बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Saturday, September 1, 2012

केंद्रबिंदु


   विख्यात पास्टर और प्रचारक अर्ल पामर ने चर्च के अगुवों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए अपने जीवन के अनुभव से बताया; उन्होंने वह बात भी बताई जो पिछ्ले अर्धदशक से उनके प्रचार तथा शिक्षा के तरीके का आधार रही है: जब वे बाइबल कॉलेज में छात्र थे तो एक बाइबल अध्ययन का संचालन करते समय उन्होंने अध्ययन करने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया कि बाइबल अध्ययन के खंड को समझने के लिए वे परमेश्वर के वचन में लिखे शब्दों पर ध्यान केंद्रित करें; और इसी बात को लेकर वे अपनी मसीही सेवकाई के जीवन में चलते रहे हैं।

   उन्होंने कहा, "मेरा विश्वास रहा है कि यदि मैं लोगों को परमेश्वर के वचन में लिखे शब्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उत्साहित कर सकूंगा, तो वे उन शब्दों का आदर करना सीख लेंगे, और फिर उन शब्दों पर मनन के द्वारा वे उन शब्दों के केंद्रबिंदु - मसीह यीशु की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने लगेंगे। और जो भी मसीह यीशु की ओर अपना मन और ध्यान लगाएगा, वह मसीह यीशु की ओर मुड़ भी जाएगा।" पास्टर पामर की सेवकाई का यह आधार उनके प्रभु परमेश्वर, प्रभु यीशु की शिक्षा के अनुसार था।

   प्रभु यीशु ने उन धार्मिक अगुवों से, जो परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम को भली भांति जानते थे किंतु फिर भी प्रभु यीशु के कट्टर विरोधी थे, कहा: "तुम पवित्र शास्‍त्र में ढूंढ़ते हो, क्‍योंकि समझते हो कि उस में अनन्‍त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है। फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना ५:३९-४०)। सम्पूर्ण पवित्र शास्त्र बाइबल मसीह यीशु की गवाही देता है। जिसने भी पवित्र शास्त्र को जाना और समझा है, उसने उस के हर स्थान पर मसीह यीशु को पाया है।

   बाइबल अध्ययन के लिए ना केवल एक खुला मन वरन एक उत्सुकता से भरा और खोजने वाला मन भी चाहिए। जिसने खुले और खोजी मन से बाइबल का अध्ययन किया है, उसने बाइबल में मसीह यीशु को पाया है; और जिसने मसीह यीशु को अपने जीवन में ग्रहण किया है, उसने आनन्द से परिपूर्ण अनन्त जीवन प्राप्त किया है।

   मसीह यीशु ही परमेश्वर के वचन का केंद्रबिंदु है; और वही पापों से क्षमा, उद्धार और आनन्द से परिपूर्ण अनन्त जीवन का दाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


लिखित वचन हमें जीवित एवं जीवनदायक वचन कि ओर ले जाता है।

तुम पवित्र शास्‍त्र में ढूंढ़ते हो, क्‍योंकि समझते हो कि उस में अनन्‍त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है। - युहन्ना ५:३९

बाइबल पाठ: युहन्ना ५:३३-४७
Joh 5:33  तुम ने यूहन्ना से पुछवाया और उस ने सच्‍चाई की गवाही दी है। 
Joh 5:34  परन्‍तु मैं अपने विषय में मनुष्य की गवाही नहीं चाहता; तौभी मैं ये बातें इसलिये कहता हूं, कि तुम्हें उद्धार मिले। 
Joh 5:35  वह तो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्हें कुछ देर तक उस की ज्योति में, मगन होना अच्‍छा लगा। 
Joh 5:36  परन्‍तु मेरे पास जो गवाही है वह यूहन्ना की गवाही से बड़ी है: क्‍योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात यही काम जो मैं करता हूं, वे मेरे गवाह हैं, कि पिता ने मुझे भेजा है। 
Joh 5:37  और पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्‍द सुना, और न उसका रूप देखा है। 
Joh 5:38  और उसके वचन को मन में स्थिर नहीं रखते क्‍योंकि जिसे उस ने भेजा उस की प्रतीति नहीं करते। 
Joh 5:39  तुम पवित्र शास्‍त्र में ढूंढ़ते हो, क्‍योंकि समझते हो कि उस में अनन्‍त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है। 
Joh 5:40   फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते। 
Joh 5:41   मैं मनुष्यों से आदर नहीं चाहता। 
Joh 5:42  परन्‍तु मैं तुम्हें जानता हूं, कि तुम में परमेश्वर का प्रेम नहीं। 
Joh 5:43   मैं अपने पिता के नाम से आया हूं, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे। 
Joh 5:44   तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो और वह आदर जो अद्वैत परमेश्वर की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्वास कर सकते हो? 
Joh 5:45   यह न समझो, कि मैं पिता के साम्हने तुम पर दोष लगाऊंगा: तुम पर दोष लगाने वाला तो है, अर्थात मूसा जिस पर तुम ने भरोसा रखा है। 
Joh 5:46  क्‍योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। 
Joh 5:47  परन्‍तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्‍योंकर प्रतीति करोगे।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन १३५-१३६ 
  • १ कुरिन्थियों १२