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शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

बचाए गए


   लौरेन घबरा भी रही थी और साथ ही उत्तेजित भी थी; वह आज एक ही व्यक्ति द्वारा चलाई जाने वाली नौका में बैठकर तेज़ बहने वाली पहाड़ी नदी के उछलते उफनते पानी में एक दल के साथ नौकाविहार के लिए जा रही थी। उसने अपने आप को नौका में सुरक्षित किया और अपने दल के साथ दल के मार्गदर्शक के पीछे पानी के तेज़ प्रवाह में चल निकली।

   थोड़ी दूर जाने पर जब सामने एक जलप्रपात दिखाई दिया तो लौरेन की घबराहट और बढ़ गई। उस तेज़ बहते और उछलते पानी में अचानक ही नौका डगमगाई और पलट गई। उन्हें अच्छे से सिखाया गया था कि यदि ऐसा हो तो नौका से निकल कर तुरंत पानी की सतह पर कैसे पहुँचना है, लेकिन पानी में अपने आप को पलटी हुई पड़ी देख उसके होश उड़ गए और उसे कुछ समझ नहीं आया कि वह क्या करे और कैसे करे। उसे बस इतना ध्यान था कि कुछ ही पलों में उसकी सांस टूट जाएगी और फिर वह इस संसार से कूच करके अपने आप को अपने प्रभु परमेश्वर के सामने खड़ा पाएगी। इन कुछ पलों ही में कोई उसकी सहायता को आया और उसे डूबने से बचा लिया। लौरेन शारीरिक मृत्यु से बचाए जाने के लिए अपने रक्षक के प्रति बहुत धन्यवादी और कृतज्ञ हुई।

   शारीरिक मृत्यु तो देर-सवेर सब को आनी है; जो आज किसी दुर्घटना या बिमारी या अन्य किसी जान के जोखिम से बचा है, वह कल किसी अन्य बात के कारण संसार से कूच करेगा - महत्व मृत्यु का नहीं वरन इस बात का है कि फिर उसके बाद क्या होगा? हर किसी को अपने जीवन का हिसाब देने परमेश्वर के सामने खड़ा होना होगा, और जो पापों की क्षमा पाए बिना संसार से जाएंगे वे अपने आप को एक दुसरी मृत्यु - आत्मिक मृत्यु के भागी पाएंगे, अर्थात अनन्तकाल के लिए परमेश्वर से दूर नरक में अपने पापों का दण्ड भोगे जाने के लिए पड़ा हुआ पाएंगे।

   पाप में पड़े और डूबते इस संसार के प्रत्येक जन के लिए परमेश्वर ने बचाए जाने का मार्ग दिया है, मार्गदर्शक दिया है - प्रभु यीशु। उसके मिलने वाली सहायता और रक्षा का हाथ संसार के सभी लोगों की ओर बढ़ा हुआ है। जो कोई भी उसके हाथ को थामता है, उसपर विश्वास लाता है वह पापों से क्षमा और अनन्त जीवन पाता है - केवल सच्चे मन से उसे किए गए समर्पण और उसपर लाए गए साधारण विश्वास द्वारा ही; और कुछ भी करने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। अपने क्रूस पर दिए गए बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा उसने सब के लिए अनन्त जीवन सुनिश्चित कर लिया है; आवश्यक्ता है तो केवल उस अनन्त जीवन को स्वेच्छा से और व्यक्तिगत रीति से ग्रहण कर लेने की।

   जिन्होंने पापों की क्षमा और अनन्त जीवन प्राप्त कर लिया है उन का कर्तव्य है कि वे अपने रक्षक और उद्धारकर्ता के प्रति अपना धन्यवाद और कृतज्ञता दिखाने के लिए पाप में डूबते अन्य लोगों को भी उसके बारे में बताते रहें। - ऐने सेटास


जो बचाए गए हैं उन्हें अन्य लोगों को भी बचाने में योगदान देने के लिए तत्पर रहना चाहिए।

परन्‍तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया; जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)। - इफिसीयों २:४-५

बाइबल पाठ: इफिसीयों २:१-१०
Eph 2:1  और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Eph 2:2  जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Eph 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्‍तान थे। 
Eph 2:4 परन्‍तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया; 
Eph 2:5  जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)। 
Eph 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Eph 2:7  कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Eph 2:8  क्‍योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Eph 2:9  और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Eph 2:10  क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १३२-१३४ 
  • १ कुरिन्थियों ११

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