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Friday, March 1, 2013

आश्वस्त तथा आशावान


   सन २००९ के कॉलेज फुटबॉल के समय में टेक्सस विश्वविद्यालय का खिलाड़ी कोल्ट मैक्कोए खेल के बाद दिए जाने वाले प्रत्येक साक्षात्कार का आरंभ खेलने का अवसर मिलने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देने के साथ करता था। इस से कुछ पहले राष्ट्रीय प्रतियोगिता के समय वह चोटिल हुआ था और उसे विवशता के साथ बाहर बैठकर अपनी टीम को हारते हुए देखना पड़ा था। उस हार को देखने के बाद एक टेलिविज़न संवादाता से हो रही बातचीत में कोल्ट ने कहा था, "अपनी टीम के साथ वहाँ होने के लिए मैं कुछ भी देने के लिए तैयार था...मैं सदा परमेश्वर को महिमा देता हूँ। मैं कभी प्रश्न नहीं करता कि जो हो रहा है वह क्यों हो रहा है। परमेश्वर मेरे जीवन को नियंत्रित करता है और मैं जानता हूँ कि चाहे कुछ भी हो, मैं चट्टान अर्थात प्रभु यीशु पर स्थिर खड़ा हूँ।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रेरित पौलुस के जीवन के अनुभवों के बारे में पढ़ते हैं। पौलुस को अपनी मसीही सेवकाई में अनेक क्लेषों और कठिनाईयों से होकर निकलना पड़ा और कई बार परमेश्वर ने उसे जान के जोखिम से बचा कर निकाला। अपने अन्त समय में एक रोमी कारावास में कैदी के रूप में उसने तिमुथियुस को लिखी पत्री में लिखा, "क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है" (२ तिमुथियुस ४:६)। कोई कह सकता था कि पौलुस अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया और उसे अपना जीवन पराजय के साथ समाप्त करना पड़ रहा है, परन्तु पौलुस इसे ऐसा नहीं देखता था, वरन कारावास की तकलीफों में और मृत्यु दण्ड के पूरा कीये जाने की प्रतीक्षा में भी वह अपने जीवन तथा परमेश्वर के प्रति आश्वस्त तथा आशावान था: "मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं" (२ तिमुथियुस ४:७-८)। अपने अन्त समय में पौलुस अपनी परिस्थितियों के कारण निराशा में नहीं वरन परमेश्वर से मिलने वाले प्रतिफल के कारण आनन्दित और आशावान था।

   जिन्होंने प्रभु यीशु में पाप क्षमा और उद्धार के द्वारा परमेश्वर को निकटता से जाना है, और उसकी संगति में जीवन व्यतीत करते हैं वे सदा आश्वस्त तथा आशावान रहते हैं क्योंकि परमेश्वर हर परिस्थिति में उनके साथ रहता है, उन्हें शांति देता है और हर बात से अन्ततः उनके लिए भलाई ही उत्पन्न करता है: "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं" (रोमियों ८:२८)।

   क्या आप परमेश्वर में सदा आश्वस्त तथा आशावान हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


वह प्रत्येक परिवर्तन में विश्वासयोग्य रहता है। - कैथरीन वॉन श्लैगैल

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह ४१:१०

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस ४:१-८
2 Timothy 4:1 परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह कर के, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, उसे और उसके प्रगट होने, और राज्य को सुधि दिलाकर मैं तुझे चिताता हूं।
2 Timothy 4:2 कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा।
2 Timothy 4:3 क्योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे।
2 Timothy 4:4 और अपने कान सत्य से फेरकर कथा-कहानियों पर लगाएंगे।
2 Timothy 4:5 पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर।
2 Timothy 4:6 क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है।
2 Timothy 4:7 मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है।
2 Timothy 4:8 भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २३-२५ 
  • मरकुस ७:१४-३७