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Tuesday, July 31, 2012

धन्य लोग


   अपने पुनरुत्थान के दिन प्रभु यीशु ने अपने चेलों को दर्शन दिए और उन्हें कीलों से छिदे अपने हाथ तथा पांव दिखाए। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे वृतांत से हमें पता लगता है कि यह अद्भुत बात उनको विश्वास से परे प्रतीत हुई (लूका २४:४०-४१), आनन्द के मारे चेलों को विश्वास ही नहीं हुआ। जब प्रभु यीशु ने चेलों को दर्शन दिए उस समय एक चेला, थोमा, वहां उपस्थित नहीं था; जब उसे प्रभु के पुनरुत्थान का पता चला तो उसे भी विश्वास करने में कठिनाई हुई। बाद में जब प्रभु यीशु थोमा की उपस्थिति में चेलों के समक्ष आए तो उन्होंने थोमा से कहा कि वह अपनी इच्छानुसार उनके हाथों और पैरों के घावों में तथा पंजर में हाथ डाल कर उनके जी उठा होने के लिए ठहराया हुआ अपना प्रमाण ले ले; तब थोमा कह उठा, "...हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" (यूहन्ना २०:२८)

   बाद में जब प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों के विश्वासियों को, मसीही विश्वास कि अपनी यात्रा में उठाए गए अपने क्लेशों के बारे में बताया, तब उसने भी प्रभु यीशु को अपना प्रभु बताया। उसने उन्हें लिखा कि प्रभु यीशु के साथ विश्वास के जीवन में यह समझ चुका है कि मसीह यीशु ही प्रभु है और उसको प्राप्त करना ही उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है: "वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं" (फिलिप्पियों ३:८)।

   मैंने, आपने और हम अन्य मसीही विश्वासियों ने चाहे प्रभु यीशु को अपने समक्ष किसी तूफान को शांत करते या किसी मुर्दे को ज़िन्दा करते ना देखा हो, और ना ही उसके चरणों पर बैठकर हम ने उससे कोई प्रवचन सुना हो, लेकिन हम सभी अपने जीवनों के अनुभवों से जानते हैं कि कैसे उसने हमें हमारी आत्मिक मृतकावस्था से जिला कर अनन्त जीवन का उत्तराधिकारी बनाया है, और कैसे वह आज भी हमारे जीवनों में कार्य कर रहा है, हर परिस्थिति में हमारे पक्ष में कार्य करता है, हमारे साथ साथ बना रहता है। इसलिए थोमा और पौलुस के समान ही हमारे लिए भी यीशु को प्रभु कहना और उसके आज्ञाकारी होना कोई अवास्तविक बात नहीं है।

   प्रभु यीशु ने थोमा से कहा, "...तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया" (यूहन्ना २०:२९)। जब हम प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार करते हैं, तब हम प्रभु द्वारा धन्य समझे जाने वाले लोगों में सम्मिलित हो जाते हैं। - डेव एग्नर


चाहे हम शरीर की आंखों से उसे नहीं देखने पाते, किंतु आत्मा की आंखों से देख कर और मन से उस पर विश्वास कर के हम भी कह सकते हैं - यीशु ही प्रभु है।

यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! - यूहन्ना २०:२८

बाइबल पाठ: यूहन्ना २०:१९-३१
Joh 20:19  उसी दिन जो सप्‍ताह का पहिला दिन था, सन्‍ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्‍द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा होकर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
Joh 20:20  और यह कह कर उस ने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेले प्रभु को देख कर आनन्‍दित हुए। 
Joh 20:21  यीशु ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। 
Joh 20:22   यह कह कर उस ने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो। 
Joh 20:23   जिन के पाप तुम क्षमा करो वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं।
Joh 20:24  परन्‍तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
Joh 20:25  जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उस ने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
Joh 20:26  आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
Joh 20:27  तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्‍तु विश्वासी हो। 
Joh 20:28   यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
Joh 20:29  यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया।
Joh 20:30  यीशु ने और भी बहुत चिन्‍ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
Joh 20:31  परन्‍तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ५४-५६ 
  • रोमियों ३

Monday, July 30, 2012

कूड़ेदान?

   एक दिन मैंने अखबार में पढ़ा कि कुछ लोगों को समुद्र में कूड़ा फेंके जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, उनकी नज़रों में समुद्र को एक विशाल कूड़ेदान के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसी संदर्भ में उस लेख में आगे लिखा था कि, "यदि आप को प्रशान्त महासागर में तैरता हुआ यह विशाल प्लास्टिक का ढेर दिखे तो चौंकिए मत, इसे ’विशाल प्रशान्त महसागरीय कूड़ेदान’ कहते हैं और इसका क्षेत्रफल अमेरिका के टैक्सस प्रांत से भी बड़ा है। इसमें तीन करोड़ टन प्लास्टिक का कूड़ा जिसके प्रति वर्गमील क्षेत्र में औसतन ४६,००० प्लास्टिक की चीज़ें हैं, समुद्र में तैर रहा है!" कुछ अन्य लोगों का मानना है कि इसका आकार इससे भी कहीं अधिक बड़ा है। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए विशेषकर हानिकारक है क्योंकि यह ना घुलता है और ना ही नष्ट होता है।

   सृष्टि के आरंभ में जब परमेश्वर ने आदम को बनाया तो उसे इस पृथ्वी और इसपर रहने वाले जीव-जन्तुओं की देख-रेख करने कि ज़िम्मेदारी भी दी: "तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे" (उत्पत्ति २:१५)। सृष्टि के वृतांत में यह भी लिखा है कि परमेश्वर ने जो कुछ बनाया वह भला था और परमेश्वर उससे प्रसन्न था (उत्पत्ति १:१०, २०, २१)।

   यह समस्त सृष्टि हमें सृष्टिकर्ता परमेश्वर की महानता को दिखाती है और उसकी यह महानता तथा कार्यकुशलता हमें उसकी प्रशंसा तथा आराधना करने को प्रेरित करती है। इस सृष्टि का बेपरवाही से प्रयोग करना उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर का अनादर करना है। इसे एक विशाल कूड़ेदान के समान उपयोग करना इसमें रहने वाले जीव-जन्तुओं को नष्ट करता है, इसकी सुन्दरता को भ्रष्ट करता है और जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है उसे तुच्छ जानना है। हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है कि हम अपने सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की इस सुन्दर रचना का आदर करें और धरती, जल और आकाश तथा इनमें रहने तथा विचरण करने वाले जीवों की भी परवाह करें, क्योंकि परमेश्वर ने यह सृष्टि केवल हम मनुष्यों के उपयोग के लिए ही नहीं बनाई है। परमेश्वर की इस सृष्टि की देखभाल करना और उसका ध्यान रखना परमेश्वर की प्रत्येक संतान का भी कर्तव्य है। - डेनिस फिशर


पिता परमेश्वर की सृष्टि की देखभाल उसकी विश्वासी सन्तान का कर्तव्य है।

...और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। - (उत्पत्ति १:१०)

बाइबल पाठ: उत्पत्ति १:२०-२८; २:१५
Gen 1:20  फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें। 
Gen 1:21  इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Gen 1:22  और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 
Gen 1:23  तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया। 
Gen 1:24  फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। 
Gen 1:25  सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वनपशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Gen 1:26  फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। 
Gen 1:27  तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्यों की सृष्टि की। 
Gen 1:28  और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो। 
Gen 2:15  तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ५१-५३ 
  • रोमियों २

Sunday, July 29, 2012

वफादारी


   मैं बड़ा प्रसन्न था क्योंकि मेरी पसन्दीदा बेसबॉल टीम डेट्रौइट टाईगर्स का मैच शिकागो व्हाइट सॉक्स के साथ होने वाला था। प्रतिद्वन्दी टीम के स्टेडियम में इस मैच को देखने जाने से पहले मैंने बड़े गर्व से अपनी मनपसन्द टीम डेट्रौइट टाईगर्स की टी-शर्ट पहनी, ताकि मैं सब को दिखा सकूँ कि मैं किस टीम को समर्थन करता हूँ। किंतु मौसम में कुछ ठंडक आने के कारण मुझे उस टी-शर्ट के ऊपर एक और वस्त्र पहनना पड़ा; इससे मुझे निराशा हुई क्योंकि मैं स्टेडियम में आए लोगों को अपनी टीम के प्रति अपनी वफादारी प्रदर्शित नहीं कर पा रहा था; कोई नहीं पहचान पा रहा था कि मैं किस टीम का समर्थक हूँ। बारिश होने के कारण खेल ३ घंटे देर से आरंभ हुआ। खेल आरंभ होने के बाद मैं अपनी टीम के लिए खुले दिल से पुकार सका और सबको जता सका कि मैं किस टीम का समर्थक हूँ।

   प्रेरित पौलुस की अपने प्रभु के प्रति वफादारी सबके सामने खुली थी। उसने रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा "मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है" (रोमियों १:१६)। सुसमाचार की इस सामर्थ को उसने व्यक्तिगत रीति से अनुभव किया था जब प्रभु यीशु ने उसके जीवन की दिशा और दशा दोनो को नाटकिय ढंग से बदला था। वह यह भी जानता था कि प्रभु अन्य सभी के जीवनों को भी ऐसे ही बदल सकता है; और अपने प्रचार तथा गवाही में वह यही बात सभी को बताता था, इसी कार्य के लिए उसने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु यीशु की सेवा में समर्पित कर दिया था।

   रोम के विश्वासी भी प्रभु यीशु में अपने विश्वास के लिए जाने जाते थे; प्रभु यीशु के लिए उनकी वफादारी छुपी हुई नहीं थी। उनके विषय में भी पौलुस ने लिखा: "मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है" (रोमियों १:८)।

   क्या आप भी प्रभु यीशु के अनुयायी हैं? यदि हाँ, तो क्या आप की प्रभु यीशु के प्रति वफादारी जग-विदित है? - ऐने सेटास


प्रभु यीशु के प्रति हमारी वफादारी संसार को दिखाई और सुनाई देनी चाहिए।

मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है। - रोमियों १:१६

बाइबल पाठ: रोमियों १:८-१६
Rom 1:8  पहिले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है। 
Rom 1:9  परमेश्वर जिस की सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूं, वही मेरा गवाह है कि मैं तुम्हें किस प्रकार लगातार स्मरण करता रहता हूं। 
Rom 1:10  और नित्य अपनी प्रार्थनाओं में बिनती करता हूं, कि किसी रीति से अब भी तुम्हारे पास आने को मेरी यात्रा परमेश्वर की इच्‍छा से सफल हो। 
Rom 1:11  क्‍योंकि मैं तुम से मिलने की लालसा करता हूं, कि मैं तुम्हें कोई आत्मिक वरदान दूं जिस से तुम स्थिर हो जाओ। 
Rom 1:12  अर्थात यह, कि मैं तुम्हारे बीच में होकर तुम्हारे साथ उस विश्वास के द्वारा जो मुझ में, और तुम में है, शान्‍ति पाऊँ। 
Rom 1:13  और हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस से अनजान रहो, कि मैं ने बार बार तुम्हारे पास आना चाहा, कि जैसा मुझे और अन्यजातियों में फल मिला, वैसा ही तुम में भी मिले, परन्‍तु अब तक रुका रहा। 
Rom 1:14  मैं यूनानियों और अन्यभाषियों का और बुद्धिमानों और निर्बुद्धियों का कर्जदार हूं। 
Rom 1:15  सो मैं तुम्हें भी जो रोम में रहते हो, सुसमाचार सुनाने को भरसक तैयार हूं। 
Rom 1:16 क्‍योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४९-५० 
  • रोमियों १

Saturday, July 28, 2012

मरम्मत और बहाली


   यदि आपने कभी किसी चीज़ की मरम्मत करने की असफल कोशिश की होगी तो आप एक कारखाने के सामने लगे लेख की सराहना कर सकेंगे जहां लिखा था: "आपके पति ने जिसकी मरम्मत करी है, हम उसे भी ठीक और बहाल कर सकते हैं।" चाहे खराबी कार में हो, घर के सामान में हो या पानी के पाइप अथवा नलके में हो, समस्या का निवारण उसके द्वारा ही भला होता है जो इसके लिए प्रशिक्षित हो और उस कार्य के करने में विश्वासयोग्य हो।

   यही सिद्धांत हमारे आंतरिक संघर्षों, आत्मिक जीवन और पाप पर भी लागू होता है। इन्हें अन्त करने के हमारे सभी प्रयास असफल रहते हैं; क्योंकि हम या तो अपने प्रयासों और योजनाओं के सहारे ऐसा करना चाहते हैं, या उन मनुष्यों के सुझाए मार्गों द्वारा करना चाहते हैं जो स्वयं इन बुराइयों को अपने जीवन से दूर नहीं कर सके। जबकि इन बुराइयों का अन्त केवल उसी के द्वारा संभव है जो इनके निवारण का विशेषज्ञ है, इन पर सामर्थी है - अर्थात परमेश्वर।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यर्मियाह नबी ने अपने दिनों के उन झूठे भविष्यद्वाक्ताओं और धार्मिक अगुवों की निन्दा करी जो परमेश्वर के नाम से लोगों को झूठी दिलासा देते थे, झूठे मार्ग सुझाते थे; यर्मियाह में हो कर परमेश्वर ने उनके विषय में कहा: "वे, “शान्ति है, शान्ति,” ऐसा कह कहकर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं" (यर्मियाह ६:१४)। वे भविष्यद्वाक्ता और अगुवे ना तो अपने आप को सही करने पाए और ना परमेश्वर की प्रजा को। इसलिए स्वयं परमेश्वर ने अपने लोगों को पुकारा कि वे उसके मार्गों पर चलें: "यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे..." (यर्मियाह ६:१६)। परमेश्वर ने अपनी प्रजा को चेतावनी भी दी कि यदि वे बहाली की उसकी पुकार को नज़रंदाज़ करते रहे तो उन्हें फिर उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा।

   इस बात के कहे जाने के कई सदियों बाद, परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु ने लोगों को निमंत्रण दिया: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती ११:२८)।

   जब हम अपने जीवन प्रभु यीशु के हाथों में समर्पित कर देते हैं तो वह उनकी मरम्मत कर के हमें अंश अंश करके अपनी समानता में बदालना आरंभ कर देता है "तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं" (२ कुरिन्थियों ३:१८); जीवन के उन भागों को भी जिनकी मरम्मत करने में हम असफल रहे हैं। मसीह यीशु में लाए गए विश्वास, पापों की क्षमा और किए गए समर्पण द्वारा हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश एवं निवास के लिए बहाल किये जाते हैं। जो प्रभु द्वारा इस मरम्मत के लिए दिये गए अवसर का लाभ नहीं उठाते और बहाली के लिए प्रभु की पुकार को नज़रंदाज़ करते हैं, उन्हें फिर अपने पापों का दण्ड भोगना ही पड़ेगा।

  क्या आपने अपने जीवन की मरम्मत और बहाली के लिए प्रभु यीशु द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने का निर्णय ले लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर जब पाप क्षमा करता है तब वह हमारे जीवन से पाप को दूर भी करता है और आत्मा को बहाल भी करता है।

यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे... यर्मियाह ६:१६

बाइबल पाठ: यर्मियाह ६:१४-१९
Jer 6:14  वे, “शान्ति है, शान्ति,” ऐसा कह कह कर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं। 
Jer 6:15  क्या वे कभी अपने घृणित कामों के कारण लज्जित हुए? नहीं, वे कुछ भी लज्जित नहीं हुए?; वे लज्जित होना जानते ही नहीं; इस कारण जब और लोग नीचे गिरें, तब वे भी गिरेंगे, और जब मैं उनको दण्ड देने लगूंगा, तब वे ठोकर खाकर गिरेंगे, यहोवा का यही वचन है। 
Jer 6:16  यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खडे होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्होंने कहा, हम उस पर न चलेंगे। 
Jer 6:17  मैं ने तुम्हारे लिये पहरुए बैठा कर कहा, नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना ! पर उन्होंने कहा, हम न सुनेंगे। 
Jer 6:18  इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है। 
Jer 6:19  हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊंगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्होंने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्होंने निकम्मी जाना है।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४६-४८ 
  • प्रेरितों २८

Friday, July 27, 2012

आज्ञाकारिता

   जब बालक कोफी अपने संडे स्कूल (रविवार को चर्च में बच्चों को परमेश्वर के वचन बाइबल से शिक्षा दिए जाने के समय) से वापस लौटा तो उसकी माँ ने उससे पूछा कि उन्हें आज क्या सिखाया गया? तुरंत ही खिसिए हुए स्वर में कोफी का उत्तर था, "आज्ञाकारिता...एक बार फिर से वही बात!"

   यद्यपि मैं कोफी से उम्र में बहुत बड़ी हूँ, तो भी मैं सहमत हूँ कि परमेश्वर की आज्ञाकारिता का पाठ एक ऐसा पाठ है जिसे हमें बार बार सीखना पड़ता है।

   बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लिखा: "परमेश्वर मुझे जीने के नियम नहीं देता, परन्तु उसने जीवन के लिए अपने स्तर बिलकुल स्पष्ट बता रखे हैं। यदि उसके साथ मेरा संबंध प्रेम का संबंध है, तो जो उसको भाता है और जो वह कहता है मैं वही करूंगा; यदि मैं ऐसा करने से हिचकिचाता हूँ तो इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम की प्रतिस्पर्धा में मैंने किसी दूसरे को, अर्थात स्वयं अपने आप को भी रख लिया है, और इस ’दूसरे’ एवं परमेश्वर के प्रति प्रेम में से किस के प्रेम को प्राथमिकता दूँ और निभाऊँ यही दुविधा मेरी हिचकिचाहट का कारण है।"

   जब हम परमेश्वर के आज्ञाकारी होते हैं तो हम यह दिखाते हैं कि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं और अपने आप में नहीं वरन उस में विश्वास रखते हैं। एक अन्य बाइबल शिक्षक आर्थर पिंक ने कहा: "प्रेम कार्यकारी होता है और अपने आप को कार्यों में व्यक्त करता है - ऐसे कार्यों में जो प्रेम के पात्र की पसन्द के अनुसार होते हैं।" परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ है कि हम अपनी इच्छाएं नहीं वरन उसका कहा पूरा करें।

   परमेश्वर अपने अनुयायियों से आज्ञाकारिता चाहता है। प्रभु यीशु ने आज्ञाकारिता की अनिवार्यता पर बहुत ज़ोर दिया; उन्होंने अपने चेलों से कहा: "जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्‍यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो?" (लूका ६:४६); प्रभु यीशु ने अपने चेला होने की पहचान भी आज्ञाकारिता से ही दी: "यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे" (यूहन्ना १४:१५)।

   प्रभु के लोगों के लिए परमेश्वर की आज्ञाकारिता विकल्प नहीं अनिवार्यता है। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर की आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है।

परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं। - १ यूहन्ना ५:३

बाइबल पाठ: १ यूहन्ना २:१-११
1Jn 2:1  हे मेरे बालको, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धामिर्क यीशु मसीह। 
1Jn 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1Jn 2:3  यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो उस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1Jn 2:4  जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है, और उस में सत्य नहीं। 
1Jn 2:5  पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1Jn 2:6  जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1Jn 2:7  हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1Jn 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं, और यह तो उस में और तुम में सच्‍ची ठहरती है; कयोंकि अन्‍धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1Jn 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं, और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्‍धकार ही में है। 
1Jn 2:10  जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1Jn 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्‍धकार में है, और अन्‍धकार में चलता है, और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्‍योंकि अन्‍धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४३-४५ 
  • प्रेरितों २७:२७-४४

Thursday, July 26, 2012

एरिन


   आम ८ वर्षीय बच्चों से एरिन का जीवन बहुत भिन्न था। जब दूसरे बच्चे दौड़ और खेल रहे होते थे, आईस्क्रीम खा रहे होते थे तब एरिन बिस्तर में लेटी होती थी, एक नली द्वारा उसे भोजन दिया जाता था, वह केवल तेज़ प्रकाश में ही कुछ देख पाती थी और तेज़ आवाज़ ही सुन पाती थी। उसका जीवन, अपनी बीमारी और शारीरिक अपंगता के कारण अस्पताल, नर्सों और सुई लगाए जाने के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता था। लेकिन उसके साथ उसका अद्भुत परिवार था जो बड़े प्रेम और करुणा के साथ उसकी देखभाल करता रहता था, और उसके जीवन को अपने प्रेम से भरता रहता था। इतना सब होने के बाद भी एरिन ९ वर्ष की होने से पहले ही चल बसी।

   एरिन जैसे मूल्यवान बच्चे के जीवन से भला कोई क्या शिक्षा ले सकता है - जिसने कभी कोई शब्द नहीं बोला, कोई गीत नहीं गाया, कोई चित्र नहीं बनाया? एरिन के परिवार के एक मित्र ने इस प्रश्न का बहुत उत्तम उत्तर दिया; उसने कहा: "एरिन का हमारे जीवनों में आना हमारे लिए भला था। उसने हमें करुणा, बिना प्रत्युत्तर में कुछ पाए प्रेम करना और जीवन की छोटी छोटी बातों की कीमत पहचानना और उनके लिए परमेश्वर का धन्यवादी होना सिखाया।"

   एरिन के जैसे बच्चे हमें यह भी स्मरण दिलाते हैं कि यह संसार केवल पूर्णतः स्वस्थ, धनवान और प्रतिभाशाली लोगों ही के लिए नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक दशा कैसी भी क्यों ना हो, परमेश्वर की सृष्टि है, परमेश्वर के स्वरूप में सृजा गया है (उत्पत्ति १:२६-२७), और परमेश्वर कि नज़रों में बहुमूल्य है, परमेश्वर की ओर से उसका एक उद्देश्य है।

   हमारा प्रभु परमेश्वर सब के लिए भला है और उसकी दया सब पर समान रूप से रहती है (भजन १४५: ८-९); उसकी सृष्टि के कमज़ोर और अपूर्ण लोगों पर भी। प्रभु की हमसे यही आशा है कि हम प्रभु के इस प्रेम को, उसी के समान, सब के लिए समान रूप से प्रदर्षित करने वाले बनें (इफिसियों ५:१-२)।

   क्या आप भी किसी ’एरिन’ को जानते हैं जिससे आज आप कुछ सीख सकते हैं? - डेव ब्रैनन


किसी एक भी आत्मा की कीमत को कभी तुच्छ ना जानें।

यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। - भजन १४५:८-९

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १२:२०-२७
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27   इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन ४०-४२ 
  • प्रेरितों २७:१-२६

Wednesday, July 25, 2012

स्थिर निगाह

   मुझे गाड़ी चलाना सिखाने वाले प्रशीक्षक का बार कहना होता था "सामने देखते हुए चलाओ"। वह चाहते थे कि मैं स्थिर निगाह से केवल सामने की ओर देखती रहूँ, ना कि अपने पास के दृश्यों और लोगों को देखूं और गाड़ी चलाने से मेरा ध्यान बटे; क्योंकि वे चालक जो अपने आस-पास के दृश्यों की ओर निगाहें घुमाते रहते हैं, उनके द्वारा दुर्घटना हो जाने की संभावना अधिक रहती है।

   हम मसीही विश्वासियों की जीवन यात्रा में भी शैतान कई ऐसे आकर्षण लाता रहता है जिससे कि हमारा ध्यान अपने प्रभु और मार्गदर्शक से हट जाए और शैतान ही की बातों की ओर भटक जाए। यदि वह ऐसा करने में सफल हो जाएगा तो फिर वह हमें सही मार्ग से भटका कर ना केवल हमारी आत्मिक प्रगति को बाधित करने पाएगा, वरन हमारे जीवन में हानि भी लाने पाएगा। ध्यान भटकाने का यह दाँव उसने प्रभु यीशु पर भी आज़माया था!

   प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में शैतान ने प्रभु को परमेश्वर द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए कुछ ’बेहतर’ उपाय सुझाए। शैतान ने प्रभु यीशु से कहा कि वह अपने आप को मन्दिर के कंगूरे अर्थात सबसे ऊँचे स्थान से नीचे फेंक कर भी प्रमाणित कर सकता है कि वह परमेश्वर का पुत्र है (लूका ४:९-११)। लेकिन प्रभु यीशु जानते थे कि किसी भवन से नीचे गिरने के द्वारा वे परमेश्वर के पुत्र प्रमाणित नहीं होंगे, ऐसा केवल उनके क्रूस पर बलिदान होने और मृतकों में से पुनः जी उठने के द्वारा ही संभव है, इसलिए उन्होंने शैतान को उत्तर दिया, "...यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना" (लूका ४:१२)। प्रभु यीशु की निगाहें संसार के लिए उद्धार का मार्ग तैयार करने पर स्थिर थीं; वे जानते थे कि समस्त संसार के उद्धार का यह कार्य, यदि वे क्रूस से बचकर निकले, तो संभव नहीं हो सकता था - जो शैतान करवाना चाहता था; उन्होंने अपनी निगाहें अपने लक्ष्य पर स्थिर बनाए रखीं और अपने कार्य को पूरा किया।

   आत्मिक खतरों से बचने का ए