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Saturday, February 9, 2013

आनन्द एवं शोक


   इस्त्राएल राष्ट्र के आरंभिक वर्षों में गोल्डा मेयर वहाँ की प्रधानमंत्री बनीं। गोल्डा मेयर ने अपने जीवन में बहुत से संघर्षों तथा उतार चढ़ावों को देखा था। अपने प्रधानमंत्री काल में भी उन्होंने नवजात इस्त्राएल राष्ट्र को अनेक संघर्षों, हानिकारक प्रसंगों एवं कुछ आनन्द के अवसरों से होकर निकलते हुए देखा। आनन्द और शोक के समयों के विषय में उन्होंने कहा, "जो अपने संपूर्ण हृदय से विलाप करना नहीं जानते, वे दिल खोल कर हँसना भी नहीं जान सकते।"

   परमेश्वर के जन प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में विलाप और आनन्द करने की बात एक अनोखे रूप में कही है। रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में वह अपने पाठकों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों एवं संदर्भ से बाहर निकल कर इन विषयों के लिए दूसरों की ओर देखने को कहता है। पौलुस ने कहा: "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों १२:१५)।

   यदि हम केवल अपने दुखों और असफलताओं पर ही विलाप करें तो हम दूसरों के कटु अनुभवों में उनके साथ होने, उनके साथ सहृदयता दिखाने और उनके प्रति संवेदनशील होने के अवसर गवाँ देंगे। यदि हम केवल अपने ही सुखों में और केवल अपनी ही सफलताओं में आनन्दित होते हैं तो हम प्रभु की सामर्थ के अद्भुत प्रगटिकरण के अवसरों में सम्मिलित नहीं हो पाते क्योंकि प्रभु अपनी सामर्थ और उद्देश्य अन्य लोगों के जीवनों में होकर भी प्रगट करता है।

   प्रत्येक जीवन आनन्द एवं शोक, सफलता एवं असफलता दोनो ही प्रकार के अनुभवों से भरा है। हम मसीही विश्वासियों को यह सौभाग्य दिया गया है कि हम लोगों के जीवनों में इन दोनो प्रकार के अनुभवों में सम्मिलित हो सकें और परमेश्वर के अनुग्रह को कार्यकारी होते हुए देख सकें। इस अवसर को व्यर्थ ना जाने दें; लोगों के जीवनों में सम्मिलित हों, उनके दुख भी बांटें और उनके सुखों में भी उनके साथ आनन्दित हों। - बिल क्राउडर


दूसरों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना मसीह को आदर देता है।

आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-१६
Romans12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Romans12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
Romans12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ६-७ 
  • मत्ती २५:१-३०