बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Thursday, January 31, 2013

अनुग्रह


   एशिया के एक बड़े और व्यस्त शहर में मुझे सड़क के किनारों और पटरियों को लोगों से भरे हुए देखकर अचरज हुआ। वहाँ भरी हुई भीड़ के कारण बिलकुल भी पाँव रखने का भी स्थान प्रतीत नहीं हो रहा था परन्तु फिर भी सब जल्दी में चलते हुए, एक-दूसरे से बेख़बर और अपनी ही किसी न किसी बात में व्यस्त दिख रहे थे।

   उसी भीड़ में मुझे एक धीमी और दिल छू लेने वाली बाँसुरी की आवाज़ सुनाई दी। कोई था जो वहाँ पर सुप्रसिद्ध आराधाना गीत "Amazing Grace" (अद्भुत अनुग्रह) बजा रहा था। वह भीड़ उस बजाने वाले और उसके संगीत, दोनो ही से बेपरवाह थी किंतु वह बजाए जा रहा था। वह परमेश्वर के अद्भुत प्रेम का एक संगीतमय संदेश उन सब के लिए दे रहा था जो या तो उस गीत को जानते थे और उसकी धुन सुनकर गीत के शब्दों को स्मरण करते और उन पर मनन करते, या जो उस धुन से आकर्षित होकर और जानकारी लेना चाहते।

   वह धुन भीड़ के लिए परमेश्वर के प्रेम पर ध्यान लगाने और जगत के उद्धारकर्ता के पास आने का निमंत्रण था - जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले (मत्ती १३:९)। जैसा सुसमाचार के साथ सदा होता आया है, सुसमाचार सुनने वालों में से कुछ लोग उस पर विश्वास करके मसीही विश्वास के संकरे मार्ग पर चलने का निर्णय ले लेते हैं; शेष परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम के उस निमंत्रण को अन्देखा और अस्वीकार करके अपने उसी सरल और चौड़े मार्ग पर ही बने रहते हैं जो अन्ततः अनन्त विनाश को ले जाता है। प्रभु यीशु ने सचेत किया है: "सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं" (मत्ती ७:१३)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को संसार में इसीलिए भेजा और क्रूस पर बलिदान होने दिया ताकि सारे संसार को उद्धार और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश का मार्ग मिल जाए "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना ३:१६)। मार्ग तो परमेश्वर ने सब के लिए खोल दिया है, परन्तु उस मार्ग पर चलना हर व्यक्ति का अपना निर्णय है। अब जो कोई सच्चे मन और सहज विश्वास से मसीह यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करता है और अपने पापों से पश्चाताप करता है वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश और अनन्त आशीष का जीवन पाता है। परमेश्वर का महान अनुग्रह यही है कि हमारे जीवन की अन्तिम सांस तक वह हमसे हमारे पापों के अनुसार नहीं वरन अपने प्रेम में क्षमा और बहाली का व्यवहार करने को तैयार रहता है। जिसने इस जीवन का यह अवसर गवाँ दिया, उसे उस जीवन में फिर परमेश्वर के प्रेम का नहीं उसके न्याय का सामना करना होगा।

   परमेश्वर के इस अनुग्रह को अपने जीवन में व्यर्थ ना जाने दें, आज ही अपना मार्ग चुन लें क्योंकि कल क्या होगा यह किसी को पता नहीं है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु को ग्रहण करना अर्थात उद्धार को प्राप्त करना।

क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं। - मत्ती ७:१४

बाइबल पाठ: मत्ती ७:१३-२३
Matthew7:13 सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं।
Matthew7:14 क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।
Matthew7:15 झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेडिए हैं।
Matthew7:16 उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?
Matthew7:17 इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।
Matthew7:18 अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है।
Matthew7:19 जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।
Matthew7:20 सो उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।
Matthew7:21 जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।
Matthew7:22 उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?
Matthew7:23 तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २५-२६ 
  • मत्ती २०:१७-३४

Wednesday, January 30, 2013

प्रत्यक्ष


   लड़कियों की सॉफ्टबॉल खेल स्पर्धा थी। खेल के अम्पायर ने लड़कियों के पीछे अपना स्थान लिया, खेल आरंभ हुआ और थोड़ी देर में पीछे से कुछ आवाज़ें आनी शुरू हो गईं, फिर थोड़ी ही समय बाद एक खिलाड़ी कि माँ ने कहना आरंभ कर दिया "हमें नया अम्पायर चहिए! हमें नया अम्पायर चहिए!" उस माँ के आलाप के पीछे-पीछे कुछ अन्य माताओं ने भी यही दोहराना आरम्भ कर दिया। अम्पायर मुस्कुराया, पीछे की भीड़ की ओर मुड़ा और ऊँची आवाज़ में कहना आरंभ कर दिया "हमें नए अभिभावक चाहिएं! हमें नए अभिभावक चाहिएं!" अभिभावकों का शोर यह सुनते ही शाँत हो गया।

   माता-पिता के लिए यह बहुत अनिवार्य है कि वे कैसा उदाहरण अपने बच्चों के समक्ष रखते हैं, क्योंकि बच्चे उनकी हर बात देखते हैं और उससे सीखते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल मसीही विश्वासी माता-पिता के लिए कुछ निर्देष देती है जिससे वे अपने बच्चों में अच्छी आदतें और आचरण बचपन से ही डाल सकें:
  • बच्चों के लिए और बच्चों के साथ प्रार्थना करें - जिससे वे परमेश्वर से बात करना सीख सकें, "प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो" (कुलुस्सियों ४:२)।

  • उन्हें बाइबल से सिखाएं और सुनाएं - जिससे वे परमेश्वर के वचन की सच्चाई को सीख सकें, "और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना" (व्यवस्थाविवरण ६:७)।

  • उन्हें प्रभु यीशु मसीह के बारे में सिखाएं - जिससे वे बचपन से ही जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास करना सीख सकें, "यीशु ने उसको उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता" (यूहन्ना ३:३)।


   बच्चों के सामने एक अच्छा उदाहरण रखने का सर्वोत्तम मार्ग है अपने विश्वास को उनके प्रत्यक्ष जी कर दिखाना। जो वे प्रत्येक्ष देखेंगे, उसी पर विश्वास करेंगे और उसे ही अपनाएंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके बिना कुछ बोले ही आपके जीवन आपके बच्चों को क्या सिखा रहे हैं। जो वे आज सीखेंगे उसे कल करेंगे। - सिंडी हैस कैसपर


बच्चों को अपने अभिभावकों के गुणों विरासत में चाहे ना भी मिलें, परन्तु बच्चे अपने अभिभावकों के मूल्यों और आदर्शों को सहजता से अपना लेते हैं।

लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा। - नीतिवचन २२:६

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ११:१८-२१
Deuteronomy11:18 इसलिये तुम मेरे ये वचन अपने अपने मन और प्राण में धारण किए रहना, और चिन्हानी के लिये अपने हाथों पर बान्धना, और वे तुम्हारी आंखों के मध्य में टीके का काम दें।
Deuteronomy11:19 और तुम घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते-उठते इनकी चर्चा कर के अपने लड़के-बालों को सिखाया करना।
Deuteronomy11:20 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट के बाजुओं और अपने फाटकों के ऊपर लिखना;
Deuteronomy11:21 इसलिये कि जिस देश के विषय में यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर कहा था, कि मैं उसे तुम्हें दूंगा, उस में तुम्हारे और तुम्हारे लड़के-बालों की दीर्घायु हो, और जब तक पृथ्वी के ऊपर का आकाश बना रहे तब तक वे भी बने रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २३-२४ 
  • मत्ती २०:१-१६

Tuesday, January 29, 2013

निष्कर्ष


   इन्टरनैट पर एक ऑन्लाइन पत्रिका, ’स्मिथ मैगज़ीन’ ने, जो सदस्यों द्वारा आपस में कथा-कहानी बांटने के द्वारा आनन्द भाव फैलाने के लिए है, अपने पाठकों के सामने एक रोचक चुनौती रखी - केवल अंग्रज़ी भाषा के छः शब्द प्रयोग करके अपने जीवन को बयान करें। हज़ारों लोगों ने प्रत्युत्तर में अपनी जीवन समीक्षाएं भेजीं, जिनमें आनन्द-विनोद भी था जैसे "प्यारी पत्नी, अच्छे बच्चे - मैं धनवान" और दुखी मन भी थे, जैसे "साठ का हूँ; अभी तक अभिभावकों को क्षमा नहीं कर पाया हूँ"।

   मैं कलपना करने लगा कि परमेश्वर के वचन में दी गई जीवनी के आधार पर यदि राजा सुलेमान को अपने जीवन को ऐसे ही संक्षेप में कहना होता तो वह क्या कहता? संभवतः अपनी जवानी के दिनों में वह कहता, "परमेश्वर ने मुझे बेहिसाब धन और बुद्धिमता प्रदान की है" (१ राजा १०:२३); और अपने जीवन के अन्त की ओर आकर कहता, "मैंने जैसा प्रचार किया था, काश वैसा ही आचरण भी किया होता।"

   राजा सुलेमान का शासन काल इस्त्राएल के इतिहास में शांति और समृद्धि का समय था। सुलेमान, जिसने लड़कपन में ही परमेश्वर के दर्शन, आशीष और सामर्थ के साथ अपना राज्य आरंभ किया था, उम्र बढ़ने के साथ अपनी समृद्धि में परमेश्वर से दूर हो गया क्योंकि उसने बहुत सी परदेशी स्त्रियों के साथ ब्याह रचा लिए थे और उन स्त्रियों ने उसे अपने देवी-देवताओं की उपासना में उलझा लिया, सच्चे परमेश्वर से विमुख कर दिया; और एक आदर्ष जीवन नष्ट हो गया तथा उससे परमेश्वर अप्रसन्न हो गया, और राजा सुलेमान अपनी आशीषें गवां बैठा। सुलेमान ने अपने अनुभवों के आधार पर लिखी सभोपदेशक पुस्तक में अनेक बार ’व्यर्थ’ शब्द का प्रयोग किया है। यह सांसारिकता के जीवन, सांसारिक उपलब्धियों, ज्ञान, वासना और शारीरक संतुष्टि से अन्ततः कुछ भी चिरस्थायी और शांतिप्रद प्राप्त ना हो पाने के कारण जीवन से उसके मोह-भंग को दिखाता है। हर प्रकार के सांसारिक सुख-विलास से आनन्द पाने का प्रयास कर के देख लेने बाद सुलेमान का अन्तिम निष्कर्ष वही था जो आरंभ में ही उससे परमेश्वर ने कह दिया था - परमेश्वर कि आज्ञाकारिता में बने रहना।

   इस बुद्धिमान राजा ने, जिसके पास सब परमेश्वर की आशीषस्वरूप कुछ था और जिसने अपनी अनाज्ञाकारिता द्वारा सब कुछ गंवा दिया, उसी ने अपने सभी अनुभवों पर गहराई से चिंतन कर के अपनी सभोपदेशक की पुस्तक का अन्त इन शब्दों से किया: "सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा" (सभोपदेशक १२:१३-१४)।

   सुलेमान राजा द्वारा अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर दिया गया यह निष्कर्ष हम सब के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है और मार्गदर्शक भी। किसके जीवन का अन्त कब हो जाएगा, कोई नहीं जानता। अन्त कभी भी हो, किंतु विचार करने की बात यह है कि क्या हम परमेश्वर को अपने जीवनों का हिसाब देने के लिए वास्तव में हर समय तैयार हैं? जो उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करते हैं वे उसे हिसाब देने के लिए सदा तैयार भी रहते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की आज्ञाकारिता ही परमेश्वर की आशीषों की कुंजी है।

सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। - सभोपदेशक १२:१३

बाइबल पाठ: १ राजा ११:१-१०
1 Kings11:1 परन्तु राजा सुलैमान फ़िरौन की बेटी, और बहुतेरी और पराये स्त्रियों से, जो मोआबी, अम्मोनी, एदोमी, सीदोनी, और हित्ती थीं, प्रीति करने लगा।
1 Kings11:2 वे उन जातियों की थीं, जिनके विषय में यहोवा ने इस्राएलियों से कहा था, कि तुम उनके मध्य में न जाना, और न वे तुम्हारे मध्य में आने पाएं, वे तुम्हारा मन अपने देवताओं की ओर नि:सन्देह फेरेंगी; उन्हीं की प्रीति में सुलैमान लिप्त हो गया।
1 Kings11:3 और उसके सात सौ रानियां, और तीन सौ रखेलियां हो गई थीं और उसकी इन स्त्रियों ने उसका मन बहका दिया।
1 Kings11:4 सो जब सुलैमान बूढ़ा हुआ, तब उसकी स्त्रियों ने उसका मन पराये देवताओं की ओर बहका दिया, और उसका मन अपने पिता दाऊद की नाईं अपने परमेश्वर यहोवा पर पूरी रीति से लगा न रहा।
1 Kings11:5 सुलैमान तो सीदोनियों की अशतोरेत नाम देवी, और अम्मोनियों के मिल्कोम नाम घृणित देवता के पीछे चला।
1 Kings11:6 और सुलैमान ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और यहोवा के पीछे अपने पिता दाऊद की नाईं पूरी रीति से न चला।
1 Kings11:7 उन दिनों सुलैमान ने यरूशलेम के साम्हने के पहाड़ पर मोआबियों के कमोश नाम घृणित देवता के लिये और अम्मोनियों के मोलेक नाम घृणित देवता के लिये एक एक ऊंचा स्थान बनाया।
1 Kings11:8 और अपनी सब पराये स्त्रियों के लिये भी जो अपने अपने देवताओं को धूप जलातीं और बलिदान करती थीं, उसने ऐसा ही किया।
1 Kings11:9 तब यहोवा ने सुलैमान पर क्रोध किया, क्योंकि उसका मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से फिर गया था जिसने दो बार उसको दर्शन दिया था।
1 Kings11:10 और उसने इसी बात के विषय में आज्ञा दी थी, कि पराये देवताओं के पीछे न हो लेना, तौभी उसने यहोवा की आज्ञा न मानी।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २१-२२ 
  • मत्ती १९

Monday, January 28, 2013

संवेदनशील


   अमेरिका का कैलिफोर्निया शहर एक अति भूकम्प संवेदनशील क्षेत्र पर स्थित है और इस क्षेत्र में भूकम्प की संभावना सदा बनी रहती है। वहां के लोगों ने भूकम्प की चेतावनियों को एक हास्य-भाव में प्रस्तुत करके आने वाले सैलानीयों को आकर्षित करने का प्रयास किया है। स्थान स्थान पर होटलों के विज्ञापनों, खाने की वस्तुओं इत्यादि को विविध रूप में भूकम्प की चेतावनियों और संबंधित बातों के हास्य-भाव के साथ प्रस्तुत किया गया हैं। लेकिन एक वास्तविक भूकम्प बड़ा भयावह होता है, मैं जानता हूँ क्योंकि मैं कैलिफोर्निया का भूक्म्प अनुभव कर चुका हूँ। ये प्राकृतिक आपदाएं कभी कभी लोगों को परमेश्वर की निकटता में लाने का मार्ग भी बन जाती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों के काम नामक पुस्तक में एक ऐसा ही वर्णन है। प्रभु यीशु के अनुयायी प्रेरित पौलुस और उसका साथी सिलास अपनी सुसमाचार कि सेवकाई के कारण पकड़कर बन्दीगृह में डाल दिए गए और जकड़ कर रखे गए थे। बन्दीगृह में डाले जाने से पहले उन की बहुत पिटाई भी करी गई थी। लेकिन अनुचित रीति से बन्दीगृह में डाले जाने और यातनाएं दिए जाने के बावजूद भी वे वहां पर परमेश्वर की प्रशंसा में स्तुति गीत गा रहे थे, जो सब सुन रहे थे। मध्य रात्री के लगभग एक भूकम्प आया और बन्दीगृह के द्वार और कैदियों के बन्धन खुल गए। ऐसे में जब बन्दीगृह के दारोगा ने पाया कि ना पौलुस और सिलास ने और ना ही किसी अन्य बन्दी ने भागने का प्रयत्न नहीं किया है तो वह उनके सामने गिर पड़ा और पूछने लगा, "... हे साहिबो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूं?" (प्रेरितों १६:३०) पौलुस ने उसे उत्तर दिया, "...प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा" (प्रेरितों १६:३१)। उसी समय वह उन्हें अपने घर ले गया, उसने तथा उसके परिवार जनों ने मसीह यीशु पर विश्वास करके बपतिस्मा लिया तथा परमेश्वर के घराने में सम्मिलित हो गए।

   जीवन के उतार-चढ़ाव और परिस्थितियां कभी कभी लोगों को मसीह यीशु में उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिक संवेदनशील कर देते हैं। क्या आप किसी ऐसे जन को जानते हैं जो कठिनाईयों से होकर निकल रहा है? प्रार्थनापूर्वक उसके साथ संपर्क में बने रहें, अपने जीवन द्वारा मसीही प्रेम और विश्वास को उसके सामने रखें तथा संवेदनशीलता के साथ मसीह में उद्धार की गवाही उसके साथ बाँटने को सदा तैयार रहें। - डेनिस फिशर


अनेक लोग समस्याओं द्वारा ही मसीह यीशु के निकट आए हैं।

कि इतने में एकाएक बड़ा भुईंडोल हुआ, यहां तक कि बन्‍दीगृह की नेव हिल गईं, और तुरन्त सब द्वार खुल गए; और सब के बन्‍धन खुल पड़े। - प्रेरितों १६:२६

बाइबल पाठ: प्रेरितों १६:२२-३४
Acts16:22 तब भीड़ के लोग उन के विरोध में इकट्ठे हो कर चढ़ आए, और हाकिमों ने उन के कपड़े फाड़कर उतार डाले, और उन्हें बेंत मारने की आज्ञा दी।
Acts16:23 और बहुत बेंत लगवाकर उन्हें बन्‍दीगृह में डाला; और दारोगा को आज्ञा दी, कि उन्हें चौकसी से रखे।
Acts16:24 उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्हें भीतर की कोठरी में रखा और उन के पांव काठ में ठोक दिए।
Acts16:25 आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और बन्‍धुए उन की सुन रहे थे।
Acts16:26 कि इतने में एकाएक बड़ा भुईंडोल हुआ, यहां तक कि बन्‍दीगृह की नेव हिल गईं, और तुरन्त सब द्वार खुल गए; और सब के बन्‍धन खुल पड़े।
Acts16:27 और दारोगा जाग उठा, और बन्‍दीगृह के द्वार खुले देखकर समझा कि बन्‍धुए भाग गए, सो उसने तलवार खींचकर अपने आप को मार डालना चाहा।
Acts16:28 परन्तु पौलुस ने ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा; अपने आप को कुछ हानि न पहुंचा, क्योंकि हम सब यहां हैं।
Acts16:29 तब वह दीया मंगवाकर भीतर लपक गया, और कांपता हुआ पौलुस और सीलास के आगे गिरा।
Acts16:30 और उन्हें बाहर लाकर कहा, हे साहिबो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूं?
Acts16:31 उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।
Acts16:32 और उन्होंने उसको, और उसके सारे घर के लोगों को प्रभु का वचन सुनाया।
Acts16:33 और रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जा कर उन के घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया।
Acts16:34 और उसने उन्हें अपने घर में ले जा कर, उन के आगे भोजन रखा और सारे घराने समेत परमेश्वर पर विश्वास कर के आनन्द किया।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १९-२० 
  • मत्ती १८:२१-३५

Sunday, January 27, 2013

उल्टा-पुल्टा


   यदि आप मुझसे मेरे विश्वास के बारे में पूछेंगे तो मैं कहुंगा कि मैं मसीह यीशु का शिष्य एवं एक मसीही विश्वासी हूँ। किंतु मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि कभी कभी मसीह यीशु की बातों का अनुसरण करना एक बड़ी चुनौती होता है। उदाहरणस्वरूप, मसीह यीशु कहते हैं कि जब मैं अपने विश्वास के कारण सताया जाऊँ तो मुझे आनन्दित होना है (मत्ती ५:११-१२); मुझे मारने वाले की ओर अपना दूसरा गाल भी फेर देना है (पद ३८-३९) और जो उधार मांगे उसे दे देना है (पद ४०-४२)। मुझे अपने शत्रुओं से प्रेम रखना है, मुझे श्राप देने वालों को आशीष देनी है और मुझसे घृणा करने वालों की भलाई करनी है (पद ४३-४४)। इस प्रकार की जीवन शैली मुझे बड़ी उल्टी-पुल्टी लगती है।

   लेकिन मैंने धीरे धीरे यह भी जान लिया है कि वास्तव में उल्टा-पुल्टा मसीह यीशु नहीं, मैं स्वयं हूँ। संसार के अन्य सभी मनुष्यों के समान मैं भी पाप स्वभाव के साथ और पाप के कारण आत्मिक रूप में विकृत जन्मा था। जन्म से ही विद्यमान पाप स्वभाव के कारण हमारे सभी नैसर्गिक गुण तथा सभी बातों के लिए हमारी प्रथम प्रतिक्रीया परमेश्वर के मार्गों तथा धार्मिकता से उलट ही होती है; और इस कारण हम किसी न किसी समस्या में बने रहते हैं। जब हम अपने पापों के लिए पश्चाताप कर के और उनकी क्षमा मांगकर, मसीह यीशु को अपना जीवन समर्पित कर देते हैं तब वह हमें हमारे उलटेपन से पलट कर सीधा करता है और हमें इसी सीधेपन में बने रहने के लिए कहता है तथा इस सीधेपन को अपने जीवन के द्वारा संसार के सामने रखने को कहता है।

   जब हम संसार के उलटे व्यवहार को छोड़कर मसीह के सीधे व्यवहार में चलना आरंभ करते हैं तब वह हमें अटपटा तो लगता है, और संसार को हमारा उपहास करने और हमारा फायदा उठाने का अवसर भी देता है, किंतु थोड़े समय में ही हम पहचानने लगते हैं कि मसीह के सीधेपन में ही सच्चाई और लाभ है। हम जान जाते हैं कि दूसरा गाल फेर देने से हम झगड़ा बढ़ाने तथा बात को और गंभीर करने से बच जाते हैं; देना लेने से भला होता है तथा अपने अहम का इन्कार करके नम्रता से जीवन जीने में कितनी शांति, सामर्थ और आशीष है। सीधेपन के जीवन की उत्तमता अनुभव से ही ज्ञात होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह ५५:८ में लिखा है कि परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्गों के समान नहीं हैं; और मैंने यह जान लिया है कि परमेश्वर के मार्ग चाहे हमारी सांसारिक समझ के अनुसार कैसे भी उल्टे-पुल्टे प्रतीत क्यों ना हों किंतु वे ही सर्वोत्तम और सदा ही लाभकारी मार्ग हैं। - जो स्टोवैल


जो परमेश्वर के लिए सीधा और सही है वह चाहे हमें उल्टा-पुल्टा प्रतीत हो किंतु खरा और लाभदायक वही है।


तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। - मत्ती ५:४३-४४

बाइबल पाठ: मत्ती ५:३-१२;३८-३८
Matthew5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे।
Matthew5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Matthew5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे।
Matthew5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।
Matthew5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
Matthew5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।
Matthew5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।
Matthew5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे।
Matthew5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे।
Matthew5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।
Matthew5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।
Matthew5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते?
Matthew5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?
Matthew5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १६-१८ 
  • मत्ती १८:१-२०