ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 8 मई 2013

लौट आ


   अमेलिया अपने डॉक्टर के प्रतीक्षालय में बैठी अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी। वहाँ बज रहे संगीत में उसे एक परिचित और मार्मिक गीत "Softly and Tenderly Jesus is Calling" (नम्रता और कोमलता से यीशु बुला रहा है) सुनाई दिया। उस गीत के बोल स्मरण करके उसके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आ गई। शायद एक गीत जिसके बोल में आता है "परछाईयाँ लंबी हो चली हैं, आगे मृत्युशैया भी है" एक डॉक्टर के प्रतीक्षालय में सुनाने के लिए सर्वथा उपयुक्त गीत नहीं होगा, लेकिन यह गीत संसार में भटके हुए पापी मनुष्य को वापस प्रेमी पिता परमेश्वर के पास लौटा लाने के लिए लिखा गया है।

   कुछ लोगों को यह पुराना और प्रचलित गीत बहुत भावनात्मक भी लग सकता है; इस गीत के कोरस का सन्देश भटके हुए पापी को लौटने के लिए प्रोत्साहित करता है: "घर लौट आ, घर लौट आ; तू जो थका और परेशान है घर लौट आ; विन्ती और कोमलता से यीशु तुझे बुलाता है; कहता है ’हे पापी आ घर लौट आ!’ "

   जब कभी एक मसीही विश्वासी अपने जीवन में परमेश्वर कि इच्छा के स्थान पर अपनी इच्छा रख देता है तो वह अपने आप को पतित, परमेश्वर की संगति से दूर और दयनीय दशा में पाता है। हालांकि अनेक बार हम मसीही विश्वासी भी अपने स्वार्थी स्वभाव के आगे झुक जाते हैं, अनुचित कर जाते हैं और फिर अपने आप को परेशानियों से घिरा पाते हैं, लेकिन परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कभी कम नहीं होता; वह सदा ही हमें अपने साथ बने हुए देखना चाहता है और हमें वापस अपने पास लौटा लाने को तत्पर तथा तैयार रहता है। ऐसा उसके प्रेमी और क्षमाशील स्वभाव तथा उसकी दया और करुणा के कारण ही है जो सदा उसके बच्चों पर बनी रहती है। उसे आनन्द होता है जब हम अपने विद्रोह और पाप से पश्चाताप करके वापस उसके पास लौट आते हैं (भजन 51:1-2; लूका 15)।

   क्या आज आप अपने आप को अपने उद्धारकर्ता से दूर अनुभव कर रहे हैं? प्रेमी यीशु आप को आज भी उसी प्रेम से बुला रहा, और आप की प्रतीक्षा में है कि आप लौट कर घर की सुरक्षा और आशीषों में आ जाएं। हे पापी आ घर लौट आ! - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर की सन्तान का परमेश्वर के घर में सदा स्वागत ही होता है।

अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। - भजन 51:12

बाइबल पाठ: भजन 51:1-13
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psalms 51:2 मुझे भली भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 4-6 
  • लूका 24:36-53


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें