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Friday, July 27, 2012

आज्ञाकारिता

   जब बालक कोफी अपने संडे स्कूल (रविवार को चर्च में बच्चों को परमेश्वर के वचन बाइबल से शिक्षा दिए जाने के समय) से वापस लौटा तो उसकी माँ ने उससे पूछा कि उन्हें आज क्या सिखाया गया? तुरंत ही खिसिए हुए स्वर में कोफी का उत्तर था, "आज्ञाकारिता...एक बार फिर से वही बात!"

   यद्यपि मैं कोफी से उम्र में बहुत बड़ी हूँ, तो भी मैं सहमत हूँ कि परमेश्वर की आज्ञाकारिता का पाठ एक ऐसा पाठ है जिसे हमें बार बार सीखना पड़ता है।

   बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लिखा: "परमेश्वर मुझे जीने के नियम नहीं देता, परन्तु उसने जीवन के लिए अपने स्तर बिलकुल स्पष्ट बता रखे हैं। यदि उसके साथ मेरा संबंध प्रेम का संबंध है, तो जो उसको भाता है और जो वह कहता है मैं वही करूंगा; यदि मैं ऐसा करने से हिचकिचाता हूँ तो इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम की प्रतिस्पर्धा में मैंने किसी दूसरे को, अर्थात स्वयं अपने आप को भी रख लिया है, और इस ’दूसरे’ एवं परमेश्वर के प्रति प्रेम में से किस के प्रेम को प्राथमिकता दूँ और निभाऊँ यही दुविधा मेरी हिचकिचाहट का कारण है।"

   जब हम परमेश्वर के आज्ञाकारी होते हैं तो हम यह दिखाते हैं कि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं और अपने आप में नहीं वरन उस में विश्वास रखते हैं। एक अन्य बाइबल शिक्षक आर्थर पिंक ने कहा: "प्रेम कार्यकारी होता है और अपने आप को कार्यों में व्यक्त करता है - ऐसे कार्यों में जो प्रेम के पात्र की पसन्द के अनुसार होते हैं।" परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ है कि हम अपनी इच्छाएं नहीं वरन उसका कहा पूरा करें।

   परमेश्वर अपने अनुयायियों से आज्ञाकारिता चाहता है। प्रभु यीशु ने आज्ञाकारिता की अनिवार्यता पर बहुत ज़ोर दिया; उन्होंने अपने चेलों से कहा: "जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्‍यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो?" (लूका ६:४६); प्रभु यीशु ने अपने चेला होने की पहचान भी आज्ञाकारिता से ही दी: "यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे" (यूहन्ना १४:१५)।

   प्रभु के लोगों के लिए परमेश्वर की आज्ञाकारिता विकल्प नहीं अनिवार्यता है। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर की आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है।

परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं। - १ यूहन्ना ५:३

बाइबल पाठ: १ यूहन्ना २:१-११
1Jn 2:1  हे मेरे बालको, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धामिर्क यीशु मसीह। 
1Jn 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1Jn 2:3  यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो उस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1Jn 2:4  जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है, और उस में सत्य नहीं। 
1Jn 2:5  पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1Jn 2:6  जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1Jn 2:7  हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1Jn 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं, और यह तो उस में और तुम में सच्‍ची ठहरती है; कयोंकि अन्‍धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1Jn 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं, और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्‍धकार ही में है। 
1Jn 2:10  जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1Jn 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्‍धकार में है, और अन्‍धकार में चलता है, और नहीं जानता, कि कहì