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Saturday, November 3, 2012

हर पल के लिए तैयार


   अभिनेता क्रिस्टोफर रीव्स सन १९९५ में घुड़सवारी करते हुए दुर्घटनाग्रस्त हुए जिससे उनके हाथों और पैरों का काम करना जाता रहा। इस दुर्घटना से पहले रीव्स ने एक फील्म में ऐसे ही एक मरीज़ की भूमिका निभाई थी। उस भूमिका की तैयारी के लिए वे एक संस्था में जाया करते थे जहां ऐसे रोगियों का इलाज और पुनर्स्थापना सिखाई जाती थी। रीव्स ने स्मरण किया कि हर बार जब वे उस संस्था से लौटते थे तो उनके मन में होता था "परमेश्वर का धन्यवाद हो कि यह मेरे साथ नहीं हुआ।" लेकिन इस दुर्घटना के बाद रीव्स को अपनी इस सोच पर दुख हुआ; इस संदर्भ में उन्होंने कहा, "मैं अपने आप को उन पक्षाघात से पीड़ित रोगियों से बिलकुल पृथक करके देखता था, बिना यह सोचे-समझे कि कभी भी क्षण भर में ही मैं भी इनके समान ही हो सकता हूँ।" और यह दुखद दुर्घटना उनके साथ घट गई।

   दुसरों को दुख-तकलीफों में देखकर हम भी सोच सकते हैं, और अकसर सोचते भी हैं कि ऐसा मेरे साथ नहीं हो सकता। हमारा ऐसा विचार विशेषतः तब होता है जब जीवन में हम सफलता, समृद्धि और पारिवारिक स्थिरता के समय से निकल रहे होते हैं। राजा दाऊद ने भी सफलता के एक समय में अपनी योग्यता के घमण्ड में अपने आप को हर नुकसान से सुरक्षित समझा: "मैं ने तो चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का" (भजन ३०:६)। परन्तु तुरन्त ही उसने अपने मन को साधा और अपने घमण्ड से मुँह फेरा; उसने स्मरण किया कि बीते समयों में वह कठिनाईयों का सामना कर चुका है और परमेश्वर ही ने उसे उन सब से बचाया था: "तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवा कर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है" (भजन ३०:११)।

   चाहे हम आशीषों से होकर निकलें या परेशानियों द्वारा परखे जाएं, हर परिस्थिति में हमारा भरोसा अपनी किसी योग्यता या सामर्थ पर नहीं वरन केवल परमेश्वर और उसकी सामर्थ पर रहना चाहिए, क्योंकि कौन सा क्षण हमारे लिए क्या ले आएगा यह केवल परमेश्वर ही जानता है और जो उसपर भरोसा रखते हैं, उन्हें वह हर पल के लिए तैयार भी रखता है: "तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्‍चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको" (१ कुरिन्थियों १०:१३)। - डेनिस फिशर


समय चाहे अच्छा हो या बुरा, हर समय में हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता परमेश्वर का साथ ही है।

मैं ने तो चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का। - भजन ३०:६

बाइबल पाठ: भजन ३०
Psa 30:1  हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया। 
Psa 30:2  हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है। 
Psa 30:3  हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।
Psa 30:4  हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो। 
Psa 30:5  क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सवेरे आनन्द पहुंचेगा।
Psa 30:6  मैं ने तो चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का। 
Psa 30:7  हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था; जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।
Psa 30:8  हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा, और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि 
Psa 30:9  जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है? 
Psa 30:10  हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर? हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो।
Psa 30:11  तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवा कर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है; 
Psa 30:12  ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३०-३१ 
  • फिलेमौन