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Monday, February 13, 2012

बदलाव का समय

   मेरे एक मित्र ने एक बार मुझ से कहा, "मैंने अपने जीवन में बहुत सी बातों को बदलते हुए देखा है, और मैं उन सब के विरुद्ध हूँ।" शायद जो मेरे मित्र ने कहा या किया अतिश्योक्ति थी, किंतु इस बात से अधिकांश सहमत होंगे कि हम बदलाव नहीं चाहते, विशेषकर तब जब वह हमारी आदतों और व्यवहार से संबंध रखता हो।

   यह भी एक कारण था कि प्रभु यीशु अपने समय के धर्मगुरुओं और धर्म के अगुवों में लोकप्रीय नहीं थे। प्रभु यीशु ने उन लोगों के परंपरागत स्थापित भले कार्यों और स्वधार्मिकता के मूल्यों और बातों को चुनौती दी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका ७ अध्याय में दी गई एक घटना पर ध्यान कीजिए: शमौन नाम का एक फरीसी (धर्मगुरू) बहुत खिन्न हुआ जब उस ’धर्मी’ के घर में एक पापिनी स्त्री ने आकर बड़ी उदार रीति से प्रभु यीशु के लिए अपना आदर और सम्मान प्रकट किया। प्रभु यीशु ने तुरंत शमौन के मन के विचार भांप लिए और उसकी स्वधार्मिकता के भाव को एक नीतिकथा के द्वारा चुनौती दी। प्रभु ने कहा, एक महाजन के दो देनदार थे, एक बहुत कर्ज़ के नीचे था और दूसर थोड़े, लेकिन दोनो ही चुका पाने की स्थित में नहीं थे। महाजन ने उनकी दशा पर दया करके उन दोनो ही के कर्ज़ को पूर्णतः माफ कर दिया। फिर प्रभु ने शमौन से पूछा: "...सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा?" (लूका ७:४२)। शमौन का उत्तर स्वभाविक था, वह जिसका अधिक कर्ज़ माफ हुआ था (पद ४३)। तब प्रभु ने शमौन के स्वधर्मी स्वभाव और घमंड की ओर इशारा करके उसे समझाया और निष्कर्ष में उस से कहा, "...जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है" (पद ४७)।

   प्रभु यीशु की यही चुनौती आज भी सार्थक है, विशेष कर उसके अनुयायीयों के लिए। बहुत बार मसीही विश्वासी इस बात में निश्चिंत हो जाते हैं कि वे संसार से बहुत भले हैं और यह भूल जाते हैं कि वे भले अपनी किसी योग्यता या अपने किसी धार्मिकता से नहीं वरन इसलिए हैं क्योंकि प्रभु ने उनको बहुत कुछ क्षमा किया है।

   यदि आज यह स्थिति आप के जीवन में है, तो निश्चय जानिए कि आप के लिए यह समय अविलंब बदलाव का समय है। - जो स्टोवैल


जब परमेश्वर बातें बदलना आरंभ करता है तो वह पहले हमें बदलने से आरंभ करता है।

यह देखकर, वह फरीसी जिस ने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है क्योंकि वह तो पापिनी है। - लूका ७:३९

बाइबल पाठ: लूका ७:३६-५०
Luk 7:36  फिर किसी फरीसी ने उस से विनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जाकर भोजन करने बैठा।
Luk 7:37  और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई।
Luk 7:38  और उस के पांवों के पास, पीछे खड़ी होकर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला।
Luk 7:39  यह देख कर, वह फरीसी जिस ने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है क्योंकि वह तो पापिनी है।
Luk 7:40  यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luk 7:41  किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था।
Luk 7:42  जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उस ने दोनो को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा।
Luk 7:43  शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उस ने अधिक छोड़ दिया: उस ने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है।
Luk 7:44  और उस स्त्री की ओर फिर कर उस ने शमौन से कहा; क्‍या तू इस स्त्री को देखता है? मैं तेरे घर में आया परन्‍तु तू ने मेरे पांव धोने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा!
Luk 7:45  तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा।
Luk 7:46  तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है।
Luk 7:47  इसलिये मैं तुझ से कहता हूं कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्‍योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।
Luk 7:48  और उस ने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए।
Luk 7:49  तब जो लोग उसके साथ भोजन करने बैठे थे, वे अपने अपने मन में सोचने लगे, यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है?
Luk 7:50  पर उस ने स्त्री से कहा, तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १४ 
  • मत्ती २६:५१-७५