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Tuesday, October 16, 2012

"परमेश्वर ने कहा है!"


   स्पष्ट लिखने के मेरे भरसक प्रयास के बावजूद भी कभी कभी मेरे लिखे हुए का गलत अर्थ निकाला जाता है। मुझे इस बात से दुख होता है और मैं एक लेखक के रूप में अपने आप को असफल अनुभव करती हूँ और प्रयास करती हूँ कि अपनी गलतियां सुधार कर और स्पष्ट लिख सकूँ। लेकिन पाठक कभी मेरे शब्दों को संदर्भ से बाहर निकाल कर प्रयोग करते हैं तो कभी उन शब्दों में वह पढ़ते हैं जो मैंने वहां ना लिखा और जो ना मेरा तात्पर्य था। यह बहुत कुण्ठित करता है क्योंकि एक बार लेख के छपने के बाद लोग उसको किस रीति से प्रयोग करेंगे यह निरधारित या नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

   यह बात एक अन्य किंतु और भी गंभीर बात को स्मरण दिलाती है - परमेश्वर के वचन का दुरुपयोग। यर्मियाह भविष्यद्वक्ता के दिनों में भी लोगों ने यह किया। उन्होंने परमेश्वर के नाम से अपने मन की बातें लोगों से कहीं; ऐसी बातें जिन्हें वे लोग स्वयं तो चाहते थे किंतु परमेश्वर की ओर से उन्हें उनके बारे में कोई निर्देश नहीं थे। इसलिए परमेश्वर ने यर्मियाह के द्वारा लोगों को सन्देश दिया: "सेनाओं के यहोवा ने तुम से यों कहा है, इन भविष्यद्वक्ताओं की बातों की ओर जो तुम से भविष्सद्वाणी करते हैं कान मत लगाओ, क्योंकि ये तुम को व्यर्थ बातें सिखाते हैं; ये दर्शन का दावा करके यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन की बातें कहते हैं" (यर्मियाह २३:१६)। साथ ही परमेश्वर ने उन्हें चेतावनी भी दी और कहा कि जो उसके नाम से अपने मन की बात कहते हैं या फिर उसके वचनों को बिगाड़ कर बताते हैं वह उन्हें त्याग देगा और अपने सामने से निकाल देगा (पद ३६, ३९)।

   उन भविष्यद्वक्ताओं की तुलना पौलुस प्रेरित की जीवन-शैली से कीजिए: "परन्‍तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं" (२ कुरिन्थियों ४:२)। उसे परमेश्वर के नाम से अपने मन की बात कहने के दुष्परिणाम भली भांति पता थे। यही मनसा हम सभी की भी होनी चाहिए कि परमेश्वर के नाम का दुरुपयोग स्वार्थ सिद्धि के लिए ना होने पाए। परमेश्वर ने अपना वचन बाइबल हमें हमारी शिक्षा के लिए दिया है ना कि उसमें जोड़-तोड़ करके उसका अपनी इच्छानुसार दुरुपयोग करने के लिए। जो ऐसा करते हैं वे सचेत हों क्योंकि ऐसा करने के परिणाम गंभीर हैं: "मैं हर एक को जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा" (प्रकाशितवाक्य २२:१८-१९)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमें अपने आप को बाइबल के अनुसार करने का प्रयास करते रहना है, ना कि बाइबल को अपने अनुसार।

क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं। - २ कुरिन्थियों २:१७

बाइबल पाठ: यर्मियाह २३:१६; ३०-४०
Jer 23:16  सेनाओं के यहोवा ने तुम से यों कहा है, इन भविष्यद्वक्ताओं की बातों की ओर जो तुम से भविष्यद्वाणी करते हैं कान मत लगाओ, क्योंकि ये तुम को व्यर्थ बातें सिखाते हैं; ये दर्शन का दावा करके यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन की बातें कहते हैं। 
Jer 23:30  यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो भविष्यद्वक्ता मेरे वचन औरों से चुरा चुराकर बोलते हैं, मैं उनके विरुद्ध हूँ। 
Jer 23:31  फिर यहोवा की यह भी वाणी है कि जो भविष्यद्वक्ता “उसकी यह वाणी है”, ऐसी झूठी वाणी कहकर अपनी अपनी जीभ डुलाते हैं, मैं उनके भी विरुद्ध हूँ। 
Jer 23:32  यहावा की यह भी वाणी है कि जो बिना मेरे भेजे वा बिना मेरी आज्ञा पाए स