ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 30 सितंबर 2012

आराधना


   कई वर्ष पहले की बात है, मेरे पति टॉम कुछ हाई-स्कूल छात्रों के एक दल को लेकर एक कसबे के मिशन स्कूल में स्वयं-सेवी कार्य के लिए लेकर गए। टॉम ने उससे कुछ दिन पहले ही अपनी टांग तोड़ ली थी इसलिए वे एक पहिए वाली कुर्सी पर बैठकर मिशन स्कूल में हो रहे कार्य का संचालन कर रहे थे। वे इस बात से कुछ निराश भी थे क्योंकि वे इस कार्य के लिए आवश्यक्तानुसार कार्यस्थल के प्रत्येक स्थान में घूमने और संचालन करने में असमर्थ थे।

   जब वे स्कूल भवन के ज़मीनी तल पर कार्य करवा रहे थे तो कुछ लड़कियां ऊपर तीसरी मंज़िल पर दीवारों को रंगने का कार्य कर रहीं थीं। अपना कार्य करते हुए वे परमेश्वर की आराधाना और स्तुति के गीत भी गाती जा रहीं थीं। उनकी आवाज़ उस खाली स्कूल भवन में गूँज रही थी और उनका एक साथ मिलकर लय-ताल में गाना बहुत अच्छा लग रहा था। टॉम ने बाद में इसके बारे में बताया और कहा कि आराधना के गीतों की यह आवाज़ें उनके लिए सबसे मधुर आवाज़ें थीं और निराशा में पड़ी उनकी आत्मा उन गीतों से प्रफुल्लित हुई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्सियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस मसीही विश्वासियों से कहता है: "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ" (कुलुस्सियों ३:१६)।" टॉम के साथ गई वे लड़कियां ना केवल परमेश्वर की आराधना कर रहीं थीं, वरन साथ ही, अनजाने में, वे एक निराश साथी को उभारने की सेवकाई भी कर रहीं थीं।

   आप जो भी कार्य करें, उसे करते समय अपने रवैये में स्तुति और आराधना की प्रवृत्ति अवश्य प्रकट करें, चाहे यह स्तुति गीत के द्वारा हो या बातचीत के द्वारा, प्रभु में अपने आनन्द को दूसरों तक पहुंचने दें। ऐसा करके क्या जाने आप किसी निराशा में पड़े हुए को कब उभार दें।

   सच्चे परमेश्वर की सच्ची आराधना सदा भली ही होती है। - सिंडी हैस कैस्पर


प्रोत्साहन की चिंगारी आशा की ज्वाला प्रज्वल्लित कर सकती है।

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। - कुलुस्सियों ३:१६

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१२-१७
Col 3:12  इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Col 3:13  और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Col 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। 
Col 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लि्ये तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो। 
Col 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। 
Col 3:17  और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ९-१० 
  • इफिसियों ३

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें