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Sunday, June 30, 2013

खोया और पाया

   जिस दिन तक मुझे "ढूँढ" नहीं लिया गया, मुझे पता ही नहीं था कि मैं "खोई" हुई हूँ!

   मेरा जीवन सामन्य रीति से चल रहा था, मैं अपने कार्य में व्यस्त रहती थी, ज़िम्मेदारियाँ और दिनचर्या पूरी करती थी, कभी कभी कुछ मौज मस्ती भी कर लेती थी। फिर एक दिन मुझे एक ई-मेल मिला जिसका शीर्षक था "शायद आप मेरे रिश्तेदार हैं।" मैंने वह सन्देश पढ़ा तो पाया कि वह एक महिला द्वारा भेजा गया है, जो अपने एक अन्य रिश्तेदार के साथ मिलकर पिछले 10 वर्ष से एक पुराने परिवार की मेरी तरफ के परिवार जनों की शाखा को खोज रही है क्योंकि उन्होंने अपने पिता से उनकी मृत्युशैया पर यह वायदा किया था कि वे परिवार की इस खोई हुई शाखा के लोगों को अवश्य ही ढूँढ निकालेंगे।

   मुझे "खो जाने" के लिए कुछ भी तो नहीं करना पड़ा था, मैं तो अपने जन्म से ही "खोई" हुई थी; इसी प्रकार मुझे ढूँढे जाने के लिए भी कुछ नहीं करना पड़ा सिवाय इसके कि मैं स्वीकार कर लूँ कि मैं उस खोई हुई परिवार शाखा की सदस्या हूँ, शेष कार्य तो मुझे ढूँढने वालों ने स्वयं ही पहले से ही कर लिया था। क्योंकि परिवार के उन सदस्यों के साथ मेरा कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं था इसलिए मुझे उन से दूर और "खोए हुए" होने का एहसास भी नहीं था और ना ही इस बात की जानकारी कि कोई मुझे ढूँढ रहा है।  यह जानकर कि मुझे ढूँढने के लिए उन्होंने इतनी मेहनत करी, इतना समय लगाया मुझे बहुत अच्छा लगा और आभास हुआ कि मैं कुछ विशिष्ट हूँ।

   इस घटना पर विचार करते हुए मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका 15 अध्याय में प्रभु यीशु द्वारा दीये तीन "खोए और पाए" दृष्टांतों का स्मरण हो आया -  खोई हुई भेड़, खोया हुआ सिक्का और खोया हुआ पुत्र। जब कभी हम परमेश्वर पिता से भटक जाते हैं, चाहे जानबूझ कर उस खोए हुए पुत्र के समान, या अनजाने में उस खोई हुई भेड़ के समान - परमेश्वर हमें "ढूँढने" और लौटा लाने के प्रयास में लग जाता है। चाहे हमें यह आभास ना भी हो कि हम खोए हुए हैं, किंतु यदि परमेश्वर के साथ हमारा व्यक्तिगत सम्पर्क और संबंध नहीं है तो हम खोए हुए ही हैं और हमारे जीवन का पाप हमें परमेश्वर के साथ सही संबंध बनाने नहीं देता। इसलिए पाप में अपने खोए हुए होने को स्वीकार करना और परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में उस पाप के निवारण को स्वीकार कर लेना ही ढूँढे जाने की ओर पहला कदम है।

   परमेश्वर ने तो एक बड़े प्रयास और कीमत के चुकाए जाने के द्वारा संसार के हर पाप में खोए हुए व्यक्ति के वापस उसके पास लौट आने और स्वर्गीय परिवार में स्वीकार होने का मार्ग तैयार कर के दे दिया है। हमें केवल प्रभु यीशु से पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पण करना है और उसकी आज्ञाकारिता में चलना है। वह प्रेमी स्वर्गीय पिता संसार और पाप में खोई हुई अपनी सन्तानों को बड़ी लालसा और प्रेम से वापस घर लौट आने को बुला रहा है; क्या आज आप उसकी इस पुकार को सुन कर स्वीकार करेंगे और उसके पास लौट आएंगे? - जूली ऐकैरमैन लिंक


ढूँढे जाने की आशीषों को पाने के लिए अपने खोया हुआ होने की दशा को स्वीकार करना अनिवार्य है।

क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है। - लूका 19:10 

बाइबल पाठ: लूका 15:1-10
Luke 15:1 सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें।
Luke 15:2 और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luke 15:3 तब उसने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा।
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे?
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है।
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luke 15:8 या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे?
Luke 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी कर के कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है।
Luke 15:10 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्द होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 17-19 
  • प्रेरितों 10:1-23


Saturday, June 29, 2013

परमेश्वर के अतिरिक्त

   अपनी पुस्तक Through the Valley of the Kwai में स्कॉटलैंड के एक सेना अधिकारी, 6 फुट 2 इन्च कद के एर्नेस्ट गौर्डन, ने दूसरे विश्वयुद्ध में कैदी बनाए जाने के अपने संस्मरण लिखे हैं। युद्ध बंदी बनाए जाने के समय गौर्डन एक नास्तिक था। बन्दीयों को रखने की दशा के कारण उसे मलेरिया, डिप्थीरिया, टायफाइड, बेरीबेरी, डाय्सेन्ट्री, शरीर के घाव आदि बिमारियों से होकर गुज़रना पड़ा। बिमारियों से उत्पन्न कमज़ोरी, कठिन परिश्रम और भोजन की कमी के कारण उसका वज़न शीघ्र ही घटकर 50 किलो से भी कम रह गया।

   युद्ध बन्दीयों के अस्पताल में व्याप्त गन्दगी के कारण गौर्डन ने आग्रह किया कि उसे एक ऐसे स्थान पर रखा जाए जहाँ कुछ सफाई होती है - वहाँ का मुर्दाघर। उस मुर्दाघर की ज़मीन पर लेटा हुआ वह प्रतिदिन अपनी मृत्यु की बाट जोहता था। लेकिन रोज़ एक साथी युद्ध बन्दी, डस्टी मिलर, उसके पास आकर उसके घावों को साफ करता, उसे आशा बन्धाता और मिलने वाले भोजन को स्वीकार करने के लिए समझाता, यहाँ तक कि डस्टी अपने भोजन में से भी गौर्डन को खाने के लिए दे देता। शांत और विनम्र स्वभाव का डस्टी उसकी मरहम-पट्टी करते समय गौर्डन से परमेश्वर में अपने दृढ़ विश्वास के बारे में बातें करता और बताता कि इस क्लेष में भी उसे एक अलौकिक आशा है।

   जिस आशा की बात परमेश्वर का वचन बाइबल करती है वह कोई अस्पष्ट, अनिश्चित, काल्पनिक आशावाद नहीं है। इसके विपरीत बाइबल में वर्णित आशा एक मज़बूत और निश्चयपूर्ण उम्मीद है कि जो कुछ परमेश्वर ने अपने वचन में वायदा किया है उसे वह अवश्य ही पूरा भी करेगा। बाइबल हमें यह भी सिखाती है कि परमेश्वर पर विश्वास करने और उसमें आशा बनाए रखने वालों के लिए क्लेष अकसर एक उत्प्रेरक का कार्य करते हैं और उनके चरित्र में धीरज तथा खराई को बढ़ाकर उन्हें और भी अधिक निखार देते हैं (रोमियों 5:3-4)।

   एक कठोर और कष्टदायक युद्ध बन्दीगृह में, 70 वर्ष पूर्व, एर्नेस्ट गौर्डन ने व्यक्तिगत अनुभव से परमेश्वर के वचन में दिया आशा का यह पाठ सीखा, और कल के उस नास्तिक का आज यह कहना है कि "सच्चा विश्वास वहीं पनपता और बढ़ता है जहाँ परमेश्वर के अतिरिक्त कोई आशा नहीं होती।" (रोमियों 8:24-25)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु विश्वासी की आशा की अटूट और स्थिर चट्टान है।

आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं। - रोमियों 8:24-25

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-5
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 14-16 
  • प्रेरितों 9:22-43


Friday, June 28, 2013

दृष्टिकोण

   विश्व के दो महाशक्तियों अमेरिका और उसके साथी देश, तथा रूस और उसके साथी देशों के बीच 1947 से 1991 तक एक लंबा शीत युद्ध चला जिसमें दोनों ही एक दूसरे से बढ़कर सैन्य क्षमता रखने वाले और एक दूसरे से बलवन्त रहने के प्रयास में लगे रहे। एक दूसरे पर शीर्षता पाने के लिए विकसित किए जाने वाले उनके हथियारों में प्रमुख स्थान था परमाणु हथियारों का। इस होड़ के दौरान प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक एल्बर्ट आईन्सटाइन ने एक बहुत अर्थपूर्ण बात कही जो आज तक भी बहुत प्रसिद्ध और उद्धरित होने वाली बात रही है; उन्होंने कहा, "मैं यह तो नहीं जानता कि तीसरा विश्वयुद्ध किस प्रकार के हथियारों से लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्वयुद्ध अवश्य ही लाठियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा।" आईन्स्टाइन के लिए परमाणु हथियारों से युद्ध लड़े जाने के परिणामों का यह एक स्पष्ट भावी दृष्टिकोण का क्षण था। वह भलि-भाँति यह समझ सके कि चाहे परमाणु युद्ध लड़ने के कारण कोई भी हों, परिणाम संसार भर के लिए अति भीष्ण और अति विध्वंसकारी होंगे।

   दुर्भाग्यवश हम साधारणतया इतने स्पष्ट भावी दृष्टिकोण के साथ आते समय और परिणामों की ओर नहीं देखते। कभी कभी हमारे द्वारा किए गए चुनाव और निर्णयों के संभावित परिणाम आंकना कठिन होता है, और कभी कभी हम केवल अपने वर्तमान के बारे में ही सोच रहे होते हैं ना कि दूरगामी परिणामों के बारे में।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक महानायक मूसा के विषय में इब्रानियों 11:24-26 में लिखी बात दिखाती है कि मूसा ने अपने निर्णय के लिए भावी दृष्टिकोण रखा और होने वाले संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन के लिए निर्णय लिया: "विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया। इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा। और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं" (इब्रानियों 11:24-26)।

   मूसा के लिए यह चुनाव सरल नहीं था लेकिन वह अपने उस चुनाव की खराई और सार्थकता को पहचान सका और इसीलिए उसने आते अनन्त समय के सुखद प्रतिफलों के लिए वर्तमान में दुख उठाना अधिक भला समझा। उसके भावी दृष्टिकोण ने ही उसे वर्तमान के कष्ट सहने में सहायता करी। क्या आज हम जो मसीही विश्वासी कहलाते हैं, मूसा के समान ऐसा ही भावी दृष्टिकोण रखते हुए, मसीह यीशु के लिए निंदित होने के लिए तैयार हैं? क्या परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले उस आते जीवन के अनन्त सुख के लिए हम वर्तमान जीवन में मसीह यीशु के कष्टों में संभागी होने के लिए सहमत हैं? पौलुस प्रेरित ने रोम के विश्वासीयों को लिखी अपनी पत्री में स्पष्ट लिखा है "... जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं" (रोमियों 8:17)।

   आज आपका दृष्टिकोण और चुनाव क्या है? - बिल क्राऊडर


यदि हम हर बात के लिए मसीह यीशु पर निर्भर रहेंगे तो हर बात को सहने की सामर्थ भी पाते रहेंगे।

यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। - 2 तिमुथियुस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-31
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिसर को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।
Hebrews 11:30 विश्वास ही से यरीहो की शहरपनाह, जब सात दिन तक उसका चक्कर लगा चुके तो वह गिर पड़ी।
Hebrews 11:31 विश्वास ही से राहाब वेश्या आज्ञा ने मानने वालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिये कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 11-13 
  • प्रेरितों 9:1-21


Thursday, June 27, 2013

उपनाम

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी पत्री में एक नाम आता है "इपफ्रदीतुस"। इपफ्रदीतुस एक युनानी व्यक्ति था जिसने मसीही विश्वास को अपनाया था और मसीह यीशु का अनुयायी हो गया था। वह पौलुस का भी एक निकट सहयोगी था और मसीही प्रचार के लिए करी गई पौलुस की यात्राओं में उसने पौलुस की बहुत अच्छी सेवा करी थी। इस पत्री में पौलुस अपने इस मित्र के लिए कुछ उपनाम प्रयुक्त करता है: "पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा" (फिलिप्पियों 2:25)।

   पौलुस के लिए इपफ्रदीतुस आत्मिक रीति से एक भाई, एक विश्वासयोग्य सहकर्मी, मसीही विश्वास के प्रचार में एक कर्मठ संगी योद्धा और पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मण्डली को लिखी इस प्रेर्णादायक पत्री का पत्रवाहक था। इपफ्रदीतुस का जीवन भाईचारे, निष्ठा, आत्मिक सहनशक्ति और सेवाभाव का नमूना था। इपफ्रदीतुस वास्तव में एक सम्मान योग्य व्यक्तित्व था जिसने अपने जीवन से प्रगट रूप में जी कर दिखाया कि अब वह किसी काल्पनिक देवी-देवता पर नहीं वरन जीवते और सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखता था और उसके लिए जीवन जीता था। पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विश्वासीयों को लिखी पत्री के अन्त में हम एक लंबी सूची पाते हैं उन लोगों की जिन्होंने पौलुस के साथ मसीही सेवकाई में कार्य किया और सहयोग दिया (रोमियों 16)। पौलुस उन सब के नाम के साथ उनके कार्य तथा सहयोग के अनुरूप कुछ उपनाम जोड़ देता है, जो आज भी हमें उन लोगों के मसीही सेवकाई के कार्यों के बारे में बताते हैं।

   हम मसीही विश्वासीयों के लिए हमारे नाम से भी अधिक हमारे वे मसीही विश्वास संबंधित गुण हैं जो हम अपने आस-पास के लोगों और समाज के सामने प्रदर्शित करते हैं, जैसे विश्वासयोग्य, ध्यान रखने और देखभाल करने वाले, प्रोत्साहित करने और उभारने वाले, सदबुद्धि से कार्य करने वाले इत्यादि। आज यदि आपके नाम के साथ, आपके व्यावाहरिक मसीही विश्वास को दिखाने के लिए कोई उपनाम लगाए, तो वह उपनाम क्या होगा? वह उपनाम आपके लिए सम्मान का कारण होगा या शर्मिंदगी का? - डेनिस फिशर


यदि हम अपने चरित्र का ध्यान रखें तो हमारी ख्याति स्वतः ही बन जाएगी।

पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। - फिलिप्पियों 2:25

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-15
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार।
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार।
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:7 ​अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।
Romans 16:8 अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार।
Romans 16:9 उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार।
Romans 16:10 अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार।
Romans 16:11 मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार।
Romans 16:12 त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:13 रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार।
Romans 16:14 असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार।
Romans 16:15 फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 8-10 
  • प्रेरितों 8:26-40


Wednesday, June 26, 2013

विश्राम स्थान

   मैं कुछ लोगों के साथ एक समूह में व्यायाम करने जाया करती थी। मेरे लिए उस व्यायाम सत्र का सबसे आकर्षक भाग होता था सत्र के अन्तिम पाँच मिनिट; उन पाँच मिनिटों में हम चटाई पर सुस्ताने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाते थे और रौशनी धीमी कर दी जाती थी जिससे हम विश्राम कर सकें। ऐसे ही एक सत्र के अन्त में, उस विश्राम समय के दौरान हमारे प्रशिक्षक ने धीमी आवाज़ में एक बहुत गंभीर बात कही, "कोई ऐसा अन्तःस्थान भी ढूंढें जहाँ आप विश्राम के लिए छुप सकें।"

   मैं अपने प्रशिक्षक की बात पर विचार करने लगी और क्लेलैण्ड बी० मैकैफी द्वारा लिखित भजन "Near to the Heart of God" (परमेश्वर के हृदय के निकट) के बोल मुझे स्मरण हो आए:
एक शांत विश्राम का स्थान है, 
परमेश्वर के हृदय के निकट, 
एक ऐसा स्थान जहाँ पाप परेशान नहीं कर सकता, 
परमेश्वर के हृदय के निकट, 
हे यीशु महान मुक्तिदाता, 
परमेश्वर के हृद्य से भेजे गए, 
हमें जो तेरे सम्मुख ठहरे हुए हैं थाम कर रख, 
परमेश्वर के हृदय के निकट.

   यह भजन क्लेलैण्ड बी० मैकैफी ने 1901 में अपने भाई और उसके परिवार के लिए परमेश्वर में आशा बनाए रखने तथा परमेश्वर की देखभाल के प्रति आश्वस्त रहने के लिए लिखा था। उस समय भजन लेखक की दो भतीजीयों की डिप्थीरीया रोग से मृत्यु हो गई थी, और रोग को संक्रमण द्वारा फैलने से रोकने के लिए उस परिवार और घर को संगरोधित कर दिया गया था जिससे कोई वहाँ से निश्चित समय तक अन्दर या बाहर नहीं हो सकता था। ऐसे में उसके चर्च के लोगों ने इस भजन को उसके भाई के घर के बाहर खड़े होकर उनके लिए गाया था।

   प्रेरित पौलुस बताता है कि परमेश्वर का हृद्य हमारे प्रति प्रेम से परिपूर्ण है (रोमियों 8:31-39); और कुछ भी - क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार, या मृत्यु, या स्वर्गदूत, या प्रधानताएं, या अधिकार, या ऊँचाई, या गहराई - हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग कर सकती है; "... यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?" (रोमियों 8:31)

   हमारे कष्ट या चिंताएं कुछ भी हों, परमेश्वर का हृदय ही हमारे लिए वह विश्राम का स्थान है जहाँ हम कभी भी, हर हाल तथा परिस्थिति में प्रवेश करके शांति और विश्राम पा सकते हैं। इसीलिए प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में लिखा है: "और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है (1 पतरस 5:7)। - ऐने सेटास


जब आप जीवन के संघर्षों में थक जाएं तो परमेश्वर के हृद्य में अपना विश्राम पाएं

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-39
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 5-7 
  • प्रेरितों 8:1-25


Tuesday, June 25, 2013

पुनःआँकलन

   मैं अपने मित्र के साथ उसकी कार में एक लंबी सड़क यात्रा पर निकला था। प्रतिदिन की अपनी यात्रा को तय करने के लिए हम उसके जी०पी०एस० अर्थात मार्ग और दिशा निर्देश देने वाले यन्त्र की सहायता लेते रहते थे। जब हम किसी बस्ती या शहर में से होकर निकलते तो उस यन्त्र से एक आवाज़ हमें बताती कि हमें कौन सी सड़क लेनी है और कौन से मोड़ पर मुड़ना है। यदि हम उस यन्त्र द्वारा बताए गए मार्ग से हटकर किसी अन्य मार्ग पर हो लेते, जानबूझकर अथवा गलती से, तो वह आवाज़ कहती, "पुनःआँकलन किया जा रहा है" और फिर हमारी वर्तमान स्थिति से गन्तव्य स्थान के लिए मार्ग का पुनःआँकलन करके वह आवाज़ हमें फिर से सही मार्ग पर आने के निर्देश देना आरंभ कर देती।

   जीवन यात्रा में प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर का वचन बाइबल भी ऐसा ही मार्ग तथा दिशा निर्देशक यन्त्र है। प्रेरित पौलुस द्वारा तिमुथियुस को लिखी अपनी दूसरी पत्री में पौलुस ने तिमुथियुस को समझाया: "हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है" (2 तिमुथियुस 3:16)। मार्गदर्शन तथा दिशा निर्देशन से संबंधित परमेश्वर के वचन की चार योग्यताएं पौलुस ने यहाँ गिनाई हैं:
  • उपदेश - अर्थात वह निर्धारित मार्ग जिस पर हमें चलना है।
  • समझाना - अर्थात मार्ग से भटक जाने पर मिलने वाली सूचना और संबंधित सलाह।
  • सुधारना - अर्थात सही मार्ग पर लौट आने के निर्देश।
  • धर्म की शिक्षा - अर्थात सही मार्ग पर बने रहने से संबंधित शिक्षाएं।

   हमें परमेश्वर के मार्ग से दूर ले जाने वाली हमारी गलतियों या चुनावों को हमें हलके में नहीं लेना चाहिए, वरन गंभीरता पूर्वक उन पर विचार करके उन्हें फिर से ना दोहराने के सार्थक प्रयास करने चाहिएं। गलती सामान्यतः अन्तिम नहीं होती और निर्णय भी बदले जा सकते हैं, इसलिए परमेश्वर के पवित्र आत्मा की आवाज़ के प्रति, जो परमेश्वर की ओर से प्रत्येक नया जन्म पाए मसीही विश्वासी को दिया गया है, हमें संवेदनशील रहना चाहिए क्योंकि सही मार्ग से भटकते ही वह हमें बताना आरंभ कर देता है कि हम पथ से हट गए हैं और हमारे लिए वहाँ से सही मार्ग पर लौटने के मार्ग का पुनःआँकलन करके उसके बारे में हमें बताने लगता है।

   क्या आप परमेश्वर द्वारा दिए गए सही मार्ग पर चल रहे हैं? कहीं परमेश्वर किसी रीति से आपका ध्यान अपनी ओर खींच कर आपकी गलती के बारे में आपको बताने के प्रयास तो नहीं कर रहा? आज कहीं आप अपने आप को परमेश्वर के मार्ग से भटका हुआ और सही मार्ग तो खोजते हुए तो नहीं पाते? परमेश्वर और उसके वचन बाइबल की ओर लौट आईए, उसने आपके लिए लौटने के मार्ग का पुनःआँकलन कर रखा है; आपको बस उसके निर्देशों का पालन मात्र ही करना है। - डेविड मैक्कैसलैंड


सही दिशा में बढ़ने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देशों का पालन करते रहिए।

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। - इब्रानियों 4:12 

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 3:10-17
2 Timothy 3:10 पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया।
2 Timothy 3:11 और ऐसे दुखों में भी जो अन्‍ताकिया और इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया।
2 Timothy 3:12 पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे।
2 Timothy 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे।
2 Timothy 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था
2 Timothy 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।
2 Timothy 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।
2 Timothy 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 3-4 
  • प्रेरितों 7:44-60


Monday, June 24, 2013

प्रेम का कारण

   एक दिन मेरा तीन वर्षीय बेटा अचानक ही बोल उठा, "माँ मैं आपसे बहुत प्रेम करता हूँ।" मुझे सुनकर अच्छा तो लगा लेकिन साथ ही जानने का कौतहूल भी हुआ कि एक तीन वर्षीय बालक को ऐसा क्या अच्छा लगता है जिसके कारण उसने यह भाव व्यक्त किया। जानने के लिए मैंने अपने बेटे से पूछा कि वह क्यों मुझसे प्रेम करता है, तो तुरंत ही बड़े स्वाभाविक भाव से उसने उत्तर दिया, "क्योंकि आप मेरे साथ खेलते हो!" कारण सुनकर मुझे थोड़ी सी निराशा हुई इसलिए मैंने फिर पूछा, "बस इसी कारण या और कुछ भी है?" उसी साधारण और उनमुक्त भाव से वह बोला, "नहीं, बस इतना ही।" उसका यह उत्तर सुनकर मैं मुस्कुराई तो सही, लेकिन मुझे परमेश्वर के साथ अपने संबंध का भी ध्यान आया। क्या परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम का कारण केवल मुझे भली लगने वाली वे बातें हैं जो परमेश्वर मेरे लिए करता है? यदि मेरी मनपसन्द बातें कल ना हों तब मेरा प्रेम परमेश्वर के प्रति कैसा होगा?

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक अय्युब को ऐसी ही परीक्षा से निकलना पड़ा। अय्युब एक बहुत ही धर्मी और परमेश्वर का भय मानने वाला और बहुत धनी व्यक्ति था। अचानक ही उसका परिवार, मकान, संपत्ति और स्वास्थ्य, सब शैतान द्वारा बरबाद कर दिए गए, और उसकी पत्नि ने उसकी दयनीय दशा देखकर सलाह दी: "तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा" (अय्युब 2:9 )। लेकिन अय्युब का अपनी पत्नि को प्रत्युत्तर था: "उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया" (अय्युब 2:10)। उसके साथ सांत्वना दिखाने आए उसके मित्र भी उसी पर दोषारोपण करने लगे कि अवश्य ही उसके जीवन में कì