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Friday, May 18, 2012

विजयी जीवन

   सन १९३५ में अमेरिका के टेक्सस प्रांत के एक छोटे और अज्ञात अश्वेत विद्यार्थियों के कॉलेज से वादविवाद प्रतियोगिता में भाग लेने आए दल ने अप्रत्याशित रीति से दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से आए और राष्ट्रीय स्तर पर विजयी श्वेत विद्यार्थियों के दल को हरा दिया। यह एक अन्जान और असंभावित की, किसी जाने माने और बलवंत पर अप्रत्याशित विजय का अद्भुत उदाहरण था।

   इस्त्राएल के इतिहास में हम ऐसी कई घटनाएं पाते हैं जहां परमेश्वर की सहायता से वे अपने विरोधियों पर, जो उन से अधिक और शक्तिशाली थे, विजयी रहे। ऐसी ही एक घटना है छोटे लड़के दाऊद और दैत्याकार फिल्स्तीनी योद्धा गोलियत की, जिसका विवरण हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में १ शमूएल १७ अध्याय में मिलता है। इस्त्राएल और फलिस्तीनीयों के सेनाएं एलाह कि घाटी में आमने-सामने थीं; इस्त्राएली उनका सामना करने से घबारा रहे थे क्योंकि ९’ ९" का एक फिल्स्तीनी योद्धा उन्हें ललकारता था, और वे उसके डील-डौल को देखकर उसका सामना करने से डरते थे।

   इस स्थिति में दाऊद नाम का एक इस्त्राएली लड़का अपने भाईयों की, जो इस्त्राएली सेना में थे, खोज-खबर लेने और उन्हें भोजन का सामान देने के लिए आया। उसने जब इस्त्राएल की डरी हुई सेना और गोलियत की ललकार तथा उसके द्वारा की जाने वाली परमेश्वर की निन्दा को सुना, तो उसने इस्त्राएल के राजा शाउल से अनुमति मांगी कि गोलियत का सामना करे। राजा शाउल ने बड़े हिचकिचाते हुए उसे अनुमति दी और दाऊद अपने गोफन, पांच चिकने पत्थर और परमेश्वर में अपने दृढ़ विश्वास के साथ गोलियत के सामने जा खड़ा हुआ। उसने गोफन में एक पत्थर लगाकर उसने फिल्स्ती के माथे पर दे मारा, जिससे वह गिर गया और दाउद ने फिर उसी की तलवार लेकर उसका काम तमाम कर दिया। अपने दैत्याकार योद्धा का अनजाम देखकर फिल्स्तीनी सेना के पांव उखड़ गए, और वे इस्त्राएलियों के सामने से भाग खड़े हुए और इस्त्राएलियों को एक बड़ी विजय मिली।

   हम सब अपने अपने जीवनों में कई दैत्याकार समस्याओं का सामना करते हैं, जैसे चिंता, शक, भय, पाप, अपराध-बोध इत्यादि और हमें लगता है कि इन पर विजयी होने कि सामर्थ हम में नहीं है। किंतु परमेश्वर पर अपने दृढ़ विश्वास और सच्चे समर्पण के द्वारा हमारा भी इन सभी बातों पर विजयी होना संभव है। हमें आवश्यक्ता है साहस के साथ कदम आगे बढ़ाने और अपने इन दैत्यों का परमेश्वर के नाम में सामना करने को तैयार होने की, अपनी रणभूमि में जाकर खड़ा होने की। वहीं परमेश्वर हमारी सहायता करेगा, हमें जयवंत करेगा। - मार्विन विलियम्स


अपने प्रबल बैरियों का सामना करने और उन पर जयवन्त होने की सामर्थ हमें परमेशवर ही से मिलती है।


फिर दाऊद ने कहा, यहोवा जिस ने मुझ सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा। शाऊल ने दाऊद से कहा, जा, यहोवा तेरे साथ रहे। - १ शमूएल १७:३७

बाइबल पाठ: १ शमूएल १७:३२-५२
1Sa 17:32  तब दाऊद ने शाऊल से कहा, किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्चा न हो, तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।
1Sa 17:33  शाऊल ने दाऊद से कहा, तू जाकर उस पलिश्ती के विरूद्ध नहीं युद्ध कर सकता क्योंकि तू तो लड़का ही है, और वह लड़कपन ही से योद्धा है।
1Sa 17:34  दाऊद ने शाऊल से कहा, तेरा दास अपने पिता की भेड़ बकरियां चराता था, और जब कोई सिंह वा भालू झुंड में से मेम्ना उठा ले गया,
1Sa 17:35  तब मैं ने उसका पीछा करके उसे मारा, और मेम्ने को उसके मुंह से छुड़ाया; और जब उस ने मुझ पर चढ़ाई की, तब मैं ने उसके केश को पकड़ कर उसे मार डाला।
1Sa 17:36  तेरे दास ने सिंह और भालू दोनों को मार डाला और वह खतनारहित पलिश्ती उनके समान हो जाएगा, क्योंकि उस ने जीवित परमेश्वर की सेना को ललकारा है।
1Sa 17:37  फिर दाऊद ने कहा, यहोवा जिस ने मुझ सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा। शाऊल ने दाऊद से कहा, जा, यहोवा तेरे साथ रहे।
1Sa 17:38  तब शाऊल ने अपने वस्त्र दाऊद को पहिनाए, और पीतल का टोप उसके सिर पर रख दिया, और झिलम उसको पहिनाया।
1Sa 17:39  और दाऊद ने उसकी तलवार वस्त्र के ऊपर कसी, और चलने का यत्न किया; उस ने तो उनको न परखा था। इसलिये दाऊद ने शाऊल से कहा, इन्हें पहिने हुए मुझ से चला नहीं जाता, क्योंकि मैं ने नहीं परखा। और दाऊद ने उन्हें उतार दिया।
1Sa 17:40  तब उस ने अपनी लाठी