उसके लिए परमेश्वर से सामर्थ और सदबुद्धि मांग कर अवश्य ही अपनी खामोशी तोड़िए और उचित कार्यवाही कीजिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


खामोशी बहूमूल्य होती है; यदि आप बात को सुधार नहीं सकते तो खामोशी को बनाए रखिए।
तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है? - मरकुस १४:६०-६१
बाइबल पाठ: मरकुस १४:५३-६५
Mar 14:53  फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए, और सब महायाजक और पुरिनए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए।
Mar 14:54  पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा।
Mar 14:55  महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली।
Mar 14:56 क्‍योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी।
Mar 14:57  तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी।
Mar 14:58 कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो।
Mar 14:59  इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली।
Mar 14:60 तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?
Mar 14:61 परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?
Mar 14:62  यीशु ने कहा, हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।
Mar 14:63 तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है?
Mar 14:64 तुम ने यह निन्‍दा सुनी: तुम्हारी क्‍या राय है? उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
Mar 14:65 तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूंसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १-२ 
  • लूका १४:१-२४

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