बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Tuesday, May 1, 2012

संतुष्टि

   जिग-सौ पज़ल के चित्र को पूर्ण बना पाने की संतुष्टि के लिए हमें उस चित्र के सभी भागों की आवश्यक्ता होती है। कई प्रकार से जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने दिन अपने जीवन के बिखरे हुए टुकड़ों को जमा करने और फिर उन्हें ठीक से जोड़ कर एक अच्छा और पूर्ण चित्र बनाने में लगे रहते हैं, किंतु फिर भी कभी कभी लगता है कि कोई भाग कहीं ग़ायब है, चित्र अधूरा है और संतुष्टि नहीं है।

   ऐसे में थोड़ा रुक कर जांचना आवश्यक है कि क्या हम चित्र को पूरा करने के लिए गलत भागों को लगाने के प्रयास तो नहीं कर रहे? यद्यपि हम जानते हैं कि जिस जीवन में परमेश्वर केंद्रबिंदु नहीं है वह जीवन अपने सबसे महत्वपूर्ण भाग से रहित है, क्या फिर भी हम ऐसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं मानों परमेश्वर हमारे लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता? चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों, आराधना में सम्मिलित होते हों, तो भी क्या परमेश्वर हमारे जीवन में सबसे अधिक महत्व रखता है? कई बार हम परमेश्वर से अपनी दूरी के आदी हो जाते हैं, उस की कमी हमें कुछ विशेष नहीं खलती, और हमारे लिए पाप में पड़ जाना या समझौता कर लेना सरल हो जाता है, बिना यह एहसास रखे कि इस से हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग नष्ट हो रहा है।

   लेकिन हम चाहे परमेश्वर से कितने ही दूर चले जाएं, वह सदा हमें अपने पास लाने के प्रयासों में लगा रहता है, क्योंकि उसकी लालसा यही रहती है कि उस की संतान उसके पास रहे। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपने नबी यशायाह द्वारा अपनी प्रजा से कहलवाया: "जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे" (यशायाह ५५:२)।

   यदि आपके जीवन से भी कुछ खोया हुआ प्रतीत होता है, तो स्मरण रखिए कि केवल परमेश्वर ही है जो आपको भरपूरी से संतुष्टि और संपूर्ण तृप्ति दे सकता है। उसे ही अपने जीवन के चित्र को पूर्ण करने दीजिए। उसकी संतुष्टि स्थाई संतुष्टि है। - जो स्टोवैल


प्रत्येक मन में ऐसी लालसाएं हैं जिन्हें केवल यीशु ही तृप्त कर सकता है।
जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। - यशायाह ५५:२
बाइबल पाठ: यशायाह ५५:१-६
Isa 55:1  अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ, और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isa 55:2  जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isa 55:3  कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isa 55:4  सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isa 55:5  सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उस ने तुझे शोभायमान किया है।
Isa 55:6  जब जब यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १०-११ 
  • लूका २१:२०-३८