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Saturday, November 30, 2013

कार्य के परिणाम


   नवम्बर 24, 1971 को एक व्यक्ति, जिसे आज डी. बी. कूपर के नाम से जाना जाता है, ने एक वायुयान का अपहरण किया और धमकी दी कि यदि उसे 200,000 अमिरीकी डॉलर नहीं दिए गए तो वह वायुयान को उड़ा देगा। इस रकम को प्राप्त करने के लिए वायुयान को एक हवाई अड्डे पर उतारा गया, और फिर रकम लेकर कूपर ने पुनः वायुयान को ऊपर हवा में ले जाने को कहा। वायुयान के ऊपर जाने के बाद उसने पिछले दरवाज़े को खुलवाया और रकम लेकर पैराशूट से रात्रि के अन्धकार में कूद गया। इसके बाद उसका कभी कोई अता-पता नहीं चला, वह पकड़ा नहीं गया और आज तक यह गुत्थी अनसुल्झी ही है। लेकिन उस व्यक्ति के एक कार्य के परिणाम हम सब को झेलने पड़ रहे हैं, क्योंकि उस के इस कार्य के बाद हवाई अड्डों पर लोगों पर विश्वास करने का दौर समाप्त हो गया, उसके स्थान पर अविश्वास तथा भय आ गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई, जिसके कारण आज हम सब को यात्रा आरंभ होने से लंबा समय पहले आकर सुरक्षा जाँच आदि करवाना होता है और अनेक प्रकार कि असुविधा का सामना करना पड़ता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी दो ऐसे कार्यों का विवरण देती है जिनके परिणामों ने संसार को उपरोक्त घटना से भी कहीं अधिक प्रभावी रीति से बदल डाला। पहली घटना थी हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की अवज्ञा का निर्णय जिसके कारण पाप और मृत्यु ने इस संसार में प्रवेश किया, "इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया" (रोमियों 5:12)। दूसरी घटना थी प्रभु यीशु द्वारा इस पाप के प्रभाव के समाधान के लिए अपना जीवन बलिदान करना और फिर मृतकों में से जी उठना, "इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ" (रोमियों 5:18)।

   जो प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा मानव जाति के लिए किया, समस्त संसार के इतिहास में वह अन्य कोई भी, कभी भी, कहीं भी नहीं कर सका है। आज प्रभु यीशु अपने अनुग्रह में होकर समस्त मानव जाति को पापों की क्षमा और अनन्त जीवन का उपहार सेंत-मेंत देने को तैयार है, यदि वे इस उपहार को स्वीकार करने को तैयार हों, "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना 1:12)।

   क्या आपने प्रभु यीशु के कार्य के परिणाम को अपना लिया है? यदि नहीं, तो अभी अवसर है, अपना लीजिए और अनन्त जीवन के भागी हो जाईए। - डेविड माइक्कैसलैंड


आदम की अनाज्ञाकारिता के परिणाम का समाधान क्रूस पर संपन्न मसीह यीशु की आज्ञाकारिता का कार्य है।

पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। - रोमियों 5:15

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-19
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39 
  • 2 पतरस 2


Friday, November 29, 2013

आदर


   मेरे पिताजी हाल ही में 90 वर्ष के हो गए और अब उनकी शारीरिक क्षमताएं कम होती जा रही हैं। उन्हें चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता है, और अपने भोजन तथा अन्य कार्यों के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। मेरे बड़े भाई स्टीव और उनकी पत्नि जूडी पिताजी के घर के समीप ही रहते थे, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब पिताजी के साथ ही उनके घर में रहेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।

   मैं भी अपने पिताजी की देखभाल में हाथ बंटाना चाहता हूँ, लेकिन मैं अपने परिवार के साथ देश के दूसरे छोर पर रहता हूँ, इसलिए मैंने और मेरी पत्नि ने कुछ समय का अवकाश लिया और पिताजी के पास आकर उनके साथ रहने लगे, तथा स्टीव और उसकी पत्नि जूडी को भी कुछ समय के लिए कहीं छुट्टी पर जाने को कहा। हमने पिताजी के साथ अच्छा वक्त बिताया और चाहे थोड़े ही दिन के लिए सही, लेकिन पिताजी की देखभाल और स्टीव तथा जूडी की सहायता करना हमें अच्छा लगा।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि, "अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)" (इफिसियों 6:2)। इस पद पर टिप्पणी करते हुए एक टीकाकार ने लिखा, किसी का आदर करने से तात्पर्य है कि, "उसके साथ सम्मान, आदर, श्रद्धा, दयालुता, शिष्टाचार और आज्ञाकारिता के साथ ऐसा पेश आना जो उसके जीवन की अवस्था के अनुसार है।"

   छोटे बच्चों के लिए इसका अर्थ है, माता-पिता के आज्ञाकारी होना; युवकों के लिए यह दिखाता है कि माता-पिता का आदर करें चाहे उन्हें यह लगे कि वे माता-पिता से अधिक जानते हैं। जवान लोगों के लिए यह माता-पिता को अपने जीवन का अंग बनाए रखने की बुलाहट है और अधेड़ या उससे अधिक उम्र वालों के लिए यह इस बात का ध्यान करने की बात है कि माता-पिता की उम्र भी बढ़ रही है, तथा स्वास्थ्य घट रहा है और उन्हें सहायता तथा देखभाल की आवश्यकता है।

   विचार कीजिए, क्या आप अपनी व्यस्त दिनचर्या में अपने माता-पिता को यथोचित समय तथा आदर देते हैं? - डेनिस फिशर


माता-पिता का आदर करने के लिए उम्र कोई सीमा नहीं है।

शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन। - व्यवस्थाविवरण 27:16

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:1-17
Exodus 20:1 तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे, 
Exodus 20:2 कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
Exodus 20:3 तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना।
Exodus 20:4 तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है। 
Exodus 20:5 तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं, 
Exodus 20:6 और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं।
Exodus 20:7 तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।
Exodus 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।
Exodus 20:13 तू खून न करना।
Exodus 20:14 तू व्यभिचार न करना।
Exodus 20:15 तू चोरी न करना।
Exodus 20:16 तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
Exodus 20:17 तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36 
  • 2 पतरस 1


Thursday, November 28, 2013

क्षमा दान


   प्रतिवर्ष, नवम्बर माह के अन्त में अमेरिका के राष्ट्रपति एक प्रथा के अन्तर्गत, ’राष्ट्रीय धन्यवादी टर्की’ को क्षमा दान प्रदान करते हैं। इस विनोदात्मक रस्म को पूरा करते समय एक राष्ट्रपति ने क्षमा दान पाने वाली उस टर्की के विषय में चुटकी ली: "हमारे सम्मनित अतिथि कुछ घबराए हुए से प्रतीत हो रहे हैं; शायद किसी ने इन से कहा नहीं है कि मैं इन्हें आज क्षमा करने जा रहा हूँ!" बेचारी उस टर्की के लिए वास्तव में घबराने की बात तो थी ही, क्योंकि यदि वह क्षमा नहीं पाती तो मारी जाती और रात्रि के धन्यवादी भोज के लिए पकाने को दे दी जाती।

   ऐसी ही परिस्थिति हमारे पापों के कारण हम मनुष्यों पर भी लागू है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23); इसलिए यदि हम परमेश्वर से पापों के लिए क्षमा दान प्राप्त नहीं करेंगे तो हमारे पापों के कारण हमारा विनाश तय है। लेकिन परमेश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए सेंत-मेंत यह क्षमा दान पाने का उपाय किया है - उसने सभी मनुष्यों के पापों के लिए अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को बलिदान हो जाने दिया, जिसने अपनी मृत्यु से सब के पापों के लिए दण्ड सह लिया है। अब जो कोई साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु के इस बलिदान को स्वीकार कर लेता है, उससे अपने पापों की क्षमा माँग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह परमेश्वर के क्षमा दान को पा लेता है और अनन्त जीवन में प्रवेश कर जाता है, क्योंकि प्रभु यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)।

   पापों से क्षमा पाने के लिए किसी को स्वयं कोई प्रयास या प्रायश्चित करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि परमेश्वर ने अपने महान अनुग्रह में सब के लिए उपाय कर के दे दिया है, आवश्यकता है केवल परमेश्वर के उपाय को स्वीकार करने और उस पर विश्वास करने की। क्या आज आपको अपने पापों का बोध और उनके भयानक परिणाम का एहसास है? क्या आप उस परिणाम को लेकर चिंतित हैं? प्रभु यीशु पर विश्वास कीजिए और अपने पापों का बोझ उसे सौंप दीजिए, और उससे उनका क्षमा दान प्राप्त कर लीजिए - वह कभी किसी को इन्कार नहीं करता। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह यीशु पर विश्वास द्वारा हम परमेश्वर का क्षमा दान पाते हैं और पापों के दण्ड से बच जाते हैं।

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। - रोमियों 8:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)।
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए।
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34 
  • 1 पतरस 5


Wednesday, November 27, 2013

दीन और दरिद्र


   किसी ना किसी रीति से हम सभी भजन 86:1 से सहमत हो सकते हैं, जहाँ दाऊद ने कहा, "हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं"। हम में से सबसे धनी व्यक्ति को भी यह समझ लेना चाहिए कि दरिद्र एवं आवश्यकता में होने का संबंध बटुए से नहीं आत्मा से है। जब रिच डि वोस नामक अरबपति व्यक्ति लोगों के साथ बातचीत करता है, तो उनसे यही कहता है कि "मैं मात्र एक पापी हूँ जो परमेश्वर के अनुग्रह से बचाया गया है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 86 हमें यह सिखाता है कि जो सहायता परमेश्वर से मिलती है वह किसी आर्थिक बही-खाते के आंकड़ों से मापी नहीं जा सकती। जब हम परमेश्वर के सामने इस बात को मान लेते हैं कि हम दीन और दरिद्र हैं तो इसका यह तात्पर्य नहीं है कि परमेश्वर हमें सांसारिक धन-दौलत से भर देगा। नहीं, हमारा परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करना कि हम दीन और दरिद्र हैं इसलिए होना चाहिए कि वह हमें संसार की दौलत से भी अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान खज़ानों से भर दे।

   जो परमेश्वर के सम्मुख सच्चे मन से दीन और दरिद्र होते हैं, उस पर भरोसा रखते हैं, परमेश्वर उन की रक्षा करता है, उन्हें बचाता है (पद 2); उन पर अनुग्रह करता है, उन्हें क्षमा करता है (पद 3, 5); वह उनकी सुनता है और उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर देता है (पद 6-7)।

   लेकिन परमेश्वर से मिलने वाली इन आशीषों को हमें केवल लेते रहने वाले नहीं बनना है, वरन कुछ लौटा कर भी देना है। परमेश्वर की आशीषें पा लेने के बाद हमारी ज़िम्मेदारी हो जाती है कि हम परमेश्वर के मार्गों को सीखें, उसके सत्य पर चलें, उसके नाम का भय मानें, उसके नाम का गुणगान और महिमा करें (पद 11-12)।

   यदि आप भी अपने आप को ऐसा दीन और दरिद्र मानते हैं तो आपका परमेश्वर के लोगों के समूह में स्वागत है। परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली आशीषों को ना भूलें और ना ही उसके इस अनुग्रह और उदारता के कारण आप पर आने वाली ज़िम्मेदारियों को नज़रंदाज़ करें। - डेव ब्रैनन


सबसे दरिद्र वह है जिसकी दौलत केवल सांसारिक धन ही है।

हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। - भजन 86:1

बाइबल पाठ: भजन 86
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ने किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आ कर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है। 
Psalms 86:14 हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psalms 86:15 परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 86:16 मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर। 
Psalms 86:17 मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देख कर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32 
  • 1 पतरस 4


Tuesday, November 26, 2013

निर्देश


   कलाकार एवं वैज्ञानिक माईकल फ़्लिन्न ने एक अन्तराष्ट्रीय कला प्रत्योगिता में भाग लेने के लिए एक ऐसा कटोरा बनाया जिससे संगीत बज सकता था। उस कटोरे को कार्य करने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन एक ऐसी चीज़ की आवश्यकता थी जो साधारणतया कम ही मिलती है - सहयोग। मैं उस प्रदर्शनी में खड़ी आशचर्य के साथ लोगों को देख रही थी जो उस कटोरे से संगीत बजता हुआ सुनना तो चाहते थे, लेकिन कोई भी उस कटोरे के नीचे लिखे हुए उसे कार्यशील करने के निर्देश नहीं पढ़ रहा था, जहाँ स्पष्ट लिखा था कि संगीत सुनने के लिए उसे हलके से हिलाना है। इन निर्देशों के विप्रीत लोग अपने ही उपाय उस पर आज़मा रहे थे, और फिर थोड़ी देर में उस कटोरे को ऐसे छोड़ कर आगे बढ़ जाते मानों वह कटोरा खराब हो; जब कि संगीत ना सुन पाना उनकी अपनी ही गलती के कारण था।

   क्या ऐसा कितनी ही बार नहीं होता कि हम जीवन से इसलिए निराश हो जाते हैं क्योंकि जीवन हमारी अपेक्षानुसार नहीं चल रहा होता? हम जीवन को अपनी इच्छानुसार संचालित करने के विभिन्न प्रयास करते रहते हैं, ऐसे प्रयास जो हमें सही लगते हैं, लेकिन अन्ततः परिणाम गलत ही निकलते हैं। लेकिन फिर भी जीवन देने वाले परमेश्वर द्वारा जीवन संचालन के लिए दिए गए निर्देशों की अवहेलना करके हम अपने ही व्यर्थ प्रयासों में उलझे रहते हैं, हताश होते रहते हैं।

   वह संगीत बजाने वाला कटोरा हमें स्मरण दिलाता है कि यदि हम रचनाकार के निर्देशों की अवहेलना करेंगे, तो जीवन सही नहीं चलेगा (व्यवस्थाविवरण 4:40)। निर्देशों का पालन करने की अवज्ञा करना हमें ना केवल परमेश्वर से वरन एक दूसरे से भी अलग-अलग कर देता है। संसार के लिए परमेश्वर की योजना की पूर्ति और समस्त संसार के लिए सेंत-मेंत पापों की क्षमा तथा उद्धार के मार्ग के प्रचार हेतु (भजन 67:2) हमें शांतिपूर्ण रीति से एक दूसरे के साथ रहने और सहयोग करने के परमेश्वर के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

   यदि जीवन सुचारु रूप से नहीं चल रहा है, जीवन में अशांति है, तो ज़रा रुक कर जीवन की समीक्षा तथा उस पर विचार कीजिए और जाँचिए, क्या आप जीवन देने वाले परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार जीवन वास्तव में व्यतीत कर रहे हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


जीवन ऐसे मधुर संगीत के समान है जिसे बजाना हमें परमेश्वर से सीखते रहना है।

इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों। - 3 यूहन्ना 1:8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 4:32-40
Deuteronomy 4:32 और जब से परमेश्वर ने मनुष्य को उत्पन्न कर के पृथ्वी पर रखा तब से ले कर तू अपने उत्पन्न होने के दिन तक की बातें पूछ, और आकाश के एक छोर से दूसरे छोर तक की बातें पूछ, क्या ऐसी बड़ी बात कभी हुई वा सुनने में आई है? 
Deuteronomy 4:33 क्या कोई जाति कभी परमेश्वर की वाणी आग के बीच में से आती हुई सुनकर जीवित रही, जैसे कि तू ने सुनी है? 
Deuteronomy 4:34 फिर क्या परमेश्वर ने और किसी जाति को दूसरी जाति के बीच में निकालने को कमर बान्धकर परीक्षा, और चिन्ह, और चमत्कार, और युद्ध, और बली हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा से ऐसे बड़े भयानक काम किए, जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने मिस्र में तुम्हारे देखते किए? 
Deuteronomy 4:35 यह सब तुझ को दिखाया गया, इसलिये कि तू जान रखे कि यहोवा ही परमेश्वर है; उसको छोड़ और कोई है ही नहीं। 
Deuteronomy 4:36 आकाश में से उसने तुझे अपनी वाणी सुनाईं कि तुझे शिक्षा दे; और पृथ्वी पर उसने तुझे अपनी बड़ी आग दिखाई, और उसके वचन आग के बीच में से आते हुए तुझे सुन पड़े। 
Deuteronomy 4:37 और उसने जो तेरे पितरों से प्रेम रखा, इस कारण उनके पीछे उनके वंश को चुन लिया, और प्रत्यक्ष हो कर तुझे अपने बड़े सामर्थ्य के द्वारा मिस्र से इसलिये निकाल लाया, 
Deuteronomy 4:38 कि तुझ से बड़ी और सामर्थी जातियों को तेरे आगे से निकाल कर तुझे उनके देश में पहुंचाए, और उसे तेरा निज भाग कर दे, जैसा आज के दिन दिखाई पड़ता है; 
Deuteronomy 4:39 सो आज जान ले, और अपने मन में सोच भी रख, कि ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर यहोवा ही परमेश्वर है; और कोई दूसरा नहीं। 
Deuteronomy 4:40 और तू उसकी विधियों और आज्ञाओं को जो मैं आज तुझे सुनाता हूं मानना, इसलिये कि तेरा और तेरे पीछे तेरे वंश का भी भला हो, और जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तेरे दिन बहुत वरन सदा के लिये हों।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29 
  • 1 पतरस 3


Monday, November 25, 2013

आशावान


   मिनिसोटा विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अमेरिका के लगभग 15% किशोर यह मानते हैं कि वे अपने 35वें जन्मदिन से पूर्व ही मर जाएंगे। अध्ययनकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो किशोर ऐसा निराशावादी दृष्टिकोण रखते हैं उनकी उतावलेपन और लापरवाही से कार्य करने की संभावना अन्य लोगों से कहीं अधिक होती है। ’पीडियैट्रिक्स’ पत्रिका में छपे इस अध्ययन की लेखिका, डॉ० आईरिस ब्राउस्की ने कहा: "ये किशोर जोखिम उठाते हैं क्योंकि उन्हें भविष्य से कोई आशा नहीं है तथा उन्हें लगता है कि खोने को कुछ विशेष नहीं है।"

   यह सच है कि निराशा की भावना से कोई बच नहीं सकता। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार, निराशा के अन्धकार से सहायता के लिए परमेश्वर को अनेक बार पुकारते हैं। भजन 42:5 में भजनकार कहता है: "हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा"। विश्वास का एक दृढ़ कदम उठाते हुए भजनकार अपने आप से कहता है कि परमेश्वर को ना भूल क्योंकि परमेश्वर तुझे कभी नहीं भूलता।

   कर्टिस एमक्विस्ट ने लिखा: "आशा परमेश्वर की उपस्थिति से बल पाती है....साथ ही आशा परमेश्वर द्वारा निर्धारित हमारे भविष्य से भी बल पाती है।" हम भी भजनकार के साथ कह सकते हैं "मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा"।

   मसीह यीशु के किसी भी अनुयायी को निराशा में सहायता माँगने के लिए कभी भी हिचकिचाना नहीं चाहिए, और ना ही हम मसीही विश्वासियों को कभी यह समझना चाहिए कि प्रार्थना और विश्वास सहायता पाने के लिए बहुत ही साधारण और बेबुनियाद उपाय हैं। जो परमेश्वर पर विश्वास रखते हैं, परमेश्वर सदा उनकी आशा बना रहता है, उन्हें आशावान बनाए रखता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


आशा मसीही विश्वासी के लिए निश्चितता है - क्योंकि उसकी आशा का आधार मसीह यीशु है।

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। - विलापगीत 3:22-24

बाइबल पाठ: भजन 42:1-11
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psalms 42:6 हे मेरे परमेश्वर; मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं। 
Psalms 42:7 तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं। 
Psalms 42:8 तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा; और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवन दाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psalms 42:9 मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं? 
Psalms 42:10 मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:11 हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26 
  • 1 पतरस 2


Sunday, November 24, 2013

सही और जायज़


   मैं अपने इलाके से बाहर एक यात्रा पर निकला हुआ था; यात्रा के दौरान एक स्थान पर मेरी मुलाकात मेरे ही इलाके के एक वकील से हुई। बातचीत करते करते हम दोनों को अचरज हुआ कि हमारे मध्य में कितना कुछ एक समान है। उन्होंने मुझ से पूछा, "क्या आपने अपना नाम स्टिलवैल बताया था?" मैंने उत्तर दिया, "जी नहीं, मेरा नाम स्टोवैल है।" वे बोले "मेरा एक मुवक्किल है जिसका नाम स्टिलवैल है", तो मैंने पूछा "क्या उस मुवक्किल का पूरा नाम आर्ट स्टिलवैल है?" और मुझे सुन कर हैरानी हुई कि वाकई उनके मुवक्किल का नाम आर्ट स्टिल्वैल ही था। आर्ट स्टिलवैल उसी चर्च में आता था जहाँ मैं जाता हूँ और वह उस इलाके का एक नामी तथा प्रभावशाली व्यवसायी था।

   उस वकील ने यह माना कि उनके पास आर्ट के समान कोई अन्य मुवक्किल नहीं था। उन्होंने अपने इस विचार का खुलासा करते हुए कहा कि जब कोई समस्या आन पड़ती है तो उनके सभी मुवक्किल उनसे कहते हैं कि कोई भी हथकंडा अपना कर वे उन्हें उस समस्या से बाहर निकालें; किंतु आर्ट ऐसे नहीं हैं। हर परिस्थिति के लिए आर्ट का केवल एक ही उत्तर होता है, "वही कीजिए जो सही और जायज़ है" और आर्ट की इस बात ने उस वकील को बहुत प्रभावित किया था।

   मनमानी करते रहने की इच्छा से ग्रसित इस स्वार्थी संसार में, हम मसीही विश्वासियों को संसार से पृथक करने वाली एक बात है, मसीह यीशु को अपना जीवन समर्पित कर देने के बाद, अपने जीवन के हर निर्णय में मसीह यीशु को महिमा देना, चाहे संसार की ओर से उसका परिणाम कुछ भी हो। जब हम स्वार्थसिद्धी के लिए नहीं वरन साहसपूर्ण तरीके से मसीह यीशु की सत्यनिष्ठा, प्रेम और अनुग्रह को दर्शाने वाले दोषरहित जीवन जीते हैं तो हम वास्तव में संसार में छाए पाप के अन्धकार के बीच मसीह यीशु की सच्ची ज्योति को दिखाने वाले जलते हुए दीपक हो जाते हैं (फिलिप्पियों 2:15)।

   यदि आप अपने जीवन को परमेश्वर कि सच्ची ज्योति से रौशन करना चाहते हैं और पाप के अन्धकार में फंसे लोगों को अनन्त जीवन का मार्ग दिखाना चाहते हैं तो मसीह यीशु से पापों की क्षमा प्राप्त करें और उसके गुणों को अपने जीवनों से सदा ही सही और जायज़ करने के द्वारा प्रदर्शित करें। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु की सच्ची ज्योति से अपने तथा दूसरों के जीवनों को प्रकाशमान कर दीजिए।

ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो)। - फिलिप्पियों 2:15

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:12-18
Philippians 2:12 सो हे मेरे प्यारो, जिस प्रकार तुम सदा से आज्ञा मानते आए हो, वैसे ही अब भी न केवल मेरे साथ रहते हुए पर विशेष कर के अब मेरे दूर रहने पर भी डरते और कांपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ। 
Philippians 2:13 क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस ने अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है। 
Philippians 2:14 सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो। 
Philippians 2:15 ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो)। 
Philippians 2:16 कि मसीह के दिन मुझे घमण्‍ड करने का कारण हो, कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्यर्थ हुआ। 
Philippians 2:17 और यदि मुझे तुम्हारे विश्वास के बलिदान और सेवा के साथ अपना लोहू भी बहाना पड़े तौभी मैं आनन्‍दित हूं, और तुम सब के साथ आनन्द करता हूं। 
Philippians 2:18 वैसे ही तुम भी आनन्‍दित हो, और मेरे साथ आनन्द करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-23 
  • 1 पतरस 1


Saturday, November 23, 2013

बहुतायत का संसार


   जिस कंपनी से मैंने अपने टी.वी. का केबल कनेक्शन लिया है, उसने मुझे हाल ही में अपने  विज्ञापन का एक पोस्टकार्ड भेजा जिसमें उसके द्वारा आरंभ किए गए नवीनत्म चैनलों के प्रसारण के विषय में जानकारी दी थी। यदि मैं उन नए चैनलों को देखने में रुचि रखूँ तो मुझे कंपनी से संपर्क कर के एक नया डिजिटल उपकरण लेना पड़ेगा, जिसे टी.वी. के साथ जोड़ने और सक्रीय करने के निर्देश भी दिए गए थे। इतना करने के बाद, उस पोस्टकार्ड में लिखा था, बस मुझे आराम से पैर फैला कर बैठना था और "बहुतायत के संसार" का मज़ा लेना था।

   उस पोस्टकार्ड ने मुझे हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर के अनुग्रह से उपलब्ध एक अन्य "बहुतायत के संसार" के विषय में विचार करने को विवश किया। हमारे पापों से पश्चाताप करने, प्रभु यीशु से उनकी क्षमा माँगने और अपना जीवन उसे समर्पित कर देने से हमारे लिए एक नया ही जीवन आरंभ हो जाता है, जहाँ हम पाप के अन्धकार से छुड़ाए जाकर परमेश्वर की अद्भुत ज्योति में उसके साथ उसके "बहुतायत के संसार" में सम्मिलित हो जाते हैं (1 पतरस 2:9)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों की पत्री के 5वें अध्याय में हम परमेश्वर से हमें प्राप्त होने वाली इस बहुतायत के बारे में कुछ और बातें पाते हैं: प्रभु यीशु में हो कर परमेश्वर के साथ हमारा मेल-मिलाप हो गया (पद 10), इसलिए अब परमेश्वर के पास हमारी पहुँच भी है और हम उसके अनुग्रह के भी भागी हैं (पद 1-2)। इस मेल के कारण हम क्लेषों में भी आनन्दित रह सकते हैं क्योंकि अब हम यह जानते-समझते हैं कि ये हर परिस्थिति में परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखने के द्वारा हमारे लिए चरित्र निर्माण तथा उन्नति के अवसर हैं (पद 3-4)। साथ ही परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी हमें प्रदान किया गया है जो परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में भरता है (पद 5); तथा अब पाप की हम पर पहले के समान पकड़ नहीं रह गई है (रोमियों 6:18)।

   मसीही विश्वासी होने के कारण हमें वास्तव में एक अद्भुत बहुतायत के संसार में प्रवेश दिया गया है, जो इस पार्थिव जीवन के बाद भी हमारे साथ बना रहेगा। यदि एक केबल कंपनी केवल क्षणिक मनोरंजन और अपने व्यवसाय के लिए सबको निमंत्रण भेज सकती है, तो फिर यदि हम अनन्त काल तक आशीष वाले इस अति-विशिष्ट संसार में आने का अन्य लोगों को निमंत्रण ना दें तो क्या यह उचित होगा? - ऐनी सेटास


परमेश्वर का हो जाना अनगिनत आशीषों को साथ ले आता है।

परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। - 1 कुरिन्थियों 2:9 

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 20-21 
  • याकूब 5


Friday, November 22, 2013

धन्यवादी


   किसी को, उसके द्वारा दिए गए किसी उपहार के लिए, ’धन्यवाद’ कहकर हम उसे इस बात की जानकारी देते हैं कि उसके द्वारा हमें दिया गया उपहार हमारी नज़रों में मूल्यवान है तथा हम उसका आदर करते हैं। लेखक जी. बी. स्टर्न ने एक बार कहा, "एक मूक धन्यवाद किसी के लिए भी किसी काम का नहीं है"। जब हमारा बेटा छोटा था तो हमें अनेक बार उसे स्मरण दिलाना पड़ता था कि सर झुकाकर, बिना आँखों से आँखें मिलाए, धीमी आवाज़ में मात्र कुछ अस्पष्ट से शब्द बुदबुदा देना एक मान्य धन्यवाद देना नहीं है।

   शादी के कई वर्षों बाद भी मैं और मेरे पति, हम दोनो ही यह अभी भी सीख रहे हैं कि यह आवश्यक है कि हम परस्पर एक दूसरे को धन्यवाद कहते रहें। जब भी हम में से एक किसी दूसरे के प्रति धन्यवादी अनुभव करता है तो यह आवश्यक है कि हम उस भावना को प्रगट करें, शब्दों में व्यक्त भी करें - चाहे हम वही बात अनेक बार पहले भी कह चुके हों। विलियम आर्थर वार्ड ने कहा, "धन्यवादी अनुभव करने के बाद उसे व्यक्त ना करना, उपहार को सुन्दर रीति से लपेट और तैयार करके फिर उसे ना देने के समान ही है।" मानव संबंधों में धन्यवाद व्यक्त करना वास्तव में महत्वपूर्ण है।

   परमेश्वर के प्रति प्रगट रूप में धन्यवादी होना, मनुष्यों के प्रति प्रगट रूप में धन्यवादी होने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह अपार है; वह तो उनको भी देता रहता है जो उसे मानते तक नहीं। दिन में जितनी बार हम परमेश्वर से मिली आशीष अथवा सहायता को अनुभव करते हैं, या बीते समय में मिली सहायता और आशीषें हमें स्मरण आती हैं तो क्या हम परमेश्वर को उसी समय उनके लिए अपना धन्यवाद व्यक्त करते हैं? और हमारे पापों की क्षमा और हमारे उद्धार के लिए जो महान बलिदान उसने दिया, जब वह स्मरण करते हैं तो क्या हमारे हृदय परमेश्वर के प्रति श्रद्धा, आदर और धन्यवाद से उमड़ते हैं? (रोमियों 6:23; 2 कुरिन्थियों 9:15)

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107:1 में दिए गए निर्देश को कभी ना भूलें, उसे प्रतिदिन स्मरण रखें: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है!" (भजन 107:1) - सिंडी हैस कैस्पर


हमारे उद्धार तथा पापों की क्षमा के लिए परमेश्वर की महान भेंट, सदैव ही हमारी सबसे गहन कृतज्ञता के योग्य है।

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, - भजन 107:1-2

बाइबल पाठ: भजन 107:31-43
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।
Psalms 107:33 वह नदियों को जंगल बना डालता है, और जल के सोतों को सूखी भूमि कर देता है। 
Psalms 107:34 वह फलवन्त भूमि को नोनी करता है, यह वहां के रहने वालों की दुष्टता के कारण होता है। 
Psalms 107:35 वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है। 
Psalms 107:36 और वहां वह भूखों को बसाता है, कि वे बसने के लिये नगर तैयार करें; 
Psalms 107:37 और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें। 
Psalms 107:38 और वह उन को ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता। 
Psalms 107:39 फिर अन्धेर, विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं। 
Psalms 107:40 और वह हाकिमों को अपमान से लाद कर मार्ग रहित जंगल में भटकाता है; 
Psalms 107:41 वह दरिद्रों को दु:ख से छुड़ा कर ऊंचे पर रखता है, और उन को भेड़ों के झुंड सा परिवार देता है। 
Psalms 107:42 सीधे लोग देख कर आनन्दित होते हैं; और सब कुटिल लोग अपने मुंह बन्द करते हैं। 
Psalms 107:43 जो कोई बुद्धिमान हो, वह इन बातों पर ध्यान करेगा; और यहोवा की करूणा के कामों पर ध्यान करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19 
  • याकूब 4


Thursday, November 21, 2013

दक्ष कारीगर


   मैंने हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखी जिसमें स्टेन्वे प्यानो बनाए जाने की प्रक्रिया को दिखाया गया है। उस चित्र में उस अति-उत्तम साज़ के बनाए जाने में उठाए गए अतिसावधानीपूर्ण हर कदम को दिखाया गया है, पेड़ के काटे जाने से लेकर प्यानो के तैयार होकर दुकान में आने तक। हर कदम पर कुशल कारीगर बारीकी से जाँचते हुए हर कार्य को पूरा करते हैं। एक प्यानो के बनने में एक वर्ष का समय लगता है, और इस साल भर लंबी प्रक्रिया के बाद जब निपुण संगीतज्ञ उसे बजाते हैं तो उनका यही निषकर्ष होता है कि संगीत की जो मधुर ध्वनि एक स्टेन्वे प्यानो से आती है वह अन्य किसी साधारण रीति से बने प्यानो से कभी नहीं आती। जंगल में उग रहे एक पेड़ से इतना उत्तम संगीत निकल सकेगा, और वह इतना मूल्यवान होने पाएगा, यह कलपना करना भी कठिन है; किंतु जंगली पेड़ से एक उत्कृष्ट उत्पाद बनने, तथा उसकी उत्तमता और प्रसिद्धी होने का राज़ है उसके निर्माण के हर कदम पर दक्ष कारीगरों का कार्य।

   जब परमेश्वर ने इस्त्राएल के लोगों को आराधना के लिए एक स्थान बनाने को कहा तो उसमें प्रयोग होने वाले सामान के बनाने के लिए भी परमेश्वर ने एक उत्तम कारीगर के कार्य को महत्व दिया। परमेश्वर ने मूसा को आराधना के स्थान का सारा नमूना दिखाते और समझाते हुए कहा कि उसने बसलेल को इस कार्य के करने के लिए चुना है और इस कार्य के लिए आवश्यक सारा कौशल और कला उसके अन्दर डाल दी है, अपने आत्मा से उसे भर दिया है (निर्गमन 31:3-5)।

   आज परमेश्वर प्रत्येक मसीही विश्वासी के हृदय में निवास करता है, लेकिन उसकी कारीगरी के कार्य का अन्त नहीं हुआ है। आज प्रत्येक मसीही विश्वासी उसके हाथ की कलाकृति है (इफिसियों 2:10) और हर विश्वासी को संवारने तराशने वाला कुशल कारीगर परमेश्वर पवित्र आत्मा है। वह हमारे हर एक दोष और खामी को तराश कर निकालता रहता है और हमारे चरित्र को प्रभु यीशु की समानता में ढालता रहता है (रोमियों 8:28-29)। जैसे जैसे हम उसकी कारीगरी के आधीन अपने आप को समर्पित करते जाते हैं हम पाते हैं कि एक निपुण कारीगर के समान वह हमें उत्तमता में और उन्नत करता जाता है; अन्ततः हम द्खेंगे कि उस दक्ष कारीगर की कुशल कारीगरी ही हमारे उत्कृष्ट जीवन का राज़ है।

   अपने जीवनों को उस महान और सर्वोत्तम कारीगर परमेश्वर प्रभु यीशु के हाथ में समर्पित कर दीजिए। अपनी किसी क्षमता अथवा कौशल पर नहीं वरन उसकी दक्ष कारीगरी पर भरोसा रखिए और उसे अपना कार्य स्वतंत्रता पूर्वक कर लेने दीजिए; वह आपके स्वरूप को ऐसा संवार देगा जैसा कि आपने कभी कलपना भी नहीं करी होगी। - डेनिस फिशर


पिता परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र की समानता में लाने के लिए हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: निर्गमन 31:1-5
Exodus 31:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 
Exodus 31:2 सुन, मैं ऊरी के पुत्र बसलेल को, जो हूर का पोता और यहूदा के गोत्र का है, नाम ले कर बुलाता हूं। 
Exodus 31:3 और मैं उसको परमेश्वर की आत्मा से जो बुद्धि, प्रवीणता, ज्ञान, और सब प्रकार के कार्यों की समझ देनेवाली आत्मा है परिपूर्ण करता हूं, 
Exodus 31:4 जिस से वह कारीगरी के कार्य बुद्धि से निकाल निकाल कर सब भांति की बनावट में, अर्थात सोने, चांदी, और पीतल में, 
Exodus 31:5 और जड़ने के लिये मणि काटने में, और लकड़ी के खोदने में काम करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17 
  • याकूब 3


Wednesday, November 20, 2013

पारिवारिक गुण


   मेरे बचपन का एक सन्डे स्कूल का गीत है जो मुझे कभी कभी स्मरण हो आता है। उस गीत के बोल प्रभु यीशु से बड़ी उदारता से मिलने वाली शान्ति की आशीषों का वर्णन करते हैं; गीत का आरंभ है: "मेरे हृदय में यीशु की शान्ति है, जो वर्णन से बाहर है।" 

   चाहे इस गीत के लेखक ने इसे एक भली इच्छा से लिखा है, लेकिन इस गीत के बोलों में कुछ कहे जाने से रह गया है, जो प्रभु यीशु के सुसमाचार के लिए आवश्यक है। यह बिलकुल सत्य है कि परमेश्वर की शान्ति हमें परमेश्वर से मिलने वाली एक भेंट है, जिससे अपने हृदयों में हम उसकी उपस्थिति को अनुभव करने पाते हैं, उससे संगति करने पाते हैं (यूहन्ना 14:27; 16:33)। लेकिन परमेश्वर की कदापि यह इच्छा नहीं है कि हम इस शान्ति को अपने पास ही समेट कर रखे रहें। परमेश्वर यह चाहता है कि हम इस अद्भुत शान्ति को अपने आस-पास के और संसार के सभी लोगों तक पहुँचाएं। मसीही विश्वासी होने के नाते यह शान्ति हमारे व्यवहार, संबंधों और हमारे अराधनालयों के वातावरण का अभिन्न अंग होनी चाहिए।

   प्रभु यीशु ने अपने ’पहाड़ी उपदेश’ में कहा था, "धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे" (मत्ती 5:9)। यह दिखाता है कि हम मसीही विश्वासियों को आगे बढ़कर परमेश्वर की इस शान्ति को लोगों के जीवनों तक पहुँचाना है, उसे अपने संबंधों में दिखाना है। क्योंकि सामान्य मानव प्रवृति शान्ति नहीं उत्पात और गड़बड़ मचाने की होती है, इसलिए प्रभु यीशु की ओर से अपने अनुयायियों के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण आज्ञा है। तो, मेल कराने वाले कैसे होते हैं? इसी अध्याय में प्रभु यीशु ने इस बात की भी पहचान दी: मेल कराने वाले अपने सताने वालों की ओर दूसरा गाल भी फेर देते हैं (पद 39); वे आशा से अधिक कार्य कर देने वाले होते हैं (पद 41); वे अपने सताने वालों के लिए प्रार्थना करने वाले और उनसे प्रेम करने वाले होते हैं (पद 44)।

   हम मसीही विश्वासियों को यह सब क्यों करना है? क्योंकि हमारा परमेश्वर शान्ति का दाता है, और जब हम शान्ति लाते हैं तब हम भी "परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे" (पद 9)। यानि कि यह शान्ति या मेलजोल कराना हमारा पारिवारिक गुण है और हमें अपने पिता के गुण प्रगट करने हैं। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर के साथ हमारी शान्ति और परमेश्वर से हमें मिली शान्ति के कारण हमें परमेश्वर की शान्ति को संसार में पहुँचाना है।

धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। - मत्ती 5:9

बाइबल पाठ: मत्ती 5:9, 38-48
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew 5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत। 
Matthew 5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे। 
Matthew 5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे। 
Matthew 5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा। 
Matthew 5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। 
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। 
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। 
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते? 
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते? 
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15 
  • याकूब 2


Tuesday, November 19, 2013

सफाई


   इस सप्ताह परमेश्वर ने कुछ शरद ऋतु वाली सफाई करी - उसने हमारे रहने के इलाके में एक तेज़ आंधी चलाकर पेड़ों को हिलाया और झकझोरा। इससे उन के सूखे हुए पत्ते और कई टहनियाँ पेड़ से अलग होकर नीचे गिर पड़े। अब आते बसंत ऋतु में नई कोंपलों और पत्तों के उगने और सूर्य की रौशनी से ऊर्जा प्राप्त कर के बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान तैयार हो गया। उन टूट कर गिरे पत्तों और टहनियों को जमा कर के अपने बागीचे से साफ करते समय मुझे यह शिक्षा भी मिली कि जब परमेश्वर मेरे जीवन से व्यर्थ बातों को अलग करे, तो भला होगा कि जो उसने अलग कर दिया है उसे मैं अपने जीवन से साफ भी कर दूँ, जैसे मैंने अपने बाग़ से उन गिरे हुए पत्तों और टहनियों को साफ कर रही थी। मैं ने यह भी सीखा कि इसी प्रकार मेरे जीवन में भी परमेश्वर कभी कभी किसी आँधी को या मुझे झकझोर देने वाले किसी अनुभव को आ लेने देता है जिससे मेरे जीवन के वे व्यर्थ भाग मुझ से अलग किए जा सकें जो सामान्य प्रक्रिया से अलग नहीं हो पा रहे हैं।

   ये ’व्यर्थ’ भाग मेरी कुछ ऐसी आदतें या पसन्द की बातें हो सकतीं हैं जिन्हें मैं ढिटाई से पकड़े हुए हूँ और छोड़ना नहीं चाहती। वे मेरी सेवकाई के ऐसे अंश भी हो सकते हैं जो कभी मेरे लिए भले और लाभदायक थे परन्तु अब उनकी उपयोगिता मेरे जीवन और मेरी सेवकाई के लिए समाप्त हो गई है, परमेश्वर उनके स्थान पर अब कुछ नया मेरे जीवन में लाना चाहता है। लेकिन अधिकांशतः यह कोई बुरी आदत या ज़िद्दी व्यवहार, जैसे कड़ुवाहट, क्रोध, निन्दा (इफिसियों 4:31) आदि होता है जिसे मैं परमेश्वर द्वारा स्मरण दिलाए जाने पर भी, या फिर उसकी चेतावनियों को प्राप्त करने अथवा हलकी डाँट के बावजूद भी छोड़ने को तैयार नहीं होती, ढिटाई से उनमें बनी रहती हूँ। मुझे साफ करने के लिए फिर परमेश्वर को मुझे हिलाना और झकझोरना ही पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में योना नबी ने जाना कि जब कोई किसी ढिटाई के आचरण को छोड़ने को तैयार नहीं होता तब क्या कुछ हो सकता है। योना परमेश्वर का नबी था, लेकिन निनेवे के दुष्ट लोगों के प्रति उसकी कड़ुवाहट परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम से कहीं अधिक थी। जब परमेश्वर ने योना को कहा कि वह निनेवे के लोगों के मध्य जा कर पश्चाताप करने का प्रचार करे, तो वह परमेश्वर की आज्ञा को मानने की बजाए, निनेवे से विपरीत दिशा में एक पानी जहाज़ पर चढ़कर चल निकला। लेकिन परमेश्वर से भागना संभव नहीं था; परमेश्वर ने एक प्रचण्ड आँधी के द्वारा उस जहाज़ को झकझोरा, योना ने स्वीकार किया की जहाज़ की यह स्थिति उसके कारण हुई है, और उसके कहने पर उसे पानी में फेंक दिया गया, जहाँ योना के लिए परमेश्वर ने एक बड़े मगरमच्छ को तैयार कर रखा था। तीन दिन तक मगरमच्छ के पेट में रहने के बाद मगरमच्छ ने योना को निनेवे के तट पर उगल दिया और अन्ततः योना ने जाकर निनेवे में परमेश्वर के प्रति पापों से पश्चाताप का प्रचार किया जिससे सारा निनेवे पश्चाताप में परमेश्वर के सामने झुक गया और विनाश से बच गया।

   परमेश्वर तो अपने लोगों को साफ देखना चाहता है, और उन्हें साफ रहने की शिक्षा भी देता है; अब यह हम पर है कि हम कैसे साफ होते हैं - उसकी सुनकर या उसके द्वारा हिलाए और झकझोरे जा कर। हमारी सफाई उसकी ज़िम्मेदारी है, और वह उसे पूरा भी करेगा; इसलिए जो सहज से हो जाए उसके लिए तकलीफ क्यों सहें? - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु के कलवरी के क्रूस पर बहाए लहु की सामर्थ पाप के गहरे से गहरे दाग़ को भी धो कर साफ कर सकती है।

पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं। - 1 पतरस 1:15-16

बाइबल पाठ: योना 1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते हैं, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे यहोवा, जो कुछ तेरी इच्छा थी वही तू ने किया है। 
Jonah 1:15 तब उन्होंने योना को उठा कर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं। 
Jonah 1:16 तब उन मनुष्यों ने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।
Jonah 1:17 यहोवा ने एक बड़ा सा मगरमच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस मगरमच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13 
  • याकूब 1


Monday, November 18, 2013

बहुभाषीय


   क्या यह संभव है कि ऐसे समाज तक, जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिकाधिक उदासीन होते जा रहा है, और उन लोगों तक जो मसीही विश्वास को नहीं मानते यह सुसमाचार सन्देश पहुँचाया जा सके? ऐसा कर सकने का एक माध्यम हो सकता है हम मसीही विश्वासियों का सांसकृतिक रूप से "बहुभाषीय" हो जाना - उन लोगों ’भाषा’ के प्रयोग द्वारा, अर्थात उन लोगों की रुचि और लगाव की बातों के माध्यम से, उन तक प्रभु यीशु मसीह में सेंत-मेंत मिलने वाली मुक्ति के सन्देश को पहुँचाना।

   सामान्यतः आम लोगों की रुचि संगीत, सिनेमा, टी.वी., खेल-कूद आदि में होती है और वे ऐसे ही विषयों पर आपस में बातचीत करते हैं। यदि हम मसीही विश्वासी भी इन बातों की आलोचना या निन्दा किए बिना, इन विषयों को बातचीत आरंभ करने का माध्यम बना कर उन तक इन विषयों के सन्दर्भ में परमेश्वर के वचन और उद्धार के मार्ग को प्रस्तुत करें तो सुसमाचार के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना सम्भव होगा।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात का उदाहरण अथेने के लोगों के साथ अपने वार्तालाप में दिया। प्रेरितों के कार्य के अध्याय 17 में हम पाते हैं कि अथेने के अरियुपगुस में पौलुस को अवसर हुआ कि एक पूर्णतः गैरमसीही संसकृति के लोगों को मसीही विश्वास और मसीह यीशु में उद्धार के मार्ग के बारे में बताए। ऐसा करने के लिए पौलुस ने उन युनानी लोगों के कवियों की लिखी बातों को संदर्भ बनाकर सुसमाचार को उनके सामने प्रस्तुत किया; पौलुस ने कहा: "क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं" (प्रेरितों 17:28)।

   जैसे पौलुस ने उस संसकृति के लोगों तक अपनी बात उसे आधार बनाकर पहुँचाई जो वे पढ़ रहे थे, हम भी लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को अधिक प्रभावी रीति से लोगों तक पहुँचा सकते हैं यदि हम उन की रुचि के विषय को आधार बनाएं तो। क्या आप किसी पड़ौसी या सहकर्मी तक सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं? ’बहुभाषीय’ बन कर देखिए, शायद ऐसा करना कारगर हो जाए। - बिल क्राउडर


बाइबल का सन्देश संसार के संपर्क में लाना आवश्यक है।

क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:18-31
Acts 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था। 
Acts 17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है? 
Acts 17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है? 
Acts 17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10 
  • इब्रानियों 13


Sunday, November 17, 2013

साथी


   मुझे अपने प्रदेश के मार्गों पर पैदल घूमना चलना अच्छा लगता है क्योंकि ऐसा करने से मैं वहाँ की सुरम्य सुन्दरता और भव्यता को भली-भांति निहार सकता हूँ, उसका आनन्द उठा सकता हूँ। यह मुझे इस बात का भी स्मरण दिलाता है कि मैं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के साथ एक आत्मिक यात्रा पर भी हूँ, जिसमें प्रभु यीशु मेरा साथी और मार्गदर्शक है। प्रभु यीशु भी, अपने पृथ्वी के समय में सारे इस्त्राएल देश में चलता फिरता और शिष्य बनाता रहा, उनसे यह कह कर, "मेरे पीछे चले आओ" (मत्ती 4:19)।

   जॉन बनयन द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध पुस्तक "मसीही मुसाफिर" में एक स्थान पर मसीही यात्री कठिनाई के पहाड़ पर पहुँचता है, और उसे चढ़ने से पहले वह थोड़ा रुककर विश्राम करता है। उस विश्राम के समय में वह अपने पास विद्यमान परमेश्वर के वचन को पढ़ता है जो उसे परमेश्वर की उसके साथ बनी हुई उपस्थिति को स्मरण कराता है और आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की सामर्थ उसके साथ है। इस विश्राम और मनन से वह नई स्फूर्ति पाता है और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ने और कठिनाई के पहाड़ पर चढ़ने के लिए तैयार हो जाता है।

   मसीही विश्वास के जीवन की यह यात्रा सरल नहीं है; अनेक बार इसमें आगे बढ़ने से सरल और बेहतर लगता है इसे छोड़ देना, पीछे हट जाना, मार्ग बदल लेना। लेकिन जब ऐसे कठिन समय आएं तब उचित होता है थोड़ा समय रुककर विश्राम करना और पुनः सामर्थ प्राप्त करना - बीती यात्रा में हमारे साथ बनी रही परमेश्वर प्रभु यीशु की उपस्थिति और सहायता को स्मरण कर के और कभी साथ ना छोड़ने के उसके वायदे तथा उसके वचनों में दी गई हमारी भलाई की प्रतिज्ञाओं के स्मरण से आश्वासन लेने के द्वारा।

   केवल परमेश्वर ही यह जानता है कि हमारी यह जीवन यात्रा कितनी लंबी है, तथा कब, कहाँ और कैसे समाप्त होगी; लेकिन उसका आश्वासन सदा अपने लोगों के साथ है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)। प्रभु यीशु का यह आश्वासन किसी कथन को सुन्दर बनाने वाला कोई अलंकार मात्र नहीं है। प्रभु यीशु की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति वास्तविक है जो अनेक मसीही विश्वासियों ने अपनी विश्वास की यात्रा में भिन्न समयों और परिस्थितियों में अनुभव की है। ऐसा कोई पल नहीं जिसमें मसीह यीशु अपने विश्वासियों के साथ ना हो, ऐसी कोई यात्रा नहीं जिसके प्रत्येक पग में वह साथी ना हो। 

   मैंने अपने अनुभव से जाना है कि वह मेरा ऐसा साथी है जो मेरी जीवन यात्रा को अपनी सामर्थ और मार्गदरशन से सुगम बना देता है। क्या आपने भी मसीह यीशु को आपनी जीवन यात्रा का साथी बनाया है? - डेविड रोपर


जीवन यात्रा के कठिन मार्ग पर अपने बोझ प्रभु यीशु को सौंप दीजिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मत्ती 4:18-22
Matthew 4:18 उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 
Matthew 4:19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 
Matthew 4:20 वे तुरन्त जालों को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 4:21 और वहां से आगे बढ़कर, उसने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 
Matthew 4:22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7 
  • इब्रानियों 12


Saturday, November 16, 2013

सावधान!


   बैंक में पैसा लेने-देने और संभालने वाले अधिकारियों के प्रशिक्षण के समय उन्हें असली और नकली नोट में भेद करना और नकली को पहचानना सिखाया जाता है। उन्हें असली और नकली दोनों ही नोट दिखाए जाते हैं फिर असली की तुलना में नकली में विद्यमान समानताओं को नहीं वरन भिन्नताओं को देखना और पहचानना सिखाया जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना की पहली पत्री के दुसरे अध्याय में मसीही विश्वासियों के समक्ष झूठे मसीही विश्वासियों और शिक्षकों के उदाहरण रखे गए हैं जिससे वे असली-नकली की पहचान कर सकें। यूहन्ना ने बताया कि अन्त के समयों की एक पहचान होगी झूठे मसीहियों और मसीह विरोधियों की बहुतायत (1 यूहन्ना 2:18)। झूठे मसीही या मसीह विरोधी वे हैं जो अपने में मसीह यीशु की सामर्थ और उससे प्राप्त अधिकार के होने का दावा तो करते हैं लेकिन उनमें ऐसा कुछ भी नहीं होता; या फिर वे जो मसीह यीशु और मसीही विश्वास का और उसकी शिक्षाओं का इन्कार करते हैं, उसका विरोध करते हैं।

   प्रेरित यूहन्ना ने मसीह विरोधियों की पहचान के तीन चिन्ह दिए: वे मसीही संगति और सहभागिता से हट जाते हैं (पद 19); वे प्रभु यीशु को जगत का उद्धारकर्ता मसीहा स्वीकार नहीं करते (पद 22); वे मसीही विश्वासियों को भी मसीह यीशु से दूर कर देने के प्रयास करते हैं (पद 26)। साथ ही यूहन्ना इसी पत्री में ऐसे मसीह विरोधियों से बच कर रहने के उपाय भी बताता है: प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने अन्दर वास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा पर निर्भर रहे, उसकी आज्ञाकरिता में चले; परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को जाने और उनमें बना रहे तथा मसीह यीशु के साथ संगति बनाए रखे।

   जैसे बैंक के कर्मचारी असली-नकली नोट के तुलनात्मक प्रशिक्षण के द्वारा असली को पहचानने वाले तथा नकली के नुकसान से बचे रहने वाले हो जाते हैं, हम मसीही विश्वासी भी अटल सत्य प्रभु यीशु मसीह की पहचान के द्वारा नकली अर्थात मसीह विरोधियों को पहचान कर उनके षड़यंत्रों और गलत शिक्षाओं से बचे रह सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


सचेत रहें; शैतान थोड़े से सत्य का हल्का सा आवरण पहना कर असत्य को स्वीकारयोग्य बनाने के प्रयास में लगा रहता है।

और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। - 2 कुरिन्थियों 11:14-15

बाइबल पाठ: 1यूहन्ना 2:18-27
1 John 2:18 हे लड़कों, यह अन्‍तिम समय है, और जैसा तुम ने सुना है, कि मसीह का विरोधी आने वाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्‍तिम समय है। 
1 John 2:19 वे निकले तो हम ही में से, पर हम में के थे नहीं; क्योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं। 
1 John 2:20 और तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो। 
1 John 2:21 मैं ने तुम्हें इसलिये नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिये, कि उसे जानते हो, और इसलिये कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं। 
1 John 2:22 झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र का इन्कार करता है। 
1 John 2:23 जो कोई पुत्र का इन्कार करता है उसके पास पिता भी नहीं: जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है। 
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे। 
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है। 
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं। 
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4 
  • इब्रानियों 11:20-40


Friday, November 15, 2013

आहार


   क्या आपने कभी शिशु आहार चखा है? मैंने चखा है, और वह बहुत बेस्वाद होता है। लेकिन शिशुओं के लिए और कोई विकल्प भी नहीं है, क्योंकि उनके दाँत नहीं होते इसलिए वे किसी स्वादिष्ट, मसालेदार ठोस भोजन को काट, चबा कर खा नहीं सकते, उसका स्वाद नहीं ले सकते। हम जानते हैं कि बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं, वे ठोस आहार भी लेना आरंभ कर देते हैं, और ऐसा केवल स्वाद के लिए नहीं है। यदि वे उस शिशु आहार से निकलकर ठोस आहार पर नहीं जाएंगे तो उनका शारीरिक विकास नहीं होने पाएगा, वे कमज़ोर रहेंगे, रोगों से लड़ने की क्षमता उनमें विकसित नहीं होने पाएगी, उनके शरीर दुर्बल तथा अस्वस्थ ही बने रहेंगे।

   दुख की बात है कि बहुत से मसीही विश्वासियों का भी आत्मिक भोजन और आत्मिक विकास के संबंध में यही हाल रहता है। वे मसीही विश्वास की उन्हीं आरंभिक बातों (इब्रानियों 6:1-2) और सरल सच्चाईयों से संतुष्ट रहते हैं और सुसमाचार की बुनियादी बातों से आगे बढ़ने ही नहीं पाते। परमेश्वर के वचन बाइबल की गंभीर बातों तथा कठिन भागों का अध्ययन और मनन ना करने के कारण वे आत्मिक रीति से परिपक्व नहीं होते, बच्चे ही रहते हैं जो बस दूसरों से ही सीखते रहते हैं, स्वयं प्रौढ़ नहीं होते (इब्रानियों 5:13)। इस कारण वे परमेश्वर के वचन और परमेश्वर की आज्ञाओं की समझ नहीं रखते, सही निर्णय करने में असमर्थ रहते हैं, झूठी शिक्षाओं को पहचानने की क्षमता नहीं रखते और चाहे अनेक वर्षों से मसीही विश्वास में हों लेकिन फिर भी आत्मिक रूप से बच्चे और अविकसित ही रहते हैं।

  किसी व्यक्ति के डील-डौल को देख कर उसकी आयु का अनुमान लगाया जा सकता है। इसी प्रकार हमारे दैनिक व्यवहार, चरित्र और भले-बुरे में अन्तर की परख द्वारा हमारी आत्मिक आयु का भी अनुमान लगाया जा सकता है। आज आपकी आत्मिक आयु के बारे में लोग क्या अनुमान लगाते हैं? क्या आप आत्मिक रीति से प्रौढ़ और परिपक्व हैं, या परिपक्वता की ओर अग्रसर हैं? आज आपका आत्मिक आहार कैसा है - शिशु आहार या ठोस आहार? - सी. पी. हिया


परमेश्वर के वचन के अध्ययन में लगे रहें; आपकी परिपक्वता स्वतः ही प्रकट होती रहेगी।

क्योंकि दूध पीने वाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं। - इब्रानियों 5:13-14

बाइबल पाठ: इब्रानियों 5:12-6:3
Hebrews 5:12 समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए ओर ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। 
Hebrews 5:13 क्योंकि दूध पीने वाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। 
Hebrews 5:14 पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं।
Hebrews 6:1 इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्भ की बातों को छोड़ कर, हम सिद्धता की ओर आगे बढ़ते जाएं, और मरे हुए कामों से मन फिराने, और परमेश्वर पर विश्वास करने। 
Hebrews 6:2 और बपतिस्मों और हाथ रखने, और मरे हुओं के जी उठने, और अन्‍तिम न्याय की शिक्षारूपी नेव, फिर से न डालें। 
Hebrews 6:3 और यदि परमेश्वर चाहे, तो हम यही करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2 
  • इब्रानियों 11:1-19


Thursday, November 14, 2013

विलाप और सांत्वना


   यरुशलेम आग की लपटों से घिरा हुआ था और परमेश्वर का भविष्यद्वकता यिर्मयाह उसकी दुर्दशा पर विलाप कर रहा था। लंबे समय से तथा बारंबार यिर्मयाह यरुशलेम के लोगों और हाकिमों को आते विनाश से बचने के लिए पश्चाताप करने का परमेश्वर का सन्देश पहुँचाता रहा था, लेकिन उन्होंने उसकी एक ना सुनी, उसका तिरस्कार किया, उसे सताया, उसे झूठा कहा। अब वह विनाश का समय अपनी संपूर्ण वीभत्सता के साथ यरुशलेम पर आ पड़ा था और चारों ओर बरबादी ही बरबादी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह द्वारा लिखित छोटी सी पुस्तक ’विलापगीत’ यिर्मयाह द्वारा यरुशलेम की इस बरबादी पर किए गए शोक और विलाप का वर्णन है।

   यिर्मयाह ने इस पुस्तक को एक विशेष रीति से लिखा है। मूल इब्रानी भाषा की वर्णमाला में, जिसमें यह पुस्तक लिखी गई, 22 अक्षर होते हैं। यिर्मयाह ने इस पुस्तक को कविता के रूप में लिखा, और कविता का हर छंद इब्रानी वर्णनमाला के अक्षर से क्रमबुद्ध रूप में आरंभ होता है। प्रत्येक अक्षर के इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रयोग करे जाने से ना केवल पाठकों को इसे स्मरण करना सरल है, वरन यह इस बात का भी सूचक है कि यिर्मयाह का शोक और विलाप अधूरा नहीं वरन आरंभ से अन्त तक संपूर्ण था। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि यिर्मयाह ने ना केवल यरुशलेम और उसके लोगों की दशा बयान करी, वरन साथ ही अपना अनुभव और अपनी व्यथा भी बयान करी, और उससे भी बढ़कर, इस सारे कठोर अनुभव में उसने परमेश्वर से मिलने वाली शांति और सांत्वना को भी लिखा है। यिर्मयाह ने लिखा, "क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;" (विलापगीत 3:31-32)।

   यह हम मसीही विश्वासियों के लिए एक अद्भुत आशा और मार्गदर्श्न की बात है - हमारा प्रभु, जिस पर हमने विश्वास किया है और जिसे अपना जीवन समर्पित किया है वह हमारे कष्ट और क्लेष में हमारे साथ होता है, हमें संभालता है, हमें सांत्वना देता है। क्या आप भी किसी हृदय विदारक घटना या क्लेष से होकर निकल रहे हैं अथवा आप को निकलना पड़ा है? यिर्मयाह के समान ही, अपने मन के शोक और विलाप को पूरा अवसर दीजिए, साथ ही परमेश्वर की उपस्थिति और बीती समय में उसके द्वारा दिखाई गई भलाईयों को भी स्मरण रखिए। इससे आप उसकी शांति तथा सांत्वना को भी अनुभव करने पाएंगे और भविषय के लिए आशावान भी बने रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर आज हमारे हृदयों को हमारे आँसुओं से धुल लेने देता है जिससे आते सुख और आनन्द के लिए वे साफ रहें।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:22-33
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5 
  • इब्रानियों 10:19-39


Wednesday, November 13, 2013

हम जो हैं


   एक स्थानीय अस्पताल में अपने नियमित चिकित्सा जाँच किए जाने की प्रतीक्षा करते हुए मेरा ध्यान वहाँ दीवार पर लगे क्रूस पर चढ़ाए हुए प्रभु यीशु मसीह के चित्र पर गया। थोड़ी देर बाद, जाँच से पहले एक नर्स ने मेरे फॉर्म भरते और जाँच संबंधी कागज़ तैयार करते हुए मुझसे अनेक प्रश्न पूछे, जिनमें से एक था, "क्या आपकी कोई आत्मिक आवश्यकताएं हैं जिनके बारे में आप हमारे पादरी से चर्चा चाहेंगे?" मैंने कहा कि वर्तमान संसार के संदर्भ में मुझे उनका यह प्रश्न पूछना अच्छा लगा। उस नर्स ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम मसीही विश्वास पर आधारित और संचालित अस्पताल हैं और यह करना हमारी सेवकाई का एक भाग है। मैं प्रभावित हुआ कि आज के बहुवादी और धर्मनिर्पेक्ष धारणाओं को मान्यता देने वाले संसार में भी ऐसे लोग हैं जो वह दिखाने में हिचकिचाते नहीं हैं जो वो हैं।

   प्रेरित पतरस ने प्रथम सदी के मसीही विश्वासियों को ढ़ाढ़स दिया, उन्हें जो मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव के कारण घर-बार छोड़कर भागने और तित्तर-बित्तर हो जाने को बाध्य हो गए थे, कि सच्चाई के कारण क्लेष उठाना भी उनके लिए आशीष का कारण है। अपनी पत्री में पतरस ने उन्हें लिखा: "और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:14-15)।

   जैसे उस अस्पताल की नर्स ने बिना झिझके अपने विश्वास को व्यक्त किया, वैसे ही हम मसीही विश्वासी भी अपने विश्वास को बिना हिचकिचाए बयान कर सकते हैं। यदि इस कारण लोग हमसे अनुचित व्यवहार करें या हमारी आलोचना करें तो हमें नम्रता और आदर के साथ ही उन्हें अपना प्रत्युत्तर देना चाहिए। हम जो हैं उसके लिए हमें कभी भयभीत होने या शर्मिंदा होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारा परमेश्वर सदा हमारे साथ है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह के कार्य को कष्ट देने के बजाए भला है कि मसीह के कार्य के लिए कष्ट उठाना।

फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। - 1 पतरस 4:14

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2 
  • इब्रानियों 10:1-18


Tuesday, November 12, 2013

पालनहारा परमेश्वर


   रॉबिन और स्टीव परमर्श देने का कार्य करते हैं, यही उनकी मसीही सेवकाई भी है; किंतु इससे उन्हें आमदानी बहुत कम मिलती है। हाल ही में परिवार में उठी एक समस्य के कारण अपनी पुरानी कार में उन्हें 5,000 मील की यात्रा करनी पड़ी। समस्या से निपटने के बाद वापस लौटते हुए, घर से लगभग 2,000 मील दूर उनकी कार से आवाज़ें आने लगीं और वह चलने में दिक्कत देने लगी। उन्होंने गाड़ी को जब एक कार ठीक करने वाले मिस्त्री को दिखाया तो उत्तर मिला, इसका अब कुछ नहीं हो सकता, पूरा इंजन ही बदलना पड़ेगा। उनके पास नया इंजन डलवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बड़ी कठिनाई से वे जैसे-तैसे उस गाड़ी में घर तक तो लौट आए। तब उन्हें एक "कार मिशनरी" का पता चला जो मसीही सेवकाई में लगे लोगों कि सहायता करता था। उसने उनकी कार देखी और उसे अचंभा हुआ कि वह वापस घर तक आ गई थी। लेकिन उससे भी अधिक अचंभा स्टीव और रॉबिन को हुआ जब उस "कार मिशनरी" ने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनकी गाड़ी में नया इंजन लगवाने का प्रस्ताव दिया। यदि उन्होंने मार्ग में नया इंजन डलवाने का प्रयास किया होता तो व्यर्थ ही, उतने पैसे ना होते हुए भी उन्हें हज़ारों डॉलर का खर्चा उठाना पड़ जाता। परमेश्वर ने उनके लिए कुछ अलग ही इन्तज़ाम पहले ही कर रखा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकल कर परमेश्वर की अगुवाई में वाचा के देश कनान की ओर चले तो उन्हें मरुभूमि से होकर जाना पड़ा। तीन दिन कि यात्रा के बाद उनका पानी समाप्त हो गया, और उन्हें यह भी पता नहीं था कि अब पानी कहाँ से मिलेगा। लेकिन परमेश्वर समस्या भी जानता था और उसका समाधान भी। जिस मार्ग से वे इस्त्राएली जा रहे थे वहाँ दो जगह, मारा और एलीम पर, पानी के सोते थे और परमेश्वर उन्हें वहीं लेकर गया। उन स्थानों पर ना केवल उन्हें पानी मिला वरन विश्राम करने के लिए अच्छा स्थान भी मिला।

   चाहे हमारी समस्या गंभीर और परिस्थिति विकट लगे, हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमारी अगुवाई कर रहा है। वह हमारा पालनहारा परमेश्वर है, हमारी यात्रा के मार्ग और मार्ग की हर बात को तथा मार्ग के लिए हमारी प्रत्येक आवश्यकता को वह भली-भांति जानता है। जब आवश्यकता आन पड़ेगी तब हमारा पालनहारा परमेश्वर उसका समाधान भी करेगा। - डेव ब्रैनन


असंभव परिस्थितियाँ परमेश्वर पर हमारे विश्वास को दृढ़ करने के अवसर होते हैं।

तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। - निर्गमन 15:25

बाइबल पाठ: निर्गमन 15:22-27
Exodus 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। 
Exodus 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। 
Exodus 15:24 तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं? 
Exodus 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, 
Exodus 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं। 
Exodus 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52 
  • इब्रानियों 9


Monday, November 11, 2013

सच्ची सुरक्षा


   शीत युद्ध के दिनों में - जो विश्व की दो महा-शक्तियों रूस और अमेरिका के बीच 20वीं सदी के दूसरे अर्ध-भाग में अत्यंत तनाव का समय था, अमेरिका के निवासी किसी भी समय घटित हो सकने वाले परमाणु युद्ध के भय में रहते थे। मुझे स्मरण है कि 1962 में क्यूबा में रुस द्वारा परमाणु मिसाइल लाने के प्रयास किए जाने से उत्पन्न संकट के समय हम विनाश के बहुत निकट आ गए थे। वह बड़ी उत्सुकता का समय था। उन दिनों की यादों में से आज मुझे एक बात की याद बड़ी विचित्र लगती है - हमारे स्कूल में होने वाला सुरक्षा अभ्यास। उस अभ्यास के लिए अचानक ही संकट सूचक घंटी बजती और हम सब जल्दी से सब कार्य छोड़कर अपने अपने डेस्क के नीचे छुप कर बैठ जाते, जब तक कि खतरा टलने की घंटी नहीं बजती थी - परमाणु हमले से बचने के लिए! आज मैं जानता हूँ और सोचता हूँ कि यदि वास्तव में परमाणु हमला होता तो हमारा वह डेस्क के नीचे जा छिपना हमारी लिए किसी भी रीति से ज़रा भी लाभदयाक नहीं हो सकता था। उस अभ्यास ने हमें सुरक्षा कि एक झूठी दिलासा तो दी लेकिन वह थी बिलकुल व्यर्थ।

   चाहे आज हम उसी स्तर के परमाणु खतरे का सामना नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कई बातें हैं जो हमारे लिए संकट उत्पन्न कर सकती हैं, उनमें से कुछ हैं आत्मिक एवं आध्यात्मिक खतरे। परमेश्वर का वचन बाइबल, इफिसियों 6:12 में हम मसीही विश्वासियों को स्मरण दिलाती है, "क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं"। ये वास्तव में शक्तिशाली शत्रु हैं, लेकिन परमेश्वर के प्रेम की सुरक्षा भी हमारे साथ है (रोमियों 8:35, 38-39)। लेकिन साथ ही हमारे परमेश्वर पिता ने हमें, और उन सभी को जो मसीह यीशु पर विश्वास लाते हैं एक आत्मिक सुरक्षा कवच तथा हथियार भी दिए हैं - इफिसियों 6:13-17, जिन्हें हमें सदा ही धारण किए रहना है क्योंकि शत्रु शैतान और उसकि सेनाओं का खतरा सदा ही हमारे लिए बना रहता है।

   इस सुरक्षा कवच और आत्मिक हथियार को सदा धारण किए रहने के परिणामस्वरूप, जब भी हम मसीही विश्वासियों पर किसी शत्रु का कोई हमला होता है तब, "...इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं" (रोमियों 8:37)। परमेश्वर पिता में और उसके द्वारा हमें सच्ची और कारगर सुरक्षा मिली है। यह सुरक्षा प्रत्येक आत्मिक परिस्थिति में उपयोगी है, प्रभावी है, जयवंत है।

   क्या आप के पास भी यह सच्ची सुरक्षा है? यदि नहीं तो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और विश्वास द्वारा आप इसे इसी क्षण पा सकते हैं; अवसर का लाभ उठाएं और परमेश्वर की आधीनता तथा सुरक्षा में आ जाएं। - बिल क्राउडर


सच्ची सुरक्षा खतरे की अनुपस्थिति में नहीं परमेश्वर की उपस्थिति में है।

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:10-18
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। 
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। 
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। 
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको। 
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहिन कर। 
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। 
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। 
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। 
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50 
  • इब्रानियों 8