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बुधवार, 29 अगस्त 2012

शांति और स्तुति


   रॉबर्ट लौरे सोचा करते थे कि उनके द्वारा किया गया प्रचार उनके जीवन का सबसे बड़ा योगदान होगा। किंतु १९वीं शताब्दी के इस पास्टर को आज उनके द्वार लिखे गए स्तुति गीतों और उनके द्वारा बनाई गई स्तुति गीतों की धुनों के लिए स्मरण लिया जाता है। उन्होंने अपने जीवन काल में ५०० से भी अधिक परमेश्वर की स्तुति के गीत लिखे या गीतों की धुनें बनाईं; इन में कुछ जाने माने गीत हैं "Christ Arose", "I Need Thee Every Hour", "Shall We Gather" इत्यादि।

   सन १८६० में जब अमेरिका ग्रह युद्ध के कगार पर खड़ा था, लौरे ने एक गीत लिखा जो आस-पास की विनाशकारी परिस्थितियों पर नहीं वरन अविनाशी, अपरिवर्तनीय और अनन्त प्रभु यीशु और उसमें मिलने वाली शांति पर आधारित है। गीत के भाव कुछ इस प्रकार से हैं: "क्या हुआ यदि मेरे आराम और आनन्द के साधन जाते रहे? मेरा प्रभु और उद्धारकर्ता तो जीवित है; क्या हुआ यदि अन्धकार चारों ओर से घेर रहा है? वह अन्धकार में भी स्तुति के गीत देता है: कोई तूफान मेरे अन्दर की शांति को भंग नहीं कर सकता, जब तक मैं उस शरणस्थान में हूँ; क्योंकि मसीह स्वर्ग और पृथ्वी का प्रभु है, मैं उसकी स्तुति गाने से कैसे रुक सकता हूँ?"

   कठिनाईयों के दौर में भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखने वाला लौरे का विश्वास परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा लिखे गए शब्दों का स्मरण दिलाता है: "तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, न किसी आदमी पर, क्योंकि उस में उद्धार करने की भी शक्ति नहीं। उसका भी प्राण निकलेगा, वही भी मिट्टी में मिल जाएगा; उसी दिन उसकी सब कल्पनाएं नाश हो जाएंगी। क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है" (भजन १४६:३-५)।

   हमारा दृष्टिकोण निर्धारित करता है कि कठिन और विषम परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रिया कैसी होगी - शांति की या भय की। यदि हम भजनकार के समान इस बात पर विश्वास रखते हैं कि हमारा प्रभु सदा के लिए और पीढ़ी पीढ़ी तक राज्य करेगा (पद १०) तो लौरे के समान हम भी कह सकते हैं कि "मैं उसकी स्तुति गाने से कैसे रुक सकता हूँ?" - डेविड मैक्कैसलैंड


यदि आप मसीह के साथ तालमेल बना कर रखते हैं तो अन्धकार में भी उसका स्तुति गान कर सकते हैं।

मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक मैं अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा। - भजन १४६:२

बाइबल पाठ: भजन १४६
Psa 146:1  याह की स्तुति करो। हे मेरे मन यहोवा की स्तुति कर! 
Psa 146:2  मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक मैं अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।
Psa 146:3  तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, न किसी आदमी पर, क्योंकि उस में उद्धार करने की भी शक्ति नहीं। 
Psa 146:4  उसका भी प्राण निकलेगा, वही भी मिट्टी में मिल जाएगा; उसी दिन उसकी सब कल्पनाएं नाश हो जाएंगी।
Psa 146:5  क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है। 
Psa 146:6  वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र और उन में जो कुछ है, सब का कर्ता है; और वह अपना वचन सदा के लिये पूरा करता रहेगा। 
Psa 146:7  वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है; और भूखों को रोटी देता है। यहोवा बन्धुओं को छुड़ाता है; 
Psa 146:8  यहोवा अन्धों को आंखें देता है। यहोवा झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है; यहोवा धर्मियों से प्रेम रखता है। 
Psa 146:9  यहोवा परदेशियों की रक्षा करता है; और अनाथों और विधवा को तो सम्भालता है, परन्तु दुष्टों के मार्ग को टेढ़ा मेढ़ा करता है।
Psa 146:10  हे सिरयोन, यहोवा सदा के लिये, तेरा परमेश्वर पीढ़ी पीढ़ी राज्य करता रहेगा। याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १२६-१२८ 
  • १ कुरिन्थियों १०:१९-३३

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