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Sunday, September 2, 2012

शांति


   हमारा संसार शोर से भरा हुआ है और संसार में यह शोर बढ़ता ही जा रहा है। किंतु, एक समाचार के अनुसार, वैज्ञानिकों ने पूर्ण खामोशी के लिए एक मार्ग पा लिया है: "New Journal of Physics में छपे एक लेख के अनुसार वैज्ञानिकों ने एक ’ध्वनि कवच’ का खाका तैयार किया है जिसके पार ध्वनि तरंगें जा नहीं सकतीं। इस तकनीक के द्वारा ध्वनि से सुरक्षित घर, संगीत-सभाओं के लिए बड़े हॉल और गुप्त रहने वाले युद्धपोत बनाना संभव हो सकेगा।"

   जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताने और मनन के लिए एक शांत स्थान ढूंढते हैं, तो इच्छा होती है कि कोई ऐसा ही ध्वनि कवच हमें भी मिल जाए जिससे हम भी बिना ध्यान बंटे मनन के लिए बैठ सकें। परन्तु यदि हमें कोई ऐसा साधन मिल भी जाए जो हमारे आस-पास के सारे शोर को हम तक पहुँचने से रोक सके तो भी अपने भीतर के कोलाहल को कैसे शांत करेंगे? मन में उठती चिंताओं का शोर तो फिर भी हमारे अन्दर गूंजता रहेगा और विचिलित करता तथा हमारा ध्यान बंटाता रहेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम भजनकार द्वारा परमेश्वर की ओर से लिखित निर्देश पाते हैं: "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं" (भजन ४६:१०)। लेकिन व्यावाहरिक रीति से हम अपने मनों को शांत कैसे करें?

   परमेश्वर हमारी दुविधा को जानता है और उसने हमारे लिए अपना बनाया ’ध्वनि कवच’ उपलब्ध कराया है - हम अपनी अशांति और चिंताएं उसकी शांति से अदल-बदल कर लें। परमेश्वर ने कहा: "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६-७)।

   जब हम समर्पित मन के साथ परमेश्वर के हाथों में अपनी चिंताओं को डालकर उन्हें वहीं छोड़ देते हैं, और परमेश्वर को अपना काम अपनी रीति से करने देते हैं, उसके समय और उसकी कार्यविधियों का आदर करते हैं, तो अपने अन्दर उसकी अद्भुत शांति को पाते हैं; ऐसी शांति जो हमारे किसी प्रयास से नहीं मिल सकती, केवल वह ही प्रदान कर सकता है। - डेनिस फिशर


जो परमेश्वर के सामने शांत रहते हैं, परमेश्वर की शांति उनहे उपलब्ध रहती है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान् हूं! - भजन ४६:१०

बाइबल पाठ: भजन ४६
Psa 46:1  परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psa 46:2  इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psa 46:3  चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psa 46:4  एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psa 46:5  परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psa 46:6  जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psa 46:7  सेनाओं का यहोवा हमारे संगे है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psa 46:8  आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उस ने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psa 46:9  वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psa 46:10  चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान् हूं!
Psa 46:11  सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १३७-१३९ 
  • १ कुरिन्थियों १३