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गुरुवार, 16 मई 2013

सही दृष्टिकोण


   क्या आपको कभी लगा कि जीवन न्यायी नहीं है? जो संसार के स्वामी तथा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह में विश्वास नहीं करते और उसकी कोई परवाह भी नहीं करते, उनकी समृद्धि और सामर्थ देख कर हम मसीही विश्वासियों को कई बार कुण्ठित एवं निराश होना बहुत स्वभाविक लगता है। एक अविश्वासी व्यवसायी बेईमानी करता है लेकिन फिर भी बड़े ठेके और दौलत उसे मिलते हैं; एक ऐसा जन जो भोग-विलास का जीवन बिताता है, स्वस्थ बना रहता है - जबकि हमें या हमारे रिश्तेदारों को आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से जूझते रहना पड़ता है, मानो हम ही दोषी और अयोग्य रहे हों और वे सब भले!

   यदि आप ने ऐसा अनुभव किया है या फिर कर रहे हैं तो आप अच्छी संगति में हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 73 का लेखक भी ऐसी ही भावना से होकर निकल रहा था; उसने दुराचारियों को फलते-फूलते देखा, और सोचने लगा कि "निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;" (भजन 73:13)। लेकिन यह तब तक ही रहा, "जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जा कर उन लोगों के परिणाम को न सोचा" (भजन 73:17); जब उसने परमेश्वर की उपस्थिति में और परमेश्वर के दृष्टिकोण से उन दुराचारियों को देखा तो उसके विचार एकदम बदल गए और शेष भजन में उन लोगों के अन्त और परमेश्वर के लोगों की उत्तम स्थिति को पहचान कर वह परमेश्वर का धन्यवादी हो गया।

   जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं और उसके दृष्टिकोण से परिस्थितियों और बातों का आंकलन करते हैं, तब हमारा जीवन और जीवन की परिस्थितियों के प्रति रवैया बिलकुल बदल जाता है। हम आज मसीही अविश्वासियों की समृद्धि को देख कर उनसे ईर्ष्या कर सकते हैं लेकिन अन्तिम न्याय के समय ऐसा नहीं रहेगा। यदि एक छोटी लड़ाई जीत कर भी पूरा युद्ध हार जाएं, तो उस छोटी जीत का क्या लाभ? संसार में कुछ समय की सुख-समृद्धि पाकर अनन्त जीवन कष्ट में बिताने के लिए खाली हाथ प्रवेश करें तो फिर क्या पाया और क्या कमाया? और फिर हमारा यह दुख उठाना व्यर्थ तो नहीं, परमेश्वर हमारी हर एक बात का हिसाब रख रहा है और स्वर्ग में हमारे लिए एक बड़ा प्रतिफल तैयार हो रहा है जिसका आनन्द हम अनन्त काल तक लेते रहेंगे।

   भजन 73 के लेखक के समान ही हम भी अपने दृष्टिकोण को सही करें और परमेश्वर कि प्रशंसा और धन्यावाद करें कि वह ना केवल आते जीवन में हमारे साथ होगा, वरन इस जीवन में भी है और हर परिस्थिति, हर परेशानी में हमारे साथ बना रहता है। जीवन के अनुचित और अन्यायी प्रतीत होने वाले व्यवहार में भी यदि परमेश्वर हमारे साथ बना है और हमारा सहारा है तो फिर और किसी बात की आवश्यकता नहीं है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के साथ समय बिताने से सब बातों के प्रति दृष्टिकोण सही हो जाता है।

क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था। - भजन 73:3 

बाइबल पाठ: भजन 73
Psalms 73:1 सचमुच इस्त्राएल के लिये अर्थात शुद्ध मन वालों के लिये परमेश्वर भला है।
Psalms 73:2 मेरे डग तो उखड़ना चाहते थे, मेरे डग फिसलने ही पर थे।
Psalms 73:3 क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था।
Psalms 73:4 क्योंकि उनकी मृत्यु में वेदनाएं नहीं होतीं, परन्तु उनका बल अटूट रहता है।
Psalms 73:5 उन को दूसरे मनुष्यों की नाईं कष्ट नहीं होता; और और मनुष्यों के समान उन पर विपत्ति नहीं पड़ती।
Psalms 73:6 इस कारण अहंकार उनके गले का हार बना है; उनका ओढ़ना उपद्रव है।
Psalms 73:7 उनकी आंखें चर्बी से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं।
Psalms 73:8 वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं;
Psalms 73:9 वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं।
Psalms 73:10 तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उन को भरे हुए प्याले का जल मिलेगा।
Psalms 73:11 फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है?
Psalms 73:12 देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं; तौभी सदा सुभागी रहकर, धन संपत्ति बटोरते रहते हैं।
Psalms 73:13 निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;
Psalms 73:14 क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है।
Psalms 73:15 यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
Psalms 73:16 जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
Psalms 73:17 जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जा कर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।
Psalms 73:18 निश्चय तू उन्हें फिसलने वाले स्थानों में रखता है; और गिराकर सत्यानाश कर देता है।
Psalms 73:19 अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं! वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं।
Psalms 73:20 जैसे जागने हारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उन को छाया सा समझ कर तुच्छ जानेगा।
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा।
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 24-25 
  • यूहन्ना 5:1-24


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