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Saturday, June 30, 2012

बचाए गए

   दक्षिणी अफ्रीका के अखबार The Cape Times में छपी एक खबर के अनुसार एक दक्षिणी अफ्रीकी आदमी ने अचानक आकर उसका घर लूटने आए हुए ९ चोरों को चकित कर दिया और उन में से ७ भाग खड़े हुए, लेकिन शेष दो को घर के मालिक ने अपने घर के पिछवाड़े में बने स्विमिंग पूल में धकेल दिया। यह देख कर कि उन में से एक चोर को तैरना नहीं आता, घर मालिक का मालिक स्विमिंग पूल में कूदा और उसे डूबने से बचा लिया। स्विमिंग पूल से बाहर निकलने पर उस चोर ने अपने बाकी साथियों को आवाज़ लगाई और अपने बचाने वाले पर चाकू लगाकर उसे धमकाने लगा। घर के मालिक ने बताया, "क्योंकि हम उस समय पूल के किनारे ही खड़े थे, इसलिए मैं ने उसे फिर से पूल में धक्का दे दिया। लेकिन फिर से उसे डूबने से बचने के लिए फड़फड़ाता देख मुझ से रहा नहीं गया और मैं ने पानी में कूद कर फिर से उसे बचा लिया।"

   परमेश्वर के वचन में कुलुस्सियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस प्रेरित एक और बचाए जाने का वर्णन करता है: कैसे पिता परमेश्वर ने उन विश्वासियों को अंधकार के राज्य से छुड़ा लिया। इस बात के लिए पौलुस लिखता है कि: "पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों। उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ा कर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया" (कुलुस्सियों १:१२-१३); अर्थात मसीही विश्वासी शैतान के राज्य से छुड़ाए जाकर, अन्धकार की शक्तियों से स्वतंत्र होकर, मसीह यीशु के शांति के राज्य में स्वतंत्रता से रहने के लिए लाए गए हैं। प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनरूत्थान के द्वारा मसीही विश्वासी ज्योति के राज्य के स्वतंत्र नागरिक बन गए।

   ऐसे अद्भुत अनुग्रह के लिए परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ रहने के संबंध में इब्रानियों का लेखक लिखता है: "इस कारण हम इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिस के द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिस से वह प्रसन्न होता है" (इब्रानियों १२:२८)।

   हम जो पाप और अनन्त अन्धकार के साम्राज्य से परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा बचाए गए हैं, हमारा कर्तव्य है कि हम सदा भय और भक्ति सहित परमेश्वर को ग्रहण योग्य आराधना और सेवकाई अर्पित करते रहें। - मार्विन विलियम्स


क्रूस के द्वारा प्रभु यीशु ने उपद्रवी और बैरियों को बचाया और स्वतंत्र किया, पाप के दण्ड से उनका उद्धार किया।

उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ा कर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। - कुलुस्सियों १:१३

बाइबल पाठ: - कुलुस्सियों १:१२-२३
Col 1:12  और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों।
Col 1:13  उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ा कर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14  जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
Col 1:15  वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Col 1:16  क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुतांए, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Col 1:17  और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्‍तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Col 1:18  और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Col 1:19  क्‍योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।
Col 1:20  और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप करके, सब वस्‍तुओं को उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्‍वर्ग में की।
Col 1:21  और उस ने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे।
Col 1:22  ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे।
Col 1:23  यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया? और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब १७-१९ 
  • प्रेरितों १०:१-२३

Friday, June 29, 2012

उद्देश्य

   एक परंपरा के अनुसार, जब प्रेरित पौलुस को सन ६७ में सिर कलम कर के मृत्युदण्ड दिया गया तो उसके बाद उसके शरीर को रोम ही में दफना भी दिया गया। सन २००९ में वैज्ञानिकों ने उसके शरीर के कई संभावित अवशेषों पर परीक्षण किए, जिनसे यह तो पता चला कि वे अवशेष प्रथम या दुसरी शताब्दी के हैं, लेकिन यह प्रमाणित नहीं हुआ कि उन में से कोई भी अवशेष पौलुस ही का है। लेकिन इस से कोई फर्क नहीं पड़ता, पौलुस की अस्थियां चाहे जहां भी हों, उसका दिल तो हमारे साथ है - परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी उसकी पत्रियों के रूप में।

   मारे जाने से पहले, जब वह रोम में कैद में था, तब पौलुस ने फिलिप्पियों के मसीही विश्वासियों को अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में लिखा था। उसने लिखा, "मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं। क्‍योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों १:२०-२१)।

   आज भी पुलुस के ये शब्द हमें अपने हृदयों को जांचने की चुनौती देते हैं; क्या मसीह यीशु के लिए हमारा प्रेम भी उस के प्रेम के समान है? क्या हमारे जीवन का उद्देश्य भी प्रतिदिन और हर परिस्थिति में अपने प्रभु को आदर देते रहना है, जैसा उसका था? हमारे संसार से कूच कर जाने के बाद संसार या हमारे सगे-संबंधी हमें किस बात के लिए स्मरण करेंगे?

   हमारा उद्देश्य और प्रयास होना चाहिए कि पौलुस के समान हम भी आशा और प्रोत्साहन देने वाली एक ऐसी विरासत छोड़ जाएं जो मसीह यीशु पर आधारित हो और हमारे पीछे भी बहुतों को प्रोत्साहित करती रहे, उन का मार्गदर्शन करती रहे। - डेविड मैक्कैसलएंड


जो हमारे जीवनों को पढ़ते हैं, हम उन के लिए मसीह की पत्रियां हैं।

मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं। - फिलिप्पियों १:२०

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:१२-२१
Php 1:12  हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।
Php 1:13  यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।
Php 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।
Php 1:15  कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।
Php 1:16  कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।
Php 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्‍पन्न करें।
Php 1:18 सो क्‍या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्‍चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।
Php 1:19 क्‍योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा।
Php 1:20  मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं।
Php 1:21  क्‍योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब १४-१६ 
  • प्रेरितों ९:२२-४३

Thursday, June 28, 2012

विषाक्त जीवन

   अमेरिका के ओक्लोहोमा प्रांत का पिचर नगर अब नहीं रहा। मध्य-२००९ में २०,००० की आबादी वाला यह व्यवसायिक नगर बरबाद हो गया। २०वीं श्ताबदी के आरंभ में पिचर बहुतायत का नगर था, क्योंकि वहां की धरती में सीसा और जस्ता पाया जाता था और दोनो विश्वयुद्धों में अमेरिका के हथियार बनाने के उद्योग को इन दोनो ही खनीज़ों की आवश्यक्ता थी। मज़दूर वहां की खानों में काम करते और अयस्क को निकालते थे, खानों के मालिक भरपूरी से पैसा कमाते थे।

   कुछ समय बाद जब धरती से सीसा और जस्ता समाप्त होने लगे तो नगर की अर्थव्यवस्था भी बैठने लगी और नगर शिथिल पड़ने लगा। लेकिन सबसे बड़ी समस्या, जो नगर की बरबादी का कारण बनी, वह थी प्रदूषण। जो बात नगर की उन्नति का कारण बनी, वही उसके पतन का भी कारण बन गई। नगर के व्यवसाय और भरपूरी के समय में सीसा और जस्ता निकालते समय होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसका निवारण करने की सुद्धि किसी ने नहीं ली; फलस्वरूप खानों के खाली होते होते, पिचर नगर और उसके आस-पास का इलाका एक विषाक्त मरुस्थल बन गया और अन्ततः सरकार को उसे विषाक्त तथा रहने के लिए अयोग्य घोषित करके, उसे बन्द कर देना पड़ा।

   जो पिचर के साथ हुआ, वही लोगों के साथ भी हो सकता है। संपन्नता इतनी मनमोहक हो सकती है कि उसके संभावित दुषपरिणामों की ओर ध्यान भी नहीं जाता, और सफलता तथा संपन्नता के नशे में ऐसे शारीरिक और आत्मिक कार्य बड़ी लापरवाही से स्वीकार कर लिए जाते हैं जो आते समयों में जीवन में गंभीर परेशानियां उत्पन्न करते हैं। यदि समय रहते इन दुषपरिणामों का उपाय नहीं किया जाता, तो अन्त बरबादी ही होता है।

   यही इस्त्राएल के प्रथम राजा, शाऊल के साथ भी हुआ। उसका आरंभ एक अच्छे राजा के रूप में था, लेकिन सफलता की लालसा में उसने पहले परमेश्वर कि आज्ञाकारिता फिर परमेश्वर की चेतावनियों, अन्ततः अपने किए के दुषपरिणामों को भी नज़रंदाज़ किया। वह परमेश्वर से विमुख हो गया, उसने "मूर्खता का काम" किया (१ शमूएल १३:१३) और अपना राजपद गंवा बैठा (पद १४)।

   सफल होने के अपने प्रयासों और लालसाओं में हमें भी यह ध्यान रखना चाहिए कि कहीं हम परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं को नज़रंदाज़ करके अपने जीवन में आत्मिक प्रदूषण तो उत्पन्न नहीं कर रहे जो आगे चल कर हमें परमेश्वर से विमुख करके हमारी बरबादी का कारण बन जाएगा। परमेश्वर के भय और आज्ञाकारिता में जीना ही विषाक्त जीवन का उपाय और निवार्ण है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के बिना कोई भी सही अर्थ में सफल नहीं हो सकता।


शमूएल ने शाऊल से कहा, तू ने मूर्खता का काम किया है; तू ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना; नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता। - १ शमूएल १३:१३

बाइबल पाठ: १ शमूएल १३:७-१४
1Sa 13:7  और कितने इब्री यरदन पार होकर गाद और गिलाद के देशों में चले गए, परन्तु शाऊल गिलगाल ही में रहा, और सब लोग थरथराते हुए उसके पीछे हो लिए।
1Sa 13:8  वह शमूएल के ठहराए हुए समय, अर्थात सात दिन तक बाट जोहता रहा; परन्तु शमूएल गिलगाल में न आया, और लोग उसके पास से इधर उधर होने लगे।
1Sa 13:9  तब शाऊल ने कहा, होमबलि और मेलबलि मेरे पास लाओ। तब उस ने होमबलि को चढ़ाया।
1Sa 13:10  ज्योंही वह होमबलि को चढ़ा चुका, तो क्या देखता है कि शमूएल आ पहुंचा, और शाऊल उस से मिलने और नमस्कार करने को निकला।
1Sa 13:11  शमूएल ने पूछा, तू ने क्या किया? शाऊल ने कहा, जब मैं ने देखा कि लोग मेरे पास से इधर उधर हो चले हैं, और तू ठहराए हुए दिनों के भीतर नहीं आया, और पलिश्ती मिकमाश में इकट्ठे हुए हैं,
1Sa 13:12  तब मैं ने सोचा कि पलिश्ती गिलगाल में मुझ पर अभी आ पड़ेंगे, और मैं ने यहोवा से बिनती भी नहीं की है; सो मैं ने अपनी इच्छा न रहते भी होमबलि चढ़ाया।
1Sa 13:13  शमूएल ने शाऊल से कहा, तू ने मूर्खता का काम किया है; तू ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना; नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता।
1Sa 13:14  परन्तु अब तेरा राज्य बना न रहेगा; यहोवा ने अपने लिये एक ऐसे पुरूष को ढूंढ़ लिया है जो उसके मन के अनुसार है; और यहोवा ने उसी को अपनी प्रजा पर प्रधान होने को ठहराया है, क्योंकि तू ने यहोवा की आज्ञा को नहीं माना।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ११-१३ 
  • प्रेरितों ९:१-२१

Wednesday, June 27, 2012

प्यास

   क्या आप कभी वास्तव में प्यासे, बहुत प्यासे हुए हैं? बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं पश्चिमी अफ्रीका के माली देश में अपनी बहन कैथी से मिलने गई। एक दिन घूमने फिरने के बाद जब दोपहर में तापमान १००  डिगरी फैरन्हाइट से भी अधिक हो गया था, मुझे बहुत प्यास लगी और मैंने अपनी बहन से पानी मांगा। तब कैथी ने उत्तर दिया कि वह फिलटर किया हुआ पानी तो लाना भूल ही गई। मैं प्यास से परेशान होने लगी, और घर पहुंचने में जितना समय बीतता जा रहा था, प्यास के कारण मुझे मर जाने का भय और मेरी बेचैनी बढ़ते जा रहे थे।

   अचानक कैथी ने कहा, "मुझे पता है कि हमें कहां जाना चाहिए" और एक दूतावास में गाड़ी मोड़ ली। उस दूतावास के अन्दर आते ही मेरे सामने एक अति सुन्दर दृश्य था - पीने के पानी का एक कूलर। मैंने वहां रखे छोटे प्याले को लिया और कूलर से उसे भर भर के स्वच्छ ठंडा पानी पीने लगी, और पीती रही जब तक मेरी प्यास बुझ नहीं गई। मेरा शरीर बहुत देर से पानी के बिना था, और अब पानी की कमी को पूरी करने के लिए उसे बहुत पानी की आवश्यक्ता पड़ी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के लिए अपनी आत्मिक प्यास को शारीरिक प्यास से समझाया है: "जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?" (भजन ४२:१-२)। उसकी परमेश्वर के लिए लालसा एक तीव्र प्यास के समान था जिसका निवारण केवल परमेश्वर की उपस्थिति में होने के द्वारा ही संभव था।

   क्या आप में भी कोई ऐसी कोई प्यास है जो यह संसार और संसार की बातें बुझा नहीं पा रहे हैं? यदि हां, तो परमेश्वर के लिए यह आपकी आत्मा की प्यास है। केवल परमेश्वर ही है जो इस आत्मा की प्यास को बुझा सकता है, "क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है" (भजन १०७:९); उसी के पास जाईए, संतुष्टि केवल उसी के पास मिलेगी। - सिंडी हैस कैस्पर


केवल जीवन का जल, प्रभु यीशु, ही आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। - भजन ४२:१

बाइबल पाठ: भजन ४२:१-११
Psa 42:1  जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।
Psa 42:2  जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?
Psa 42:3  मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं, और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:4  मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
Psa 42:5  हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psa 42:6  हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।
Psa 42:7  तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
Psa 42:8  तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psa 42:9  मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
Psa 42:10  मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:11  हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ८-१० 
  • प्रेरितों ८:२६-४०

Tuesday, June 26, 2012

दोषी

   एक व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन पत्र भर रहा था। उस पत्र में एक प्रश्न आया "क्या आप कभी गिफ्तार हुए हैं?" उस व्यक्ति ने उत्तर भरा "नहीं"; इससे अगला प्रश्न था "किस कारण से?" यह उन लोगों के लिए था जिन्होंने गिरफ्तारी के लिए उत्तर "हाँ" में दिया हो; लेकिन इस व्यक्ति ने इस बात का ध्यान रखे बिना वहां अपना उत्तर भर दिया "क्योंकि कभी पकड़ा नहीं गया"। उसका यह उत्तर इस बात का प्रमाण था कि वह जानता था कि चाहे वह गिरफ्तार ना भी हुआ हो, तो भी वह दोषी तो है।

   यही स्थिति प्रेरित पौलुस की थी। वह जानता था कि उसने गलतियां और परमेश्वर के विरुद्ध पाप किए हैं। इसीलिए वह लिखता है "मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था..."  (१ तिमुथियुस १:१३); और फिर वह अपने आप को "सबसे बड़ा पापी" बताता है (पद १५)।

   हम में से प्रत्येक मसीही विश्वासी यह भली भांति जानता है कि एक समय हम भी अपने पापों और अपराधों के कारण परमेश्वर से दूर और परमेश्वर के बैरी थे (रोमियों ५:१०; कुलुस्सियों १:२१), लेकिन जब हमने अपने पाप मान लिए, प्रभु यीशु को समर्पण के साथ उससे उन पापों की क्षमा मांग ली तो उसने हमें क्षमा किया और सब पापों के दोष से मुक्त किया, शुद्ध किया और एक नया जीवन दिया - मानो हमारा "नया जन्म" हो गया।

   हम मसीही विश्वासियों में से वे जो बहुत वर्षों से प्रभु के इस अनुग्रह में जी रहे हैं संभवतः यह भूल बैठे हों कि प्रभु यीशु ने हमें हमारी किस दशा से छुड़ाया था। इसीलिए प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपने जीवन की गवाही दुसरों के साथ बांटते रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना ना केवल हमें दीन और नम्र रखता है, वरन हमें शैतान पर विजयी भी रखता है (प्रकाशितवाक्य १२:११)। जब हम अपनी पिछली तथा वर्तमान गलतियों का स्मरण बनाए रखते हैं और उनके लिए परमेश्वर से मिले अनुग्रह और क्षमा का बयान करते रहते हैं, तो हमारे अन्दर स्वधार्मिकता या अन्य किसी घमण्ड की कोई संभावना नहीं रहती। साथ ही जिनके सामने हम अपने जीवन और जीवन में हुए प्रभु के कार्य की गवाही रखते हैं, वे भी हमें किसी भी अन्य साधारण सामन्य मनुष्य ही के समान जानने पाते हैं ना कि किसी बहुत "धर्मी और पहुंच से परे" धर्मात्मा या किसी पाखंडी के समान, और देख-समझ पाते हैं कि परमेश्वर की क्षमा और अनुग्रह कैसे किसी के जीवन को बदल देता है।

   कड़ुवा सच यही है कि हम सब परमेश्वर के दोषी हैं, बहुतायत से दोषी हैं; लेकिन साथ ही इस कड़ुवे सच का एक मधुर पहलू भी है - परमेश्वर की क्षमा और अनुग्रह प्रत्येक दोषी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। आवश्यक्ता है प्रभु यीशु में विश्वास की, उसे ग्रहण कर लेने और उसकी क्षमा तथा अनुग्रह को जीवन में लागू कर लेने की; "...यीशु मसीह का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है" (१ युहन्ना १:७)। - ऐनी सेटास


जो सर्वथा अयोग्य हों उनके लिए सब कुछ उपलब्ध करा देना ही अनुग्रह है।

और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। - १ तिमुथियुस १:१४

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस १:१२-१७
1Ti 1:12  और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिस ने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं कि उस ने मुझे विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया।
1Ti 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्‍योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे।
1Ti 1:14  और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ।
1Ti 1:15  यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं।
1Ti 1:16 पर मुझपर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्‍त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं।
1Ti 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ५-७ 
  • प्रेरितों ८:१-२५

Monday, June 25, 2012

सही लोग

   एक फिल्म "मिरेकल" १९८० में अमेरिका की बर्फीले मैदान पर खेले जाने वाले हॉकी के खेल में अप्रत्याशित स्वर्ण पदक की ओर बढ़ते दल की सच्ची कहानी दिखाती है। कहानी के आरंभ में दल के मुख्य प्रशिक्षक हर्ब ब्रुक्स को अपने दल के लिए खिलाड़ियों का चुनाव करते हुए दिखाया है। जब वह अपने सहायक प्रशीक्षक, क्रेग पैट्रिक को अपने द्वारा चुने हुए खिलाड़ियों की सूची देता है, तो क्रेग विस्मित होकर कहता है, "आप ने कुछ सबसे अच्छे खिलाड़ियों को तो चुना ही नहीं है।" तब ब्रुक उसको उत्तर देता है, "क्रेग, मैं सबसे अच्छे नहीं केवल सबसे सही खिलाड़ियों की तलाश में हूँ।"

   ब्रुक्स जानते थे कि किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत प्रतिभा, पूरे दल को केवल एक सीमा तक ही ले जा सकती है; किंतु अपनी प्रतिभा से ऊपर उठकर अपने प्रशीक्षक की इच्छा के अनुसार खेलना दल की सहयोग-भावना और एकमनता को बनाए रखने और जीतने का अवसर देने के लिए अनिवार्य है। ब्रुक के लिए पूरे दल की सफलता किसी की व्यक्तिगत प्रतिभा से अधिक महत्वपूर्ण थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर की सेवकाई के लिए दी गई बुलाहट के बारे में भी कुछ ऐसा ही ज़ोर है। परमेश्वर की योजना में, प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपना अपना व्यक्तिगत कार्य तो करना है, परन्तु नतीजे सामूहिक हैं। प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर की आत्मा के द्वारा मण्डली के सदस्यों को दिए जाने वाले विभिन्न आत्मिक वरदानों में के विष्य में लिखा, "किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है" (१ कुरिन्थियों १२:७)। जब हम परमेश्वर द्वारा हमें दी गई प्रतिभा का उसकी इच्छानुसार सदुपयोग करते हैं, तो उसके उद्देश्य पूरे होते हैं और उसे महिमा मिलती है।

   परमेश्वर की सेवकाई में महत्व व्यक्तिगत रीति से ना सबसे उत्तम होने का है, ना सबसे अधिक प्रतिभावान होने का और ना ही सबसे अधिक गुण्वन्त होने का है; महत्व है सही व्यक्ति होने का, ऐसा व्यक्ति जो व्यक्तिगत उपलब्धी और ख्याति के लिए महत्वकांक्षी ना हो वरन परमेश्वर की देह अर्थात उसकी मण्डली में परमेश्वर द्वारा निर्धारित स्थान पर ही विनम्रता और आज्ञाकारिता में रहने तथा मण्डली के अन्य लोगों के साथ मिलकर मण्डली के सामूहिक उत्थान के लिए कार्य करने को तत्पर और तैयार हो। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में कोई जन महत्वहीन नहीं है।

परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। - १ कुरिन्थियों १२:१८

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:७-१८
1Co 12:7  किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है।
1Co 12:8  क्&#