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Saturday, November 30, 2013

कार्य के परिणाम


   नवम्बर 24, 1971 को एक व्यक्ति, जिसे आज डी. बी. कूपर के नाम से जाना जाता है, ने एक वायुयान का अपहरण किया और धमकी दी कि यदि उसे 200,000 अमिरीकी डॉलर नहीं दिए गए तो वह वायुयान को उड़ा देगा। इस रकम को प्राप्त करने के लिए वायुयान को एक हवाई अड्डे पर उतारा गया, और फिर रकम लेकर कूपर ने पुनः वायुयान को ऊपर हवा में ले जाने को कहा। वायुयान के ऊपर जाने के बाद उसने पिछले दरवाज़े को खुलवाया और रकम लेकर पैराशूट से रात्रि के अन्धकार में कूद गया। इसके बाद उसका कभी कोई अता-पता नहीं चला, वह पकड़ा नहीं गया और आज तक यह गुत्थी अनसुल्झी ही है। लेकिन उस व्यक्ति के एक कार्य के परिणाम हम सब को झेलने पड़ रहे हैं, क्योंकि उस के इस कार्य के बाद हवाई अड्डों पर लोगों पर विश्वास करने का दौर समाप्त हो गया, उसके स्थान पर अविश्वास तथा भय आ गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई, जिसके कारण आज हम सब को यात्रा आरंभ होने से लंबा समय पहले आकर सुरक्षा जाँच आदि करवाना होता है और अनेक प्रकार कि असुविधा का सामना करना पड़ता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी दो ऐसे कार्यों का विवरण देती है जिनके परिणामों ने संसार को उपरोक्त घटना से भी कहीं अधिक प्रभावी रीति से बदल डाला। पहली घटना थी हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की अवज्ञा का निर्णय जिसके कारण पाप और मृत्यु ने इस संसार में प्रवेश किया, "इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया" (रोमियों 5:12)। दूसरी घटना थी प्रभु यीशु द्वारा इस पाप के प्रभाव के समाधान के लिए अपना जीवन बलिदान करना और फिर मृतकों में से जी उठना, "इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ" (रोमियों 5:18)।

   जो प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा मानव जाति के लिए किया, समस्त संसार के इतिहास में वह अन्य कोई भी, कभी भी, कहीं भी नहीं कर सका है। आज प्रभु यीशु अपने अनुग्रह में होकर समस्त मानव जाति को पापों की क्षमा और अनन्त जीवन का उपहार सेंत-मेंत देने को तैयार है, यदि वे इस उपहार को स्वीकार करने को तैयार हों, "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना 1:12)।

   क्या आपने प्रभु यीशु के कार्य के परिणाम को अपना लिया है? यदि नहीं, तो अभी अवसर है, अपना लीजिए और अनन्त जीवन के भागी हो जाईए। - डेविड माइक्कैसलैंड


आदम की अनाज्ञाकारिता के परिणाम का समाधान क्रूस पर संपन्न मसीह यीशु की आज्ञाकारिता का कार्य है।

पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। - रोमियों 5:15

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-19
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39 
  • 2 पतरस 2


Friday, November 29, 2013

आदर


   मेरे पिताजी हाल ही में 90 वर्ष के हो गए और अब उनकी शारीरिक क्षमताएं कम होती जा रही हैं। उन्हें चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता है, और अपने भोजन तथा अन्य कार्यों के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। मेरे बड़े भाई स्टीव और उनकी पत्नि जूडी पिताजी के घर के समीप ही रहते थे, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब पिताजी के साथ ही उनके घर में रहेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।

   मैं भी अपने पिताजी की देखभाल में हाथ बंटाना चाहता हूँ, लेकिन मैं अपने परिवार के साथ देश के दूसरे छोर पर रहता हूँ, इसलिए मैंने और मेरी पत्नि ने कुछ समय का अवकाश लिया और पिताजी के पास आकर उनके साथ रहने लगे, तथा स्टीव और उसकी पत्नि जूडी को भी कुछ समय के लिए कहीं छुट्टी पर जाने को कहा। हमने पिताजी के साथ अच्छा वक्त बिताया और चाहे थोड़े ही दिन के लिए सही, लेकिन पिताजी की देखभाल और स्टीव तथा जूडी की सहायता करना हमें अच्छा लगा।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि, "अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)" (इफिसियों 6:2)। इस पद पर टिप्पणी करते हुए एक टीकाकार ने लिखा, किसी का आदर करने से तात्पर्य है कि, "उसके साथ सम्मान, आदर, श्रद्धा, दयालुता, शिष्टाचार और आज्ञाकारिता के साथ ऐसा पेश आना जो उसके जीवन की अवस्था के अनुसार है।"

   छोटे बच्चों के लिए इसका अर्थ है, माता-पिता के आज्ञाकारी होना; युवकों के लिए यह दिखाता है कि माता-पिता का आदर करें चाहे उन्हें यह लगे कि वे माता-पिता से अधिक जानते हैं। जवान लोगों के लिए यह माता-पिता को अपने जीवन का अंग बनाए रखने की बुलाहट है और अधेड़ या उससे अधिक उम्र वालों के लिए यह इस बात का ध्यान करने की बात है कि माता-पिता की उम्र भी बढ़ रही है, तथा स्वास्थ्य घट रहा है और उन्हें सहायता तथा देखभाल की आवश्यकता है।

   विचार कीजिए, क्या आप अपनी व्यस्त दिनचर्या में अपने माता-पिता को यथोचित समय तथा आदर देते हैं? - डेनिस फिशर


माता-पिता का आदर करने के लिए उम्र कोई सीमा नहीं है।

शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन। - व्यवस्थाविवरण 27:16

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:1-17
Exodus 20:1 तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे, 
Exodus 20:2 कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
Exodus 20:3 तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना।
Exodus 20:4 तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है। 
Exodus 20:5 तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं, 
Exodus 20:6 और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं।
Exodus 20:7 तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।
Exodus 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।
Exodus 20:13 तू खून न करना।
Exodus 20:14 तू व्यभिचार न करना।
Exodus 20:15 तू चोरी न करना।
Exodus 20:16 तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
Exodus 20:17 तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36 
  • 2 पतरस 1


Thursday, November 28, 2013

क्षमा दान


   प्रतिवर्ष, नवम्बर माह के अन्त में अमेरिका के राष्ट्रपति एक प्रथा के अन्तर्गत, ’राष्ट्रीय धन्यवादी टर्की’ को क्षमा दान प्रदान करते हैं। इस विनोदात्मक रस्म को पूरा करते समय एक राष्ट्रपति ने क्षमा दान पाने वाली उस टर्की के विषय में चुटकी ली: "हमारे सम्मनित अतिथि कुछ घबराए हुए से प्रतीत हो रहे हैं; शायद किसी ने इन से कहा नहीं है कि मैं इन्हें आज क्षमा करने जा रहा हूँ!" बेचारी उस टर्की के लिए वास्तव में घबराने की बात तो थी ही, क्योंकि यदि वह क्षमा नहीं पाती तो मारी जाती और रात्रि के धन्यवादी भोज के लिए पकाने को दे दी जाती।

   ऐसी ही परिस्थिति हमारे पापों के कारण हम मनुष्यों पर भी लागू है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23); इसलिए यदि हम परमेश्वर से पापों के लिए क्षमा दान प्राप्त नहीं करेंगे तो हमारे पापों के कारण हमारा विनाश तय है। लेकिन परमेश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए सेंत-मेंत यह क्षमा दान पाने का उपाय किया है - उसने सभी मनुष्यों के पापों के लिए अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को बलिदान हो जाने दिया, जिसने अपनी मृत्यु से सब के पापों के लिए दण्ड सह लिया है। अब जो कोई साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु के इस बलिदान को स्वीकार कर लेता है, उससे अपने पापों की क्षमा माँग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह परमेश्वर के क्षमा दान को पा लेता है और अनन्त जीवन में प्रवेश कर जाता है, क्योंकि प्रभु यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)।

   पापों से क्षमा पाने के लिए किसी को स्वयं कोई प्रयास या प्रायश्चित करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि परमेश्वर ने अपने महान अनुग्रह में सब के लिए उपाय कर के दे दिया है, आवश्यकता है केवल परमेश्वर के उपाय को स्वीकार करने और उस पर विश्वास करने की। क्या आज आपको अपने पापों का बोध और उनके भयानक परिणाम का एहसास है? क्या आप उस परिणाम को लेकर चिंतित हैं? प्रभु यीशु पर विश्वास कीजिए और अपने पापों का बोझ उसे सौंप दीजिए, और उससे उनका क्षमा दान प्राप्त कर लीजिए - वह कभी किसी को इन्कार नहीं करता। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह यीशु पर विश्वास द्वारा हम परमेश्वर का क्षमा दान पाते हैं और पापों के दण्ड से बच जाते हैं।

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। - रोमियों 8:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)।
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए।
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34 
  • 1 पतरस 5


Wednesday, November 27, 2013

दीन और दरिद्र


   किसी ना किसी रीति से हम सभी भजन 86:1 से सहमत हो सकते हैं, जहाँ दाऊद ने कहा, "हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं"। हम में से सबसे धनी व्यक्ति को भी यह समझ लेना चाहिए कि दरिद्र एवं आवश्यकता में होने का संबंध बटुए से नहीं आत्मा से है। जब रिच डि वोस नामक अरबपति व्यक्ति लोगों के साथ बातचीत करता है, तो उनसे यही कहता है कि "मैं मात्र एक पापी हूँ जो परमेश्वर के अनुग्रह से बचाया गया है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 86 हमें यह सिखाता है कि जो सहायता परमेश्वर से मिलती है वह किसी आर्थिक बही-खाते के आंकड़ों से मापी नहीं जा सकती। जब हम परमेश्वर के सामने इस बात को मान लेते हैं कि हम दीन और दरिद्र हैं तो इसका यह तात्पर्य नहीं है कि परमेश्वर हमें सांसारिक धन-दौलत से भर देगा। नहीं, हमारा परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करना कि हम दीन और दरिद्र हैं इसलिए होना चाहिए कि वह हमें संसार की दौलत से भी अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान खज़ानों से भर दे।

   जो परमेश्वर के सम्मुख सच्चे मन से दीन और दरिद्र होते हैं, उस पर भरोसा रखते हैं, परमेश्वर उन की रक्षा करता है, उन्हें बचाता है (पद 2); उन पर अनुग्रह करता है, उन्हें क्षमा करता है (पद 3, 5); वह उनकी सुनता है और उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर देता है (पद 6-7)।

   लेकिन परमेश्वर से मिलने वाली इन आशीषों को हमें केवल लेते रहने वाले नहीं बनना है, वरन कुछ लौटा कर भी देना है। परमेश्वर की आशीषें पा लेने के बाद हमारी ज़िम्मेदारी हो जाती है कि हम परमेश्वर के मार्गों को सीखें, उसके सत्य पर चलें, उसके नाम का भय मानें, उसके नाम का गुणगान और महिमा करें (पद 11-12)।

   यदि आप भी अपने आप को ऐसा दीन और दरिद्र मानते हैं तो आपका परमेश्वर के लोगों के समूह में स्वागत है। परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली आशीषों को ना भूलें और ना ही उसके इस अनुग्रह और उदारता के कारण आप पर आने वाली ज़िम्मेदारियों को नज़रंदाज़ करें। - डेव ब्रैनन


सबसे दरिद्र वह है जिसकी दौलत केवल सांसारिक धन ही है।

हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। - भजन 86:1

बाइबल पाठ: भजन 86
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ने किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आ कर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है। 
Psalms 86:14 हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psalms 86:15 परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 86:16 मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर। 
Psalms 86:17 मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देख कर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32 
  • 1 पतरस 4


Tuesday, November 26, 2013

निर्देश


   कलाकार एवं वैज्ञानिक माईकल फ़्लिन्न ने एक अन्तराष्ट्रीय कला प्रत्योगिता में भाग लेने के लिए एक ऐसा कटोरा बनाया जिससे संगीत बज सकता था। उस कटोरे को कार्य करने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन एक ऐसी चीज़ की आवश्यकता थी जो साधारणतया कम ही मिलती है - सहयोग। मैं उस प्रदर्शनी में खड़ी आशचर्य के साथ लोगों को देख रही थी जो उस कटोरे से संगीत बजता हुआ सुनना तो चाहते थे, लेकिन कोई भी उस कटोरे के नीचे लिखे हुए उसे कार्यशील करने के निर्देश नहीं पढ़ रहा था, जहाँ स्पष्ट लिखा था कि संगीत सुनने के लिए उसे हलके से हिलाना है। इन निर्देशों के विप्रीत लोग अपने ही उपाय उस पर आज़मा रहे थे, और फिर थोड़ी देर में उस कटोरे को ऐसे छोड़ कर आगे बढ़ जाते मानों वह कटोरा खराब हो; जब कि संगीत ना सुन पाना उनकी अपनी ही गलती के कारण था।

   क्या ऐसा कितनी ही बार नहीं होता कि हम जीवन से इसलिए निराश हो जाते हैं क्योंकि जीवन हमारी अपेक्षानुसार नहीं चल रहा होता? हम जीवन को अपनी इच्छानुसार संचालित करने के विभिन्न प्रयास करते रहते हैं, ऐसे प्रयास जो हमें सही लगते हैं, लेकिन अन्ततः परिणाम गलत ही निकलते हैं। लेकिन फिर भी जीवन देने वाले परमेश्वर द्वारा जीवन संचालन के लिए दिए गए निर्देशों की अवहेलना करके हम अपने ही व्यर्थ प्रयासों में उलझे रहते हैं, हताश होते रहते हैं।

   वह संगीत बजाने वाला कटोरा हमें स्मरण दिलाता है कि यदि हम रचनाकार के निर्देशों की अवहेलना करेंगे, तो जीवन सही नहीं चलेगा (व्यवस्थाविवरण 4:40)। निर्देशों का पालन करने की अवज्ञा करना हमें ना केवल परमेश्वर से वरन एक दूसरे से भी अलग-अलग कर देता है। संसार के लिए परमेश्वर की योजना की पूर्ति और समस्त संसार के लिए सेंत-मेंत पापों की क्षमा तथा उद्धार के मार्ग के प्रचार हेतु (भजन 67:2) हमें शांतिपूर्ण रीति से एक दूसरे के साथ रहने और सहयोग करने के परमेश्वर के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

   यदि जीवन सुचारु रूप से नहीं चल रहा है, जीवन में अशांति है, तो ज़रा रुक कर जीवन की समीक्षा तथा उस पर विचार कीजिए और जाँचिए, क्या आप जीवन देने वाले परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार जीवन वास्तव में व्यतीत कर रहे हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


जीवन ऐसे मधुर संगीत के समान है जिसे बजाना हमें परमेश्वर से सीखते रहना है।

इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों। - 3 यूहन्ना 1:8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 4:32-40
Deuteronomy 4:32 और जब से परमेश्वर ने मनुष्य को उत्पन्न कर के पृथ्वी पर रखा तब से ले कर तू अपने उत्पन्न होने के दिन तक की बातें पूछ, और आकाश के एक छोर से दूसरे छोर तक की बातें पूछ, क्या ऐसी बड़ी बात कभी हुई वा सुनने में आई है? 
Deuteronomy 4:33 क्या कोई जाति कभी परमेश्वर की वाणी आग के बीच में से आती हुई सुनकर जीवित रही, जैसे कि तू ने सुनी है? 
Deuteronomy 4:34 फिर क्या परमेश्वर ने और किसी जाति को दूसरी जाति के बीच में निकालने को कमर बान्धकर परीक्षा, और चिन्ह, और चमत्कार, और युद्ध, और बली हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा से ऐसे बड़े भयानक काम किए, जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने मिस्र में तुम्हारे देखते किए? 
Deuteronomy 4:35 यह सब तुझ को दिखाया गया, इसलिये कि तू जान रखे कि यहोवा ही परमेश्वर है; उसको छोड़ और कोई है ही नहीं। 
Deuteronomy 4:36 आकाश में से उसने तुझे अपनी वाणी सुनाईं कि तुझे शिक्षा दे; और पृथ्वी पर उसने तुझे अपनी बड़ी आग दिखाई, और उसके वचन आग के बीच में से आते हुए तुझे सुन पड़े। 
Deuteronomy 4:37 और उसने जो तेरे पितरों से प्रेम रखा, इस कारण उनके पीछे उनके वंश को चुन लिया, और प्रत्यक्ष हो कर तुझे अपने बड़े सामर्थ्य के द्वारा मिस्र से इसलिये निकाल लाया, 
Deuteronomy 4:38 कि तुझ से बड़ी और सामर्थी जातियों को तेरे आगे से निकाल कर तुझे उनके देश में पहुंचाए, और उसे तेरा निज भाग कर दे, जैसा आज के दिन दिखाई पड़ता है; 
Deuteronomy 4:39 सो आज जान ले, और अपने मन में सोच भी रख, कि ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर यहोवा ही परमेश्वर है; और कोई दूसरा नहीं। 
Deuteronomy 4:40 और तू उसकी विधियों और आज्ञाओं को जो मैं आज तुझे सुनाता हूं मानना, इसलिये कि तेरा और तेरे पीछे तेरे वंश का भी भला हो, और जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तेरे दिन बहुत वरन सदा के लिये हों।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29 
  • 1 पतरस 3


Monday, November 25, 2013

आशावान


   मिनिसोटा विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अमेरिका के लगभग 15% किशोर यह मानते हैं कि वे अपने 35वें जन्मदिन से पूर्व ही मर जाएंगे। अध्ययनकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो किशोर ऐसा निराशावादी दृष्टिकोण रखते हैं उनकी उतावलेपन और लापरवाही से कार्य करने की संभावना अन्य लोगों से कहीं अधिक होती है। ’पीडियैट्रिक्स’ पत्रिका में छपे इस अध्ययन की लेखिका, डॉ० आईरिस ब्राउस्की ने कहा: "ये किशोर जोखिम उठाते हैं क्योंकि उन्हí