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Sunday, September 9, 2012

प्रेम की आज्ञा


   सिंगापुर में कुछ बूढ़े माँ-बाप पनए जीवन-यापन के लिए परोपकारी संस्थाओं और सरकारी विभागों से सहायता मांगने और उनपर निर्भर रहने को मजबूर हैं क्योंकि उन की व्यस्क सन्तान उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है। यह रवैया बढ़ता ही जा रहा है और इस संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "हम प्रेम करना कानून बाध्य तो कर नहीं सकते!"

   किंतु परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेम करना परमेश्वर की आज्ञा है। यही बात मूसा ने इस्त्राएली समाज से कही: "क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे" (व्यवस्थाविवरण ३०:१६)। प्रभु यीशु ने भी कहा कि "सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन, प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना" (मरकुस १२:२९-३०)।

   भला परमेश्वर प्रेम करने की आज्ञा क्योंकर दे सकता है? प्रेम तो एक भावना है, उसे आज्ञा कैसे बनाया जा सकता है? परमेश्वर ने स्वयं पहले होकर हमसे हमारी पाप की दशा में ही प्रेम किया और प्रदर्शित किया; कलवरी के क्रूस पर अपने महान प्रेम में होकर दिया गया उसका महान बलिदान ही उसे यह अधिकार देता है कि अब वह हमें भी प्रेम प्रदर्शित करने की आज्ञा दे सके। प्रेरित युहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा: "हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें" (१ युहन्ना ३:१६, २३)।

   आज आपके पास परमेश्वर की प्रेम करने की आज्ञा को निभाने के लिए क्या क्या अवसर हैं? अपने माता-पिता का आदर करना और उनकी देखरेख करना? किसी बीमार साथी या मित्र की सेवा करना? किसी ऐसे से जिसे प्रेम करना कठिन है, प्रेम और अनुग्रह के दो शब्द कहना?

   प्रभु यीशु से प्रार्थना करें, "प्रभु क्योंकि आपने अपने महान प्रेम में होकर हमारे लिए अपने प्राण दिये, हमारी सहायता करें कि हम भी दुसरों के प्रति प्रेम दिखा सकें।" - सी. पी. हिया


जो प्रेम हम एक-दुसरे के प्रति प्रदर्शित करते हैं, वह परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम को दिखाता है।

और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें। - १ युहन्ना ३:२३

बाइबल पाठ: १ युहन्ना ३:१६-२४
1Jn 3:16  हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
1Jn 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्‍योंकर बना रह सकता है?
1Jn 3:18  हे बालको, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।
1Jn 3:19  इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उस विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे।
1Jn 3:20 क्‍योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है।
1Jn 3:21  हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के साम्हने हियाव होता है।
1Jn 3:22 और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है, क्‍योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं और जो उसे भाता है वही करते हैं।
1Jn 3:23  और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें।
1Jn 3:24 और जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह इस में, और यह उस में बना रहता है: और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उस ने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है।


एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन ६-७ 
  • २ कुरिन्थियों २